गुलाम वंश मॉक टेस्ट (100 महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न एवं उत्तर)

Gulam Vansh Mock Test Thumbnail | गुलाम वंश के 100 महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न | Medieval History Mock Test

Gulam Vansh Mock Test मध्यकालीन भारत के इतिहास के उस महत्वपूर्ण कालखंड पर आधारित है, जब भारत में दिल्ली सल्तनत की स्थापना हुई। इस वंश की शुरुआत कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1206 ई. में की। इल्तुतमिश ने सल्तनत को स्थायित्व प्रदान किया, रज़िया सुल्तान दिल्ली की पहली और एकमात्र महिला सुल्तान बनीं तथा गयासुद्दीन बलबन ने राजसत्ता को मजबूत करने के लिए चहलगानी का प्रभाव समाप्त किया और ज़िल्ले-इलाही की अवधारणा को बढ़ावा दिया। इक्ता व्यवस्था, टंका और जीतल मुद्रा, कुतुब मीनार का निर्माण, मंगोल आक्रमणों का प्रतिरोध तथा केंद्रीय प्रशासन का विकास गुलाम वंश की प्रमुख विशेषताएँ थीं। Gulam Vansh Mock Test के माध्यम से इन सभी महत्वपूर्ण विषयों का क्रमबद्ध अध्ययन किया जा सकता है।

Gulam Vansh Mock Test MCQ Questions 1–20

1. दिल्ली सल्तनत के गुलाम वंश का संस्थापक कौन था?

A. इल्तुतमिश
B. कुतुबुद्दीन ऐबक
C. गयासुद्दीन बलबन
D. जलालुद्दीन खिलजी

उत्तर: B. कुतुबुद्दीन ऐबक

व्याख्या: कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1206 ईस्वी में गुलाम वंश की स्थापना की और दिल्ली सल्तनत का प्रथम स्वतंत्र सुल्तान बना। वह तुर्क मूल का दास था जिसे मोहम्मद गौरी ने खरीदकर सैन्य शिक्षा प्रदान की थी। गौरी की मृत्यु के बाद उसने दिल्ली और लाहौर को अपने अधिकार में लेकर स्वतंत्र शासन स्थापित किया। उसके शासनकाल में कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद का विस्तार तथा कुतुब मीनार का निर्माण प्रारम्भ हुआ जिससे प्रारम्भिक इंडो-इस्लामिक स्थापत्य शैली विकसित हुई।


2. कुतुबुद्दीन ऐबक ने स्वतंत्र शासन की स्थापना किस वर्ष की थी?

A. 1192 ई.
B. 1199 ई.
C. 1206 ई.
D. 1211 ई.

उत्तर: C. 1206 ई.

व्याख्या: 1206 ईस्वी में मोहम्मद गौरी की मृत्यु के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने स्वयं को स्वतंत्र शासक घोषित किया। इसी वर्ष से दिल्ली सल्तनत में गुलाम वंश का शासन प्रारम्भ माना जाता है। प्रारम्भिक समय में उसकी राजधानी लाहौर रही जबकि दिल्ली प्रशासनिक दृष्टि से प्रमुख केंद्र थी। गुलाम वंश के बाद क्रमशः खिलजी, तुगलक, सैयद और लोदी वंशों ने दिल्ली सल्तनत पर शासन किया।


3. कुतुबुद्दीन ऐबक मूलतः किस शासक का दास एवं सेनापति था?

A. महमूद गजनवी
B. मोहम्मद गौरी
C. चंगेज़ ख़ाँ
D. बाबर

उत्तर: B. मोहम्मद गौरी

व्याख्या: कुतुबुद्दीन ऐबक मोहम्मद गौरी का विश्वसनीय दास और सेनापति था जिसने भारत में गौरी की विजयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तराइन के द्वितीय युद्ध के बाद उसने उत्तर भारत के अनेक क्षेत्रों का प्रशासन संभाला। गौरी ने उसकी योग्यता से प्रभावित होकर उसे भारतीय प्रदेशों का प्रतिनिधि बनाया था। गौरी की मृत्यु के पश्चात उसी प्रशासनिक आधार पर उसने स्वतंत्र सल्तनत स्थापित की।


4. कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु किस प्रकार हुई थी?

A. युद्ध में घायल होने से
B. विष दिए जाने से
C. चौगान खेलते समय घोड़े से गिरने से
D. विद्रोह में मारे जाने से

उत्तर: C. चौगान खेलते समय घोड़े से गिरने से

व्याख्या: 1210 ईस्वी में लाहौर में चौगान अर्थात पोलो खेलते समय घोड़े से गिरने के कारण कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु हुई। उसका शासनकाल लगभग चार वर्ष का रहा। उसकी मृत्यु के बाद उत्तराधिकार का संकट उत्पन्न हुआ जिसे बाद में इल्तुतमिश ने समाप्त किया। लाहौर में स्थित उसका मकबरा प्रारम्भिक सल्तनतकालीन स्थापत्य का उदाहरण माना जाता है।


5. कुतुबुद्दीन ऐबक को किस उपनाम से जाना जाता है?

A. सिकंदर-ए-सानी
B. लाख बख्श
C. जिंदा पीर
D. गाजी

उत्तर: B. लाख बख्श

व्याख्या: कुतुबुद्दीन ऐबक अपनी उदार दानशीलता के कारण ‘लाख बख्श’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। वह विद्वानों, सूफी संतों और जरूरतमंदों को उदारतापूर्वक धन प्रदान करता था। उसके दरबार में हसन निजामी और फख्र-ए-मुदब्बिर जैसे विद्वानों को संरक्षण प्राप्त था। मध्यकालीन इतिहास में शासकों की उपाधियाँ और उपनाम राजनीतिक तथा सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखते हैं।


6. कुतुब मीनार का निर्माण किस शासक ने प्रारम्भ कराया था?

A. इल्तुतमिश
B. बलबन
C. कुतुबुद्दीन ऐबक
D. अलाउद्दीन खिलजी

उत्तर: C. कुतुबुद्दीन ऐबक

व्याख्या: कुतुब मीनार का निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने विजय स्मारक के रूप में प्रारम्भ कराया था। उसने केवल प्रथम मंजिल का निर्माण कराया जबकि शेष मंजिलों का निर्माण इल्तुतमिश ने पूर्ण कराया। बाद में फिरोज शाह तुगलक ने क्षतिग्रस्त भागों का पुनर्निर्माण कराया। यह स्मारक वर्तमान में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित है।


7. गुलाम वंश का वास्तविक संगठक किसे माना जाता है?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. इल्तुतमिश
C. रज़िया सुल्तान
D. बलबन

उत्तर: B. इल्तुतमिश

व्याख्या: इल्तुतमिश ने विघटित होती सल्तनत को संगठित कर स्थायी प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की। उसने बंगाल, सिंध और राजपूताना के अनेक क्षेत्रों पर पुनः नियंत्रण स्थापित किया। बगदाद के खलीफा से वैधता प्राप्त कर उसने अपने शासन को धार्मिक मान्यता दिलाई। दिल्ली को स्थायी राजधानी के रूप में विकसित करने का श्रेय भी उसे दिया जाता है।


8. इल्तुतमिश किसका दामाद था?

A. बलबन
B. कुतुबुद्दीन ऐबक
C. मोहम्मद गौरी
D. कैकुबाद

उत्तर: B. कुतुबुद्दीन ऐबक

व्याख्या: इल्तुतमिश ने कुतुबुद्दीन ऐबक की पुत्री से विवाह किया था जिससे उसका संबंध शाही परिवार से स्थापित हुआ। ऐबक ने उसकी प्रशासनिक क्षमता से प्रभावित होकर उसे बदायूँ का सूबेदार नियुक्त किया था। ऐबक की मृत्यु के बाद राजनीतिक संघर्ष के पश्चात इल्तुतमिश दिल्ली की गद्दी पर बैठा। उसके शासनकाल में गुलाम वंश को स्थिरता और विस्तार प्राप्त हुआ।


9. तुर्कान-ए-चहलगानी का गठन किस शासक ने किया था?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. इल्तुतमिश
C. बलबन
D. नासिरुद्दीन महमूद

उत्तर: B. इल्तुतमिश

व्याख्या: तुर्कान-ए-चहलगानी चालीस प्रमुख तुर्क अमीरों का शक्तिशाली समूह था जिसका गठन इल्तुतमिश ने किया। इस परिषद का उद्देश्य शासन और सैन्य प्रशासन में सहयोग प्राप्त करना था। इल्तुतमिश की मृत्यु के बाद यही समूह उत्तराधिकार के मामलों में हस्तक्षेप करने लगा। रज़िया सुल्तान के शासनकाल में भी इस दल की राजनीतिक भूमिका अत्यंत प्रभावशाली रही।


10. इल्तुतमिश ने किस धातु के टंका सिक्के का प्रचलन किया?

A. तांबा
B. सोना
C. चाँदी
D. कांसा

उत्तर: C. चाँदी

व्याख्या: इल्तुतमिश ने चाँदी का टंका तथा ताँबे का जीतल सिक्का प्रचलित किया जिससे सल्तनत की मुद्रा व्यवस्था सुदृढ़ हुई। टंका मध्यकालीन भारत की मानक मुद्रा बन गया। व्यवस्थित मुद्रा प्रणाली से व्यापार और कर संग्रह में सुविधा हुई। बाद के कई सल्तनती शासकों ने इसी मुद्रा प्रणाली को अपनाया।

11. भारत की प्रथम मुस्लिम महिला शासक कौन थीं?

A. नूरजहाँ
B. रज़िया सुल्तान
C. जहाँआरा बेगम
D. मुमताज़ महल

उत्तर: B. रज़िया सुल्तान

व्याख्या: रज़िया सुल्तान इल्तुतमिश की पुत्री थीं और 1236 ईस्वी में दिल्ली सल्तनत की गद्दी पर बैठीं। उन्होंने पर्दा प्रथा का पालन नहीं किया तथा पुरुष शासकों की भाँति खुले दरबार में शासन किया। उन्होंने सेना का नेतृत्व स्वयं किया और प्रशासनिक पदों पर योग्यता के आधार पर अधिकारियों की नियुक्ति की। दिल्ली सल्तनत के इतिहास में वे एकमात्र महिला सुल्तान के रूप में प्रसिद्ध हैं।


12. रज़िया सुल्तान किस शासक की पुत्री थीं?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. इल्तुतमिश
C. बलबन
D. नासिरुद्दीन महमूद

उत्तर: B. इल्तुतमिश

व्याख्या: इल्तुतमिश ने अपने पुत्रों की अपेक्षा रज़िया सुल्तान को अधिक योग्य मानते हुए उत्तराधिकारी घोषित किया था। रज़िया ने अपने पिता के शासनकाल में प्रशासनिक अनुभव प्राप्त किया था। इल्तुतमिश की मृत्यु के बाद पहले रुक्नुद्दीन फिरोज को गद्दी मिली, किन्तु उसके पतन के बाद रज़िया सुल्तान सुल्तान बनीं। मध्यकालीन भारत में योग्य उत्तराधिकारी के चयन का यह महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।


13. रज़िया सुल्तान के शासनकाल में अमीर-ए-आखूर किसे नियुक्त किया गया था?

