खिलजी वंश मॉक टेस्ट (MCQ) | 100 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर | मध्यकालीन भारत का इतिहास

Khilji Dynasty Mock Test – खिलजी वंश के 100 महत्वपूर्ण MCQs | Medieval History in Hindi

Khilji Dynasty Mock Test में खिलजी वंश से संबंधित 100 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न शामिल हैं, जो मध्यकालीन भारत के इतिहास के प्रमुख तथ्यों पर आधारित हैं। इसमें जलालुद्दीन फिरोज खिलजी, अलाउद्दीन खिलजी, प्रशासनिक सुधार, बाजार नियंत्रण नीति, दक्षिण भारत के अभियान, मंगोल आक्रमण तथा दिल्ली सल्तनत के विस्तार जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। प्रश्नों का चयन प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाने वाले तथ्यों को ध्यान में रखकर किया गया है।

इस Khilji Dynasty Mock Test की सहायता से आप अपनी तैयारी का मूल्यांकन कर सकते हैं और खिलजी वंश से जुड़े महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्यों की दोहराई एक ही स्थान पर कर सकते हैं। प्रत्येक प्रश्न के साथ दिया गया उत्तर विषय की समझ को मजबूत बनाने और परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने में सहायक होगा।

Khilji Dynasty Mock Test MCQ Questions 1-20

1. खिलजी वंश का संस्थापक कौन था?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. इल्तुतमिश
C. जलालुद्दीन फिरोज खिलजी
D. गयासुद्दीन तुगलक

उत्तर: C. जलालुद्दीन फिरोज खिलजी

व्याख्या: जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने 1290 ईस्वी में दिल्ली सल्तनत में खिलजी वंश की स्थापना की और गुलाम वंश का शासन समाप्त किया। वे अफगान-तुर्क मूल के शासक माने जाते हैं तथा अपनी उदार नीति के कारण समकालीन अमीरों में लोकप्रिय थे। उनके शासनकाल में सत्ता परिवर्तन अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा, लेकिन बाद में अलाउद्दीन खिलजी ने उनकी हत्या कर स्वयं सत्ता प्राप्त की। खिलजी वंश का उदय दिल्ली सल्तनत के इतिहास में एक नए राजनीतिक चरण की शुरुआत माना जाता है।


2. खिलजी वंश का शासनकाल किस अवधि में रहा था?

A. 1206–1290 ई.
B. 1290–1320 ई.
C. 1320–1414 ई.
D. 1451–1526 ई.

उत्तर: B. 1290–1320 ई.

व्याख्या: खिलजी वंश ने लगभग तीस वर्षों तक दिल्ली सल्तनत पर शासन किया। इस अवधि में जलालुद्दीन फिरोज खिलजी, अलाउद्दीन खिलजी, शिहाबुद्दीन उमर तथा कुतुबुद्दीन मुबारक शाह जैसे शासकों ने शासन किया। इसी काल में दक्षिण भारत तक सल्तनत का विस्तार हुआ और प्रशासनिक, आर्थिक तथा सैन्य सुधार लागू किए गए। 1320 ईस्वी में गयासुद्दीन तुगलक ने तुगलक वंश की स्थापना कर खिलजी शासन का अंत किया।


3. अलाउद्दीन खिलजी ने दिल्ली की गद्दी किसकी हत्या के बाद प्राप्त की थी?

A. कैकुबाद
B. जलालुद्दीन फिरोज खिलजी
C. बलबन
D. नासिरुद्दीन महमूद

उत्तर: B. जलालुद्दीन फिरोज खिलजी

व्याख्या: 1296 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने कड़ा के निकट अपने चाचा और ससुर जलालुद्दीन फिरोज खिलजी की हत्या कर सत्ता पर अधिकार किया। इसके बाद उन्होंने स्वयं को दिल्ली का सुल्तान घोषित किया और साम्राज्य विस्तार की नीति अपनाई। उनके शासनकाल में दिल्ली सल्तनत की शक्ति और क्षेत्रफल दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। यह घटना मध्यकालीन भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाओं में गिनी जाती है।


4. अलाउद्दीन खिलजी ने देवगिरि पर पहला आक्रमण कब किया था?

A. 1292 ई.
B. 1294 ई.
C. 1298 ई.
D. 1303 ई.

उत्तर: B. 1294 ई.

व्याख्या: देवगिरि पर पहला आक्रमण अलाउद्दीन खिलजी ने उस समय किया जब वे अभी दिल्ली के सुल्तान नहीं बने थे। इस अभियान में यादव शासक रामचंद्र देव को पराजित कर उन्होंने विशाल धन-संपत्ति प्राप्त की। यही संपत्ति आगे चलकर सत्ता प्राप्त करने और सेना को मजबूत बनाने में सहायक बनी। वर्तमान में देवगिरि का किला महाराष्ट्र के दौलताबाद क्षेत्र में स्थित है।


5. अलाउद्दीन खिलजी का सबसे प्रसिद्ध सेनापति कौन था?

A. उलूग खाँ
B. जफर खाँ
C. मलिक काफूर
D. खुसरो खाँ

उत्तर: C. मलिक काफूर

व्याख्या: मलिक काफूर अलाउद्दीन खिलजी का विश्वसनीय सेनापति था जिसने दक्षिण भारत के कई सफल सैन्य अभियानों का नेतृत्व किया। उसने देवगिरि, वारंगल, द्वारसमुद्र और मदुरै जैसे राज्यों को दिल्ली सल्तनत के अधीन किया। इन विजयों से दिल्ली सल्तनत को अपार धन-संपत्ति और राजनीतिक प्रभाव प्राप्त हुआ। दक्षिण भारत में खिलजी साम्राज्य के विस्तार का सबसे बड़ा श्रेय मलिक काफूर को दिया जाता है।


6. अलाउद्दीन खिलजी ने बाजार नियंत्रण नीति किस उद्देश्य से लागू की थी?

A. व्यापार समाप्त करने के लिए
B. किसानों को करमुक्त करने के लिए
C. सेना का खर्च नियंत्रित रखने के लिए
D. विदेशी व्यापार बढ़ाने के लिए

उत्तर: C. सेना का खर्च नियंत्रित रखने के लिए

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने आवश्यक वस्तुओं के मूल्य निश्चित कर बाजार नियंत्रण व्यवस्था लागू की ताकि सैनिकों को कम वेतन पर भी जीवन-निर्वाह की आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध हो सकें। उन्होंने व्यापारियों, गोदामों और मंडियों पर कड़ी निगरानी रखी तथा मूल्य सूची निर्धारित की। इस नीति से महँगाई पर नियंत्रण रखने में सफलता मिली। मध्यकालीन भारत के आर्थिक इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार माना जाता है।


7. अलाउद्दीन खिलजी की बाजार व्यवस्था का प्रमुख अधिकारी कौन कहलाता था?

A. वजीर
B. कोतवाल
C. शहना-ए-मंडी
D. सद्र-उस-सुदूर

उत्तर: C. शहना-ए-मंडी

व्याख्या: शहना-ए-मंडी बाजार नियंत्रण विभाग का प्रमुख अधिकारी होता था। उसका कार्य वस्तुओं के निर्धारित मूल्य लागू कराना, व्यापारियों की गतिविधियों पर निगरानी रखना तथा जमाखोरी और कालाबाज़ारी को रोकना था। नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यापारियों को कठोर दंड दिया जाता था। इस व्यवस्था के कारण बाजार में मूल्य नियंत्रण प्रभावी रूप से लागू किया जा सका।


8. 1303 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने किस दुर्ग पर विजय प्राप्त की थी?

A. रणथंभौर
B. ग्वालियर
C. चित्तौड़
D. कालिंजर

उत्तर: C. चित्तौड़

व्याख्या: 1303 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने मेवाड़ की राजधानी चित्तौड़ पर अधिकार किया। उस समय वहाँ के शासक राणा रतन सिंह थे। चित्तौड़ विजय के बाद दिल्ली सल्तनत का प्रभाव राजस्थान में और अधिक मजबूत हुआ। इसी अभियान से जुड़ी रानी पद्मिनी की कथा मलिक मुहम्मद जायसी की ‘पद्मावत’ में वर्णित है, हालांकि इतिहासकार इसके ऐतिहासिक प्रमाणों पर अलग-अलग मत रखते हैं।


9. मंगोल आक्रमणों से सुरक्षा के लिए अलाउद्दीन खिलजी ने कौन-सा प्रमुख कदम उठाया?

A. राजधानी को दौलताबाद स्थानांतरित किया
B. कर व्यवस्था समाप्त कर दी
C. विशाल स्थायी सेना का गठन किया
D. इक्ता प्रथा समाप्त कर दी

उत्तर: C. विशाल स्थायी सेना का गठन किया

व्याख्या: मंगोलों के लगातार आक्रमणों से दिल्ली सल्तनत की रक्षा के लिए अलाउद्दीन खिलजी ने बड़ी स्थायी सेना का गठन किया। सैनिकों के वेतन की नियमित व्यवस्था की गई तथा सेना में अनुशासन बनाए रखने के लिए नई व्यवस्थाएँ लागू की गईं। सीमावर्ती क्षेत्रों में किलों को मजबूत किया गया और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया गया। इन उपायों के कारण मंगोल कई बार असफल होकर वापस लौटे।


10. सैनिकों के घोड़ों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए अलाउद्दीन खिलजी ने कौन-सी व्यवस्था लागू की थी?

A. चेहरा प्रथा
B. इक्ता प्रथा
C. दाग प्रथा
D. नस्क प्रथा

उत्तर: C. दाग प्रथा

व्याख्या: दाग प्रथा के अंतर्गत सैनिकों के घोड़ों पर सरकारी निशान अंकित किया जाता था ताकि निम्न गुणवत्ता वाले या नकली घोड़ों को सेना में शामिल होने से रोका जा सके। इस व्यवस्था से सैन्य निरीक्षण अधिक प्रभावी हुआ और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण स्थापित करने में सहायता मिली। दाग प्रथा के साथ चेहरा प्रथा भी लागू की गई, जिसके अंतर्गत प्रत्येक सैनिक का व्यक्तिगत विवरण सरकारी अभिलेखों में दर्ज किया जाता था। यह सुधार अलाउद्दीन खिलजी की सैन्य व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं में से एक था।

11. सैनिकों का विवरण सरकारी अभिलेखों में दर्ज करने की व्यवस्था क्या कहलाती थी?

A. दाग प्रथा
B. चेहरा प्रथा
C. इक्ता प्रथा
D. नस्क प्रथा

उत्तर: B. चेहरा प्रथा

व्याख्या: चेहरा प्रथा के अंतर्गत प्रत्येक सैनिक का नाम, हुलिया तथा अन्य व्यक्तिगत विवरण सरकारी अभिलेखों में दर्ज किया जाता था। इस व्यवस्था का उद्देश्य फर्जी सैनिकों की नियुक्ति और वेतन संबंधी भ्रष्टाचार को रोकना था। इसे दाग प्रथा के साथ लागू किया गया ताकि सेना की गुणवत्ता और अनुशासन बनाए रखा जा सके। अलाउद्दीन खिलजी के सैन्य सुधारों में चेहरा प्रथा का विशेष महत्व माना जाता है।


12. अलाउद्दीन खिलजी के दक्षिण भारत के अभियानों का नेतृत्व किसने किया था?

