
परिचय
maratha empire mock test के अंतर्गत मराठा साम्राज्य के उदय, प्रशासनिक विकास, सैन्य संगठन और भारतीय राजनीति पर पड़े उसके प्रभाव को समझा जाता है। दक्कन की भौगोलिक परिस्थितियों, स्थानीय सरदारों की शक्ति और मुगल विस्तार के प्रतिरोध ने मराठा सत्ता के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। छत्रपति शिवाजी महाराज ने विभिन्न दुर्गों और क्षेत्रों को संगठित करके स्वराज्य की स्थापना की तथा रायगढ़ को अपनी राजधानी बनाया।
शिवाजी ने शासन को व्यवस्थित रखने के लिए अष्टप्रधान परिषद का गठन किया। उनकी प्रशासनिक व्यवस्था में केंद्रीय नियंत्रण, सुव्यवस्थित राजस्व प्रणाली, दुर्गों की सुरक्षा और अनुशासित सेना को विशेष महत्त्व दिया गया। समुद्री तटों की रक्षा के लिए नौसेना का विकास भी किया गया, जिससे पश्चिमी तट पर मराठों की सामरिक स्थिति मजबूत हुई।
मराठा सेना ने पहाड़ी भूभाग, तीव्र गति और अचानक आक्रमण पर आधारित युद्ध-पद्धति अपनाई। दुर्गों के प्रभावी उपयोग और छापामार रणनीति ने उन्हें बीजापुर तथा मुगल सेनाओं के विरुद्ध लंबे समय तक संघर्ष करने में सहायता दी। शिवाजी के बाद संभाजी, राजाराम और ताराबाई ने औरंगजेब के दक्कनी अभियानों के दौरान मराठा प्रतिरोध को जारी रखा।
अठारहवीं शताब्दी में पेशवाओं के नेतृत्व में मराठा शक्ति महाराष्ट्र से बाहर मालवा, गुजरात, बुंदेलखंड और उत्तर भारत तक फैल गई। बालाजी विश्वनाथ, बाजीराव प्रथम और बालाजी बाजीराव के समय मराठा प्रशासन एक व्यापक संघात्मक व्यवस्था में बदलने लगा। सिंधिया, होल्कर, भोंसले और गायकवाड़ जैसे प्रमुख घराने मराठा राजनीति के प्रभावशाली अंग बने।
पानीपत के तृतीय युद्ध में हुई पराजय से मराठा विस्तार को गंभीर आघात पहुँचा, फिर भी उन्होंने शीघ्र ही अपनी शक्ति का पुनर्गठन किया। बाद के समय में आंतरिक प्रतिस्पर्धा, पेशवाओं की कमजोर होती स्थिति और अंग्रेजों के साथ हुए संघर्षों ने मराठा साम्राज्य को विभाजित कर दिया। इसके बावजूद स्वराज्य, स्थानीय प्रशासन, दुर्ग-व्यवस्था और सैन्य संगठन के क्षेत्र में मराठा साम्राज्य की विरासत भारतीय इतिहास में विशिष्ट स्थान रखती है।
maratha empire mock test – मराठा साम्राज्य एक नजर में
साम्राज्य का नाम: मराठा साम्राज्य
संस्थापक: छत्रपति शिवाजी महाराज
स्थापना का क्षेत्र: पश्चिमी दक्कन और महाराष्ट्र
औपचारिक स्थापना: 1674 ईस्वी में शिवाजी के राज्याभिषेक के साथ
राजवंश: भोंसले वंश
संस्थापक का जन्म: 19 फरवरी 1630 ईस्वी
संस्थापक का जन्मस्थान: शिवनेरी दुर्ग, महाराष्ट्र
शिवाजी के पिता: शाहजी भोंसले
शिवाजी की माता: जीजाबाई
शिवाजी के प्रारंभिक संरक्षक: जीजाबाई और दादाजी कोंडदेव
शिवाजी की प्रमुख उपाधि: छत्रपति
शिवाजी का राज्याभिषेक: 6 जून 1674 ईस्वी
राज्याभिषेक का स्थान: रायगढ़ दुर्ग
राज्याभिषेक के पुरोहित: काशी के विद्वान गागा भट्ट
प्रारंभिक राजधानी: राजगढ़
राज्याभिषेक के बाद राजधानी: रायगढ़
शाहू के शासनकाल की राजधानी: सतारा
पेशवाकालीन सत्ता का प्रमुख केंद्र: पुणे
शिवाजी द्वारा जीता गया पहला प्रमुख दुर्ग: तोरणा दुर्ग
तोरणा दुर्ग पर अधिकार: 1646 ईस्वी
प्रमुख प्रशासनिक परिषद: अष्टप्रधान परिषद
अष्टप्रधान परिषद का प्रधान: पेशवा
अष्टप्रधान परिषद के पद: पेशवा, अमात्य, सचिव, मंत्री, सेनापति, सुमंत, न्यायाधीश और पंडितराव
शिवाजी के प्रथम पेशवा: मोरोपंत त्र्यंबक पिंगले
वित्त विभाग का प्रमुख: अमात्य
विदेश मामलों का प्रमुख: सुमंत या दबीर
धार्मिक मामलों का प्रमुख: पंडितराव
न्याय विभाग का प्रमुख: न्यायाधीश
सेना का प्रधान: सेनापति
प्रमुख सैन्य नीति: तीव्र गति से आक्रमण और छापामार युद्ध
मराठा छापामार युद्ध-पद्धति: गणिमी कावा
मराठा सेना की प्रमुख शक्ति: हल्की घुड़सवार सेना और दुर्गों का जाल
नौसेना के विकास का श्रेय: छत्रपति शिवाजी महाराज
प्रमुख समुद्री दुर्ग: सिंधुदुर्ग
प्रमुख मराठा नौसेनाध्यक्ष: कान्होजी आंग्रे
प्रशासन की प्रमुख भाषा: मराठी
प्रशासन में प्रयुक्त प्रमुख लिपि: मोडी लिपि
प्रमुख कर: चौथ और सरदेशमुखी
चौथ की दर: संबंधित प्रदेश के राजस्व का एक-चौथाई भाग
सरदेशमुखी की दर: संबंधित प्रदेश के राजस्व का दस प्रतिशत
प्रतापगढ़ का युद्ध: 1659 ईस्वी
प्रतापगढ़ के युद्ध में शिवाजी का प्रतिद्वंद्वी: अफजल खान
पुणे में शाइस्ता खान पर आक्रमण: 1663 ईस्वी
सूरत पर शिवाजी का पहला आक्रमण: 1664 ईस्वी
पुरंदर की संधि: 1665 ईस्वी
पुरंदर की संधि के पक्ष: शिवाजी और मुगल सेनापति मिर्जा राजा जयसिंह
शिवाजी की आगरा यात्रा: 1666 ईस्वी
आगरा से शिवाजी का निकलना: 1666 ईस्वी
शिवाजी की मृत्यु: 3 अप्रैल 1680 ईस्वी
शिवाजी की मृत्यु का स्थान: रायगढ़ दुर्ग
शिवाजी के उत्तराधिकारी: संभाजी महाराज
संभाजी का शासनकाल: 1681 से 1689 ईस्वी
संभाजी की गिरफ्तारी का स्थान: संगमेश्वर
संभाजी की मृत्यु: 1689 ईस्वी
संभाजी के बाद छत्रपति: राजाराम महाराज
राजाराम का दक्षिण भारतीय केंद्र: जिंजी दुर्ग
राजाराम के बाद मराठा प्रतिरोध की नेता: महारानी ताराबाई
ताराबाई के पुत्र: शिवाजी द्वितीय
मुगल कैद से मुक्त मराठा शासक: छत्रपति शाहू महाराज
छत्रपति शाहू का राज्याभिषेक: 1708 ईस्वी
शाहू के प्रमुख पेशवा: बालाजी विश्वनाथ
बालाजी विश्वनाथ की पेशवा नियुक्ति: 1713 ईस्वी
पेशवा पद को शक्तिशाली बनाने वाला शासक: बालाजी विश्वनाथ
बाजीराव प्रथम का पेशवाकाल: 1720 से 1740 ईस्वी
पालखेड़ का युद्ध: 1728 ईस्वी
पालखेड़ में पराजित शासक: हैदराबाद का निजाम
बाजीराव प्रथम के बाद पेशवा: बालाजी बाजीराव