A. मलिक काफूर
B. याकूत
C. इमादुद्दीन रैहान
D. मलिक छज्जू

उत्तर: B. याकूत

व्याख्या: याकूत एक हब्शी अधिकारी था जिसे रज़िया सुल्तान ने अमीर-ए-आखूर अर्थात शाही अस्तबल का प्रमुख नियुक्त किया। तुर्क अमीरों ने इस नियुक्ति का तीव्र विरोध किया क्योंकि वे उच्च पदों पर अपना प्रभुत्व बनाए रखना चाहते थे। इस घटना से दरबार में राजनीतिक संघर्ष और गहरा हो गया। अंततः यही विरोध रज़िया सुल्तान के पतन का प्रमुख कारण बना।


14. गयासुद्दीन बलबन किस वर्ष दिल्ली का सुल्तान बना था?

A. 1240 ई.
B. 1246 ई.
C. 1266 ई.
D. 1287 ई.

उत्तर: C. 1266 ई.

व्याख्या: 1266 ईस्वी में नासिरुद्दीन महमूद की मृत्यु के बाद बलबन दिल्ली सल्तनत का सुल्तान बना। इससे पहले वह नायब-ए-ममलिकत के रूप में वास्तविक शासन का संचालन कर रहा था। सत्ता प्राप्त करने के बाद उसने केंद्रीय प्रशासन को कठोर अनुशासन के साथ संगठित किया। उसके शासनकाल में राजसत्ता की प्रतिष्ठा और सीमाओं की सुरक्षा को विशेष महत्व दिया गया।


15. बलबन से पहले वास्तविक शासन किस शासक के नाम पर चल रहा था?

A. इल्तुतमिश
B. रज़िया सुल्तान
C. नासिरुद्दीन महमूद
D. कैकुबाद

उत्तर: C. नासिरुद्दीन महमूद

व्याख्या: नासिरुद्दीन महमूद नाममात्र का सुल्तान था जबकि प्रशासन की वास्तविक शक्ति बलबन के हाथों में थी। बलबन नायब-ए-ममलिकत के पद पर रहकर राज्य के प्रमुख निर्णय लेता था। उसने विद्रोहों का दमन किया और सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत बनाया। इसी प्रशासनिक अनुभव के कारण बाद में वह स्वयं सुल्तान बना।


16. बलबन ने स्वयं को किस उपाधि से अलंकृत किया था?

A. गाजी
B. जिल्ले-इलाही
C. अमीर-उल-मोमिनीन
D. सिकंदर-ए-सानी

उत्तर: B. जिल्ले-इलाही

व्याख्या: बलबन ने स्वयं को ‘जिल्ले-इलाही’ अर्थात ईश्वर की छाया घोषित किया। इस सिद्धांत के अनुसार सुल्तान को ईश्वर का प्रतिनिधि माना गया और उसकी प्रतिष्ठा सर्वोच्च रखी गई। इसी उद्देश्य से दरबार में सजदा और पैबोस जैसी परंपराओं को प्रोत्साहित किया गया। इस नीति ने शाही गरिमा और केंद्रीय सत्ता को अधिक प्रभावशाली बनाया।


17. बलबन द्वारा अपनाई गई ‘रक्त एवं लौह नीति’ का उद्देश्य क्या था?

A. व्यापार का विस्तार
B. विद्रोहों और अराजकता का दमन
C. समुद्री शक्ति बढ़ाना
D. धार्मिक सुधार करना

उत्तर: B. विद्रोहों और अराजकता का दमन

व्याख्या: रक्त एवं लौह नीति के अंतर्गत बलबन ने विद्रोहियों और अपराधियों के विरुद्ध कठोर दंड व्यवस्था लागू की। मेवात, दोआब और कटेहर जैसे क्षेत्रों में व्यापक सैन्य अभियान चलाए गए। इस नीति से मार्गों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ। कठोर प्रशासन के कारण केंद्रीय सत्ता का प्रभाव भी पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुआ।


18. गुलाम वंश के अंतिम प्रभावी शासक कौन थे?

A. रज़िया सुल्तान
B. कैकुबाद
C. बलबन
D. रुक्नुद्दीन फिरोज

उत्तर: B. कैकुबाद

व्याख्या: कैकुबाद बलबन का पौत्र था और उसके शासनकाल में गुलाम वंश की शक्ति तेजी से कमजोर हुई। दरबार में तुर्क अमीरों के बीच गुटबाजी बढ़ने लगी जिससे प्रशासनिक नियंत्रण कमज़ोर पड़ गया। उसके अंतिम दिनों में केंद्रीय सत्ता लगभग निष्प्रभावी हो गई। 1290 ईस्वी में जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने सत्ता प्राप्त कर गुलाम वंश का अंत कर दिया।


19. गुलाम वंश के अंत के बाद दिल्ली सल्तनत पर किस वंश का शासन प्रारम्भ हुआ?

A. तुगलक वंश
B. सैयद वंश
C. खिलजी वंश
D. लोदी वंश

उत्तर: C. खिलजी वंश

व्याख्या: 1290 ईस्वी में जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने दिल्ली सल्तनत की सत्ता पर अधिकार कर खिलजी वंश की स्थापना की। इसके साथ ही लगभग 84 वर्षों तक शासन करने वाले गुलाम वंश का अंत हो गया। खिलजी शासकों ने उत्तर भारत के साथ-साथ दक्षिण भारत में भी अपने साम्राज्य का विस्तार किया। दिल्ली सल्तनत का क्रम गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैयद और लोदी वंश के रूप में स्वीकार किया जाता है।


20. गुलाम वंश का शासनकाल किस अवधि तक माना जाता है?

A. 1192–1287 ई.
B. 1206–1290 ई.
C. 1211–1320 ई.
D. 1200–1305 ई.

उत्तर: B. 1206–1290 ई.

व्याख्या: गुलाम वंश की स्थापना 1206 ईस्वी में कुतुबुद्दीन ऐबक ने की और 1290 ईस्वी में खिलजी वंश की स्थापना के साथ इसका शासन समाप्त हुआ। इस अवधि में इल्तुतमिश ने सल्तनत को संगठित किया, रज़िया सुल्तान पहली महिला शासक बनीं और बलबन ने केंद्रीय सत्ता को अत्यंत मजबूत बनाया। दिल्ली सल्तनत की प्रशासनिक, सैन्य और मुद्रा व्यवस्था की आधारशिला इसी वंश के शासनकाल में रखी गई।

गुलाम वंश मॉक टेस्ट MCQ Questions 21-40

21. इल्तुतमिश को बगदाद के खलीफा से वैधता प्रदान करने वाला खलीफा कौन था?

A. अल-मुतासिम
B. अल-मुस्तनसिर
C. अल-नासिर
D. अल-मामून

उत्तर: C. अल-नासिर

व्याख्या: 1229 ईस्वी में बगदाद के अब्बासी खलीफा अल-नासिर ने इल्तुतमिश को सम्मानसूचक राजचिह्न और मान्यता प्रदान की जिससे उसके शासन को इस्लामी जगत में वैधता मिली। इसके बाद इल्तुतमिश ने अपने नाम के सिक्के जारी कराए और खुतबा भी अपने नाम से पढ़वाया। इस मान्यता ने दिल्ली सल्तनत की राजनीतिक स्थिति को मजबूत किया तथा उसे स्वतंत्र मुस्लिम राज्य के रूप में स्वीकार्यता प्राप्त हुई।


22. दिल्ली सल्तनत में चाँदी का टंका और ताँबे का जीतल किस शासक ने प्रचलित किया?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. इल्तुतमिश
C. बलबन
D. रज़िया सुल्तान

उत्तर: B. इल्तुतमिश

व्याख्या: इल्तुतमिश ने चाँदी का टंका तथा ताँबे का जीतल जारी करके सल्तनत की मुद्रा व्यवस्था को संगठित स्वरूप प्रदान किया। टंका लगभग 175 ग्रेन भार का मानक सिक्का माना जाता था। इस मुद्रा प्रणाली ने व्यापार, कर संग्रह और प्रशासनिक नियंत्रण को सुदृढ़ बनाया। बाद के सल्तनती शासकों ने भी इसी मुद्रा प्रणाली को आधार बनाकर सिक्कों का प्रचलन जारी रखा।


23. रज़िया सुल्तान दिल्ली की गद्दी पर किस वर्ष बैठीं?

A. 1211 ई.
B. 1229 ई.
C. 1236 ई.
D. 1246 ई.

उत्तर: C. 1236 ई.

व्याख्या: 1236 ईस्वी में इल्तुतमिश की मृत्यु के बाद रज़िया सुल्तान दिल्ली की शासक बनीं। उन्होंने पर्दा प्रथा का पालन नहीं किया और पुरुष शासकों की भाँति दरबार लगाया तथा सेना का नेतृत्व किया। उनके शासनकाल में तुर्क अमीरों का प्रभाव कम करने का प्रयास किया गया। भारतीय इतिहास में वे दिल्ली सल्तनत की एकमात्र महिला सुल्तान मानी जाती हैं।


24. रज़िया सुल्तान के शासन का सबसे शक्तिशाली विरोधी समूह कौन था?

A. राजपूत सरदार
B. मराठा सरदार
C. तुर्कान-ए-चहलगानी
D. अफगान सरदार

उत्तर: C. तुर्कान-ए-चहलगानी

व्याख्या: तुर्कान-ए-चहलगानी चालीस तुर्क अमीरों का प्रभावशाली समूह था जो उत्तराधिकार और प्रशासन में हस्तक्षेप करता था। रज़िया सुल्तान ने इस समूह के प्रभाव को सीमित करने का प्रयास किया जिससे उसके विरुद्ध षड्यंत्र प्रारम्भ हुए। इसी राजनीतिक संघर्ष के कारण उनका शासन अल्पकालिक सिद्ध हुआ। चहलगानी दल का गठन मूलतः इल्तुतमिश ने प्रशासनिक सहयोग के लिए किया था।


25. रज़िया सुल्तान ने किस अधिकारी को अमीर-ए-आखूर नियुक्त किया था?

A. मलिक काफूर
B. याकूत
C. इमादुद्दीन रैहान
D. ताजुद्दीन

उत्तर: B. याकूत

व्याख्या: याकूत एक हब्शी अधिकारी था जिसे रज़िया सुल्तान ने अमीर-ए-आखूर अर्थात शाही अस्तबल का प्रमुख नियुक्त किया। तुर्क अमीरों ने उसकी नियुक्ति का विरोध किया क्योंकि वे उच्च पदों पर केवल तुर्क अधिकारियों का प्रभुत्व बनाए रखना चाहते थे। इस नियुक्ति से दरबार में राजनीतिक असंतोष बढ़ा। अंततः यही विरोध रज़िया के पतन का प्रमुख कारण बना।


26. रज़िया सुल्तान की मृत्यु किस वर्ष हुई थी?