A. उलूग खाँ
B. जफर खाँ
C. मलिक काफूर
D. खुसरो खाँ

उत्तर: C. मलिक काफूर

व्याख्या: मलिक काफूर ने अलाउद्दीन खिलजी के आदेश पर दक्षिण भारत में अनेक सफल सैन्य अभियान संचालित किए। उसने वारंगल, देवगिरि, द्वारसमुद्र तथा मदुरै जैसे राज्यों को पराजित कर दिल्ली सल्तनत की शक्ति का विस्तार किया। इन अभियानों से सल्तनत को अपार धन-संपत्ति प्राप्त हुई और दक्षिण भारत के कई राज्यों ने कर देना स्वीकार किया। मलिक काफूर को खिलजी काल का सबसे सफल सेनापति माना जाता है।


13. अलाउद्दीन खिलजी द्वारा बसाया गया नया नगर कौन-सा था?

A. फिरोजाबाद
B. तुगलकाबाद
C. सीरी
D. आगरा

उत्तर: C. सीरी

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने दिल्ली में सीरी नगर की स्थापना की, जिसे दिल्ली का दूसरा ऐतिहासिक नगर माना जाता है। इस नगर का निर्माण मुख्यतः प्रशासनिक और सैन्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर कराया गया था। सीरी में राजमहल, सैनिक छावनियाँ तथा अन्य महत्वपूर्ण भवन बनाए गए। आज भी इसके अवशेष दिल्ली में ऐतिहासिक धरोहर के रूप में मौजूद हैं।


14. अलाउद्दीन खिलजी के दरबार का प्रसिद्ध कवि एवं संगीतज्ञ कौन था?

A. जियाउद्दीन बरनी
B. अमीर खुसरो
C. बदायूँनी
D. अबुल फ़ज़ल

उत्तर: B. अमीर खुसरो

व्याख्या: अमीर खुसरो फारसी भाषा के महान कवि, लेखक और संगीतज्ञ थे, जिन्होंने अलाउद्दीन खिलजी सहित कई दिल्ली सल्तनत के शासकों के दरबार की शोभा बढ़ाई। उन्हें ‘तूत-ए-हिंद’ अर्थात ‘भारत का तोता’ कहा जाता है। भारतीय संगीत परंपरा में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। उनकी रचनाएँ मध्यकालीन भारत के इतिहास का महत्वपूर्ण स्रोत हैं।


15. ‘तूत-ए-हिंद’ (भारत का तोता) की उपाधि किसे दी गई थी?

A. अबुल फ़ज़ल
B. जियाउद्दीन बरनी
C. अमीर खुसरो
D. अलबरूनी

उत्तर: C. अमीर खुसरो

व्याख्या: अमीर खुसरो को उनकी असाधारण साहित्यिक प्रतिभा के कारण ‘तूत-ए-हिंद’ कहा गया। उन्होंने फारसी साहित्य के साथ-साथ हिंदवी भाषा के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। संगीत के क्षेत्र में उनके नाम से कई नवाचार जोड़े जाते हैं, जिनमें कव्वाली परंपरा के विकास का उल्लेख भी मिलता है। वे दिल्ली सल्तनत के सांस्कृतिक इतिहास के प्रमुख व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं।


16. खिलजी वंश का अंतिम प्रभावी शासक कौन था?

A. अलाउद्दीन खिलजी
B. जलालुद्दीन फिरोज खिलजी
C. कुतुबुद्दीन मुबारक शाह
D. शिहाबुद्दीन उमर

उत्तर: C. कुतुबुद्दीन मुबारक शाह

व्याख्या: कुतुबुद्दीन मुबारक शाह अलाउद्दीन खिलजी का पुत्र था और खिलजी वंश का अंतिम प्रभावी शासक माना जाता है। उसके शासनकाल में कई कठोर नियम समाप्त कर दिए गए, जिससे प्रशासनिक नियंत्रण कमजोर पड़ गया। बाद में खुसरो खाँ ने उसकी हत्या कर सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया। इसके कुछ समय बाद गयासुद्दीन तुगलक ने खुसरो खाँ को पराजित कर तुगलक वंश की स्थापना की।


17. खिलजी वंश के बाद दिल्ली सल्तनत पर किस वंश का शासन स्थापित हुआ?

A. सैयद वंश
B. लोदी वंश
C. तुगलक वंश
D. गुलाम वंश

उत्तर: C. तुगलक वंश

व्याख्या: 1320 ईस्वी में गयासुद्दीन तुगलक ने खुसरो खाँ को पराजित कर तुगलक वंश की स्थापना की। इसके साथ ही खिलजी वंश का शासन समाप्त हो गया। तुगलक शासकों ने प्रशासनिक व्यवस्था में कई नए प्रयोग किए, जिनमें राजधानी परिवर्तन और सांकेतिक मुद्रा जैसी नीतियाँ विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। दिल्ली सल्तनत का इतिहास पाँच प्रमुख वंशों में विभाजित किया जाता है, जिनमें खिलजी और तुगलक दोनों महत्वपूर्ण हैं।


18. अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ विजय के बाद उसका नाम क्या रखा था?

A. अलाईनगर
B. मुबारकाबाद
C. खिज्राबाद
D. जलालाबाद

उत्तर: C. खिज्राबाद

व्याख्या: 1303 ईस्वी में चित्तौड़ पर विजय प्राप्त करने के बाद अलाउद्दीन खिलजी ने उसका नाम अपने पुत्र खिज्र खाँ के सम्मान में ‘खिज्राबाद’ रखा। यद्यपि यह नाम अधिक समय तक प्रचलित नहीं रह सका, फिर भी यह तथ्य मध्यकालीन भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है। चित्तौड़ दुर्ग राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक किलों में से एक है और यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में भी शामिल है।


19. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में भूमि कर सामान्यतः उपज का कितना भाग था?

A. एक-चौथाई
B. एक-तिहाई
C. आधा
D. दो-तिहाई

उत्तर: C. आधा

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने कृषि उपज का लगभग 50 प्रतिशत भाग भूमि कर के रूप में निर्धारित किया। इस व्यवस्था से राज्य की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और सेना तथा प्रशासन के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हुए। कर संग्रह की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए अधिकारियों पर भी कड़ी निगरानी रखी जाती थी। यह नीति खिलजी काल की आर्थिक व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं में गिनी जाती है।


20. खिलजी वंश का सबसे प्रसिद्ध एवं शक्तिशाली शासक कौन था?

A. जलालुद्दीन फिरोज खिलजी
B. शिहाबुद्दीन उमर
C. कुतुबुद्दीन मुबारक शाह
D. अलाउद्दीन खिलजी

उत्तर: D. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी को खिलजी वंश का सबसे शक्तिशाली शासक माना जाता है। उनके शासनकाल में दिल्ली सल्तनत का विस्तार उत्तर भारत से दक्षिण भारत तक हुआ और अनेक प्रशासनिक, आर्थिक तथा सैन्य सुधार लागू किए गए। बाजार नियंत्रण नीति, दाग प्रथा, चेहरा प्रथा तथा मंगोल आक्रमणों का सफल प्रतिरोध उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं। मध्यकालीन भारत के इतिहास में उनका शासन सबसे प्रभावशाली कालों में से एक माना जाता है।

खिलजी वंश MCQ Questions 21-40

21. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल का प्रमुख इतिहासकार कौन था?

A. अबुल फ़ज़ल
B. मिनहाज-उस-सिराज
C. जियाउद्दीन बरनी
D. इब्न बतूता

उत्तर: C. जियाउद्दीन बरनी

व्याख्या: जियाउद्दीन बरनी दिल्ली सल्तनत के प्रमुख इतिहासकारों में से एक थे। उन्होंने ‘तारीख-ए-फिरोजशाही’ और ‘फतवा-ए-जहाँदारी’ जैसी महत्वपूर्ण कृतियों की रचना की। यद्यपि उनका अधिकांश लेखन तुगलक काल में हुआ, फिर भी उन्होंने अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल की प्रशासनिक और आर्थिक नीतियों का विस्तृत वर्णन किया है। उनके ग्रंथ मध्यकालीन भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं।


22. रणथंभौर पर विजय प्राप्त करने वाला खिलजी शासक कौन था?

A. जलालुद्दीन फिरोज खिलजी
B. कुतुबुद्दीन मुबारक शाह
C. अलाउद्दीन खिलजी
D. शिहाबुद्दीन उमर

उत्तर: C. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: 1301 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने रणथंभौर दुर्ग पर विजय प्राप्त की। उस समय वहाँ के शासक हम्मीर देव चौहान थे। इस विजय से राजस्थान में दिल्ली सल्तनत की स्थिति और अधिक सुदृढ़ हुई। रणथंभौर अभियान अलाउद्दीन खिलजी की प्रमुख सैन्य सफलताओं में गिना जाता है।


23. अलाउद्दीन खिलजी के समय वारंगल का शासक कौन था?

A. रामचंद्र देव
B. प्रतापरुद्र देव
C. वीर बल्लाल तृतीय
D. हरिहर

उत्तर: B. प्रतापरुद्र देव

व्याख्या: वारंगल पर काकतीय वंश का शासन था और उसके शासक प्रतापरुद्र देव थे। मलिक काफूर ने अलाउद्दीन खिलजी के आदेश पर वारंगल पर आक्रमण किया और प्रतापरुद्र देव को अधीनता स्वीकार करने के लिए विवश किया। इस विजय से दिल्ली सल्तनत को भारी मात्रा में धन और बहुमूल्य रत्न प्राप्त हुए। वारंगल वर्तमान तेलंगाना राज्य में स्थित है।


24. अलाउद्दीन खिलजी ने किस राज्य पर विजय प्राप्त कर कोहिनूर हीरा प्राप्त किया था?

A. देवगिरि
B. द्वारसमुद्र
C. वारंगल
D. मदुरै

उत्तर: C. वारंगल

व्याख्या: इतिहासकारों के अनुसार वारंगल विजय के बाद दिल्ली सल्तनत को अनेक बहुमूल्य रत्न प्राप्त हुए, जिनमें कोहिनूर हीरे का उल्लेख भी किया जाता है। यह अभियान मलिक काफूर के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ था। वारंगल उस समय दक्षिण भारत का एक समृद्ध राज्य था। इस विजय ने खिलजी साम्राज्य की आर्थिक शक्ति को और अधिक बढ़ाया।


25. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में गुजरात पर आक्रमण का नेतृत्व किसने किया था?