बालाजी बाजीराव की उपाधि: नानासाहेब
मराठा संघ के प्रमुख घराने: सिंधिया, होल्कर, गायकवाड़ और नागपुर के भोंसले
सिंधिया घराने का प्रमुख क्षेत्र: ग्वालियर
होल्कर घराने का प्रमुख क्षेत्र: इंदौर
गायकवाड़ घराने का प्रमुख क्षेत्र: बड़ौदा
भोंसले घराने का प्रमुख क्षेत्र: नागपुर
पानीपत का तृतीय युद्ध: 14 जनवरी 1761 ईस्वी
पानीपत में मराठों का प्रतिद्वंद्वी: अहमद शाह अब्दाली
पानीपत में मराठा सेना का प्रमुख सेनापति: सदाशिवराव भाऊ
पानीपत के समय मराठा उत्तराधिकारी: विश्वासराव
पानीपत की पराजय के बाद पुनरुत्थान का नेतृत्व: पेशवा माधवराव प्रथम
माधवराव प्रथम का पेशवाकाल: 1761 से 1772 ईस्वी
उत्तर भारत में मराठा प्रभाव पुनः स्थापित करने वाला सरदार: महादजी सिंधिया
प्रमुख मराठा राजनेता: नाना फडणवीस
प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध: 1775 से 1782 ईस्वी
प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध की समाप्ति: सालबाई की संधि
सालबाई की संधि: 1782 ईस्वी
बसीन की संधि: 1802 ईस्वी
बसीन की संधि करने वाला पेशवा: बाजीराव द्वितीय
द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध: 1803 से 1805 ईस्वी
तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध: 1817 से 1818 ईस्वी
अंतिम पेशवा: बाजीराव द्वितीय
मराठा साम्राज्य का अंत: 1818 ईस्वी
अंत का प्रमुख कारण: आंतरिक संघर्ष, संघीय सरदारों की प्रतिस्पर्धा और अंग्रेजों की बढ़ती शक्ति
प्रमुख ऐतिहासिक विशेषता: मुगल साम्राज्य के पतन के बाद मराठा शक्ति भारतीय राजनीति की सबसे प्रभावशाली शक्तियों में से एक बनी।
मराठा साम्राज्य MCQ Questions 1–100
1. मराठा साम्राज्य की स्थापना किसने की थी?
A. संभाजी महाराज
B. शाहू महाराज
C. छत्रपति शिवाजी महाराज
D. बाजीराव प्रथम
उत्तर: C. छत्रपति शिवाजी महाराज
व्याख्या: छत्रपति शिवाजी महाराज ने पश्चिमी दक्कन में स्वतंत्र मराठा राज्य की स्थापना की। उन्होंने स्थानीय दुर्गों, मावला सैनिकों और तीव्र सैन्य अभियानों की सहायता से स्वराज्य का विस्तार किया। उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों में बीजापुर सल्तनत और मुगल साम्राज्य शामिल थे। 1674 ईस्वी के राज्याभिषेक ने मराठा सत्ता को औपचारिक राजकीय स्वरूप प्रदान किया।
2. छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म किस दुर्ग में हुआ था?
A. रायगढ़ दुर्ग
B. शिवनेरी दुर्ग
C. प्रतापगढ़ दुर्ग
D. सिंहगढ़ दुर्ग
उत्तर: B. शिवनेरी दुर्ग
व्याख्या: शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 ईस्वी को शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। यह दुर्ग वर्तमान महाराष्ट्र के पुणे जिले के जुन्नर क्षेत्र में स्थित है। दुर्ग की प्राकृतिक सुरक्षा ने इसे सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बनाया था। शिवाजी के बचपन का आरंभिक समय इसी क्षेत्र और पुणे की जागीर में बीता।
3. शिवाजी महाराज के पिता कौन थे?
A. मालोजी भोंसले
B. शाहजी भोंसले
C. शंभाजी भोंसले
D. व्यंकोजी भोंसले
उत्तर: B. शाहजी भोंसले
व्याख्या: शाहजी भोंसले शिवाजी महाराज के पिता और दक्कन के प्रभावशाली मराठा सेनानायक थे। उन्होंने अहमदनगर और बीजापुर की सल्तनतों के अधीन विभिन्न पदों पर कार्य किया। उन्हें पुणे क्षेत्र की जागीर प्राप्त थी, जिसका प्रशासन बाद में शिवाजी के राजनीतिक उदय का आधार बना। शाहजी ने दक्षिण भारत में बेंगलुरु को भी अपना प्रमुख केंद्र बनाया था।
4. शिवाजी महाराज की माता कौन थीं?
A. ताराबाई
B. सईबाई
C. जीजाबाई
D. येसुबाई
उत्तर: C. जीजाबाई
व्याख्या: जीजाबाई सिंदखेड के जाधव परिवार से संबंधित थीं। उन्होंने शिवाजी के चरित्र, धार्मिक संस्कार और स्वराज्य की भावना के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुणे की जागीर में रहते हुए उन्होंने स्थानीय प्रशासन और धार्मिक निर्माणों को भी प्रोत्साहित किया। शिवाजी के राज्याभिषेक के कुछ समय बाद 1674 ईस्वी में उनका निधन हुआ।
5. शिवाजी महाराज ने सबसे पहले किस प्रमुख दुर्ग पर अधिकार किया था?
A. तोरणा
B. पुरंदर
C. पन्हाला
D. विशालगढ़
उत्तर: A. तोरणा
व्याख्या: शिवाजी ने लगभग 1646 ईस्वी में तोरणा दुर्ग पर अधिकार किया था। यह उनकी प्रारंभिक राजनीतिक और सैन्य सफलताओं में गिना जाता है। दुर्ग से प्राप्त संपत्ति का उपयोग आसपास के क्षेत्रों और किलों को मजबूत करने में किया गया। तोरणा को प्रचंडगढ़ के नाम से भी जाना जाता है।
6. प्रतापगढ़ के युद्ध में शिवाजी महाराज का सामना किससे हुआ था?
A. शाइस्ता खान
B. अफजल खान
C. मिर्जा राजा जयसिंह
D. दिलेर खान
उत्तर: B. अफजल खान
व्याख्या: प्रतापगढ़ का युद्ध 1659 ईस्वी में शिवाजी और बीजापुर के सेनापति अफजल खान के बीच हुआ था। अफजल खान को शिवाजी की बढ़ती शक्ति दबाने के लिए भेजा गया था। व्यक्तिगत भेंट के दौरान दोनों पक्षों के बीच संघर्ष हुआ और अफजल खान मारा गया। इसके बाद मराठों ने बीजापुर के कई क्षेत्रों और सैन्य संसाधनों पर अधिकार कर लिया।
7. प्रतापगढ़ का युद्ध किस वर्ष हुआ था?
A. 1646 ईस्वी
B. 1657 ईस्वी
C. 1659 ईस्वी
D. 1665 ईस्वी
उत्तर: C. 1659 ईस्वी
व्याख्या: प्रतापगढ़ का युद्ध नवंबर 1659 ईस्वी में लड़ा गया था। यह मराठा शक्ति और बीजापुर सल्तनत के बीच निर्णायक संघर्ष था। विजय से शिवाजी की प्रतिष्ठा दक्कन में तेजी से बढ़ी। इस सफलता के बाद मराठों को घोड़े, हथियार और बड़ी मात्रा में युद्ध सामग्री प्राप्त हुई।
8. शिवाजी महाराज ने पुणे में शाइस्ता खान पर अचानक आक्रमण कब किया था?