A. 1236 ई.
B. 1240 ई.
C. 1246 ई.
D. 1266 ई.

उत्तर: B. 1240 ई.

व्याख्या: 1240 ईस्वी में कैथल के निकट रज़िया सुल्तान और उनके पति मलिक अल्तूनिया की हत्या कर दी गई। इससे दिल्ली सल्तनत में पुनः तुर्क अमीरों का प्रभाव बढ़ गया। रज़िया का शासन लगभग चार वर्षों तक चला। दिल्ली और कैथल दोनों स्थानों पर उनके मकबरे से संबंधित ऐतिहासिक परंपराएँ प्रचलित हैं।


27. नासिरुद्दीन महमूद के शासनकाल में वास्तविक सत्ता किसके हाथों में थी?

A. इल्तुतमिश
B. बलबन
C. रुक्नुद्दीन फिरोज
D. कैकुबाद

उत्तर: B. बलबन

व्याख्या: नासिरुद्दीन महमूद के शासनकाल में बलबन नायब-ए-ममलिकत के पद पर रहते हुए प्रशासन का संचालन करता था। उसने सीमाओं की सुरक्षा, विद्रोहों के दमन और केंद्रीय सत्ता को सुदृढ़ बनाने का कार्य किया। बाद में 1266 ईस्वी में वही स्वयं दिल्ली का सुल्तान बना। उसके प्रशासनिक अनुभव ने उसे एक प्रभावशाली शासक के रूप में स्थापित किया।


28. गयासुद्दीन बलबन किस पद पर रहते हुए सबसे अधिक प्रभावशाली बना?

A. वजीर
B. अमीर-ए-उमरा
C. नायब-ए-ममलिकत
D. काज़ी-उल-कुज़ात

उत्तर: C. नायब-ए-ममलिकत

व्याख्या: नायब-ए-ममलिकत का पद सल्तनत के उप-शासक के समान माना जाता था और बलबन ने इसी पद पर रहते हुए प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित किया। उसने मेवात, दोआब और सीमावर्ती क्षेत्रों में विद्रोहों का कठोरता से दमन किया। इस पद पर रहते हुए उसकी प्रतिष्ठा तुर्क अमीरों में अत्यधिक बढ़ी। बाद में इसी प्रभाव के आधार पर उसने दिल्ली की गद्दी प्राप्त की।


29. बलबन ने राजसत्ता की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए किस परंपरा को अपनाया?

A. सुलह-ए-कुल
B. सजदा और पैबोस
C. दीन-ए-इलाही
D. झरोखा दर्शन

उत्तर: B. सजदा और पैबोस

व्याख्या: बलबन ने दरबार में सजदा अर्थात सुल्तान के सामने झुकना तथा पैबोस अर्थात चरण स्पर्श या पाँव चूमने की परंपरा को अपनाया। इन परंपराओं का उद्देश्य सुल्तान की सर्वोच्च प्रतिष्ठा स्थापित करना था। उसने स्वयं को ईश्वर की छाया अर्थात जिल्ले-इलाही घोषित किया। इन उपायों से शाही गरिमा और केंद्रीय सत्ता को सुदृढ़ करने का प्रयास किया गया।


30. बलबन ने सीमाओं की सुरक्षा के लिए किस नीति पर विशेष बल दिया?

A. समुद्री सुरक्षा नीति
B. सीमांत दुर्ग नीति
C. व्यापारिक नीति
D. धार्मिक सहिष्णुता नीति

उत्तर: B. सीमांत दुर्ग नीति

व्याख्या: बलबन ने उत्तर-पश्चिमी सीमा पर मंगोल आक्रमणों को रोकने के लिए अनेक दुर्गों का निर्माण और पुनर्निर्माण कराया। उसने सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्षम सैनिक अधिकारियों की नियुक्ति की। सीमाओं की सुरक्षा के लिए स्थायी सैन्य व्यवस्था विकसित की गई जिससे मंगोलों की प्रगति को नियंत्रित किया जा सका। उसके शासनकाल में सीमा रक्षा को केंद्रीय प्रशासन का प्रमुख अंग बनाया गया।

31. गयासुद्दीन बलबन ने मेवात के विद्रोहियों के विरुद्ध कौन-सी नीति अपनाई थी?

A. सुलह की नीति
B. धार्मिक परिवर्तन की नीति
C. कठोर दमन की नीति
D. व्यापारिक संधि की नीति

उत्तर: C. कठोर दमन की नीति

व्याख्या: गयासुद्दीन बलबन ने मेवात क्षेत्र में सक्रिय लुटेरों और विद्रोहियों का कठोर सैन्य कार्रवाई द्वारा दमन किया। उसने जंगलों की कटाई कर सैनिक चौकियाँ स्थापित करवाईं जिससे विद्रोहियों के छिपने के स्थान समाप्त हो गए। दिल्ली और दोआब के मार्गों को सुरक्षित बनाने के लिए नियमित गश्त की व्यवस्था लागू की गई। इस अभियान के परिणामस्वरूप राजधानी और उसके आसपास के क्षेत्रों में प्रशासनिक नियंत्रण पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुआ।


32. बलबन ने स्वयं को ईश्वर का प्रतिनिधि बताने के लिए कौन-सी उपाधि धारण की?

A. गाजी
B. जिल्ले-इलाही
C. खलीफा
D. अमीर-उल-मोमिनीन

उत्तर: B. जिल्ले-इलाही

व्याख्या: जिल्ले-इलाही का अर्थ ईश्वर की छाया होता है और बलबन ने इस उपाधि के माध्यम से सुल्तान के पद की सर्वोच्च प्रतिष्ठा स्थापित की। उसने दरबार में अनुशासन और शाही मर्यादा को अत्यधिक महत्व दिया। दरबार में हँसी-मज़ाक तथा अनौपचारिक व्यवहार पर प्रतिबंध लगाया गया। इस नीति का उद्देश्य तुर्क अमीरों के प्रभाव को सीमित कर केंद्रीय सत्ता को मजबूत बनाना था।


33. बलबन का उत्तराधिकारी कौन बना था?

A. कैकुबाद
B. बुगरा खाँ
C. कैखुसरो
D. रुक्नुद्दीन फिरोज

उत्तर: A. कैकुबाद

व्याख्या: 1287 ईस्वी में बलबन की मृत्यु के बाद उसका पौत्र कैकुबाद दिल्ली की गद्दी पर बैठा। बलबन का योग्य पुत्र मुहम्मद मंगोलों से युद्ध करते हुए पहले ही मारा जा चुका था। कैकुबाद के शासनकाल में केंद्रीय प्रशासन कमजोर होने लगा। इसी राजनीतिक दुर्बलता का लाभ उठाकर जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने 1290 ईस्वी में सत्ता प्राप्त कर ली।


34. गुलाम वंश का अंतिम शासक कौन था?

A. बलबन
B. कैकुबाद
C. कैयूमर्स
D. इल्तुतमिश

उत्तर: B. कैकुबाद

व्याख्या: कैकुबाद को गुलाम वंश का अंतिम प्रभावी शासक माना जाता है जिसके शासनकाल में सल्तनत की शक्ति निरंतर घटती गई। उसके अंतिम दिनों में शासन पर दरबारी गुटों का प्रभाव बढ़ गया था। उसके पश्चात अल्पायु कैयूमर्स को नाममात्र का शासक बनाया गया जिसे शीघ्र ही हटा दिया गया। 1290 ईस्वी में जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने गुलाम वंश का अंत कर खिलजी वंश की स्थापना की।


35. गुलाम वंश के बाद दिल्ली सल्तनत में किस वंश का शासन प्रारम्भ हुआ?

A. तुगलक वंश
B. लोदी वंश
C. खिलजी वंश
D. सैयद वंश

उत्तर: C. खिलजी वंश

व्याख्या: 1290 ईस्वी में जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने सत्ता ग्रहण कर दिल्ली सल्तनत में खिलजी वंश की स्थापना की। इसके साथ ही लगभग चौरासी वर्षों तक शासन करने वाले गुलाम वंश का अंत हो गया। खिलजी शासकों ने दक्षिण भारत तक अपने साम्राज्य का विस्तार किया। दिल्ली सल्तनत का क्रम गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैयद और लोदी वंश के रूप में माना जाता है।


36. इल्तुतमिश ने अपने जीवनकाल में किसे उत्तराधिकारी घोषित किया था?

A. रुक्नुद्दीन फिरोज
B. रज़िया सुल्तान
C. बहराम शाह
D. नासिरुद्दीन महमूद

उत्तर: B. रज़िया सुल्तान

व्याख्या: इल्तुतमिश ने अपने पुत्रों की अपेक्षा रज़िया सुल्तान को अधिक योग्य मानते हुए उत्तराधिकारी घोषित किया था। उसने रज़िया की प्रशासनिक क्षमता को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था। इल्तुतमिश की मृत्यु के बाद तुर्क अमीरों ने पहले रुक्नुद्दीन फिरोज को गद्दी पर बैठाया। उसके अल्पकालीन शासन के बाद 1236 ईस्वी में रज़िया सुल्तान सत्ता पर आसीन हुईं।


37. कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद कहाँ स्थित है?

A. आगरा
B. लाहौर
C. दिल्ली
D. अजमेर

उत्तर: C. दिल्ली

व्याख्या: कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद दिल्ली के महरौली क्षेत्र में स्थित है और इसका निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने प्रारम्भ कराया था। इसका निर्माण चौहान शासकों के राय पिथौरा दुर्ग परिसर में किया गया था। इल्तुतमिश ने बाद में इस मस्जिद का विस्तार करवाया। यह परिसर कुतुब मीनार और लौह स्तंभ के कारण भी ऐतिहासिक दृष्टि से प्रसिद्ध है।


38. ‘तबकात-ए-नासिरी’ के लेखक कौन थे?

A. अमीर खुसरो
B. हसन निजामी
C. मिनहाज-उस-सिराज
D. जियाउद्दीन बरनी

उत्तर: C. मिनहाज-उस-सिराज

व्याख्या: मिनहाज-उस-सिराज ने ‘तबकात-ए-नासिरी’ की रचना नासिरुद्दीन महमूद के शासनकाल में की थी। इस ग्रंथ में विशेष रूप से गुलाम वंश के शासकों और प्रारम्भिक दिल्ली सल्तनत का विस्तृत वर्णन मिलता है। मध्यकालीन भारतीय इतिहास के अध्ययन के लिए इसे एक प्रमुख समकालीन स्रोत माना जाता है। इतिहासकार सल्तनतकालीन घटनाओं के पुनर्निर्माण में इस ग्रंथ का व्यापक उपयोग करते हैं।


39. बलबन के योग्य पुत्र का नाम क्या था जिसकी मंगोलों से युद्ध में मृत्यु हुई थी?