A. मलिक काफूर और जफर खाँ
B. उलूग खाँ और नुसरत खाँ
C. खुसरो खाँ और ऐनुलमुल्क
D. अलप खाँ और मलिक नायक

उत्तर: B. उलूग खाँ और नुसरत खाँ

व्याख्या: 1299 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने गुजरात पर आक्रमण के लिए उलूग खाँ और नुसरत खाँ को भेजा। इस अभियान में गुजरात के शासक कर्णदेव द्वितीय पराजित हुए। इसी अभियान के दौरान मलिक काफूर को बंदी बनाकर दिल्ली लाया गया, जो आगे चलकर अलाउद्दीन का प्रमुख सेनापति बना। गुजरात विजय से सल्तनत को विशाल धन-संपत्ति प्राप्त हुई।


26. अलाउद्दीन खिलजी ने किस मंगोल नेता को पराजित कर दिल्ली की रक्षा की थी?

A. तैमूर
B. चंगेज़ खाँ
C. कुतलुग ख़्वाजा
D. बाबर

उत्तर: C. कुतलुग ख़्वाजा

व्याख्या: 1299 ईस्वी में मंगोल सेनापति कुतलुग ख़्वाजा ने भारत पर आक्रमण किया। अलाउद्दीन खिलजी की सेना ने किली के युद्ध में उसका सामना किया और मंगोलों की प्रगति को रोक दिया। इसके बाद भी कई मंगोल आक्रमण हुए, लेकिन अलाउद्दीन की मजबूत सैन्य व्यवस्था के कारण वे दिल्ली पर अधिकार स्थापित नहीं कर सके। मंगोल आक्रमणों का सफल प्रतिरोध उनकी महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता है।


27. अलाउद्दीन खिलजी द्वारा बनवाया गया प्रसिद्ध प्रवेश द्वार कौन-सा है?

A. बुलंद दरवाजा
B. अलाई दरवाजा
C. रूमी दरवाजा
D. लाल दरवाजा

उत्तर: B. अलाई दरवाजा

व्याख्या: अलाई दरवाजा का निर्माण 1311 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने कुतुब परिसर में कराया था। इसे भारत में इस्लामी स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से निर्मित यह भवन अपनी सुंदर नक्काशी और स्थापत्य शैली के लिए प्रसिद्ध है। अलाई दरवाजा आज भी दिल्ली के प्रमुख ऐतिहासिक स्मारकों में शामिल है।


28. अलाउद्दीन खिलजी ने किस प्रसिद्ध मीनार का निर्माण प्रारम्भ कराया था, जो अधूरी रह गई?

A. विजय स्तंभ
B. कुतुब मीनार
C. अलाई मीनार
D. चारमीनार

उत्तर: C. अलाई मीनार

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने कुतुब मीनार से लगभग दोगुनी ऊँचाई की अलाई मीनार बनवाने की योजना बनाई थी। उनके जीवनकाल में केवल इसका आधार भाग ही बन सका और उनकी मृत्यु के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया। आज भी इसका अधूरा ढांचा कुतुब परिसर में देखा जा सकता है। यह खिलजी काल की महत्वाकांक्षी स्थापत्य योजनाओं का प्रतीक माना जाता है।


29. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में ‘दीवान-ए-रियासत’ का संबंध किससे था?

A. न्याय व्यवस्था
B. बाजार नियंत्रण
C. सैन्य संगठन
D. धार्मिक मामलों

उत्तर: B. बाजार नियंत्रण

व्याख्या: दीवान-ए-रियासत अलाउद्दीन खिलजी द्वारा स्थापित एक महत्वपूर्ण विभाग था, जिसका कार्य बाजार व्यवस्था और मूल्य नियंत्रण की निगरानी करना था। यह विभाग वस्तुओं के निर्धारित मूल्य लागू कराने तथा व्यापारियों पर नियंत्रण रखने के लिए उत्तरदायी था। इसके माध्यम से जमाखोरी और कालाबाज़ारी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया। यह विभाग खिलजी की आर्थिक नीति का प्रमुख आधार था।


30. अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु किस वर्ष हुई थी?

A. 1310 ई.
B. 1313 ई.
C. 1316 ई.
D. 1320 ई.

उत्तर: C. 1316 ई.

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु 1316 ईस्वी में हुई। उनके निधन के बाद दिल्ली सल्तनत में उत्तराधिकार को लेकर संघर्ष प्रारम्भ हो गया। पहले शिहाबुद्दीन उमर को सुल्तान बनाया गया, लेकिन वास्तविक सत्ता मलिक काफूर के हाथों में रही। बाद में कुतुबुद्दीन मुबारक शाह ने सत्ता संभाली, परन्तु खिलजी वंश अधिक समय तक स्थिर नहीं रह सका।

31. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में देवगिरि का शासक कौन था?

A. प्रतापरुद्र देव
B. रामचंद्र देव
C. वीर बल्लाल तृतीय
D. हरिहर

उत्तर: B. रामचंद्र देव

व्याख्या: देवगिरि पर यादव वंश के राजा रामचंद्र देव का शासन था। 1294 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने देवगिरि पर पहला आक्रमण किया और बाद में मलिक काफूर ने भी इस राज्य को पूरी तरह दिल्ली सल्तनत के अधीन कर दिया। देवगिरि की विजय से खिलजी शासन को अपार धन-संपत्ति और दक्षिण भारत में राजनीतिक प्रभाव प्राप्त हुआ। वर्तमान में देवगिरि का किला महाराष्ट्र के दौलताबाद में स्थित है।


32. अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर विजय किस वर्ष प्राप्त की थी?

A. 1299 ई.
B. 1301 ई.
C. 1303 ई.
D. 1305 ई.

उत्तर: C. 1303 ई.

व्याख्या: 1303 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ दुर्ग पर विजय प्राप्त की। उस समय मेवाड़ के शासक राणा रतन सिंह थे। इस विजय के बाद राजस्थान में दिल्ली सल्तनत का प्रभाव और अधिक बढ़ गया। चित्तौड़ का दुर्ग भारत के सबसे विशाल एवं ऐतिहासिक दुर्गों में गिना जाता है और इसे यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में भी शामिल किया गया है।


33. अलाउद्दीन खिलजी ने किस दुर्ग पर विजय प्राप्त करने के बाद अपने पुत्र के नाम पर उसका नाम ‘खिज्राबाद’ रखा था?

A. रणथंभौर
B. ग्वालियर
C. चित्तौड़
D. कालिंजर

उत्तर: C. चित्तौड़

व्याख्या: चित्तौड़ विजय के बाद अलाउद्दीन खिलजी ने इस दुर्ग का नाम अपने पुत्र खिज्र खाँ के सम्मान में ‘खिज्राबाद’ रखा। यद्यपि यह नाम अधिक समय तक प्रचलित नहीं रहा, फिर भी यह तथ्य इतिहास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। चित्तौड़ दुर्ग राजपूत वीरता और बलिदान का प्रमुख प्रतीक माना जाता है।


34. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में ‘दीवान-ए-मुस्तखराज’ विभाग का मुख्य कार्य क्या था?

A. सेना का संचालन
B. धार्मिक मामलों का प्रबंधन
C. बकाया राजस्व की वसूली
D. न्याय व्यवस्था

उत्तर: C. बकाया राजस्व की वसूली

व्याख्या: दीवान-ए-मुस्तखराज विभाग की स्थापना बकाया भूमि कर और अन्य राजस्व की प्रभावी वसूली के लिए की गई थी। इस विभाग के माध्यम से अधिकारियों की निगरानी भी की जाती थी ताकि कर संग्रह में किसी प्रकार की अनियमितता न हो। इससे राज्य की आय में वृद्धि हुई और प्रशासन अधिक संगठित बना। यह विभाग अलाउद्दीन खिलजी की वित्तीय नीति का महत्वपूर्ण भाग था।


35. अलाउद्दीन खिलजी ने किस प्रसिद्ध सूफी संत का सम्मान किया था?

A. शेख सलीम चिश्ती
B. निजामुद्दीन औलिया
C. मुईनुद्दीन चिश्ती
D. शेख अहमद सरहिंदी

उत्तर: B. निजामुद्दीन औलिया

व्याख्या: निजामुद्दीन औलिया चिश्ती संप्रदाय के प्रसिद्ध सूफी संत थे, जिनका जीवनकाल अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल से मेल खाता है। उन्होंने सत्ता से दूरी बनाए रखी और मानव सेवा, प्रेम तथा आध्यात्मिक जीवन पर बल दिया। उनके शिष्य अमीर खुसरो थे, जिन्होंने भारतीय साहित्य और संगीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। दिल्ली स्थित उनकी दरगाह आज भी प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है।


36. अलाउद्दीन खिलजी की मूल्य नियंत्रण नीति का मुख्य उद्देश्य क्या था?

A. विदेशी व्यापार बढ़ाना
B. व्यापारियों को लाभ पहुँचाना
C. सेना के लिए आवश्यक वस्तुएँ सस्ती उपलब्ध कराना
D. किसानों को करमुक्त करना

उत्तर: C. सेना के लिए आवश्यक वस्तुएँ सस्ती उपलब्ध कराना

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने सैनिकों को कम वेतन पर भी जीवन-निर्वाह योग्य बनाने के लिए आवश्यक वस्तुओं के मूल्य निश्चित किए। उन्होंने अनाज, कपड़ा, घोड़े तथा अन्य वस्तुओं के अलग-अलग बाजार स्थापित किए और प्रत्येक बाजार की निगरानी के लिए अधिकारियों की नियुक्ति की। मूल्य नियंत्रण नीति के कारण महँगाई पर प्रभावी नियंत्रण रखा गया। यह नीति मध्यकालीन भारत की सबसे सफल आर्थिक व्यवस्थाओं में गिनी जाती है।


37. अलाउद्दीन खिलजी के समय ‘सराय-ए-अदल’ का संबंध किससे था?

A. न्यायालय
B. अनाज बाजार
C. कपड़ा बाजार
D. सेना

उत्तर: C. कपड़ा बाजार

व्याख्या: सराय-ए-अदल अलाउद्दीन खिलजी द्वारा स्थापित एक विशेष बाजार था जहाँ मुख्य रूप से कपड़े और अन्य वस्त्रों का व्यापार नियंत्रित मूल्य पर किया जाता था। इस बाजार का संचालन राज्य की निगरानी में होता था ताकि व्यापारी निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत न वसूल सकें। यह व्यवस्था उनकी बाजार नियंत्रण नीति का महत्वपूर्ण अंग थी। सराय-ए-अदल का उल्लेख समकालीन इतिहासकारों ने विस्तार से किया है।


38. अलाउद्दीन खिलजी के समय दिल्ली सल्तनत का सबसे बड़ा शत्रु कौन था?

A. राजपूत
B. मराठा
C. मंगोल
D. पुर्तगाली

उत्तर: C. मंगोल

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में मंगोलों ने कई बार भारत पर आक्रमण किया। उन्होंने सीमाओं की सुरक्षा मजबूत की, विशाल स्थायी सेना का गठन किया और नए किलों का निर्माण कराया। उनकी सैन्य तैयारियों के कारण मंगोल दिल्ली पर स्थायी अधिकार स्थापित नहीं कर सके। मंगोल आक्रमणों का सफल प्रतिरोध उनकी सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जाता है।


39. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में गुजरात का शासक कौन था?