A. 1659 ईस्वी
B. 1663 ईस्वी
C. 1665 ईस्वी
D. 1670 ईस्वी
उत्तर: B. 1663 ईस्वी
व्याख्या: शिवाजी ने अप्रैल 1663 ईस्वी में पुणे के लाल महल में ठहरे शाइस्ता खान पर रात में अचानक आक्रमण किया। इस हमले में शाइस्ता खान घायल हुआ और उसकी कुछ उँगलियाँ कट गईं। मुगल सुरक्षा व्यवस्था की विफलता से उसकी प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुँचा। औरंगजेब ने बाद में उसे दक्कन से हटाकर बंगाल भेज दिया।
9. शिवाजी महाराज ने पहली बार सूरत पर किस वर्ष आक्रमण किया था?
A. 1661 ईस्वी
B. 1664 ईस्वी
C. 1666 ईस्वी
D. 1672 ईस्वी
उत्तर: B. 1664 ईस्वी
व्याख्या: शिवाजी ने जनवरी 1664 ईस्वी में मुगल साम्राज्य के समृद्ध बंदरगाह सूरत पर आक्रमण किया। सूरत अरब सागर के व्यापार, हज यात्राओं और यूरोपीय कंपनियों का प्रमुख केंद्र था। इस अभियान से मराठों को बड़ी मात्रा में धन और संसाधन प्राप्त हुए। शिवाजी ने 1670 ईस्वी में सूरत पर दूसरी बार भी आक्रमण किया।
10. शिवाजी और मुगलों के बीच पुरंदर की संधि कब हुई थी?
A. 1663 ईस्वी
B. 1665 ईस्वी
C. 1667 ईस्वी
D. 1674 ईस्वी
उत्तर: B. 1665 ईस्वी
व्याख्या: पुरंदर की संधि जून 1665 ईस्वी में मुगल सैन्य दबाव के बाद हुई थी। इसके अनुसार शिवाजी ने अपने कई दुर्ग मुगलों को सौंपने की सहमति दी। उन्हें कुछ क्षेत्र अपने अधिकार में रखने और बीजापुर के विरुद्ध मुगलों का सहयोग करने की अनुमति मिली। उनके पुत्र संभाजी को मुगल मनसब प्रदान करने की व्यवस्था भी की गई।
11. पुरंदर की संधि में मुगल पक्ष का प्रतिनिधित्व किसने किया था?
A. शाइस्ता खान
B. मिर्जा राजा जयसिंह
C. मीर जुमला
D. जुल्फिकार खान
उत्तर: B. मिर्जा राजा जयसिंह
व्याख्या: आमेर के मिर्जा राजा जयसिंह ने औरंगजेब की ओर से मराठों के विरुद्ध अभियान चलाया था। उसने पुरंदर दुर्ग की घेराबंदी के साथ कूटनीतिक वार्ता का भी उपयोग किया। उसकी रणनीति के कारण शिवाजी संधि करने के लिए तैयार हुए। जयसिंह ने बाद में शिवाजी को मुगल दरबार जाने के लिए भी प्रेरित किया।
12. शिवाजी महाराज औरंगजेब के दरबार में उपस्थित होने के लिए किस नगर गए थे?
A. दिल्ली
B. लाहौर
C. आगरा
D. अजमेर
उत्तर: C. आगरा
व्याख्या: शिवाजी 1666 ईस्वी में अपने पुत्र संभाजी के साथ आगरा पहुँचे थे। औरंगजेब के दरबार में उन्हें अपेक्षित सम्मान और स्थान नहीं दिया गया। विरोध प्रकट करने के बाद उन्हें कड़ी निगरानी में रखा गया। कुछ समय बाद वे अपने पुत्र सहित आगरा से निकलने में सफल हुए।
13. शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक किस वर्ष हुआ था?
A. 1666 ईस्वी
B. 1670 ईस्वी
C. 1674 ईस्वी
D. 1680 ईस्वी
उत्तर: C. 1674 ईस्वी
व्याख्या: शिवाजी महाराज का औपचारिक राज्याभिषेक 6 जून 1674 ईस्वी को हुआ था। इस समारोह ने उन्हें स्वतंत्र और वैध हिंदू शासक के रूप में स्थापित किया। उन्होंने छत्रपति की उपाधि धारण की और नई राजकीय परंपराएँ प्रारंभ कीं। राज्याभिषेक के बाद मराठा प्रशासन को अधिक संगठित रूप दिया गया।
14. शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक कहाँ हुआ था?
A. सतारा
B. पुणे
C. रायगढ़
D. राजगढ़
उत्तर: C. रायगढ़
व्याख्या: रायगढ़ दुर्ग शिवाजी के राज्याभिषेक और मराठा शासन की प्रमुख राजधानी था। दुर्ग कोंकण और पश्चिमी घाट के मार्गों पर नियंत्रण के लिए उपयुक्त स्थान पर स्थित था। यहाँ राजमहल, बाजार, प्रशासनिक भवन और जगदीश्वर मंदिर बनाए गए थे। शिवाजी की समाधि भी रायगढ़ में स्थित है।
15. शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक कराने वाले विद्वान कौन थे?
A. समर्थ रामदास
B. गागा भट्ट
C. कवि भूषण
D. परमानंद
उत्तर: B. गागा भट्ट
व्याख्या: गागा भट्ट काशी के प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान और धर्मशास्त्री थे। उन्हें शिवाजी के राज्याभिषेक के वैदिक अनुष्ठान संपन्न कराने के लिए रायगढ़ बुलाया गया था। उन्होंने शिवाजी की क्षत्रिय वंश-परंपरा को स्वीकार करते हुए समारोह का संचालन किया। राज्याभिषेक से मराठा राज्य को धार्मिक और राजनीतिक वैधता प्राप्त हुई।
16. शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मंत्रिपरिषद को क्या कहा जाता था?
A. नवरत्न परिषद
B. अष्टप्रधान परिषद
C. बारभाई परिषद
D. मंत्रिमंडल-ए-खास
उत्तर: B. अष्टप्रधान परिषद
व्याख्या: अष्टप्रधान परिषद शिवाजी की आठ प्रमुख मंत्रियों वाली प्रशासनिक व्यवस्था थी। प्रत्येक मंत्री को वित्त, विदेश नीति, न्याय, धर्म या सेना से संबंधित विशेष विभाग सौंपा गया था। सभी अधिकारी अंतिम रूप से छत्रपति के प्रति उत्तरदायी थे। यह परिषद सलाह और प्रशासनिक कार्यान्वयन का साधन थी, स्वतंत्र सत्ता-केंद्र नहीं।
17. अष्टप्रधान परिषद में पेशवा का प्रमुख कार्य क्या था?
A. न्याय करना
B. धार्मिक अनुदान देना
C. शासन का सामान्य संचालन करना
D. विदेशी पत्राचार संभालना
उत्तर: C. शासन का सामान्य संचालन करना
व्याख्या: पेशवा अष्टप्रधान परिषद का प्रधान मंत्री और छत्रपति का प्रमुख प्रशासनिक सहयोगी था। वह विभिन्न विभागों के कार्यों में समन्वय स्थापित करता था। शिवाजी के समय पेशवा राजा के अधीन एक अधिकारी था। अठारहवीं शताब्दी में यही पद मराठा राजनीति का वास्तविक सत्ता-केंद्र बन गया।
18. शिवाजी की अष्टप्रधान परिषद में वित्त विभाग का प्रमुख कौन होता था?
A. अमात्य
B. सुमंत
C. सचिव
D. मंत्री
उत्तर: A. अमात्य
व्याख्या: अमात्य मराठा प्रशासन में वित्त और राजस्व विभाग का प्रमुख अधिकारी था। वह राज्य की आय, व्यय और लेखा-परीक्षा पर निगरानी रखता था। प्रशासनिक अभिलेखों और आर्थिक संसाधनों का सही उपयोग उसकी जिम्मेदारी थी। रामचंद्र पंत अमात्य इस पद से जुड़े प्रमुख मराठा प्रशासक थे।
19. अष्टप्रधान परिषद में राजकीय पत्राचार का उत्तरदायित्व किसके पास था?