A. कैकुबाद
B. मुहम्मद
C. बुगरा खाँ
D. बहराम शाह

उत्तर: B. मुहम्मद

व्याख्या: राजकुमार मुहम्मद बलबन का ज्येष्ठ एवं योग्य पुत्र था जिसे उसका उत्तराधिकारी माना जा रहा था। 1285 ईस्वी में मंगोलों के विरुद्ध युद्ध करते हुए उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना से बलबन को गहरा आघात पहुँचा और उत्तराधिकार का संकट उत्पन्न हो गया। इसके बाद उसके पौत्र कैकुबाद को गद्दी पर बैठाया गया।


40. गुलाम वंश का शासनकाल लगभग कितने वर्षों तक रहा?

A. 64 वर्ष
B. 84 वर्ष
C. 104 वर्ष
D. 124 वर्ष

उत्तर: B. 84 वर्ष

व्याख्या: गुलाम वंश का शासन 1206 ईस्वी से 1290 ईस्वी तक चला जिसकी कुल अवधि लगभग 84 वर्ष मानी जाती है। इस वंश की स्थापना कुतुबुद्दीन ऐबक ने की और इसके प्रमुख शासकों में इल्तुतमिश, रज़िया सुल्तान तथा गयासुद्दीन बलबन शामिल थे। इसी काल में दिल्ली सल्तनत की प्रशासनिक, सैन्य और मुद्रा व्यवस्था की मजबूत नींव रखी गई। गुलाम वंश के पश्चात दिल्ली सल्तनत का शासन खिलजी वंश के हाथों में चला गया।

गुलाम वंश मॉक टेस्ट MCQ Questions 41-60

41. गुलाम वंश के दौरान दिल्ली सल्तनत की राजधानी कौन-सा नगर था?

A. आगरा
B. लाहौर
C. दिल्ली
D. जौनपुर

उत्तर: C. दिल्ली

व्याख्या: दिल्ली गुलाम वंश की प्रमुख राजधानी थी जहाँ से सम्पूर्ण सल्तनत का प्रशासन संचालित किया जाता था। इल्तुतमिश ने दिल्ली को स्थायी राजनीतिक एवं प्रशासनिक केन्द्र के रूप में विकसित किया। इसी काल में दिल्ली उत्तर भारत की सबसे महत्वपूर्ण सत्ता का केन्द्र बनकर उभरी। बाद के खिलजी, तुगलक, सैयद और लोदी शासकों ने भी दिल्ली को अपनी राजधानी बनाए रखा।


42. ‘इक्ता व्यवस्था’ का मुख्य उद्देश्य क्या था?

A. धार्मिक शिक्षा का प्रसार
B. भूमि राजस्व एवं प्रशासन का संचालन
C. समुद्री व्यापार को बढ़ावा देना
D. विदेशी व्यापार पर नियंत्रण

उत्तर: B. भूमि राजस्व एवं प्रशासन का संचालन

व्याख्या: इक्ता व्यवस्था के अंतर्गत अधिकारियों को निश्चित क्षेत्र का राजस्व संग्रह करने तथा स्थानीय प्रशासन चलाने का अधिकार दिया जाता था। इक्तादार भूमि का स्वामी नहीं बल्कि राज्य का प्रतिनिधि होता था। प्राप्त आय से वह सैनिकों का व्यय तथा प्रशासनिक कार्यों का संचालन करता था। इस व्यवस्था ने प्रारम्भिक दिल्ली सल्तनत की आर्थिक एवं सैन्य संरचना को सुदृढ़ आधार प्रदान किया।


43. इल्तुतमिश ने किस नगर को अपनी स्थायी राजधानी बनाया?

A. लाहौर
B. बदायूँ
C. दिल्ली
D. अजमेर

उत्तर: C. दिल्ली

व्याख्या: इल्तुतमिश ने दिल्ली को स्थायी राजधानी बनाकर सल्तनत की राजनीतिक शक्ति को एक केन्द्र में संगठित किया। उसने प्रशासनिक कार्यालयों और शाही संस्थानों का विस्तार भी यहीं किया। राजधानी बनने के बाद दिल्ली व्यापार, संस्कृति और शिक्षा का प्रमुख केन्द्र बन गई। आगे चलकर मुगल काल तक दिल्ली का राजनीतिक महत्व निरंतर बना रहा।


44. निम्नलिखित में से किस शासक ने कुतुब मीनार का शेष निर्माण पूर्ण कराया?

A. रज़िया सुल्तान
B. इल्तुतमिश
C. बलबन
D. कैकुबाद

उत्तर: B. इल्तुतमिश

व्याख्या: कुतुब मीनार का निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने प्रारम्भ कराया था, परन्तु उसकी मृत्यु के कारण कार्य अधूरा रह गया। इल्तुतमिश ने शेष मंजिलों का निर्माण पूरा कराया और स्मारक को वर्तमान स्वरूप प्रदान किया। बाद में भूकंप से क्षतिग्रस्त भागों का पुनर्निर्माण फिरोज शाह तुगलक ने कराया। यह स्मारक प्रारम्भिक सल्तनतकालीन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।


45. बलबन ने दरबार में अनुशासन बनाए रखने के लिए किस नीति पर विशेष बल दिया?

A. धार्मिक सहिष्णुता
B. शाही गरिमा और कठोर दरबारी शिष्टाचार
C. मुक्त व्यापार नीति
D. स्थानीय स्वशासन

उत्तर: B. शाही गरिमा और कठोर दरबारी शिष्टाचार

व्याख्या: बलबन ने सुल्तान की प्रतिष्ठा को सर्वोच्च बनाए रखने के लिए दरबार में कठोर अनुशासन लागू किया। उसने दरबार में हँसी-मज़ाक तथा अनौपचारिक व्यवहार पर रोक लगा दी। सजदा और पैबोस जैसी परम्पराओं को भी शाही गरिमा का अंग बनाया गया। इन उपायों का उद्देश्य अमीरों के प्रभाव को सीमित कर केंद्रीय सत्ता को अधिक प्रभावशाली बनाना था।


46. गुलाम वंश के किस शासक ने मंगोल आक्रमणों का प्रभावी प्रतिरोध किया?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. रज़िया सुल्तान
C. गयासुद्दीन बलबन
D. रुक्नुद्दीन फिरोज

उत्तर: C. गयासुद्दीन बलबन

व्याख्या: बलबन ने उत्तर-पश्चिमी सीमाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और सीमांत क्षेत्रों में मजबूत किलों का निर्माण कराया। उसने योग्य सेनापतियों की नियुक्ति कर मंगोलों के आक्रमणों को नियंत्रित किया। सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थायी सैन्य व्यवस्था विकसित की गई जिससे सल्तनत की रक्षा मजबूत हुई। उसके शासनकाल में सीमा सुरक्षा प्रशासन का महत्वपूर्ण अंग बन गई।


47. गुलाम वंश के समय ‘जीतल’ किसका नाम था?

A. सैनिक पद
B. ताँबे का सिक्का
C. प्रशासनिक अधिकारी
D. कर प्रणाली

उत्तर: B. ताँबे का सिक्का

व्याख्या: जीतल ताँबे का सिक्का था जिसे इल्तुतमिश ने चाँदी के टंका के साथ प्रचलित किया। यह सामान्य लेन-देन के लिए उपयोग में लाया जाता था। संगठित मुद्रा प्रणाली के कारण व्यापारिक गतिविधियों और कर संग्रह में सुविधा हुई। सल्तनतकालीन आर्थिक व्यवस्था को समझने में टंका और जीतल दोनों का विशेष महत्व है।


48. रज़िया सुल्तान का विवाह किससे हुआ था?

A. मलिक काफूर
B. मलिक अल्तूनिया
C. बुगरा खाँ
D. इमादुद्दीन रैहान

उत्तर: B. मलिक अल्तूनिया

व्याख्या: मलिक अल्तूनिया भटिंडा का सूबेदार था जिसने प्रारम्भ में रज़िया सुल्तान का विरोध किया था। बाद में दोनों के बीच समझौता हुआ और उनका विवाह संपन्न हुआ। विवाह के पश्चात दोनों ने दिल्ली की सत्ता पुनः प्राप्त करने का प्रयास किया। कैथल के निकट संघर्ष के दौरान दोनों की मृत्यु हो गई जिससे रज़िया का शासन समाप्त हो गया।


49. गुलाम वंश के किस शासक ने प्रशासनिक पद ‘नायब-ए-ममलिकत’ पर रहते हुए अपनी राजनीतिक शक्ति बढ़ाई?

A. इल्तुतमिश
B. बलबन
C. कैकुबाद
D. रज़िया सुल्तान

उत्तर: B. बलबन

व्याख्या: नासिरुद्दीन महमूद के शासनकाल में बलबन नायब-ए-ममलिकत के रूप में वास्तविक प्रशासन का संचालन करता था। उसने विद्रोहों का दमन कर केंद्रीय सत्ता को सुदृढ़ बनाया। इसी अवधि में उसकी राजनीतिक प्रतिष्ठा और सैन्य प्रभाव अत्यधिक बढ़ गया। बाद में 1266 ईस्वी में वह स्वयं दिल्ली सल्तनत का सुल्तान बना।


50. गुलाम वंश के पतन का प्रमुख कारण क्या था?

A. समुद्री आक्रमण
B. उत्तराधिकार विवाद और अमीरों के गुटीय संघर्ष
C. अकाल
D. यूरोपीय आक्रमण

उत्तर: B. उत्तराधिकार विवाद और अमीरों के गुटीय संघर्ष

व्याख्या: इल्तुतमिश के बाद उत्तराधिकार को लेकर लगातार संघर्ष उत्पन्न हुए जिससे केंद्रीय सत्ता कमजोर होती गई। तुर्क अमीरों के गुटों ने शासन व्यवस्था में अत्यधिक हस्तक्षेप किया और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी। बलबन के बाद योग्य नेतृत्व का अभाव भी सल्तनत की कमजोरी का कारण बना। इन परिस्थितियों का लाभ उठाकर 1290 ईस्वी में जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने सत्ता प्राप्त कर गुलाम वंश का अंत कर दिया।

51. गुलाम वंश के किस शासक ने बंगाल में पुनः सल्तनत का नियंत्रण स्थापित किया?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. इल्तुतमिश
C. रज़िया सुल्तान
D. कैकुबाद

उत्तर: B. इल्तुतमिश

व्याख्या: इल्तुतमिश ने बंगाल के विद्रोही सूबेदारों को पराजित कर दिल्ली सल्तनत का अधिकार पुनः स्थापित किया। उसने बंगाल को प्रत्यक्ष प्रशासनिक नियंत्रण में लाने के लिए अपने प्रतिनिधियों की नियुक्ति की। इस अभियान से पूर्वी भारत में सल्तनत की राजनीतिक स्थिति मजबूत हुई। बंगाल पर प्रभावी नियंत्रण ने इल्तुतमिश की केंद्रीय सत्ता को अधिक स्थिर बनाया।


52. कुतुबुद्दीन ऐबक के दरबार में ‘ताज-उल-मासिर’ की रचना किसने की थी?