A. भीमदेव द्वितीय
B. कर्णदेव द्वितीय
C. सिद्धराज जयसिंह
D. कुमारपाल

उत्तर: B. कर्णदेव द्वितीय

व्याख्या: 1299 ईस्वी में जब अलाउद्दीन खिलजी ने गुजरात पर आक्रमण कराया, उस समय वहाँ वाघेला वंश के कर्णदेव द्वितीय शासन कर रहे थे। इस विजय के बाद गुजरात दिल्ली सल्तनत के प्रभाव में आ गया। अभियान के दौरान अपार धन-संपत्ति प्राप्त हुई तथा मलिक काफूर को बंदी बनाकर दिल्ली लाया गया, जिसने आगे चलकर खिलजी साम्राज्य के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


40. अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु के बाद सबसे पहले किसे सुल्तान बनाया गया था?

A. कुतुबुद्दीन मुबारक शाह
B. खुसरो खाँ
C. शिहाबुद्दीन उमर
D. गयासुद्दीन तुगलक

उत्तर: C. शिहाबुद्दीन उमर

व्याख्या: 1316 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु के बाद उनके नाबालिग पुत्र शिहाबुद्दीन उमर को सुल्तान घोषित किया गया। उस समय वास्तविक सत्ता मलिक काफूर के हाथों में थी, जिसने संरक्षक के रूप में शासन का संचालन किया। कुछ समय बाद कुतुबुद्दीन मुबारक शाह ने सत्ता अपने हाथ में ले ली। अलाउद्दीन की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार संघर्ष ने खिलजी वंश को कमजोर कर दिया।

खिलजी वंश MCQ Questions 41-60

41. अलाउद्दीन खिलजी ने ‘सिकंदर-ए-सानी’ (दूसरा सिकंदर) की उपाधि किस उद्देश्य से धारण की थी?

A. धार्मिक सुधारों के कारण
B. स्वयं को महान विजेता सिद्ध करने के लिए
C. खलीफा बनने के लिए
D. मंगोलों से संधि करने के लिए

उत्तर: B. स्वयं को महान विजेता सिद्ध करने के लिए

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने अपने साम्राज्य विस्तार और लगातार सैन्य विजयों के कारण ‘सिकंदर-ए-सानी’ अर्थात ‘दूसरा सिकंदर’ की उपाधि धारण की। वे स्वयं को विश्वविजेता के रूप में स्थापित करना चाहते थे। उनके सिक्कों और शिलालेखों में भी इस उपाधि का उल्लेख मिलता है। यह उपाधि उनकी विस्तारवादी नीति और राजनीतिक महत्वाकांक्षा का प्रतीक थी।


42. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में ‘नव मुसलमान’ किसे कहा जाता था?

A. अरब व्यापारियों को
B. मंगोल मूल के इस्लाम स्वीकार करने वाले लोगों को
C. सूफी संतों को
D. तुर्क अमीरों को

उत्तर: B. मंगोल मूल के इस्लाम स्वीकार करने वाले लोगों को

व्याख्या: दिल्ली सल्तनत के दौरान कई मंगोल सैनिकों और परिवारों ने इस्लाम स्वीकार कर भारत में बसना प्रारम्भ किया। इन्हें ‘नव मुसलमान’ कहा जाता था। अलाउद्दीन खिलजी को इनके विद्रोह की आशंका रहती थी, इसलिए उन्होंने इन पर कड़ी निगरानी रखी। यह वर्ग तत्कालीन राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण भाग था।


43. अलाउद्दीन खिलजी ने शराब की बिक्री और मद्यपान पर प्रतिबंध क्यों लगाया था?

A. धार्मिक कारणों से
B. राजकोष बढ़ाने के लिए
C. षड्यंत्र और विद्रोह रोकने के लिए
D. व्यापार बढ़ाने के लिए

उत्तर: C. षड्यंत्र और विद्रोह रोकने के लिए

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी का मानना था कि शराब की महफिलों में अमीर और सरदार शासन के विरुद्ध षड्यंत्र रचते हैं। इसलिए उन्होंने मद्यपान और सार्वजनिक शराब बिक्री पर प्रतिबंध लगाया। इस निर्णय का उद्देश्य प्रशासन पर नियंत्रण बनाए रखना और विद्रोह की संभावनाओं को कम करना था। यह उनकी कठोर आंतरिक सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण भाग था।


44. अलाउद्दीन खिलजी ने अमीरों के बीच वैवाहिक संबंधों पर नियंत्रण क्यों लगाया था?

A. धार्मिक परंपराओं के कारण
B. विद्रोह और राजनीतिक गठबंधन रोकने के लिए
C. कर वसूली बढ़ाने के लिए
D. सेना का विस्तार करने के लिए

उत्तर: B. विद्रोह और राजनीतिक गठबंधन रोकने के लिए

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी को आशंका थी कि शक्तिशाली अमीर आपस में वैवाहिक संबंध स्थापित कर राजनीतिक गठबंधन बना सकते हैं। इसी कारण उन्होंने ऐसे संबंधों पर नियंत्रण लगाया और बिना अनुमति बड़े समारोह आयोजित करने पर भी रोक लगा दी। इससे केंद्रीय सत्ता मजबूत हुई और विद्रोह की संभावनाएँ कम हुईं। यह नीति उनकी सुदृढ़ शासन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा थी।


45. अलाउद्दीन खिलजी के समय गुप्तचर विभाग को सुदृढ़ करने का प्रमुख उद्देश्य क्या था?

A. विदेशी व्यापार बढ़ाना
B. विद्रोह और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण रखना
C. धार्मिक प्रचार करना
D. नई राजधानी बसाना

उत्तर: B. विद्रोह और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण रखना

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने शासन के प्रत्येक स्तर पर गुप्तचरों की नियुक्ति की ताकि अधिकारियों, अमीरों और सैन्य अधिकारियों की गतिविधियों की नियमित जानकारी मिलती रहे। गुप्तचर सीधे सुल्तान को सूचना भेजते थे। इससे विद्रोह, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया। उनकी गुप्तचर व्यवस्था दिल्ली सल्तनत की सबसे संगठित व्यवस्थाओं में मानी जाती है।


46. अलाउद्दीन खिलजी ने किस कर को किसानों से कठोरता से वसूल किया?

A. जजिया
B. खराज
C. जकात
D. उश्र

उत्तर: B. खराज

व्याख्या: खराज भूमि कर था, जिसे मुख्यतः कृषकों से वसूला जाता था। अलाउद्दीन खिलजी ने भूमि माप के आधार पर कर निर्धारण किया और उपज का लगभग आधा भाग कर के रूप में लिया। कर संग्रह में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाती थी। इससे राज्य की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और विशाल सेना का व्यय पूरा किया जा सका।


47. अलाउद्दीन खिलजी के समय दक्षिण भारत में होयसल वंश की राजधानी कौन-सी थी?

A. वारंगल
B. मदुरै
C. द्वारसमुद्र
D. कांची

उत्तर: C. द्वारसमुद्र

व्याख्या: द्वारसमुद्र होयसल वंश की राजधानी थी, जहाँ मलिक काफूर ने अलाउद्दीन खिलजी के आदेश पर सफल अभियान चलाया। उस समय वहाँ वीर बल्लाल तृतीय का शासन था। इस विजय के बाद होयसल शासक ने दिल्ली सल्तनत की अधीनता स्वीकार की और कर देना प्रारम्भ किया। वर्तमान में द्वारसमुद्र को कर्नाटक के हलेबीडु के नाम से जाना जाता है।


48. अलाउद्दीन खिलजी के समय मदुरै क्षेत्र पर किस वंश का शासन था?

A. काकतीय वंश
B. पांड्य वंश
C. चोल वंश
D. होयसल वंश

उत्तर: B. पांड्य वंश

व्याख्या: मदुरै पर पांड्य वंश का शासन था, जहाँ मलिक काफूर ने सफल सैन्य अभियान चलाया। उस समय पांड्य राजकुमारों के बीच उत्तराधिकार संघर्ष चल रहा था, जिसका लाभ दिल्ली सल्तनत की सेना को मिला। इस अभियान से खिलजी शासन को भारी मात्रा में धन, हाथी और बहुमूल्य वस्तुएँ प्राप्त हुईं। पांड्य राज्य दक्षिण भारत के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक माना जाता था।


49. अलाउद्दीन खिलजी ने किस उद्देश्य से अमीरों को उपहार और दान देने की प्रथा पर नियंत्रण लगाया?

A. धार्मिक सुधार के लिए
B. विदेशी व्यापार बढ़ाने के लिए
C. अमीरों की आर्थिक शक्ति कम करने के लिए
D. किसानों को सहायता देने के लिए

उत्तर: C. अमीरों की आर्थिक शक्ति कम करने के लिए

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने अमीरों की आर्थिक और राजनीतिक शक्ति को सीमित करने के लिए बड़े उपहार, दान और भव्य समारोहों पर नियंत्रण लगाया। उनका उद्देश्य यह था कि कोई भी सामंत इतना शक्तिशाली न बन सके कि सुल्तान के विरुद्ध विद्रोह कर सके। इस नीति से केंद्रीय सत्ता को मजबूत बनाने में सहायता मिली। यह उनकी आंतरिक प्रशासनिक नीति का महत्वपूर्ण भाग थी।


50. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में दिल्ली सल्तनत का सबसे बड़ा विस्तार किस दिशा में हुआ?

A. उत्तर-पश्चिम
B. पूर्वोत्तर
C. दक्षिण भारत
D. कश्मीर

उत्तर: C. दक्षिण भारत

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में दिल्ली सल्तनत का प्रभाव पहली बार दक्षिण भारत के प्रमुख राज्यों तक पहुँचा। मलिक काफूर के नेतृत्व में देवगिरि, वारंगल, द्वारसमुद्र और मदुरै जैसे राज्यों ने दिल्ली की अधीनता स्वीकार की या कर देना प्रारम्भ किया। इन विजयों से सल्तनत को अपार धन-संपत्ति, राजनीतिक प्रतिष्ठा और व्यापक क्षेत्रीय प्रभाव प्राप्त हुआ। दक्षिण भारत के अभियानों को खिलजी काल की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता है।

51. अलाउद्दीन खिलजी ने किस उद्देश्य से भूमि का मापन करवाया था?

A. नई राजधानी बसाने के लिए
B. व्यापार बढ़ाने के लिए
C. भूमि कर का सही निर्धारण करने के लिए
D. धार्मिक कर लगाने के लिए

उत्तर: C. भूमि कर का सही निर्धारण करने के लिए

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने कृषि भूमि का मापन करवाकर भूमि कर को अधिक व्यवस्थित बनाया। इससे उपज के आधार पर कर निर्धारित करना संभव हुआ और अधिकारियों द्वारा की जाने वाली अनियमितताओं पर नियंत्रण स्थापित हुआ। इस व्यवस्था से राज्य की आय में वृद्धि हुई तथा कर संग्रह प्रणाली अधिक प्रभावी बनी। भूमि मापन की यह नीति दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक सुधारों में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।


52. अलाउद्दीन खिलजी ने बाजार नियंत्रण व्यवस्था के अंतर्गत अनाज की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए किस व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया?