A. सेनापति
B. सचिव
C. पंडितराव
D. न्यायाधीश
उत्तर: B. सचिव
व्याख्या: सचिव राजकीय पत्रों, आदेशों और सरकारी अभिलेखों की जाँच करता था। वह यह सुनिश्चित करता था कि आधिकारिक दस्तावेज सही भाषा और आशय में जारी हों। मराठा प्रशासन में लिखित आदेशों और लेखा-अभिलेखों को विशेष महत्त्व दिया जाता था। मोडी लिपि का उपयोग प्रशासनिक कार्यों में व्यापक रूप से होता था।
20. अष्टप्रधान परिषद में विदेश मामलों का प्रमुख कौन था?
A. अमात्य
B. सुमंत
C. मंत्री
D. पंडितराव
उत्तर: B. सुमंत
व्याख्या: सुमंत को दबीर भी कहा जाता था और वह विदेशी राज्यों से संबंध संभालता था। बीजापुर, गोलकुंडा, मुगल साम्राज्य और यूरोपीय शक्तियों के साथ पत्राचार उसके विभाग से संबंधित था। राजदूतों के स्वागत और संधियों की तैयारी में भी उसकी भूमिका रहती थी। अंतिम विदेश नीति का निर्णय छत्रपति स्वयं करता था।
21. अष्टप्रधान परिषद में न्याय विभाग का प्रमुख कौन होता था?
A. न्यायाधीश
B. मंत्री
C. अमात्य
D. पेशवा
उत्तर: A. न्यायाधीश
व्याख्या: न्यायाधीश राज्य के दीवानी और आपराधिक मामलों से संबंधित सर्वोच्च अधिकारी था। वह प्रचलित कानून, धर्मशास्त्र और स्थानीय परंपराओं के आधार पर न्याय देता था। ग्राम स्तर पर कई विवाद स्थानीय पंचायतों द्वारा सुलझाए जाते थे। गंभीर मामले उच्च प्रशासनिक अधिकारियों के सामने प्रस्तुत किए जाते थे।
22. अष्टप्रधान परिषद में धार्मिक मामलों का प्रमुख कौन होता था?
A. सुमंत
B. सेनापति
C. पंडितराव
D. सचिव
उत्तर: C. पंडितराव
व्याख्या: पंडितराव धार्मिक संस्थाओं, दान और धर्मार्थ अनुदानों से संबंधित विभाग संभालता था। वह धार्मिक आचरण और ब्राह्मण विद्वानों को दिए जाने वाले अनुदानों की देखरेख करता था। धार्मिक विवादों पर परामर्श देना भी उसका कार्य था। यह पद प्रशासन और धार्मिक संस्थाओं के बीच संपर्क स्थापित करता था।
23. अष्टप्रधान परिषद में सेना का प्रमुख अधिकारी कौन था?
A. सेनापति
B. पेशवा
C. अमात्य
D. मंत्री
उत्तर: A. सेनापति
व्याख्या: सेनापति मराठा सेना का प्रमुख सैन्य अधिकारी होता था। वह सैनिकों की भर्ती, संगठन और युद्ध अभियानों में नेतृत्व प्रदान करता था। शिवाजी ने सैन्य पदों को पूर्णतः वंशानुगत होने से रोकने का प्रयास किया। सेना पर अंतिम नियंत्रण छत्रपति के हाथों में बना रहता था।
24. मराठों की छापामार युद्ध-पद्धति को किस नाम से जाना जाता था?
A. दाग व्यवस्था
B. गणिमी कावा
C. सुलह-ए-कुल
D. चक्रव्यूह
उत्तर: B. गणिमी कावा
व्याख्या: गणिमी कावा में तीव्र गति, अचानक आक्रमण, गुप्त सूचना और कठिन भूभाग का उपयोग किया जाता था। मराठा सैनिक भारी सेना से सीधे लंबे युद्ध करने के स्थान पर उसकी आपूर्ति और संचार पर प्रहार करते थे। पश्चिमी घाट की पहाड़ियाँ इस रणनीति के लिए अनुकूल थीं। शिवाजी ने इस पद्धति से अधिक शक्तिशाली सेनाओं को बार-बार चुनौती दी।
25. शिवाजी महाराज द्वारा बनवाया गया प्रमुख समुद्री दुर्ग कौन-सा था?
A. सिंधुदुर्ग
B. दौलताबाद
C. असीरगढ़
D. ग्वालियर
उत्तर: A. सिंधुदुर्ग
व्याख्या: सिंधुदुर्ग का निर्माण मालवन के निकट अरब सागर में करवाया गया था। इसका उद्देश्य मराठा तट और नौसेना को पुर्तगालियों, सिद्दियों तथा अन्य समुद्री शक्तियों से सुरक्षा देना था। दुर्ग का निर्माण चट्टानी द्वीप पर किया गया। इसकी मजबूत दीवारें समुद्री लहरों और तोपों का सामना करने के लिए बनाई गई थीं।
26. मराठा प्रशासन में सरकारी अभिलेखों के लिए मुख्यतः किस लिपि का प्रयोग होता था?
A. शारदा
B. मोडी
C. खरोष्ठी
D. ब्राह्मी
उत्तर: B. मोडी
व्याख्या: मोडी लिपि का उपयोग मराठी प्रशासनिक दस्तावेजों और राजकीय पत्राचार में किया जाता था। इसकी लेखन शैली तेज और कार्यालयी कार्यों के लिए सुविधाजनक थी। राजस्व खाते, आदेश और स्थानीय अभिलेख इसी लिपि में लिखे जाते थे। धार्मिक साहित्य के लिए देवनागरी का भी प्रयोग होता था।
27. मराठों द्वारा वसूला जाने वाला ‘चौथ’ सामान्यतः राजस्व का कितना भाग था?
A. दस प्रतिशत
B. बीस प्रतिशत
C. पच्चीस प्रतिशत
D. पचास प्रतिशत
उत्तर: C. पच्चीस प्रतिशत
व्याख्या: चौथ किसी प्रदेश की अनुमानित आय का एक-चौथाई अर्थात पच्चीस प्रतिशत होता था। मराठे इसे सुरक्षा, आक्रमण से मुक्ति या अपने राजनीतिक अधिकार की मान्यता के बदले वसूलते थे। यह कर मराठा साम्राज्य के बाहर के क्षेत्रों से भी लिया जाता था। पेशवाकाल में चौथ मराठा विस्तार का प्रमुख आर्थिक साधन बन गया।
28. ‘सरदेशमुखी’ कर की सामान्य दर कितनी थी?
A. पाँच प्रतिशत
B. दस प्रतिशत
C. पंद्रह प्रतिशत
D. पच्चीस प्रतिशत
उत्तर: B. दस प्रतिशत
व्याख्या: सरदेशमुखी भूमि-राजस्व पर लगभग दस प्रतिशत अतिरिक्त दावा था। मराठा शासक स्वयं को महाराष्ट्र का पारंपरिक सरदेशमुख मानते हुए इसकी माँग करते थे। यह चौथ से अलग कर था और दोनों की संयुक्त वसूली से बड़ी आय प्राप्त होती थी। मुगल प्रदेशों में इन अधिकारों की मान्यता मराठों के राजनीतिक प्रभाव का संकेत थी।
29. शिवाजी के समय भूमि-मापन और राजस्व सुधारों से किस अधिकारी का नाम जुड़ा है?
A. अण्णाजी दत्तो
B. नाना फडणवीस
C. बालाजी विश्वनाथ
D. महादजी सिंधिया
उत्तर: A. अण्णाजी दत्तो
व्याख्या: अण्णाजी दत्तो शिवाजी के प्रशासन के प्रमुख अधिकारियों में शामिल थे। उन्होंने भूमि-मापन और राजस्व निर्धारण को व्यवस्थित करने में भूमिका निभाई। उपजाऊ क्षमता के आधार पर भूमि का आकलन करने का प्रयास किया गया। इससे मध्यस्थों पर निर्भरता घटाकर राज्य और कृषकों के बीच प्रत्यक्ष संबंध मजबूत किया गया।
30. मराठा ग्राम प्रशासन में गाँव का प्रमुख कौन होता था?