A. अमीर खुसरो
B. हसन निजामी
C. मिनहाज-उस-सिराज
D. जियाउद्दीन बरनी

उत्तर: B. हसन निजामी

व्याख्या: हसन निजामी ने ‘ताज-उल-मासिर’ नामक ऐतिहासिक ग्रंथ की रचना कुतुबुद्दीन ऐबक के संरक्षण में की। इस ग्रंथ में मोहम्मद गौरी और प्रारम्भिक दिल्ली सल्तनत की घटनाओं का वर्णन मिलता है। यह प्रारम्भिक सल्तनतकालीन इतिहास का महत्वपूर्ण समकालीन स्रोत माना जाता है। इतिहासकार गुलाम वंश के प्रारम्भिक राजनीतिक घटनाक्रम के अध्ययन में इस ग्रंथ का व्यापक उपयोग करते हैं।


53. ‘लाख बख्श’ की उपाधि किस कारण से कुतुबुद्दीन ऐबक को मिली थी?

A. सैन्य विजय के कारण
B. धार्मिक सुधारों के कारण
C. उदार दानशीलता के कारण
D. स्थापत्य निर्माण के कारण

उत्तर: C. उदार दानशीलता के कारण

व्याख्या: कुतुबुद्दीन ऐबक अपनी उदार दानशीलता के लिए प्रसिद्ध था और वह विद्वानों, सूफी संतों तथा जरूरतमंदों को भरपूर धन प्रदान करता था। इसी स्वभाव के कारण उसे ‘लाख बख्श’ की उपाधि प्राप्त हुई। उसके शासनकाल में अनेक साहित्यकारों को संरक्षण मिला। मध्यकालीन शासकों की उपाधियाँ उनके व्यक्तित्व और प्रशासनिक विशेषताओं को भी प्रतिबिंबित करती हैं।


54. गुलाम वंश के किस शासक ने ‘रक्त और लौह नीति’ अपनाई थी?

A. इल्तुतमिश
B. बलबन
C. रज़िया सुल्तान
D. कुतुबुद्दीन ऐबक

उत्तर: B. बलबन

व्याख्या: बलबन ने विद्रोहों और अराजकता को समाप्त करने के लिए अत्यंत कठोर शासन व्यवस्था लागू की जिसे रक्त और लौह नीति कहा जाता है। इस नीति के अंतर्गत अपराधियों और विद्रोहियों को कठोर दंड दिए जाते थे। उसने मेवात, दोआब तथा कटेहर क्षेत्रों में सैन्य अभियान चलाकर शांति स्थापित की। इस कठोर प्रशासन से केंद्रीय सत्ता का प्रभाव उल्लेखनीय रूप से बढ़ा।


55. गुलाम वंश के किस शासक ने दिल्ली सल्तनत को खलीफा की औपचारिक मान्यता दिलाई?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. इल्तुतमिश
C. बलबन
D. नासिरुद्दीन महमूद

उत्तर: B. इल्तुतमिश

व्याख्या: इल्तुतमिश को 1229 ईस्वी में अब्बासी खलीफा अल-नासिर से औपचारिक मान्यता प्राप्त हुई। इस मान्यता के बाद उसके नाम से खुतबा पढ़ा जाने लगा और सिक्के जारी किए गए। इससे दिल्ली सल्तनत को इस्लामी विश्व में वैध राजनीतिक पहचान मिली। इस घटना ने इल्तुतमिश की स्थिति को अन्य तुर्क सरदारों की तुलना में अधिक सुदृढ़ बनाया।


56. गुलाम वंश के किस शासक ने दरबार में फारसी परंपराओं को विशेष महत्व दिया?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. रज़िया सुल्तान
C. गयासुद्दीन बलबन
D. कैकुबाद

उत्तर: C. गयासुद्दीन बलबन

व्याख्या: बलबन ने ईरानी-फारसी राजकीय परंपराओं को अपनाकर शाही गरिमा को नई ऊँचाई प्रदान की। उसने दरबार की कार्यप्रणाली, पोशाक और शिष्टाचार में फारसी प्रभाव को बढ़ावा दिया। सुल्तान और सामान्य अमीरों के बीच स्पष्ट दूरी बनाए रखने पर बल दिया गया। इन परंपराओं का प्रभाव बाद के सल्तनती शासकों के दरबारों में भी दिखाई देता है।


57. कुतुब मीनार का निर्माण किस विजय की स्मृति में प्रारम्भ किया गया था?

A. तराइन के प्रथम युद्ध की विजय
B. दिल्ली पर मुस्लिम सत्ता की स्थापना
C. चंदावर के युद्ध की विजय
D. गुजरात विजय

उत्तर: B. दिल्ली पर मुस्लिम सत्ता की स्थापना

व्याख्या: कुतुब मीनार का निर्माण दिल्ली में मुस्लिम शासन की स्थापना के प्रतीक के रूप में प्रारम्भ किया गया था। इसका निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने करवाया और बाद में इल्तुतमिश ने इसे पूरा कराया। यह परिसर कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद और लौह स्तंभ के साथ एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है। वर्तमान में यह यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है।


58. गुलाम वंश के दौरान ‘अमीर-ए-आखूर’ पद किस विभाग से संबंधित था?

A. न्याय विभाग
B. शाही अस्तबल
C. राजस्व विभाग
D. गुप्तचर विभाग

उत्तर: B. शाही अस्तबल

व्याख्या: अमीर-ए-आखूर शाही अस्तबल का सर्वोच्च अधिकारी होता था और घोड़ों की देखरेख तथा घुड़सवार सेना की व्यवस्था उसके अधीन रहती थी। रज़िया सुल्तान ने याकूत को इसी पद पर नियुक्त किया था। इस नियुक्ति का तुर्क अमीरों ने तीव्र विरोध किया जिससे दरबारी संघर्ष बढ़ गया। सल्तनतकालीन प्रशासन में घुड़सवार सेना को अत्यधिक महत्व प्राप्त था।


59. बलबन ने गुप्तचर व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए किस प्रणाली का विकास किया?

A. दहसाला प्रणाली
B. बारिद व्यवस्था
C. मनसबदारी प्रणाली
D. इक्ता प्रणाली

उत्तर: B. बारिद व्यवस्था

व्याख्या: बलबन ने बारिद नामक गुप्तचर प्रणाली को अत्यंत प्रभावी बनाया ताकि प्रांतों और अधिकारियों की गतिविधियों की जानकारी सीधे सुल्तान तक पहुँच सके। गुप्तचरों को स्वतंत्र रूप से रिपोर्ट भेजने का अधिकार दिया गया था। किसी भी अधिकारी की लापरवाही पर कठोर दंड का प्रावधान था। इस व्यवस्था ने केंद्रीय प्रशासन की निगरानी क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया।


60. गुलाम वंश का शासन किस वर्ष समाप्त हुआ था?

A. 1266 ई.
B. 1287 ई.
C. 1290 ई.
D. 1320 ई.

उत्तर: C. 1290 ई.

व्याख्या: 1290 ईस्वी में जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने सत्ता प्राप्त कर गुलाम वंश का अंत किया और खिलजी वंश की स्थापना की। उस समय कैकुबाद के शासनकाल में केंद्रीय सत्ता अत्यंत कमजोर हो चुकी थी। तुर्क अमीरों के आंतरिक संघर्षों ने भी सल्तनत की राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित किया। गुलाम वंश का शासनकाल 1206 ईस्वी से 1290 ईस्वी तक लगभग चौरासी वर्षों तक माना जाता है।

गुलाम वंश मॉक टेस्ट MCQ Questions 61-80

61. इल्तुतमिश ने किस नगर को अपनी प्रारम्भिक प्रशासनिक राजधानी के रूप में विकसित किया था, जहाँ वह सुल्तान बनने से पहले सूबेदार था?

A. अजमेर
B. बदायूँ
C. कन्नौज
D. लाहौर

उत्तर: B. बदायूँ

व्याख्या: इल्तुतमिश को कुतुबुद्दीन ऐबक ने बदायूँ का सूबेदार नियुक्त किया था जहाँ उसने अपनी प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया। बदायूँ उस समय उत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण सामरिक और प्रशासनिक केन्द्र था। ऐबक की मृत्यु के बाद इसी अनुभव के आधार पर इल्तुतमिश ने सत्ता संघर्ष में सफलता प्राप्त की। बदायूँ प्रारम्भिक दिल्ली सल्तनत की प्रशासनिक व्यवस्था में विशेष स्थान रखता था।


62. कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा निर्मित ‘अढ़ाई दिन का झोपड़ा’ कहाँ स्थित है?

A. दिल्ली
B. लाहौर
C. अजमेर
D. बदायूँ

उत्तर: C. अजमेर

व्याख्या: अढ़ाई दिन का झोपड़ा अजमेर में स्थित एक प्रसिद्ध मस्जिद है जिसका निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने प्रारम्भ कराया था। इसका निर्माण एक प्राचीन संस्कृत शिक्षण संस्थान के अवशेषों पर किया गया था। बाद में इल्तुतमिश ने इस भवन का विस्तार कराया। यह प्रारम्भिक इंडो-इस्लामिक स्थापत्य शैली का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।


63. ‘तुर्कान-ए-चहलगानी’ में कुल कितने प्रमुख तुर्क अमीर शामिल थे?

A. 20
B. 30
C. 40
D. 50

उत्तर: C. 40

व्याख्या: तुर्कान-ए-चहलगानी चालीस प्रभावशाली तुर्क अमीरों का समूह था जिसका गठन इल्तुतमिश ने किया था। इसका उद्देश्य प्रशासन और सैन्य मामलों में सुल्तान को सहयोग देना था। इल्तुतमिश की मृत्यु के बाद यही समूह उत्तराधिकार के मामलों में हस्तक्षेप करने लगा। रज़िया सुल्तान और अन्य उत्तराधिकारियों को इसी शक्तिशाली गुट के विरोध का सामना करना पड़ा।


64. रज़िया सुल्तान ने किस नगर के सूबेदार अल्तूनिया से विवाह किया था?

A. मुल्तान
B. भटिंडा
C. लाहौर
D. कन्नौज

उत्तर: B. भटिंडा

व्याख्या: मलिक अल्तूनिया भटिंडा का सूबेदार था जिसने प्रारम्भ में रज़िया सुल्तान के विरुद्ध विद्रोह किया था। बाद में दोनों के बीच समझौता हुआ और उनका विवाह संपन्न हुआ। विवाह के बाद दोनों ने दिल्ली की सत्ता पुनः प्राप्त करने का प्रयास किया। कैथल के निकट संघर्ष में दोनों की मृत्यु हो गई जिससे रज़िया का शासन समाप्त हो गया।


65. बलबन ने मेवात क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए कौन-सा प्रमुख कदम उठाया था?