A. नौसेना का विस्तार
B. सरकारी भंडारगृह
C. विदेशी व्यापार
D. डाक व्यवस्था

उत्तर: B. सरकारी भंडारगृह

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने अकाल अथवा कृत्रिम कमी की स्थिति से बचने के लिए सरकारी भंडारगृहों की व्यवस्था को मजबूत किया। इन भंडारों में अनाज सुरक्षित रखा जाता था ताकि आवश्यकता पड़ने पर बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनी रहे। इससे मूल्य नियंत्रण नीति को सफल बनाने में सहायता मिली। यह व्यवस्था जमाखोरी और कृत्रिम महँगाई को रोकने का प्रभावी माध्यम बनी।


53. अलाउद्दीन खिलजी ने किस राजपूत दुर्ग पर सबसे पहले विजय प्राप्त की थी?

A. चित्तौड़
B. ग्वालियर
C. रणथंभौर
D. जालौर

उत्तर: C. रणथंभौर

व्याख्या: 1301 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने रणथंभौर दुर्ग पर विजय प्राप्त की। उस समय वहाँ चौहान वंश के शासक हम्मीर देव का शासन था। रणथंभौर विजय के बाद राजस्थान में दिल्ली सल्तनत की स्थिति और अधिक सुदृढ़ हो गई। इसके पश्चात चित्तौड़ और जालौर जैसे अन्य प्रमुख दुर्गों पर भी खिलजी सेना ने अधिकार स्थापित किया।


54. अलाउद्दीन खिलजी के समय जालौर का शासक कौन था?

A. हम्मीर देव
B. कर्णदेव द्वितीय
C. कान्हड़देव
D. राणा रतन सिंह

उत्तर: C. कान्हड़देव

व्याख्या: जालौर पर चौहान वंश के शासक कान्हड़देव का शासन था। 1311 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी की सेना ने जालौर पर विजय प्राप्त की। इस विजय के साथ राजस्थान के अधिकांश महत्वपूर्ण दुर्ग दिल्ली सल्तनत के अधीन आ गए। कान्हड़देव का उल्लेख राजस्थानी साहित्य और ऐतिहासिक ग्रंथों में वीर शासक के रूप में मिलता है।


55. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में किस राज्य ने सबसे पहले दक्षिण भारत में दिल्ली सल्तनत की अधीनता स्वीकार की?

A. मदुरै
B. वारंगल
C. देवगिरि
D. द्वारसमुद्र

उत्तर: C. देवगिरि

व्याख्या: देवगिरि दक्षिण भारत का पहला प्रमुख राज्य था जिसने अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के बाद दिल्ली सल्तनत की अधीनता स्वीकार की। यादव शासक रामचंद्र देव ने कर देना स्वीकार किया और बाद में दिल्ली सल्तनत के सहयोगी भी बने। देवगिरि की विजय ने दक्षिण भारत में खिलजी साम्राज्य के विस्तार का मार्ग प्रशस्त किया। यह विजय खिलजी शासन की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य सफलताओं में गिनी जाती है।


56. अलाउद्दीन खिलजी की आर्थिक नीति का मुख्य उद्देश्य क्या था?

A. विदेशी व्यापार को बढ़ावा देना
B. किसानों को करमुक्त करना
C. सेना और प्रशासन को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाना
D. धार्मिक संस्थानों को अनुदान देना

उत्तर: C. सेना और प्रशासन को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाना

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी की आर्थिक नीतियों का प्रमुख उद्देश्य विशाल स्थायी सेना का व्यय वहन करना और प्रशासन को मजबूत बनाए रखना था। इसी कारण उन्होंने भूमि कर में वृद्धि, बाजार नियंत्रण तथा राजस्व संग्रह की नई व्यवस्थाएँ लागू कीं। इन सुधारों से राज्य की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। उनकी आर्थिक नीति को मध्यकालीन भारत की सबसे प्रभावी प्रशासनिक नीतियों में शामिल किया जाता है।


57. अलाउद्दीन खिलजी ने किस प्रकार की सेना को विशेष महत्व दिया था?

A. नौसेना
B. हाथी सेना
C. स्थायी सेना
D. भाड़े की सेना

उत्तर: C. स्थायी सेना

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने विशाल स्थायी सेना का गठन किया ताकि मंगोल आक्रमणों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके। सैनिकों को नियमित वेतन दिया जाता था तथा दाग और चेहरा जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से सेना में अनुशासन बनाए रखा गया। स्थायी सेना के कारण दिल्ली सल्तनत की सीमाओं की सुरक्षा मजबूत हुई। यह व्यवस्था उनकी सैन्य नीति की प्रमुख विशेषता थी।


58. अलाउद्दीन खिलजी ने किस प्रसिद्ध मस्जिद के विस्तार का कार्य कराया था?

A. जामा मस्जिद, दिल्ली
B. कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद
C. अढ़ाई दिन का झोंपड़ा
D. मोती मस्जिद

उत्तर: B. कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने दिल्ली स्थित कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद का विस्तार कराया और उसके निकट अलाई दरवाजा तथा अलाई मीनार का निर्माण प्रारम्भ कराया। कुतुब परिसर में किए गए ये निर्माण कार्य खिलजी काल की स्थापत्य कला के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। अलाई दरवाजा विशेष रूप से अपनी सुंदर नक्काशी और इस्लामी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।


59. अलाउद्दीन खिलजी के समय दिल्ली सल्तनत का सबसे प्रमुख राजस्व स्रोत क्या था?

A. व्यापार कर
B. जजिया
C. भूमि कर
D. चुंगी कर

उत्तर: C. भूमि कर

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में भूमि कर राज्य की आय का सबसे बड़ा स्रोत था। उन्होंने कृषि उपज का लगभग आधा भाग कर के रूप में निर्धारित किया और कर संग्रह की प्रक्रिया को अधिक कठोर बनाया। भूमि मापन तथा अधिकारियों की निगरानी से राजस्व व्यवस्था अधिक प्रभावी हुई। इसी आय के आधार पर विशाल सेना और प्रशासनिक तंत्र का संचालन किया जाता था।


60. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में दिल्ली सल्तनत अपनी सबसे अधिक शक्तिशाली स्थिति में क्यों पहुँची?

A. केवल धार्मिक सुधारों के कारण
B. केवल समुद्री व्यापार के कारण
C. सैन्य विजय, प्रशासनिक सुधार और आर्थिक नीतियों के कारण
D. विदेशी सहायता के कारण

उत्तर: C. सैन्य विजय, प्रशासनिक सुधार और आर्थिक नीतियों के कारण

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने उत्तर और दक्षिण भारत में सफल सैन्य अभियान चलाए, मंगोल आक्रमणों का प्रभावी प्रतिरोध किया तथा प्रशासनिक और आर्थिक सुधार लागू किए। बाजार नियंत्रण, दाग प्रथा, चेहरा प्रथा और राजस्व व्यवस्था ने केंद्रीय शासन को मजबूत बनाया। इन नीतियों के कारण दिल्ली सल्तनत का क्षेत्रफल, आर्थिक शक्ति और राजनीतिक प्रभाव अपने चरम पर पहुँचा। इसी कारण अलाउद्दीन खिलजी का शासन दिल्ली सल्तनत के सबसे शक्तिशाली कालों में माना जाता है।

खिलजी वंश MCQ Questions 61-80

61. अलाउद्दीन खिलजी ने अपने शासनकाल में किस वर्ग की शक्ति को सबसे अधिक सीमित करने का प्रयास किया था?

A. किसान
B. व्यापारी
C. अमीर और सामंत
D. सूफी संत

उत्तर: C. अमीर और सामंत

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी का मानना था कि शक्तिशाली अमीर और सामंत विद्रोह का सबसे बड़ा कारण बन सकते हैं। इसलिए उन्होंने उनकी आर्थिक शक्ति सीमित की, उपहारों एवं वैवाहिक संबंधों पर नियंत्रण लगाया तथा गुप्तचर व्यवस्था को मजबूत किया। इन उपायों से केंद्रीय सत्ता अधिक प्रभावी बनी और सामंतों के विद्रोह की संभावना कम हुई। उनकी यह नीति दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।


62. अलाउद्दीन खिलजी ने सेना के घोड़ों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कौन-सी व्यवस्था लागू की थी?

A. चेहरा प्रथा
B. दाग प्रथा
C. इक्ता प्रथा
D. खालसा प्रथा

उत्तर: B. दाग प्रथा

व्याख्या: दाग प्रथा के अंतर्गत सेना के प्रत्येक घोड़े पर सरकारी निशान लगाया जाता था ताकि घटिया या नकली घोड़ों का उपयोग रोका जा सके। इससे सैन्य निरीक्षण अधिक प्रभावी हुआ और अधिकारियों द्वारा होने वाले भ्रष्टाचार पर नियंत्रण स्थापित किया गया। यह व्यवस्था विशाल स्थायी सेना की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए लागू की गई थी। दाग प्रथा अलाउद्दीन खिलजी के प्रमुख सैन्य सुधारों में सम्मिलित थी।


63. अलाउद्दीन खिलजी ने ‘चेहरा प्रथा’ क्यों लागू की थी?

A. सैनिकों का वेतन बढ़ाने के लिए
B. सैनिकों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए
C. नए सैनिकों की भर्ती रोकने के लिए
D. व्यापारियों की पहचान के लिए

उत्तर: B. सैनिकों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए

व्याख्या: चेहरा प्रथा के अंतर्गत प्रत्येक सैनिक का नाम, हुलिया तथा व्यक्तिगत विवरण सरकारी अभिलेखों में दर्ज किया जाता था। इसका उद्देश्य फर्जी सैनिकों की नियुक्ति और वेतन संबंधी अनियमितताओं को समाप्त करना था। यह व्यवस्था दाग प्रथा के साथ मिलकर सेना में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने में सहायक बनी। दिल्ली सल्तनत की सैन्य व्यवस्था में यह एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार था।


64. अलाउद्दीन खिलजी के समय ‘दीवान-ए-रियासत’ का प्रमुख कार्य क्या था?

A. धार्मिक मामलों का संचालन
B. न्याय व्यवस्था का संचालन
C. बाजार नियंत्रण एवं मूल्य निर्धारण
D. विदेश नीति का संचालन

उत्तर: C. बाजार नियंत्रण एवं मूल्य निर्धारण

व्याख्या: दीवान-ए-रियासत अलाउद्दीन खिलजी द्वारा स्थापित एक महत्वपूर्ण विभाग था, जो बाजार नियंत्रण नीति को लागू करने के लिए उत्तरदायी था। यह विभाग वस्तुओं के मूल्य निर्धारित करता था तथा व्यापारियों पर निगरानी रखता था। जमाखोरी, कालाबाज़ारी और मूल्य वृद्धि पर कठोर कार्रवाई की जाती थी। इस विभाग ने खिलजी की आर्थिक नीति को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


65. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में गुजरात अभियान किस वर्ष चलाया गया था?