A. पाटिल
B. देशमुख
C. हवलदार
D. सरनौबत
उत्तर: A. पाटिल
व्याख्या: पाटिल गाँव का प्रशासनिक प्रधान होता था। वह राजस्व वसूली, कानून-व्यवस्था और ग्राम समुदाय से संबंधित मामलों की देखरेख करता था। कुलकर्णी गाँव के लेखाकार के रूप में उसका सहयोग करता था। ये पद महाराष्ट्र की पुरानी स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा थे।
31. मराठा दुर्ग के प्रशासन और सुरक्षा का प्रमुख अधिकारी कौन होता था?
A. हवलदार
B. कुलकर्णी
C. मजूमदार
D. कारकून
उत्तर: A. हवलदार
व्याख्या: हवलदार दुर्ग की सुरक्षा और सैनिक व्यवस्था का प्रमुख अधिकारी होता था। उसके साथ सबनीस लेखा और कारखानीस भंडार संबंधी कार्य संभालते थे। विभिन्न समुदायों के अधिकारियों की नियुक्ति से शिवाजी ने किसी एक व्यक्ति के हाथ में पूर्ण नियंत्रण जाने से रोका। दुर्ग मराठा सैन्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाते थे।
32. छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु कब हुई थी?
A. 1674 ईस्वी
B. 1680 ईस्वी
C. 1689 ईस्वी
D. 1700 ईस्वी
उत्तर: B. 1680 ईस्वी
व्याख्या: शिवाजी महाराज की मृत्यु 3 अप्रैल 1680 ईस्वी को रायगढ़ दुर्ग में हुई थी। उनकी मृत्यु के बाद उत्तराधिकार को लेकर दरबारी संघर्ष आरंभ हुआ। रानी सोयराबाई अपने पुत्र राजाराम को सिंहासन दिलाना चाहती थीं। अंततः संभाजी ने सत्ता प्राप्त करके छत्रपति का पद संभाला।
33. शिवाजी महाराज के बाद मराठा सिंहासन पर कौन बैठा था?
A. राजाराम
B. संभाजी
C. शाहू
D. शिवाजी द्वितीय
उत्तर: B. संभाजी
व्याख्या: संभाजी शिवाजी महाराज के ज्येष्ठ पुत्र थे। उन्होंने 1681 ईस्वी में औपचारिक रूप से छत्रपति का पद संभाला। उनके शासनकाल में मराठों को औरंगजेब की विशाल मुगल सेना, पुर्तगालियों और जंजीरा के सिद्दियों से संघर्ष करना पड़ा। संभाजी ने मुगल दबाव के बावजूद मराठा प्रतिरोध जारी रखा।
34. संभाजी महाराज को किस स्थान पर पकड़ा गया था?
A. रायगढ़
B. संगमेश्वर
C. जिंजी
D. सतारा
उत्तर: B. संगमेश्वर
व्याख्या: संभाजी को फरवरी 1689 ईस्वी में कोंकण क्षेत्र के संगमेश्वर में पकड़ा गया था। उस समय उनके साथ कवि कलश भी उपस्थित थे। मुगल सेना ने अचानक कार्रवाई करके उन्हें बंदी बनाया। गिरफ्तारी मराठा नेतृत्व के लिए गंभीर संकट थी, लेकिन इससे मराठा प्रतिरोध समाप्त नहीं हुआ।
35. संभाजी को पकड़ने वाली मुगल टुकड़ी का नेतृत्व किसने किया था?
A. जुल्फिकार खान
B. मुकर्रब खान
C. मीर जुमला
D. शाइस्ता खान
उत्तर: B. मुकर्रब खान
व्याख्या: मुकर्रब खान ने संगमेश्वर पर तेज आक्रमण करके संभाजी और कवि कलश को बंदी बनाया था। इसके बाद दोनों को औरंगजेब के शिविर में प्रस्तुत किया गया। मुगलों ने मराठा दुर्गों और खजाने की जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया। कुछ समय बाद संभाजी को कठोर दंड देकर मृत्युदंड दिया गया।
36. संभाजी महाराज को किस स्थान के निकट मृत्युदंड दिया गया था?
A. तुलापुर
B. पुरंदर
C. नासिक
D. औरंगाबाद
उत्तर: A. तुलापुर
व्याख्या: संभाजी को मार्च 1689 ईस्वी में तुलापुर के निकट मृत्युदंड दिया गया था। यह स्थान भीमा, भामा और इंद्रायणी नदियों के संगम क्षेत्र के पास स्थित है। उनकी मृत्यु के बाद मुगलों ने रायगढ़ पर अधिकार कर उनके परिवार को बंदी बनाया। मराठों ने राजाराम के नेतृत्व में अपना संघर्ष जारी रखा।
37. संभाजी के बाद मराठों का छत्रपति कौन बना था?
A. शाहू
B. राजाराम
C. ताराबाई
D. बालाजी विश्वनाथ
उत्तर: B. राजाराम
व्याख्या: राजाराम शिवाजी महाराज के छोटे पुत्र और संभाजी के सौतेले भाई थे। संभाजी की मृत्यु के बाद 1689 ईस्वी में उन्हें छत्रपति बनाया गया। मुगल आक्रमण के कारण वे रायगढ़ से निकलकर दक्षिण भारत के जिंजी दुर्ग पहुँचे। वहीं से उन्होंने मराठा प्रतिरोध को संगठित किया।
38. राजाराम ने किस दुर्ग को अपना प्रमुख दक्षिण भारतीय केंद्र बनाया था?
A. गोलकुंडा
B. जिंजी
C. बीदर
D. पन्हाला
उत्तर: B. जिंजी
व्याख्या: जिंजी दुर्ग वर्तमान तमिलनाडु में स्थित अत्यंत मजबूत किला था। राजाराम ने यहाँ से महाराष्ट्र में सक्रिय मराठा सरदारों को निर्देश दिए। मुगलों को इस दुर्ग की घेराबंदी में लगभग आठ वर्ष लग गए। राजाराम दुर्ग के पतन से पहले ही निकलकर महाराष्ट्र लौटने में सफल रहे।
39. राजाराम की मृत्यु के बाद मराठा प्रतिरोध का नेतृत्व किसने किया था?
A. येसुबाई
B. ताराबाई
C. अहिल्याबाई
D. काशीबाई
उत्तर: B. ताराबाई
व्याख्या: राजाराम की मृत्यु 1700 ईस्वी में हुई, जिसके बाद उनकी पत्नी ताराबाई ने नेतृत्व संभाला। उन्होंने अपने पुत्र शिवाजी द्वितीय के नाम पर शासन चलाया। ताराबाई ने मराठा सेनापतियों को संगठित कर मुगल प्रदेशों पर लगातार छापामार आक्रमण करवाए। उनके नेतृत्व ने औरंगजेब के दक्कनी अभियान को गंभीर चुनौती दी।
40. ताराबाई किस मराठा शासक की पत्नी थीं?
A. संभाजी
B. राजाराम
C. शाहू
D. शिवाजी महाराज
उत्तर: B. राजाराम
व्याख्या: ताराबाई सेनापति हंबीरराव मोहिते की पुत्री और छत्रपति राजाराम की पत्नी थीं। पति की मृत्यु के बाद उन्होंने मराठा राज्य की संरक्षिका के रूप में सत्ता संभाली। उन्होंने अपने पुत्र शिवाजी द्वितीय का दावा प्रस्तुत किया। बाद में शाहू की वापसी से मराठा उत्तराधिकार का संघर्ष और जटिल हो गया।
41. मुगल कैद से मुक्त होने के बाद मराठा सिंहासन का दावा किसने किया था?