A. नई मुद्रा जारी की
B. जंगल कटवाकर सैनिक चौकियाँ स्थापित कीं
C. व्यापारिक कर समाप्त किए
D. समुद्री सेना का गठन किया

उत्तर: B. जंगल कटवाकर सैनिक चौकियाँ स्थापित कीं

व्याख्या: मेवात के विद्रोही घने जंगलों में छिपकर लूटपाट करते थे जिससे दिल्ली के आसपास का क्षेत्र असुरक्षित हो गया था। बलबन ने जंगल कटवाकर उनके सुरक्षित ठिकानों को समाप्त किया और अनेक सैनिक चौकियाँ स्थापित करवाईं। नियमित गश्त की व्यवस्था से मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। इस नीति से राजधानी के आसपास कानून व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ।


66. गुलाम वंश के किस शासक के शासनकाल में मंगोलों का खतरा सबसे अधिक बढ़ा?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. रज़िया सुल्तान
C. गयासुद्दीन बलबन
D. कैकुबाद

उत्तर: C. गयासुद्दीन बलबन

व्याख्या: बलबन के शासनकाल में मंगोल बार-बार उत्तर-पश्चिमी सीमा पर आक्रमण कर रहे थे जिससे सल्तनत की सुरक्षा चुनौतीपूर्ण हो गई थी। उसने सीमांत क्षेत्रों में दुर्गों का निर्माण कराया और स्थायी सैन्य व्यवस्था विकसित की। उसका पुत्र राजकुमार मुहम्मद भी मंगोलों से युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ। सीमा सुरक्षा को बलबन ने अपने शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया।


67. गुलाम वंश का कौन-सा शासक स्वयं भी दास रह चुका था?

A. केवल कुतुबुद्दीन ऐबक
B. केवल इल्तुतमिश
C. कुतुबुद्दीन ऐबक और इल्तुतमिश
D. केवल बलबन

उत्तर: C. कुतुबुद्दीन ऐबक और इल्तुतमिश

व्याख्या: कुतुबुद्दीन ऐबक और इल्तुतमिश दोनों ही तुर्क मूल के दास थे जिन्हें बाद में उनकी योग्यता के कारण उच्च पद प्राप्त हुए। ऐबक मोहम्मद गौरी का दास था जबकि इल्तुतमिश को ऐबक ने खरीदकर प्रशिक्षित किया था। दोनों ने अपनी प्रशासनिक और सैन्य क्षमता के आधार पर दिल्ली की गद्दी प्राप्त की। इसी कारण इस वंश को इतिहास में ममलूक अथवा गुलाम वंश कहा जाता है।


68. ‘ममलूक वंश’ नाम से किस वंश को जाना जाता है?

A. खिलजी वंश
B. गुलाम वंश
C. तुगलक वंश
D. लोदी वंश

उत्तर: B. गुलाम वंश

व्याख्या: गुलाम वंश को इतिहास में ममलूक वंश भी कहा जाता है क्योंकि इसके प्रारम्भिक शासक पूर्व दास थे जिन्हें अरबी भाषा में ममलूक कहा जाता था। इस वंश की स्थापना 1206 ईस्वी में कुतुबुद्दीन ऐबक ने की थी। इसका शासन 1290 ईस्वी तक चला। दिल्ली सल्तनत का यह पहला शासक वंश था जिसने उत्तर भारत में स्थायी मुस्लिम शासन की नींव रखी।


69. बलबन के पुत्र मुहम्मद की मृत्यु किसके विरुद्ध युद्ध करते हुए हुई थी?

A. राजपूतों
B. मंगोलों
C. खिलजियों
D. मराठों

उत्तर: B. मंगोलों

व्याख्या: राजकुमार मुहम्मद उत्तर-पश्चिमी सीमा की रक्षा करते हुए मंगोलों से संघर्ष में 1285 ईस्वी में मारा गया। वह बलबन का सबसे योग्य उत्तराधिकारी माना जाता था। उसकी मृत्यु से बलबन को गहरा मानसिक आघात पहुँचा और उत्तराधिकार की समस्या उत्पन्न हो गई। बाद में यही स्थिति गुलाम वंश की राजनीतिक कमजोरी का एक कारण बनी।


70. गुलाम वंश के बाद दिल्ली सल्तनत का दूसरा शासक वंश कौन-सा था?

A. सैयद वंश
B. तुगलक वंश
C. खिलजी वंश
D. लोदी वंश

उत्तर: C. खिलजी वंश

व्याख्या: 1290 ईस्वी में जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने दिल्ली सल्तनत में खिलजी वंश की स्थापना की। इसके साथ गुलाम वंश का शासन समाप्त हो गया और तुर्क प्रभुत्व के स्थान पर खिलजी सत्ता स्थापित हुई। खिलजी शासकों ने दक्षिण भारत तक साम्राज्य का विस्तार किया और प्रशासनिक व्यवस्था में अनेक परिवर्तन किए। दिल्ली सल्तनत का क्रम गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैयद और लोदी वंश के रूप में स्वीकार किया जाता है।

71. इल्तुतमिश ने किस राजपूत राज्य को पराजित कर दिल्ली सल्तनत की शक्ति को सुदृढ़ किया?

A. मेवाड़
B. रणथंभौर
C. ग्वालियर
D. चित्तौड़

उत्तर: C. ग्वालियर

व्याख्या: इल्तुतमिश ने ग्वालियर पर अधिकार स्थापित कर मध्य भारत में दिल्ली सल्तनत का प्रभाव बढ़ाया। ग्वालियर का दुर्ग सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता था। इस विजय के बाद उत्तर और मध्य भारत के बीच सल्तनत का संपर्क अधिक सुरक्षित हुआ। इल्तुतमिश की सैन्य सफलताओं ने उसके शासन को स्थायित्व प्रदान किया और केंद्रीय सत्ता को सुदृढ़ बनाया।


72. गुलाम वंश के किस शासक ने ‘नवरोज’ उत्सव को शाही दरबार में विशेष महत्व दिया?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. इल्तुतमिश
C. बलबन
D. रज़िया सुल्तान

उत्तर: C. बलबन

व्याख्या: बलबन ने फारसी परंपराओं को अपनाते हुए नवरोज उत्सव को शाही दरबार में विशेष सम्मान दिया। इस उत्सव का उद्देश्य शाही वैभव और राजकीय प्रतिष्ठा का प्रदर्शन करना था। दरबार में निर्धारित शिष्टाचार और औपचारिक समारोहों को भी इसी काल में अधिक महत्व मिला। फारसी सांस्कृतिक प्रभाव बाद के सल्तनती और मुगल दरबारों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।


73. रज़िया सुल्तान को पराजित करने वाले प्रमुख विरोधी शासक का नाम क्या था?

A. रुक्नुद्दीन फिरोज
B. बहराम शाह
C. नासिरुद्दीन महमूद
D. कैकुबाद

उत्तर: B. बहराम शाह

व्याख्या: तुर्क अमीरों ने रज़िया सुल्तान के विरुद्ध षड्यंत्र कर बहराम शाह को दिल्ली की गद्दी पर बैठाया। रज़िया ने मलिक अल्तूनिया के साथ मिलकर सत्ता पुनः प्राप्त करने का प्रयास किया, किन्तु सफलता नहीं मिली। बहराम शाह का शासन भी अमीरों के प्रभाव में रहा। इस काल में उत्तराधिकार संघर्षों ने केंद्रीय सत्ता को कमजोर कर दिया।


74. इल्तुतमिश द्वारा प्रारम्भ की गई मुद्रा प्रणाली में ‘टंका’ किस धातु का सिक्का था?

A. सोना
B. चाँदी
C. ताँबा
D. कांसा

उत्तर: B. चाँदी

व्याख्या: इल्तुतमिश द्वारा जारी चाँदी का टंका दिल्ली सल्तनत की मानक मुद्रा माना जाता था। इसका निश्चित भार निर्धारित किया गया जिससे व्यापारिक लेन-देन में एकरूपता आई। इसके साथ ताँबे का जीतल भी प्रचलन में था। यह संगठित मुद्रा व्यवस्था आगे के सल्तनती शासकों द्वारा भी अपनाई गई।


75. बलबन ने दोआब क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए मुख्यतः किस उपाय का प्रयोग किया?

A. करों में पूर्ण छूट
B. सैनिक चौकियों की स्थापना
C. नई राजधानी की स्थापना
D. समुद्री सेना का विस्तार

उत्तर: B. सैनिक चौकियों की स्थापना

व्याख्या: दोआब क्षेत्र में डाकुओं और विद्रोहियों की गतिविधियाँ बढ़ने पर बलबन ने अनेक सैनिक चौकियाँ स्थापित करवाईं। इन चौकियों में स्थायी सैनिक तैनात किए गए जिससे मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई। नियमित गश्त और कठोर दंड व्यवस्था के कारण अपराधों में उल्लेखनीय कमी आई। इससे दिल्ली और पूर्वी क्षेत्रों के बीच संपर्क अधिक सुरक्षित बना।


76. गुलाम वंश के किस शासक ने लाहौर में अपना मकबरा बनवाया?

A. बलबन
B. कुतुबुद्दीन ऐबक
C. इल्तुतमिश
D. कैकुबाद

उत्तर: B. कुतुबुद्दीन ऐबक

व्याख्या: कुतुबुद्दीन ऐबक का मकबरा लाहौर में स्थित है जहाँ उसकी मृत्यु के बाद उसका अंतिम संस्कार किया गया। प्रारम्भिक रूप से यह साधारण स्थापत्य शैली में निर्मित था जिसे बाद के काल में पुनर्निर्मित किया गया। यह स्मारक प्रारम्भिक सल्तनतकालीन स्थापत्य का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। लाहौर प्रारम्भिक दिल्ली सल्तनत का प्रमुख प्रशासनिक केन्द्र भी रहा था।


77. इल्तुतमिश ने किस प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित रूप प्रदान किया?

A. मनसबदारी व्यवस्था
B. इक्ता व्यवस्था
C. दहसाला व्यवस्था
D. रैयतवाड़ी व्यवस्था

उत्तर: B. इक्ता व्यवस्था

व्याख्या: इल्तुतमिश ने इक्ता व्यवस्था को व्यवस्थित प्रशासनिक ढाँचे में विकसित किया और अधिकारियों की जिम्मेदारियाँ स्पष्ट कीं। इक्तादारों को राजस्व संग्रह तथा स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी सौंपी जाती थी। वे भूमि के स्वामी नहीं बल्कि राज्य के प्रतिनिधि होते थे। इस व्यवस्था ने दिल्ली सल्तनत की वित्तीय और सैन्य संरचना को स्थायित्व प्रदान किया।


78. गुलाम वंश के दौरान ‘चहलगानी’ शब्द का संबंध किससे था?

A. धार्मिक विद्वानों के समूह से
B. चालीस तुर्क अमीरों के दल से
C. व्यापारिक संघ से
D. सैनिक प्रशिक्षण केन्द्र से

उत्तर: B. चालीस तुर्क अमीरों के दल से

व्याख्या: चहलगानी या तुर्कान-ए-चहलगानी चालीस प्रभावशाली तुर्क अमीरों का समूह था जिसका गठन इल्तुतमिश ने किया था। प्रारम्भ में यह प्रशासनिक सहयोग के लिए बनाया गया था। बाद में यह समूह उत्तराधिकार और शासन व्यवस्था में हस्तक्षेप करने लगा। रज़िया सुल्तान सहित कई शासकों को इस गुट के विरोध का सामना करना पड़ा।


79. बलबन के शासनकाल में ‘बारिद’ का प्रमुख कार्य क्या था?