A. 1296 ई.
B. 1299 ई.
C. 1303 ई.
D. 1308 ई.

उत्तर: B. 1299 ई.

व्याख्या: 1299 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने अपने सेनापति उलूग खाँ और नुसरत खाँ को गुजरात विजय के लिए भेजा। इस अभियान में गुजरात के वाघेला शासक कर्णदेव द्वितीय पराजित हुए। इसी अभियान के दौरान मलिक काफूर को बंदी बनाकर दिल्ली लाया गया, जो आगे चलकर अलाउद्दीन का सबसे सफल सेनापति बना। गुजरात विजय से दिल्ली सल्तनत को अपार धन-संपत्ति प्राप्त हुई।


66. अलाउद्दीन खिलजी के समय किली का युद्ध किसके विरुद्ध लड़ा गया था?

A. राजपूतों के विरुद्ध
B. मंगोलों के विरुद्ध
C. बहमनी सल्तनत के विरुद्ध
D. विजयनगर साम्राज्य के विरुद्ध

उत्तर: B. मंगोलों के विरुद्ध

व्याख्या: 1299 ईस्वी में किली का युद्ध अलाउद्दीन खिलजी और मंगोल सेनापति कुतलुग ख़्वाजा के बीच लड़ा गया था। इस युद्ध में दिल्ली सल्तनत ने मंगोलों की प्रगति को रोकने में सफलता प्राप्त की। यद्यपि युद्ध निर्णायक नहीं था, फिर भी मंगोल दिल्ली पर अधिकार स्थापित नहीं कर सके। इस संघर्ष ने अलाउद्दीन को सेना और सीमा सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने के लिए प्रेरित किया।


67. अलाउद्दीन खिलजी द्वारा निर्मित अलाई दरवाजा कहाँ स्थित है?

A. आगरा किला
B. लाल किला
C. कुतुब परिसर, दिल्ली
D. पुराना किला

उत्तर: C. कुतुब परिसर, दिल्ली

व्याख्या: अलाई दरवाजा का निर्माण 1311 ईस्वी में कुतुब परिसर में कराया गया था। यह लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से निर्मित इस्लामी स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। इसकी सुंदर नक्काशी, मेहराबें और अनुपात इसे दिल्ली सल्तनत की श्रेष्ठ स्थापत्य उपलब्धियों में स्थान दिलाते हैं। यह स्मारक आज भी संरक्षित ऐतिहासिक धरोहर के रूप में विद्यमान है।


68. अलाउद्दीन खिलजी द्वारा प्रारम्भ की गई अलाई मीनार किस कारण पूर्ण नहीं हो सकी?

A. धन की कमी के कारण
B. मंगोल आक्रमणों के कारण
C. अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु के कारण
D. भूकंप के कारण

उत्तर: C. अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु के कारण

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने कुतुब मीनार से लगभग दोगुनी ऊँचाई की अलाई मीनार बनवाने की योजना बनाई थी। उनके जीवनकाल में केवल इसका आधार भाग ही बन सका। 1316 ईस्वी में उनकी मृत्यु के बाद निर्माण कार्य स्थायी रूप से बंद हो गया। आज इसका अधूरा ढाँचा कुतुब परिसर में खिलजी काल की महत्वाकांक्षी स्थापत्य योजना का प्रमाण है।


69. अलाउद्दीन खिलजी ने दक्षिण भारत में अपना पहला बड़ा अभियान किस राज्य के विरुद्ध चलाया था?

A. वारंगल
B. मदुरै
C. देवगिरि
D. द्वारसमुद्र

उत्तर: C. देवगिरि

व्याख्या: 1294 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने देवगिरि पर पहला बड़ा अभियान चलाया, जब वे अभी दिल्ली के सुल्तान नहीं बने थे। इस अभियान में यादव शासक रामचंद्र देव पर विजय प्राप्त कर उन्होंने विशाल धन-संपत्ति अर्जित की। इसी आर्थिक शक्ति के आधार पर उन्होंने बाद में दिल्ली की सत्ता प्राप्त की। देवगिरि की विजय ने दक्षिण भारत में आगे के अभियानों का मार्ग प्रशस्त किया।


70. अलाउद्दीन खिलजी की प्रशासनिक सफलता का सबसे प्रमुख आधार क्या था?

A. धार्मिक सुधार
B. समुद्री व्यापार
C. सुदृढ़ सैन्य, आर्थिक और गुप्तचर व्यवस्था
D. विदेशी सहायता

उत्तर: C. सुदृढ़ सैन्य, आर्थिक और गुप्तचर व्यवस्था

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने विशाल स्थायी सेना का गठन किया, बाजार नियंत्रण नीति लागू की, राजस्व व्यवस्था को मजबूत बनाया तथा गुप्तचर विभाग का व्यापक विस्तार किया। इन सभी उपायों ने केंद्रीय शासन को अत्यंत शक्तिशाली बनाया और साम्राज्य के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंगोल आक्रमणों का सफल प्रतिरोध और दक्षिण भारत तक प्रभाव स्थापित करना इन्हीं नीतियों का परिणाम था। इसी कारण उनका शासन दिल्ली सल्तनत के सबसे संगठित और प्रभावशाली कालों में गिना जाता है।

71. अलाउद्दीन खिलजी के समय ‘दीवान-ए-अर्ज’ विभाग का संबंध किससे था?

A. न्याय व्यवस्था
B. राजस्व संग्रह
C. सेना का संगठन एवं निरीक्षण
D. धार्मिक मामलों

उत्तर: C. सेना का संगठन एवं निरीक्षण

व्याख्या: दीवान-ए-अर्ज दिल्ली सल्तनत का सैन्य विभाग था, जो सेना की भर्ती, निरीक्षण और संगठन का कार्य करता था। अलाउद्दीन खिलजी ने इस विभाग को अधिक प्रभावी बनाया तथा दाग और चेहरा प्रथा जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से सेना में अनुशासन स्थापित किया। इस विभाग की सुदृढ़ व्यवस्था के कारण दिल्ली सल्तनत मंगोल आक्रमणों का सफलतापूर्वक सामना कर सकी।


72. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में किस शासक ने वारंगल पर शासन किया?

A. रामचंद्र देव
B. प्रतापरुद्र देव
C. वीर बल्लाल तृतीय
D. सुन्दर पांड्य

उत्तर: B. प्रतापरुद्र देव

व्याख्या: वारंगल पर काकतीय वंश के शासक प्रतापरुद्र देव का शासन था। मलिक काफूर ने अलाउद्दीन खिलजी के आदेश पर वारंगल पर सफल अभियान चलाया और प्रतापरुद्र देव को कर देने के लिए बाध्य किया। इस विजय से दिल्ली सल्तनत को बहुमूल्य रत्न, स्वर्ण तथा अन्य संपत्तियाँ प्राप्त हुईं। वारंगल उस समय दक्षिण भारत का एक समृद्ध और शक्तिशाली राज्य था।


73. अलाउद्दीन खिलजी ने किस दुर्ग को जीतकर राजस्थान में अपनी शक्ति को और मजबूत किया?

A. कालिंजर
B. जालौर
C. चुनार
D. रोहतासगढ़

उत्तर: B. जालौर

व्याख्या: 1311 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने जालौर दुर्ग पर अधिकार किया। उस समय वहाँ चौहान वंश के शासक कान्हड़देव का शासन था। जालौर की विजय के बाद राजस्थान के अधिकांश प्रमुख दुर्ग दिल्ली सल्तनत के नियंत्रण में आ गए। इस सफलता ने पश्चिमी भारत में खिलजी शासन की स्थिति को और अधिक सुदृढ़ किया।


74. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में दिल्ली सल्तनत की राजधानी कौन-सी थी?

A. आगरा
B. लाहौर
C. दिल्ली
D. दौलताबाद

उत्तर: C. दिल्ली

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने दिल्ली को ही अपनी राजधानी बनाए रखा तथा उसके विस्तार के लिए सीरी नगर की स्थापना कराई। प्रशासन, सेना और व्यापार का प्रमुख केंद्र दिल्ली ही था। राजधानी परिवर्तन का निर्णय बाद में मुहम्मद बिन तुगलक ने लिया था। खिलजी काल में दिल्ली सल्तनत राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र थी।


75. अलाउद्दीन खिलजी के समय ‘शहना-ए-मंडी’ किस विभाग का अधिकारी था?

A. न्याय विभाग
B. सेना विभाग
C. बाजार नियंत्रण विभाग
D. राजस्व विभाग

उत्तर: C. बाजार नियंत्रण विभाग

व्याख्या: शहना-ए-मंडी बाजार नियंत्रण व्यवस्था का प्रमुख अधिकारी होता था। उसका कार्य वस्तुओं के मूल्य निर्धारित नियमों के अनुसार लागू कराना तथा व्यापारियों की गतिविधियों पर निगरानी रखना था। जमाखोरी, कालाबाज़ारी और मूल्य वृद्धि करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाती थी। यह पद अलाउद्दीन खिलजी की आर्थिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा था।


76. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में ‘सराय-ए-अदल’ मुख्यतः किस वस्तु के व्यापार से संबंधित था?

A. घोड़े
B. मसाले
C. कपड़ा
D. हथियार

उत्तर: C. कपड़ा

व्याख्या: सराय-ए-अदल विशेष रूप से कपड़ों और वस्त्रों के व्यापार के लिए स्थापित नियंत्रित बाजार था। यहाँ वस्त्र निर्धारित सरकारी मूल्य पर बेचे जाते थे और व्यापारियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाती थी। इस व्यवस्था का उद्देश्य आम जनता और सैनिकों को उचित मूल्य पर आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराना था। यह बाजार नियंत्रण नीति की प्रमुख इकाइयों में से एक था।


77. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में काकतीय वंश की राजधानी कौन-सी थी?

A. देवगिरि
B. द्वारसमुद्र
C. वारंगल
D. मदुरै

उत्तर: C. वारंगल

व्याख्या: वारंगल काकतीय वंश की राजधानी थी और दक्षिण भारत का एक समृद्ध नगर माना जाता था। मलिक काफूर ने इस नगर पर सफल अभियान चलाकर दिल्ली सल्तनत का प्रभाव स्थापित किया। वारंगल विजय के बाद काकतीय शासक ने कर देना स्वीकार किया। यह विजय खिलजी साम्राज्य की दक्षिण नीति की सबसे महत्वपूर्ण सफलताओं में शामिल थी।


78. अलाउद्दीन खिलजी ने किस कारण अमीरों की संपत्ति पर नियंत्रण रखा?