A. शाहू महाराज
B. संभाजी द्वितीय
C. राजाराम द्वितीय
D. रामराजा
उत्तर: A. शाहू महाराज
व्याख्या: शाहू संभाजी महाराज के पुत्र थे और रायगढ़ के पतन के बाद मुगलों की कैद में चले गए थे। औरंगजेब की मृत्यु के बाद 1707 ईस्वी में उन्हें मुक्त किया गया। उन्होंने ताराबाई के पुत्र के विरुद्ध मराठा सिंहासन का दावा किया। उनकी विजय के बाद सतारा मराठा राजसत्ता का प्रमुख केंद्र बना।
42. शाहू और ताराबाई के समर्थकों के बीच निर्णायक प्रारंभिक युद्ध कौन-सा था?
A. पालखेड़ का युद्ध
B. खेड़ का युद्ध
C. खर्डा का युद्ध
D. वड़गाँव का युद्ध
उत्तर: B. खेड़ का युद्ध
व्याख्या: खेड़ का युद्ध 1707 ईस्वी में शाहू और ताराबाई की सेनाओं के बीच हुआ था। धनाजी जाधव सहित कई प्रभावशाली सरदार बाद में शाहू के पक्ष में आ गए। विजय ने शाहू के सिंहासन के दावे को मजबूत किया। इसके बाद उन्होंने सतारा में अपनी सत्ता स्थापित की।
43. शाहू महाराज ने बालाजी विश्वनाथ को पेशवा किस वर्ष नियुक्त किया था?
A. 1708 ईस्वी
B. 1713 ईस्वी
C. 1720 ईस्वी
D. 1728 ईस्वी
उत्तर: B. 1713 ईस्वी
व्याख्या: बालाजी विश्वनाथ को 1713 ईस्वी में शाहू महाराज ने पेशवा नियुक्त किया था। उन्होंने विभिन्न मराठा सरदारों को शाहू के पक्ष में संगठित किया। उनकी कूटनीति से पेशवा पद का प्रभाव तेजी से बढ़ा। आगे चलकर उनके परिवार में पेशवा पद लगभग वंशानुगत हो गया।
44. 1719 ईस्वी में मराठों को दक्कन में चौथ और सरदेशमुखी का अधिकार किससे प्राप्त हुआ था?
A. निजाम-उल-मुल्क
B. मुगल सम्राट फर्रुखसियर
C. अहमद शाह अब्दाली
D. हैदर अली
उत्तर: B. मुगल सम्राट फर्रुखसियर
व्याख्या: बालाजी विश्वनाथ ने सैयद बंधुओं के साथ समझौता करके मुगल दरबार की राजनीति में हस्तक्षेप किया। 1719 ईस्वी में मराठों को दक्कन के छह मुगल सूबों से चौथ और सरदेशमुखी वसूलने की मान्यता मिली। बदले में मराठों ने मुगल राजनीति में सैयद बंधुओं की सहायता की। इस समझौते से मराठा शक्ति को वैधानिक और आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ।
45. मराठा पेशवा पद को वंशानुगत रूप देने वाला परिवार कौन-सा था?
A. सिंधिया परिवार
B. भट्ट परिवार
C. होल्कर परिवार
D. गायकवाड़ परिवार
उत्तर: B. भट्ट परिवार
व्याख्या: बालाजी विश्वनाथ भट्ट के बाद उनके पुत्र बाजीराव प्रथम पेशवा बने। इसके बाद बालाजी बाजीराव और अन्य उत्तराधिकारी उसी परिवार से आए। इस क्रम से पेशवा पद व्यवहारतः वंशानुगत हो गया। पुणे पेशवा परिवार की राजधानी और मराठा राजनीति का वास्तविक केंद्र बना।
46. बाजीराव प्रथम किस वर्ष पेशवा बना था?
A. 1713 ईस्वी
B. 1720 ईस्वी
C. 1730 ईस्वी
D. 1740 ईस्वी
उत्तर: B. 1720 ईस्वी
व्याख्या: बालाजी विश्वनाथ की मृत्यु के बाद 1720 ईस्वी में बाजीराव प्रथम पेशवा नियुक्त हुआ। उस समय उसकी आयु लगभग बीस वर्ष थी। उसने तीव्र घुड़सवार अभियानों द्वारा मराठा प्रभाव को मध्य और उत्तर भारत तक पहुँचाया। उसके नेतृत्व में पेशवा पद मराठा साम्राज्य की वास्तविक कार्यकारी शक्ति बन गया।
47. पालखेड़ के युद्ध में बाजीराव प्रथम ने किसे पराजित किया था?
A. मुहम्मद शाह
B. निजाम-उल-मुल्क
C. सआदत खान
D. अहमद शाह अब्दाली
उत्तर: B. निजाम-उल-मुल्क
व्याख्या: पालखेड़ का युद्ध 1728 ईस्वी में बाजीराव प्रथम और हैदराबाद के निजाम के बीच हुआ था। बाजीराव ने अपनी तेज घुड़सवार सेना से निजाम की आपूर्ति और संचार काट दिए। भारी तोपखाने वाली निजामी सेना को बिना बड़े सीधे युद्ध के घेर लिया गया। मुंगी-शेवगाँव की संधि से शाहू के अधिकार और मराठा दावों को मान्यता मिली।
48. पालखेड़ का युद्ध किस वर्ष हुआ था?
A. 1720 ईस्वी
B. 1728 ईस्वी
C. 1737 ईस्वी
D. 1740 ईस्वी
उत्तर: B. 1728 ईस्वी
व्याख्या: पालखेड़ का युद्ध फरवरी 1728 ईस्वी में महाराष्ट्र में हुआ था। इसे गतिशील घुड़सवार युद्ध-पद्धति का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। बाजीराव ने निजाम की सेना को जल और रसद से अलग कर दिया। इस विजय ने दक्कन में मराठा शक्ति की श्रेष्ठता स्थापित की।
49. बुंदेलखंड के किस शासक ने मुगल सेनापति के विरुद्ध बाजीराव प्रथम से सहायता माँगी थी?
A. छत्रसाल
B. वीरसिंह देव
C. मधुकर शाह
D. चंपतराय
उत्तर: A. छत्रसाल
व्याख्या: बुंदेला शासक महाराजा छत्रसाल पर मुगल सेनापति मुहम्मद खान बंगश ने आक्रमण किया था। छत्रसाल ने बाजीराव प्रथम से सहायता माँगी। बाजीराव ने बुंदेलखंड पहुँचकर बंगश को पीछे हटने पर विवश किया। इसके बदले छत्रसाल ने अपने राज्य का एक भाग मराठों को प्रदान किया।
50. बाजीराव प्रथम की मृत्यु कहाँ हुई थी?
A. पुणे
B. रावेरखेड़ी
C. सतारा
D. दिल्ली
उत्तर: B. रावेरखेड़ी
व्याख्या: बाजीराव प्रथम की मृत्यु 1740 ईस्वी में नर्मदा नदी के तट पर रावेरखेड़ी में हुई थी। वह उत्तर भारत की ओर सैन्य अभियान पर था। उसने अपने लगभग बीस वर्षीय पेशवाकाल में कोई प्रमुख युद्ध नहीं हारा। उसकी समाधि वर्तमान मध्य प्रदेश में रावेरखेड़ी में स्थित है।
51. बाजीराव प्रथम के बाद पेशवा कौन बना था?
A. माधवराव प्रथम
B. बालाजी बाजीराव
C. रघुनाथराव
D. नारायणराव
उत्तर: B. बालाजी बाजीराव
व्याख्या: बालाजी बाजीराव अपने पिता बाजीराव प्रथम की मृत्यु के बाद 1740 ईस्वी में पेशवा बना। वह नानासाहेब के नाम से भी प्रसिद्ध था। उसके शासनकाल में मराठा साम्राज्य का क्षेत्रीय विस्तार अपने चरम की ओर बढ़ा। इसी समय मराठा संघ के प्रमुख सरदार अधिक स्वायत्त और शक्तिशाली बने।
52. बालाजी बाजीराव को किस अन्य नाम से जाना जाता था?