A. न्याय देना
B. गुप्त सूचनाएँ एकत्र करना
C. कर संग्रह करना
D. सेना का नेतृत्व करना

उत्तर: B. गुप्त सूचनाएँ एकत्र करना

व्याख्या: बारिद व्यवस्था सल्तनत की गुप्तचर प्रणाली थी जिसके माध्यम से प्रांतों और अधिकारियों की गतिविधियों की जानकारी सीधे सुल्तान तक पहुँचाई जाती थी। बलबन ने इस व्यवस्था को अधिक प्रभावी और स्वतंत्र बनाया। गुप्तचर किसी भी अधिकारी की शिकायत सीधे सुल्तान को भेज सकते थे। इससे प्रशासन पर केंद्रीय नियंत्रण अधिक मजबूत हुआ।


80. गुलाम वंश के किस शासक ने दिल्ली में अपना प्रसिद्ध मकबरा बनवाया जो प्रारम्भिक इस्लामी स्थापत्य का महत्वपूर्ण उदाहरण है?

A. रज़िया सुल्तान
B. कुतुबुद्दीन ऐबक
C. इल्तुतमिश
D. नासिरुद्दीन महमूद

उत्तर: C. इल्तुतमिश

व्याख्या: इल्तुतमिश का मकबरा 1235 ईस्वी के आसपास दिल्ली के कुतुब परिसर में निर्मित कराया गया था। यह भारत में प्रारम्भिक इस्लामी मकबरा स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। इसके भीतरी भाग में अरबी सुलेख और ज्यामितीय नक्काशी का सुंदर संयोजन दिखाई देता है। कुतुब परिसर में कुतुब मीनार, कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद और लौह स्तंभ भी स्थित हैं जिससे यह क्षेत्र मध्यकालीन इतिहास का महत्वपूर्ण स्थापत्य समूह बनता है।

गुलाम वंश मॉक टेस्ट MCQ Questions 81-100

81. इल्तुतमिश ने किस राजवंश के शासक यल्दौज़ को पराजित किया था?

A. गजनवी
B. घूरी
C. तुर्की शासक यल्दौज़
D. खिलजी

उत्तर: C. तुर्की शासक यल्दौज़

व्याख्या: 1216 ईस्वी में तराइन के निकट इल्तुतमिश ने गजनी के शासक ताजुद्दीन यल्दौज़ को पराजित किया। इस विजय के बाद दिल्ली सल्तनत की स्वतंत्र राजनीतिक स्थिति और अधिक मजबूत हुई। यल्दौज़ स्वयं को मोहम्मद गौरी का उत्तराधिकारी मानता था और दिल्ली पर अधिकार चाहता था। इस युद्ध के परिणामस्वरूप इल्तुतमिश उत्तर भारत का सर्वाधिक शक्तिशाली तुर्क शासक बनकर उभरा।


82. इल्तुतमिश ने सिंध के किस प्रतिद्वंद्वी शासक को पराजित किया था?

A. नासिरुद्दीन कुबाचा
B. जलालुद्दीन खिलजी
C. बहराम शाह
D. कैकुबाद

उत्तर: A. नासिरुद्दीन कुबाचा

व्याख्या: नासिरुद्दीन कुबाचा सिंध और मुल्तान का शासक था जिसने दिल्ली सल्तनत की अधीनता स्वीकार नहीं की थी। इल्तुतमिश ने उसके विरुद्ध अभियान चलाकर सिंध और मुल्तान पर अपना अधिकार स्थापित किया। पराजय के बाद कुबाचा ने सिंधु नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली थी। इस विजय से पश्चिमोत्तर भारत में सल्तनत की स्थिति अधिक सुदृढ़ हो गई।


83. दिल्ली सल्तनत की पहली और एकमात्र महिला सुल्तान कौन थीं?

A. नूरजहाँ
B. जहाँआरा बेगम
C. रज़िया सुल्तान
D. मुमताज महल

उत्तर: C. रज़िया सुल्तान

व्याख्या: रज़िया सुल्तान 1236 ईस्वी में दिल्ली की गद्दी पर बैठीं और उन्होंने पुरुष शासकों की भाँति खुला दरबार लगाया। उन्होंने पर्दा प्रथा का पालन नहीं किया तथा स्वयं सेना का नेतृत्व भी किया। उनके शासनकाल में तुर्क अमीरों के प्रभाव को सीमित करने का प्रयास किया गया। भारतीय मध्यकालीन इतिहास में वे दिल्ली सल्तनत की एकमात्र महिला सुल्तान के रूप में प्रसिद्ध हैं।


84. बलबन ने अपने शासनकाल में किस समुदाय के विद्रोहों का कठोर दमन किया?

A. जाट और मेवाती
B. मराठा
C. सिख
D. अहोम

उत्तर: A. जाट और मेवाती

व्याख्या: बलबन ने दिल्ली और दोआब क्षेत्र में सक्रिय जाट तथा मेवाती विद्रोहियों के विरुद्ध व्यापक सैन्य अभियान चलाए। उसने जंगलों की सफाई कराकर सुरक्षा चौकियाँ स्थापित कीं जिससे लूटपाट पर नियंत्रण पाया गया। कठोर दंड नीति के कारण मार्गों की सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ। इन अभियानों ने राजधानी के आसपास केंद्रीय प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाया।


85. गुलाम वंश का कौन-सा शासक ‘लोह एवं रक्त नीति’ के लिए प्रसिद्ध है?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. इल्तुतमिश
C. गयासुद्दीन बलबन
D. रज़िया सुल्तान

उत्तर: C. गयासुद्दीन बलबन

व्याख्या: बलबन ने शासन व्यवस्था में कठोर अनुशासन स्थापित करने के लिए लोह एवं रक्त नीति अपनाई। इस नीति के अंतर्गत विद्रोहियों और अपराधियों को कठोर दंड दिया जाता था। उसने शाही अधिकार को सर्वोच्च मानते हुए अमीरों के प्रभाव को सीमित किया। उसके शासनकाल में केंद्रीय सत्ता पहले की तुलना में अधिक सुदृढ़ और अनुशासित बनी।


86. गुलाम वंश के दौरान ‘दीवान-ए-वजारत’ का संबंध किस विभाग से था?

A. न्याय विभाग
B. सैन्य विभाग
C. वित्त एवं राजस्व विभाग
D. धार्मिक विभाग

उत्तर: C. वित्त एवं राजस्व विभाग

व्याख्या: दीवान-ए-वजारत सल्तनत का प्रमुख वित्तीय विभाग था जिसका प्रमुख वजीर कहलाता था। यह विभाग राजस्व संग्रह, आय-व्यय और राज्य की आर्थिक व्यवस्था का संचालन करता था। विभिन्न प्रांतों से प्राप्त आय का लेखा-जोखा इसी कार्यालय में रखा जाता था। दिल्ली सल्तनत की प्रशासनिक संरचना में इसे सबसे महत्वपूर्ण विभागों में गिना जाता है।


87. गुलाम वंश के समय ‘दीवान-ए-अर्ज’ का मुख्य कार्य क्या था?

A. न्याय व्यवस्था
B. सेना का संगठन और निरीक्षण
C. धार्मिक मामलों का संचालन
D. विदेशी व्यापार

उत्तर: B. सेना का संगठन और निरीक्षण

व्याख्या: दीवान-ए-अर्ज सैन्य विभाग का प्रमुख कार्यालय था जो सैनिकों की भर्ती, वेतन, निरीक्षण और सैन्य संगठन का कार्य करता था। इस विभाग का प्रमुख आरिज-ए-ममालिक कहलाता था। सल्तनत की सेना की कार्यक्षमता बनाए रखने में इस विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका थी। बाद के खिलजी और तुगलक शासकों ने भी इसी प्रशासनिक व्यवस्था को आगे बढ़ाया।


88. कुतुब मीनार की पहली मंजिल का निर्माण किसने कराया था?

A. इल्तुतमिश
B. कुतुबुद्दीन ऐबक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. अलाउद्दीन खिलजी

उत्तर: B. कुतुबुद्दीन ऐबक

व्याख्या: कुतुबुद्दीन ऐबक ने कुतुब मीनार की केवल पहली मंजिल का निर्माण कराया था। उसके निधन के बाद इल्तुतमिश ने शेष मंजिलों का निर्माण पूरा कराया। बाद में भूकंप से क्षतिग्रस्त भागों का पुनर्निर्माण फिरोज शाह तुगलक ने करवाया। कुतुब मीनार भारतीय इस्लामी स्थापत्य कला की प्रमुख धरोहरों में सम्मिलित है।


89. इल्तुतमिश द्वारा गठित ‘चहलगानी’ का मुख्य उद्देश्य क्या था?

A. व्यापार का विकास
B. प्रशासनिक एवं सैन्य सहयोग प्राप्त करना
C. धार्मिक शिक्षा का प्रसार
D. विदेशी व्यापार को बढ़ावा देना

उत्तर: B. प्रशासनिक एवं सैन्य सहयोग प्राप्त करना

व्याख्या: चहलगानी चालीस प्रमुख तुर्क अमीरों का समूह था जिसे इल्तुतमिश ने प्रशासनिक स्थिरता के उद्देश्य से गठित किया था। यह समूह प्रारम्भ में सुल्तान को शासन और सैन्य मामलों में सहयोग प्रदान करता था। बाद में इसी समूह ने उत्तराधिकार के मामलों में हस्तक्षेप कर राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न की। रज़िया सुल्तान के शासनकाल में इसका प्रभाव अत्यधिक बढ़ गया था।


90. गुलाम वंश के शासनकाल में दिल्ली सल्तनत का प्रमुख राजकीय भाषा कौन-सी थी?

A. संस्कृत
B. हिन्दी
C. फारसी
D. अरबी

उत्तर: C. फारसी

व्याख्या: गुलाम वंश के शासनकाल में फारसी को प्रशासन और राजकीय अभिलेखों की आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया गया। शाही आदेश, राजस्व अभिलेख और दरबारी पत्राचार फारसी में तैयार किए जाते थे। सल्तनतकालीन अधिकांश ऐतिहासिक ग्रंथ भी फारसी भाषा में लिखे गए। फारसी का प्रभाव बाद के खिलजी, तुगलक, सैयद, लोदी तथा मुगल प्रशासन में भी निरंतर बना रहा।

91. इल्तुतमिश के शासनकाल में दिल्ली सल्तनत को किस विदेशी आक्रमण से प्रत्यक्ष टकराव से बचाया गया था?

A. तैमूर का आक्रमण
B. चंगेज़ ख़ाँ का आक्रमण
C. नादिरशाह का आक्रमण
D. बाबर का आक्रमण

उत्तर: B. चंगेज़ ख़ाँ

व्याख्या: 1221 ईस्वी में ख्वारिज्म के शासक जलालुद्दीन मंगबर्नी का पीछा करते हुए चंगेज़ ख़ाँ भारत की सीमा तक पहुँचा था। इल्तुतमिश ने जलालुद्दीन को शरण न देकर मंगोलों से प्रत्यक्ष संघर्ष से बचने की कूटनीतिक नीति अपनाई। इस निर्णय के कारण दिल्ली सल्तनत विनाशकारी मंगोल आक्रमण से सुरक्षित रही। प्रारम्भिक सल्तनतकाल की विदेश नीति में यह निर्णय अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।


92. ‘कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद’ का निर्माण किस शासक ने प्रारम्भ कराया था?