A. धार्मिक सुधार लागू करने के लिए
B. विदेशी व्यापार बढ़ाने के लिए
C. विद्रोह की संभावना कम करने के लिए
D. किसानों को सहायता देने के लिए

उत्तर: C. विद्रोह की संभावना कम करने के लिए

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी का मानना था कि अत्यधिक धनवान अमीर सुल्तान के विरुद्ध विद्रोह कर सकते हैं। इसलिए उन्होंने उनकी संपत्ति, उपहारों और सामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण लगाया। इन नीतियों से अमीरों की राजनीतिक शक्ति सीमित हुई और केंद्रीय शासन मजबूत बना। यह नीति उनकी आंतरिक प्रशासनिक व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं में से एक थी।


79. अलाउद्दीन खिलजी ने दक्षिण भारत के अभियानों के दौरान किस राज्य से सबसे अधिक धन-संपत्ति प्राप्त की?

A. जालौर
B. वारंगल
C. रणथंभौर
D. ग्वालियर

उत्तर: B. वारंगल

व्याख्या: वारंगल विजय के बाद दिल्ली सल्तनत को स्वर्ण, रत्न, हाथी और अन्य बहुमूल्य संपत्तियाँ प्राप्त हुईं। इतिहासकारों के अनुसार कोहिनूर हीरे का उल्लेख भी इसी अभियान से जोड़ा जाता है। इस विजय ने दिल्ली सल्तनत की आर्थिक स्थिति को अत्यंत मजबूत बनाया। वारंगल अभियान मलिक काफूर की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य सफलताओं में गिना जाता है।


80. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता क्या मानी जाती है?

A. समुद्री साम्राज्य की स्थापना
B. धार्मिक सहिष्णुता का विस्तार
C. प्रशासनिक, आर्थिक और सैन्य सुधार
D. यूरोपीय व्यापारियों को संरक्षण

उत्तर: C. प्रशासनिक, आर्थिक और सैन्य सुधार

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने बाजार नियंत्रण नीति, भूमि कर सुधार, दाग प्रथा, चेहरा प्रथा और गुप्तचर व्यवस्था जैसी अनेक प्रशासनिक व्यवस्थाएँ लागू कीं। उन्होंने विशाल स्थायी सेना का गठन कर मंगोल आक्रमणों का सफल प्रतिरोध किया तथा दक्षिण भारत तक दिल्ली सल्तनत का प्रभाव स्थापित किया। इन्हीं कारणों से उनका शासन मध्यकालीन भारत के सबसे संगठित और प्रभावशाली प्रशासनिक कालों में गिना जाता है।

खिलजी वंश MCQ Questions 81-100

81. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में ‘मुहतसिब’ का प्रमुख कार्य क्या था?

A. सेना का नेतृत्व करना
B. धार्मिक एवं सार्वजनिक आचरण पर निगरानी रखना
C. भूमि कर वसूलना
D. विदेशी व्यापार का संचालन करना

उत्तर: B. धार्मिक एवं सार्वजनिक आचरण पर निगरानी रखना

व्याख्या: मुहतसिब एक ऐसा अधिकारी था जो सार्वजनिक नैतिकता, धार्मिक नियमों के पालन तथा बाजारों में अनुशासन बनाए रखने का कार्य करता था। यद्यपि बाजार नियंत्रण का मुख्य दायित्व शहना-ए-मंडी और दीवान-ए-रियासत के पास था, फिर भी मुहतसिब सामाजिक अनुशासन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। दिल्ली सल्तनत के प्रशासन में यह पद लंबे समय तक प्रचलित रहा।


82. अलाउद्दीन खिलजी ने किस उद्देश्य से अमीरों की जागीरों पर नियंत्रण स्थापित किया था?

A. धार्मिक संस्थाओं को दान देने के लिए
B. विद्रोह की संभावना समाप्त करने के लिए
C. विदेशी व्यापार बढ़ाने के लिए
D. नई राजधानी बसाने के लिए

उत्तर: B. विद्रोह की संभावना समाप्त करने के लिए

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने अमीरों की आर्थिक शक्ति को सीमित करने के लिए उनकी जागीरों और अतिरिक्त संपत्ति पर नियंत्रण स्थापित किया। उनका उद्देश्य यह था कि कोई सामंत अत्यधिक शक्तिशाली होकर सुल्तान के विरुद्ध विद्रोह न कर सके। इस नीति से केंद्रीय सत्ता को मजबूती मिली और प्रशासन पर सुल्तान का नियंत्रण बढ़ा। यह कदम उनकी आंतरिक सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण भाग था।


83. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में देवगिरि किस वंश की राजधानी थी?

A. काकतीय वंश
B. यादव वंश
C. होयसल वंश
D. पांड्य वंश

उत्तर: B. यादव वंश

व्याख्या: देवगिरि यादव वंश की राजधानी थी, जहाँ राजा रामचंद्र देव शासन करते थे। 1294 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने इस राज्य पर सफल आक्रमण किया और बाद में इसे दिल्ली सल्तनत के प्रभाव में ले आया। देवगिरि की विजय ने दक्षिण भारत में खिलजी साम्राज्य के विस्तार का मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में देवगिरि का किला महाराष्ट्र के दौलताबाद क्षेत्र में स्थित है।


84. अलाउद्दीन खिलजी ने बाजार नियंत्रण नीति के अंतर्गत घोड़ों के व्यापार के लिए अलग बाजार क्यों स्थापित किया था?

A. विदेशी व्यापार बढ़ाने के लिए
B. सेना को उच्च गुणवत्ता के घोड़े उपलब्ध कराने के लिए
C. किसानों की सहायता करने के लिए
D. धार्मिक कर वसूलने के लिए

उत्तर: B. सेना को उच्च गुणवत्ता के घोड़े उपलब्ध कराने के लिए

व्याख्या: विशाल स्थायी सेना के लिए अच्छे घोड़ों की आवश्यकता थी, इसलिए अलाउद्दीन खिलजी ने घोड़ों के व्यापार पर विशेष नियंत्रण स्थापित किया। घोड़ों की गुणवत्ता, मूल्य और बिक्री पर सरकारी निगरानी रखी जाती थी। इससे सेना को उचित मूल्य पर श्रेष्ठ घोड़े उपलब्ध होते थे और भ्रष्टाचार पर भी नियंत्रण बना रहता था। यह व्यवस्था उनकी सैन्य और आर्थिक नीति दोनों का महत्वपूर्ण भाग थी।


85. अलाउद्दीन खिलजी ने किस प्रसिद्ध दुर्ग पर विजय प्राप्त करने के बाद वहाँ के शासक हम्मीर देव को पराजित किया था?

A. जालौर
B. चित्तौड़
C. रणथंभौर
D. ग्वालियर

उत्तर: C. रणथंभौर

व्याख्या: 1301 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने रणथंभौर दुर्ग पर आक्रमण कर चौहान शासक हम्मीर देव को पराजित किया। यह विजय राजस्थान में दिल्ली सल्तनत के विस्तार की महत्वपूर्ण घटना थी। रणथंभौर दुर्ग अपनी प्राकृतिक सुरक्षा और मजबूत किलेबंदी के कारण प्रसिद्ध था। इस विजय के बाद राजस्थान में खिलजी शासन की स्थिति और मजबूत हुई।


86. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में किस अधिकारी को बाजारों में मूल्य नियंत्रण लागू कराने की जिम्मेदारी दी गई थी?

A. दीवान-ए-अर्ज
B. शहना-ए-मंडी
C. वकील-ए-दर
D. दीवान-ए-इंशा

उत्तर: B. शहना-ए-मंडी

व्याख्या: शहना-ए-मंडी बाजार नियंत्रण व्यवस्था का प्रमुख अधिकारी था। वह निर्धारित मूल्य सूची का पालन सुनिश्चित करता था तथा व्यापारियों द्वारा कालाबाज़ारी या जमाखोरी किए जाने पर कठोर दंड देता था। उसके अधीन कई निरीक्षक कार्य करते थे जो बाजारों की नियमित निगरानी करते थे। यह पद अलाउद्दीन खिलजी की मूल्य नियंत्रण नीति को सफल बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण था।


87. अलाउद्दीन खिलजी के समय ‘दीवान-ए-इंशा’ विभाग का मुख्य कार्य क्या था?

A. सेना का संचालन
B. शाही पत्राचार और अभिलेख तैयार करना
C. बाजार नियंत्रण करना
D. न्यायिक निर्णय देना

उत्तर: B. शाही पत्राचार और अभिलेख तैयार करना

व्याख्या: दीवान-ए-इंशा शाही पत्राचार और सरकारी दस्तावेज़ों का प्रमुख विभाग था। इस विभाग के अधिकारी विभिन्न प्रांतों और अधिकारियों को भेजे जाने वाले शाही आदेशों का मसौदा तैयार करते थे। प्रशासनिक कार्यों में लिखित अभिलेखों का विशेष महत्व था, इसलिए यह विभाग शासन व्यवस्था का आवश्यक अंग माना जाता था। दिल्ली सल्तनत के अधिकांश शासकों ने इस विभाग को बनाए रखा।


88. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में किस राज्य के शासक वीर बल्लाल तृतीय थे?

A. देवगिरि
B. वारंगल
C. द्वारसमुद्र
D. मदुरै

उत्तर: C. द्वारसमुद्र

व्याख्या: द्वारसमुद्र होयसल वंश की राजधानी थी और वहाँ वीर बल्लाल तृतीय शासन करते थे। मलिक काफूर ने अलाउद्दीन खिलजी के आदेश पर इस राज्य पर अभियान चलाया। विजय के बाद होयसल शासक ने दिल्ली सल्तनत की अधीनता स्वीकार कर कर देना प्रारम्भ किया। वर्तमान में द्वारसमुद्र को कर्नाटक के हलेबीडु के नाम से जाना जाता है।


89. अलाउद्दीन खिलजी ने किस नीति के माध्यम से व्यापारियों द्वारा कृत्रिम महँगाई उत्पन्न करने पर रोक लगाई थी?

A. इक्ता नीति
B. बाजार नियंत्रण नीति
C. धार्मिक नीति
D. जागीर नीति

उत्तर: B. बाजार नियंत्रण नीति

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने वस्तुओं के निश्चित मूल्य निर्धारित किए और जमाखोरी तथा कालाबाज़ारी पर कठोर दंड का प्रावधान किया। व्यापारियों को निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर वस्तुएँ बेचने की अनुमति नहीं थी। सरकारी अधिकारियों द्वारा बाजारों की नियमित निगरानी की जाती थी। इस नीति से महँगाई पर प्रभावी नियंत्रण रखा गया और सैनिकों सहित आम जनता को आवश्यक वस्तुएँ उचित मूल्य पर उपलब्ध हुईं।


90. अलाउद्दीन खिलजी की दक्षिण नीति का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम क्या था?