A. नानासाहेब
B. थोरले माधवराव
C. सवाई माधवराव
D. रघोबा
उत्तर: A. नानासाहेब
व्याख्या: बालाजी बाजीराव को नानासाहेब पेशवा कहा जाता था। उसके समय पुणे का राजनीतिक और स्थापत्य विकास हुआ। मराठा सेनाएँ बंगाल, पंजाब और दक्षिण भारत के क्षेत्रों तक पहुँचीं। पानीपत के तृतीय युद्ध की पराजय ने उसके शासन के अंतिम चरण को गहरे आघात में बदल दिया।
53. मराठा साम्राज्य में पेशवाओं की राजधानी कौन-सा नगर था?
A. रायगढ़
B. सतारा
C. पुणे
D. नागपुर
उत्तर: C. पुणे
व्याख्या: बाजीराव प्रथम और उसके उत्तराधिकारियों ने पुणे को पेशवा सत्ता का प्रमुख केंद्र बनाया। शनिवार वाड़ा पेशवाओं का प्रसिद्ध राजकीय निवास था। पुणे से मराठा अभियानों, राजस्व और संघीय सरदारों के संबंधों का संचालन किया जाता था। सतारा में छत्रपति का पद बना रहा, लेकिन वास्तविक सत्ता धीरे-धीरे पुणे स्थानांतरित हो गई।
54. निम्न में से कौन मराठा संघ का प्रमुख घराना नहीं था?
A. सिंधिया
B. होल्कर
C. गायकवाड़
D. आसफजाही
उत्तर: D. आसफजाही
व्याख्या: सिंधिया, होल्कर, गायकवाड़ और नागपुर के भोंसले मराठा संघ के प्रमुख घराने थे। आसफजाही वंश हैदराबाद के निजामों से संबंधित था। मराठा घरानों ने अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी सत्ता स्थापित की। वे पेशवा की सर्वोच्चता स्वीकार करते हुए भी पर्याप्त स्वायत्तता रखते थे।
55. गायकवाड़ घराने का प्रमुख केंद्र कहाँ था?
A. इंदौर
B. बड़ौदा
C. ग्वालियर
D. नागपुर
उत्तर: B. बड़ौदा
व्याख्या: गायकवाड़ घराने ने गुजरात के बड़ौदा क्षेत्र में अपनी सत्ता स्थापित की। पिलाजी गायकवाड़ और दमाजी गायकवाड़ इसके प्रारंभिक प्रमुख नेताओं में थे। उन्होंने गुजरात में मराठा चौथ और राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाया। बड़ौदा बाद में एक प्रमुख देशी रियासत बना।
56. होल्कर घराने का प्रमुख केंद्र कौन-सा था?
A. इंदौर
B. सतारा
C. बड़ौदा
D. झाँसी
उत्तर: A. इंदौर
व्याख्या: मल्हारराव होल्कर ने मालवा क्षेत्र में होल्कर शक्ति की नींव रखी। इंदौर इस घराने का प्रमुख प्रशासनिक केंद्र बना। अहिल्याबाई होल्कर ने बाद में महेश्वर से शासन किया और अनेक धार्मिक तथा लोककल्याणकारी निर्माण करवाए। होल्कर उत्तर और मध्य भारत की राजनीति में प्रभावशाली रहे।
57. सिंधिया घराने का प्रमुख केंद्र कौन-सा था?
A. ग्वालियर
B. नागपुर
C. कोल्हापुर
D. तंजावुर
उत्तर: A. ग्वालियर
व्याख्या: सिंधिया घराने ने मालवा और उत्तर भारत में अपनी शक्ति स्थापित की। महादजी सिंधिया के समय ग्वालियर इस घराने का प्रमुख राजनीतिक केंद्र बना। सिंधिया शासकों ने दिल्ली के मुगल सम्राट पर भी प्रभाव कायम किया। उनकी सेना को यूरोपीय अधिकारियों की सहायता से आधुनिक बनाया गया।
58. नागपुर में किस मराठा घराने का शासन स्थापित हुआ था?
A. होल्कर
B. भोंसले
C. गायकवाड़
D. पवार
उत्तर: B. भोंसले
व्याख्या: नागपुर के भोंसले मराठा संघ के प्रमुख घरानों में शामिल थे। रघुजी भोंसले प्रथम ने मध्य और पूर्वी भारत में अपनी शक्ति का विस्तार किया। उनका प्रभाव बरार, गोंडवाना और उड़ीसा तक फैल गया। उन्होंने बंगाल के नवाबों के क्षेत्रों पर भी अनेक अभियान किए।
59. बंगाल और उड़ीसा की दिशा में मराठा शक्ति का विस्तार किस भोंसले शासक ने किया था?
A. शाहजी भोंसले
B. रघुजी भोंसले प्रथम
C. व्यंकोजी भोंसले
D. मालोजी भोंसले
उत्तर: B. रघुजी भोंसले प्रथम
व्याख्या: रघुजी भोंसले प्रथम ने नागपुर से पूर्वी भारत की ओर अनेक सैन्य अभियान चलाए। मराठा घुड़सवारों के बंगाल अभियानों को स्थानीय रूप से बरगी आक्रमण कहा गया। उड़ीसा पर नागपुर भोंसलों का प्रभाव स्थापित हुआ। इन अभियानों से पूर्वी भारत की राजनीति और अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई।
60. पानीपत का तृतीय युद्ध कब हुआ था?
A. 1739 ईस्वी
B. 1757 ईस्वी
C. 1761 ईस्वी
D. 1764 ईस्वी
उत्तर: C. 1761 ईस्वी
व्याख्या: पानीपत का तृतीय युद्ध 14 जनवरी 1761 ईस्वी को हुआ था। इसमें मराठा सेना और अहमद शाह अब्दाली की संयुक्त सेना आमने-सामने थीं। युद्ध उत्तर भारत में राजनीतिक प्रभुत्व के लिए लड़ा गया। पराजय से मराठों को भारी जनहानि हुई और उनका तत्काल उत्तरी विस्तार रुक गया।
61. पानीपत के तृतीय युद्ध में मराठों का मुख्य प्रतिद्वंद्वी कौन था?
A. नादिर शाह
B. अहमद शाह अब्दाली
C. निजाम अली खान
D. मीर कासिम
उत्तर: B. अहमद शाह अब्दाली
व्याख्या: अहमद शाह अब्दाली अफगानिस्तान के दुर्रानी साम्राज्य का संस्थापक था। उसने भारत पर कई आक्रमण किए और पंजाब तथा दिल्ली की राजनीति में हस्तक्षेप किया। पानीपत में उसे रोहिल्लों और अवध के नवाब शुजाउद्दौला का सहयोग मिला। मराठों की पराजय के बाद भी वह भारत में स्थायी शासन स्थापित नहीं कर सका।
62. पानीपत के तृतीय युद्ध में मराठा सेना का प्रधान सेनापति कौन था?
A. मल्हारराव होल्कर
B. सदाशिवराव भाऊ
C. महादजी सिंधिया
D. रघुनाथराव
उत्तर: B. सदाशिवराव भाऊ
व्याख्या: सदाशिवराव भाऊ पेशवा बालाजी बाजीराव का चचेरा भाई था। उसने उदगीर के युद्ध में निजाम को पराजित करने के बाद बड़ी प्रतिष्ठा प्राप्त की थी। पानीपत अभियान में उसने भारी तोपखाने और विशाल शिविर के साथ उत्तर भारत की ओर प्रस्थान किया। रसद संकट और सहयोगियों की कमी ने उसकी स्थिति कमजोर कर दी।
63. पानीपत के तृतीय युद्ध में मारा गया पेशवा का पुत्र कौन था?
A. माधवराव
B. विश्वासराव
C. नारायणराव
D. जनार्दनराव
उत्तर: B. विश्वासराव
व्याख्या: विश्वासराव पेशवा बालाजी बाजीराव का ज्येष्ठ पुत्र और संभावित उत्तराधिकारी था। वह पानीपत के अभियान में सदाशिवराव भाऊ के साथ गया था। युद्ध के निर्णायक चरण में उसकी मृत्यु से मराठा सेना का मनोबल प्रभावित हुआ। इसके बाद युद्ध-व्यवस्था तेजी से बिखर गई।
64. पानीपत के युद्ध में मराठा तोपखाने का नेतृत्व किसने किया था?