A. इल्तुतमिश
B. बलबन
C. कुतुबुद्दीन ऐबक
D. रज़िया सुल्तान

उत्तर: C. कुतुबुद्दीन ऐबक

व्याख्या: कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद का निर्माण 1193 ईस्वी के आसपास कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली के महरौली क्षेत्र में प्रारम्भ कराया। इसका निर्माण चौहान शासकों के राय पिथौरा दुर्ग परिसर में किया गया था। इल्तुतमिश ने बाद में इस मस्जिद का विस्तार कराया। यह मस्जिद कुतुब परिसर का सबसे प्राचीन इस्लामी स्मारक मानी जाती है।


93. गुलाम वंश के किस शासक ने राजसत्ता के दैवी सिद्धांत को सर्वाधिक महत्व दिया?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. इल्तुतमिश
C. बलबन
D. रज़िया सुल्तान

उत्तर: C. बलबन

व्याख्या: बलबन ने सुल्तान को ईश्वर का प्रतिनिधि मानते हुए राजसत्ता के दैवी सिद्धांत को अपनाया। उसने स्वयं को जिल्ले-इलाही की उपाधि प्रदान की और शाही गरिमा को सर्वोच्च स्थान दिया। दरबार में सजदा और पैबोस जैसी परंपराओं को इसी उद्देश्य से प्रोत्साहित किया गया। इस नीति ने अमीरों के प्रभाव को सीमित कर केंद्रीय सत्ता की प्रतिष्ठा बढ़ाई।


94. गुलाम वंश के किस शासक ने ‘कुतुब मीनार’ की शेष मंजिलों का निर्माण पूरा कराया?

A. बलबन
B. इल्तुतमिश
C. रज़िया सुल्तान
D. नासिरुद्दीन महमूद

उत्तर: B. इल्तुतमिश

व्याख्या: कुतुबुद्दीन ऐबक ने कुतुब मीनार की केवल पहली मंजिल का निर्माण कराया था। इल्तुतमिश ने शेष तीन मंजिलों का निर्माण पूर्ण करवाया जिससे यह स्मारक अपने मूल स्वरूप में विकसित हुआ। बाद में भूकंप से क्षतिग्रस्त ऊपरी भाग का पुनर्निर्माण फिरोज शाह तुगलक ने कराया। कुतुब मीनार वर्तमान में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल है।


95. बलबन के शासनकाल में सीमा सुरक्षा का प्रमुख उद्देश्य क्या था?

A. दक्षिण भारत पर विजय प्राप्त करना
B. मंगोल आक्रमणों को रोकना
C. समुद्री व्यापार बढ़ाना
D. अरब देशों से संबंध स्थापित करना

उत्तर: B. मंगोल आक्रमणों को रोकना

व्याख्या: बलबन ने उत्तर-पश्चिमी सीमा पर मंगोल आक्रमणों को सबसे बड़ा खतरा माना और सीमांत क्षेत्रों में मजबूत किलों का निर्माण कराया। उसने योग्य सेनापतियों की नियुक्ति कर स्थायी सैन्य व्यवस्था विकसित की। सीमाओं की नियमित निगरानी के लिए गुप्तचर तंत्र को भी सुदृढ़ बनाया गया। इस नीति के कारण मंगोलों की प्रगति को नियंत्रित करने में सफलता मिली।


96. गुलाम वंश के किस शासक का मकबरा भारत में मेहराब के पूर्ण उपयोग का प्रारम्भिक उदाहरण माना जाता है?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. इल्तुतमिश
C. बलबन
D. रज़िया सुल्तान

उत्तर: C. बलबन

व्याख्या: दिल्ली स्थित बलबन का मकबरा भारतीय इस्लामी स्थापत्य में वास्तविक मेहराब के प्रारम्भिक उदाहरणों में गिना जाता है। इससे पहले अधिकांश इमारतों में कृत्रिम अथवा कॉर्बेल्ड मेहराबों का प्रयोग किया जाता था। स्थापत्य इतिहास में यह स्मारक तकनीकी परिवर्तन का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है। बाद के सल्तनती और मुगल स्थापत्य में वास्तविक मेहराबों का व्यापक उपयोग हुआ।


97. गुलाम वंश के दौरान ‘आरिज-ए-ममालिक’ किस विभाग का प्रमुख होता था?

A. वित्त विभाग
B. सैन्य विभाग
C. न्याय विभाग
D. डाक विभाग

उत्तर: B. सैन्य विभाग

व्याख्या: आरिज-ए-ममालिक दीवान-ए-अर्ज अर्थात सैन्य विभाग का प्रमुख अधिकारी होता था। उसका कार्य सैनिकों की भर्ती, निरीक्षण, वेतन और सैन्य संगठन का संचालन करना था। सेना की गुणवत्ता और अनुशासन बनाए रखने में इस पद की महत्वपूर्ण भूमिका थी। दिल्ली सल्तनत की प्रशासनिक संरचना में यह प्रमुख केंद्रीय पदों में शामिल था।


98. गुलाम वंश के इतिहास के अध्ययन के लिए ‘ताज-उल-मासिर’ किस प्रकार का स्रोत है?

A. विदेशी यात्रा-वृत्तांत
B. समकालीन ऐतिहासिक ग्रंथ
C. अभिलेखीय स्रोत
D. धार्मिक ग्रंथ

उत्तर: B. समकालीन ऐतिहासिक ग्रंथ

व्याख्या: ‘ताज-उल-मासिर’ की रचना हसन निजामी ने कुतुबुद्दीन ऐबक के संरक्षण में की थी। इसमें मोहम्मद गौरी तथा प्रारम्भिक दिल्ली सल्तनत की घटनाओं का वर्णन मिलता है। यह गुलाम वंश के इतिहास का समकालीन साहित्यिक स्रोत माना जाता है। इतिहासकार प्रारम्भिक सल्तनतकालीन राजनीतिक घटनाओं के अध्ययन में इस ग्रंथ का व्यापक उपयोग करते हैं।


99. गुलाम वंश के अधिकांश शासक किस जातीय मूल से संबंधित थे?

A. अफगान
B. तुर्क
C. मंगोल
D. अरब

उत्तर: B. तुर्क

व्याख्या: गुलाम वंश के प्रमुख शासक जैसे कुतुबुद्दीन ऐबक, इल्तुतमिश और बलबन तुर्क मूल के थे। इनमें से अधिकांश ने दास जीवन से अपनी राजनीतिक यात्रा प्रारम्भ की थी। उनकी सैन्य और प्रशासनिक योग्यता के कारण उन्हें उच्च पद प्राप्त हुए और बाद में वे सुल्तान बने। इसी कारण इस वंश को तुर्क अथवा ममलूक वंश भी कहा जाता है।


100. दिल्ली सल्तनत के गुलाम वंश का शासनकाल किस अवधि के बीच माना जाता है?

A. 1192–1287 ई.
B. 1206–1290 ई.
C. 1211–1320 ई.
D. 1199–1305 ई.

उत्तर: B. 1206–1290 ई.

व्याख्या: गुलाम वंश का शासन 1206 ईस्वी में कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा स्थापित किया गया और 1290 ईस्वी में जलालुद्दीन फिरोज खिलजी के सत्ता ग्रहण करने के साथ समाप्त हुआ। इस अवधि में इल्तुतमिश ने सल्तनत को संगठित किया, रज़िया सुल्तान पहली महिला सुल्तान बनीं और बलबन ने केंद्रीय सत्ता को अत्यंत मजबूत बनाया। दिल्ली सल्तनत के इतिहास में इसी काल में प्रशासन, मुद्रा व्यवस्था, स्थापत्य कला और सैन्य संगठन की आधारभूत संरचना विकसित हुई।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गुलाम वंश का इतिहास क्या है?

गुलाम वंश, जिसे ममलूक वंश भी कहा जाता है, दिल्ली सल्तनत का प्रथम शासक वंश था। इसकी स्थापना 1206 ईस्वी में कुतुबुद्दीन ऐबक ने की थी। इस वंश ने 1206 से 1290 ईस्वी तक शासन किया। इल्तुतमिश, रज़िया सुल्तान और गयासुद्दीन बलबन इसके प्रमुख शासक थे। इस काल में दिल्ली सल्तनत की प्रशासनिक, सैन्य और मुद्रा व्यवस्था की मजबूत नींव रखी गई।

गुलाम वंश के कुल कितने शासक हुए थे?

गुलाम वंश में कुल 11 शासक हुए थे। इनमें कुतुबुद्दीन ऐबक, आराम शाह, इल्तुतमिश, रुक्नुद्दीन फिरोज, रज़िया सुल्तान, मुइज़ुद्दीन बहराम शाह, अलाउद्दीन मसूद शाह, नासिरुद्दीन महमूद, गयासुद्दीन बलबन, कैकुबाद और कैयूमर्स शामिल हैं।

भारत में गुलाम (ममलूक) वंश का संस्थापक कौन था?

भारत में गुलाम (ममलूक) वंश का संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक था। वह मोहम्मद गौरी का विश्वसनीय सेनापति और दास था। गौरी की मृत्यु के बाद उसने 1206 ईस्वी में स्वतंत्र शासन स्थापित किया और दिल्ली सल्तनत की नींव रखी। अपनी उदारता के कारण उसे “लाख बख्श” की उपाधि भी प्राप्त हुई।

गुलाम वंश का अंतिम राजा कौन था?

गुलाम वंश का अंतिम शासक कैकुबाद था। उसके शासनकाल में केंद्रीय सत्ता कमजोर हो गई और तुर्क अमीरों के बीच गुटबाजी बढ़ गई। इसके बाद 1290 ईस्वी में जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने सत्ता पर अधिकार कर खिलजी वंश की स्थापना की, जिसके साथ गुलाम वंश का शासन समाप्त हो गया।

निष्कर्ष

गुलाम वंश ने दिल्ली सल्तनत की मजबूत नींव रखी और मध्यकालीन भारत के राजनीतिक इतिहास को नई दिशा दी। कुतुबुद्दीन ऐबक, इल्तुतमिश, रज़िया सुल्तान और गयासुद्दीन बलबन जैसे शासकों ने प्रशासन, सैन्य संगठन, इक्ता व्यवस्था, मुद्रा प्रणाली और स्थापत्य कला के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यदि आपने इस Gulam Vansh Mock Test के सभी 100 MCQ हल किए हैं, तो आपने इस विषय के लगभग सभी प्रमुख परीक्षा-उपयोगी तथ्यों का प्रभावी पुनरावलोकन कर लिया है। नियमित अभ्यास और विषयवार मॉक टेस्ट आपकी तैयारी को और अधिक मजबूत बनाएंगे तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करने में सहायता करेंगे।

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