A. मुगल साम्राज्य की स्थापना
B. दिल्ली सल्तनत का दक्षिण भारत तक विस्तार
C. राजधानी का परिवर्तन
D. समुद्री साम्राज्य का निर्माण

उत्तर: B. दिल्ली सल्तनत का दक्षिण भारत तक विस्तार

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी की दक्षिण नीति के परिणामस्वरूप देवगिरि, वारंगल, द्वारसमुद्र और मदुरै जैसे राज्यों ने दिल्ली सल्तनत की अधीनता स्वीकार की या कर देना प्रारम्भ किया। इससे दिल्ली सल्तनत की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और उसका राजनीतिक प्रभाव उत्तर भारत से आगे दक्षिण तक पहुँच गया। इन अभियानों का नेतृत्व मुख्य रूप से मलिक काफूर ने किया था और इन्हें खिलजी शासन की सबसे बड़ी सैन्य सफलताओं में गिना जाता है।

91. अलाउद्दीन खिलजी ने किस उद्देश्य से गुप्तचर व्यवस्था को अत्यधिक मजबूत बनाया था?

A. विदेशी व्यापार बढ़ाने के लिए
B. विद्रोह, षड्यंत्र और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण रखने के लिए
C. धार्मिक प्रचार करने के लिए
D. किसानों को सहायता देने के लिए

उत्तर: B. विद्रोह, षड्यंत्र और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण रखने के लिए

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने शासन के विभिन्न स्तरों पर गुप्तचरों की नियुक्ति की ताकि अमीरों, प्रांतीय अधिकारियों और सैन्य अधिकारियों की गतिविधियों की नियमित जानकारी प्राप्त हो सके। गुप्तचर सीधे सुल्तान को रिपोर्ट भेजते थे, जिससे विद्रोह और षड्यंत्रों का समय रहते पता चल जाता था। इस व्यवस्था ने केंद्रीय शासन को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाया। गुप्तचर तंत्र उनकी प्रशासनिक सफलता का महत्वपूर्ण आधार था।


92. अलाउद्दीन खिलजी के समय ‘बरीद-ए-मुमालिक’ का संबंध किससे था?

A. डाक एवं गुप्त सूचना व्यवस्था
B. न्याय विभाग
C. बाजार नियंत्रण
D. राजस्व विभाग

उत्तर: A. डाक एवं गुप्त सूचना व्यवस्था

व्याख्या: बरीद-ए-मुमालिक दिल्ली सल्तनत का प्रमुख डाक एवं गुप्त सूचना अधिकारी होता था। उसका कार्य विभिन्न प्रांतों से समाचार एकत्र कर सुल्तान तक पहुँचाना था। अलाउद्दीन खिलजी ने इस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया ताकि प्रशासन पर निरंतर नियंत्रण रखा जा सके। गुप्त सूचना प्रणाली ने विद्रोहों और प्रशासनिक अनियमितताओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


93. अलाउद्दीन खिलजी ने किस नीति के माध्यम से व्यापारियों द्वारा जमाखोरी पर रोक लगाई?

A. इक्ता नीति
B. बाजार नियंत्रण नीति
C. धार्मिक नीति
D. जागीर नीति

उत्तर: B. बाजार नियंत्रण नीति

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने आवश्यक वस्तुओं के निश्चित मूल्य निर्धारित किए तथा जमाखोरी और कालाबाज़ारी करने वाले व्यापारियों के लिए कठोर दंड का प्रावधान किया। सरकारी अधिकारी नियमित रूप से बाजारों का निरीक्षण करते थे। इससे बाजार में वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता बनी रही और मूल्य वृद्धि पर प्रभावी नियंत्रण रखा गया। यह नीति उनकी आर्थिक व्यवस्था की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक थी।


94. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में ‘दीवान-ए-वजारत’ का प्रमुख कार्य क्या था?

A. सेना का संचालन
B. वित्त एवं राजस्व व्यवस्था का संचालन
C. न्याय व्यवस्था का संचालन
D. धार्मिक मामलों का संचालन

उत्तर: B. वित्त एवं राजस्व व्यवस्था का संचालन

व्याख्या: दीवान-ए-वजारत दिल्ली सल्तनत का प्रमुख वित्त विभाग था, जिसके प्रमुख को वजीर कहा जाता था। यह विभाग राज्य की आय, व्यय, कर संग्रह और वित्तीय प्रशासन की देखरेख करता था। अलाउद्दीन खिलजी के आर्थिक सुधारों को लागू करने में इस विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक ढाँचे में इसे सबसे महत्वपूर्ण विभागों में गिना जाता है।


95. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में किस दुर्ग की विजय ने राजस्थान में दिल्ली सल्तनत का प्रभाव सबसे अधिक बढ़ाया?

A. ग्वालियर
B. कालिंजर
C. चित्तौड़
D. चुनार

उत्तर: C. चित्तौड़

व्याख्या: 1303 ईस्वी में चित्तौड़ विजय के बाद राजस्थान में दिल्ली सल्तनत का प्रभाव काफी बढ़ गया। उस समय मेवाड़ के शासक राणा रतन सिंह थे। चित्तौड़ दुर्ग अपनी सामरिक स्थिति और मजबूत किलेबंदी के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता था। इस विजय के बाद राजस्थान के अधिकांश प्रमुख क्षेत्रों पर खिलजी शासन का प्रभाव स्थापित हो गया।


96. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में सेना के सैनिकों को वेतन किस रूप में दिया जाता था?

A. केवल जागीर के रूप में
B. केवल अनाज के रूप में
C. नकद वेतन के रूप में
D. भूमि के रूप में

उत्तर: C. नकद वेतन के रूप में

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी विशाल स्थायी सेना को नकद वेतन देने की व्यवस्था अपनाई। सैनिकों का वेतन नियमित रूप से दिया जाता था तथा बाजार नियंत्रण नीति के कारण उन्हें आवश्यक वस्तुएँ उचित मूल्य पर उपलब्ध हो जाती थीं। इस व्यवस्था से सेना में अनुशासन और निष्ठा बनाए रखने में सहायता मिली। नकद वेतन प्रणाली उनकी सैन्य नीति की महत्वपूर्ण विशेषता थी।


97. अलाउद्दीन खिलजी ने अपने शासनकाल में सबसे अधिक किस क्षेत्र पर ध्यान दिया?

A. समुद्री व्यापार
B. सैन्य और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण
C. धार्मिक प्रचार
D. विदेशी उपनिवेश

उत्तर: B. सैन्य और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने सेना को मजबूत बनाने, राजस्व व्यवस्था सुधारने, बाजार नियंत्रण लागू करने और गुप्तचर विभाग को प्रभावी बनाने पर विशेष ध्यान दिया। इन सुधारों के कारण दिल्ली सल्तनत राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत शक्तिशाली बनी। मंगोल आक्रमणों का सफल प्रतिरोध और दक्षिण भारत तक साम्राज्य का विस्तार इन्हीं नीतियों का परिणाम था। उनका शासन प्रशासनिक दक्षता के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।


98. अलाउद्दीन खिलजी के बाद खिलजी वंश का सबसे अंतिम प्रभावी शासक कौन था?

A. शिहाबुद्दीन उमर
B. कुतुबुद्दीन मुबारक शाह
C. खुसरो खाँ
D. जलालुद्दीन फिरोज खिलजी

उत्तर: B. कुतुबुद्दीन मुबारक शाह

व्याख्या: कुतुबुद्दीन मुबारक शाह अलाउद्दीन खिलजी का पुत्र था और खिलजी वंश का अंतिम प्रभावी शासक माना जाता है। उसके शासनकाल में कई कठोर प्रशासनिक नियम समाप्त कर दिए गए, जिससे केंद्रीय नियंत्रण कमजोर पड़ गया। बाद में खुसरो खाँ ने उसकी हत्या कर सत्ता पर अधिकार कर लिया। इसके कुछ समय बाद गयासुद्दीन तुगलक ने तुगलक वंश की स्थापना की।


99. 1320 ईस्वी में किस शासक ने खिलजी वंश का अंत कर तुगलक वंश की स्थापना की?

A. मुहम्मद बिन तुगलक
B. गयासुद्दीन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. खिज्र खाँ

उत्तर: B. गयासुद्दीन तुगलक

व्याख्या: 1320 ईस्वी में गयासुद्दीन तुगलक ने खुसरो खाँ को पराजित कर दिल्ली की सत्ता प्राप्त की और तुगलक वंश की स्थापना की। इसके साथ ही खिलजी वंश का शासन समाप्त हो गया। तुगलक वंश दिल्ली सल्तनत का तीसरा प्रमुख राजवंश माना जाता है। इस सत्ता परिवर्तन ने मध्यकालीन भारतीय इतिहास में एक नए प्रशासनिक युग की शुरुआत की।


100. खिलजी वंश का सबसे महत्वपूर्ण और स्थायी योगदान किस क्षेत्र में माना जाता है?

A. समुद्री साम्राज्य की स्थापना
B. प्रशासनिक, आर्थिक और सैन्य सुधार
C. यूरोपीय व्यापार का विकास
D. मुगल साम्राज्य की स्थापना

उत्तर: B. प्रशासनिक, आर्थिक और सैन्य सुधार

व्याख्या: खिलजी वंश, विशेषकर अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में प्रशासन, अर्थव्यवस्था और सैन्य संगठन में अनेक महत्वपूर्ण सुधार किए गए। बाजार नियंत्रण नीति, भूमि कर व्यवस्था, दाग प्रथा, चेहरा प्रथा तथा गुप्तचर तंत्र जैसी व्यवस्थाओं ने दिल्ली सल्तनत को अत्यंत सुदृढ़ बनाया। दक्षिण भारत तक साम्राज्य का विस्तार और मंगोल आक्रमणों का सफल प्रतिरोध भी इसी काल की प्रमुख उपलब्धियाँ थीं। इन कारणों से खिलजी काल मध्यकालीन भारत के सबसे प्रभावशाली प्रशासनिक कालों में गिना जाता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न 

खिलजी वंश का संस्थापक कौन था?

खिलजी वंश का संस्थापक जलालुद्दीन फिरोज खिलजी था, जिसने 1290 ईस्वी में दिल्ली सल्तनत में इस वंश की स्थापना की।

खिलजी वंश का सबसे शक्तिशाली शासक कौन था?

अलाउद्दीन खिलजी खिलजी वंश का सबसे शक्तिशाली और प्रसिद्ध शासक था। उसने प्रशासनिक, आर्थिक और सैन्य क्षेत्रों में अनेक महत्वपूर्ण सुधार किए।

खिलजी वंश का शासनकाल कब से कब तक रहा?

खिलजी वंश ने 1290 ईस्वी से 1320 ईस्वी तक दिल्ली सल्तनत पर शासन किया।

अलाउद्दीन खिलजी की बाजार नियंत्रण नीति का मुख्य उद्देश्य क्या था?

बाजार नियंत्रण नीति का मुख्य उद्देश्य आवश्यक वस्तुओं के मूल्य नियंत्रित रखना तथा विशाल स्थायी सेना के लिए कम लागत पर वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना था।

खिलजी वंश का अंत किसने किया था?

गयासुद्दीन तुगलक ने 1320 ईस्वी में खुसरो खाँ को पराजित कर तुगलक वंश की स्थापना की, जिससे खिलजी वंश का शासन समाप्त हो गया।

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