A. इब्राहिम खान गर्दी
B. दौलतराव सिंधिया
C. तुकोजी होल्कर
D. बापू गोखले
उत्तर: A. इब्राहिम खान गर्दी
व्याख्या: इब्राहिम खान गर्दी यूरोपीय शैली में प्रशिक्षित पैदल सेना और तोपखाने का प्रमुख था। उसके सैनिकों ने युद्ध के प्रारंभिक चरण में अब्दाली की सेना को गंभीर क्षति पहुँचाई। पर्याप्त गोला-बारूद और समर्थन न मिलने से उनकी स्थिति कमजोर हुई। इब्राहिम खान बाद में पकड़ा गया और उसकी हत्या कर दी गई।
65. पानीपत अभियान से पहले मराठों का प्रमुख अनुभवी घुड़सवार सरदार कौन था?
A. मल्हारराव होल्कर
B. नाना फडणवीस
C. बालाजी विश्वनाथ
D. कान्होजी आंग्रे
उत्तर: A. मल्हारराव होल्कर
व्याख्या: मल्हारराव होल्कर बाजीराव प्रथम के समय से मराठा अभियानों में सक्रिय अनुभवी सेनानायक था। उसने मालवा और उत्तर भारत में मराठा शक्ति के विस्तार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। पानीपत अभियान में रणनीति को लेकर उसके और सदाशिवराव भाऊ के बीच मतभेद बताए जाते हैं। वह युद्ध से जीवित लौटने वाले प्रमुख मराठा सरदारों में था।
66. पानीपत में मराठों की पराजय का प्रमुख कारण क्या था?
A. नौसेना की अनुपस्थिति
B. लंबी आपूर्ति व्यवस्था और स्थानीय सहयोग की कमी
C. दक्षिण भारत में विद्रोह
D. समुद्री व्यापार का पतन
उत्तर: B. लंबी आपूर्ति व्यवस्था और स्थानीय सहयोग की कमी
व्याख्या: मराठा सेना अपने प्रमुख आधार से बहुत दूर उत्तर भारत में अभियान चला रही थी। अब्दाली ने उनके रसद मार्गों को काटकर खाद्यान्न और चारे की कमी उत्पन्न कर दी। जाट, राजपूत और अन्य स्थानीय शक्तियों से स्थायी सहयोग नहीं बन सका। विशाल गैर-सैनिक शिविर ने भी मराठा सेना की गतिशीलता घटाई।
67. पानीपत की पराजय के कुछ समय बाद किस पेशवा की मृत्यु हो गई थी?
A. बाजीराव प्रथम
B. बालाजी बाजीराव
C. माधवराव प्रथम
D. नारायणराव
उत्तर: B. बालाजी बाजीराव
व्याख्या: पानीपत की भीषण पराजय और अपने पुत्र विश्वासराव तथा संबंधियों की मृत्यु से बालाजी बाजीराव को गहरा आघात पहुँचा। जून 1761 ईस्वी में उसकी मृत्यु हो गई। उसके बाद अल्पायु माधवराव प्रथम पेशवा बना। राज्य को आर्थिक संकट, सरदारों की प्रतिस्पर्धा और बाहरी शत्रुओं का सामना करना पड़ा।
68. पानीपत के बाद मराठा शक्ति का पुनरुत्थान किस पेशवा के नेतृत्व में हुआ था?
A. माधवराव प्रथम
B. बाजीराव द्वितीय
C. रघुनाथराव
D. नारायणराव
उत्तर: A. माधवराव प्रथम
व्याख्या: माधवराव प्रथम 1761 ईस्वी में कम आयु में पेशवा बना। उसने प्रशासनिक अनुशासन और सैन्य पुनर्गठन द्वारा मराठा शक्ति को दोबारा मजबूत किया। निजाम, मैसूर और विद्रोही सरदारों के विरुद्ध उसने सफल अभियान चलाए। उसकी असामयिक मृत्यु को मराठा साम्राज्य के लिए बड़ी क्षति माना जाता है।
69. राक्षसभुवन के युद्ध में माधवराव प्रथम ने किसे पराजित किया था?
A. हैदर अली
B. निजाम
C. अंग्रेज
D. रोहिल्ले
उत्तर: B. निजाम
व्याख्या: राक्षसभुवन का युद्ध 1763 ईस्वी में मराठों और हैदराबाद के निजाम के बीच हुआ था। माधवराव प्रथम की सेना ने निजाम को पराजित किया। इस विजय से दक्कन में मराठों की प्रतिष्ठा पुनः स्थापित हुई। युद्ध ने पानीपत के बाद मराठा सैन्य पुनरुत्थान का संकेत दिया।
70. मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय को दिल्ली के सिंहासन पर पुनः स्थापित करने में किस मराठा सरदार की प्रमुख भूमिका थी?
A. महादजी सिंधिया
B. रघुजी भोंसले
C. यशवंतराव होल्कर
D. दमाजी गायकवाड़
उत्तर: A. महादजी सिंधिया
व्याख्या: महादजी सिंधिया ने उत्तर भारत में मराठा प्रभाव का पुनर्निर्माण किया। 1771–72 ईस्वी में उन्होंने शाह आलम द्वितीय को इलाहाबाद से दिल्ली वापस लाने में सहायता की। बाद में मुगल सम्राट पर सिंधिया का प्रभाव बहुत बढ़ गया। दिल्ली की राजनीति में मराठे पुनः निर्णायक शक्ति बन गए।
71. मराठा राजनीति में ‘मराठा मैकियावेली’ किसे कहा गया है?
A. नाना फडणवीस
B. बाजीराव प्रथम
C. बालाजी विश्वनाथ
D. महादजी सिंधिया
उत्तर: A. नाना फडणवीस
व्याख्या: नाना फडणवीस पेशवा प्रशासन के कुशल वित्तज्ञ और कूटनीतिज्ञ थे। नारायणराव की मृत्यु के बाद उन्होंने बारभाई परिषद के माध्यम से सवाई माधवराव के हितों की रक्षा की। उन्होंने अंग्रेजों और मराठा सरदारों के बीच शक्ति-संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया। उनकी मृत्यु के बाद पेशवा राजनीति की स्थिरता तेजी से कमजोर हुई।
72. बारभाई परिषद का गठन किसके समर्थन में किया गया था?
A. रघुनाथराव
B. सवाई माधवराव
C. बाजीराव द्वितीय
D. अमृतराव
उत्तर: B. सवाई माधवराव
व्याख्या: नारायणराव की हत्या के बाद उनकी गर्भवती पत्नी गंगाबाई ने माधवराव द्वितीय को जन्म दिया। बारह प्रमुख मराठा सरदारों ने शिशु पेशवा की रक्षा और शासन के लिए बारभाई परिषद बनाई। नाना फडणवीस इस समूह के प्रमुख नेता थे। परिषद ने रघुनाथराव के पेशवा पद के दावे का विरोध किया।
73. पेशवा नारायणराव की हत्या किस वर्ष हुई थी?
A. 1761 ईस्वी
B. 1772 ईस्वी
C. 1773 ईस्वी
D. 1775 ईस्वी
उत्तर: C. 1773 ईस्वी
व्याख्या: पेशवा नारायणराव की हत्या अगस्त 1773 ईस्वी में शनिवार वाड़ा में हुई थी। हत्या में गारदी सैनिकों का उपयोग किया गया। उनके चाचा रघुनाथराव और चाची आनंदीबाई पर षड्यंत्र में शामिल होने के आरोप लगे। इस घटना ने मराठा राजनीति को लंबे आंतरिक संघर्ष में धकेल दिया।
74. अंग्रेजों की सहायता से पेशवा बनने का प्रयास किसने किया था?
A. रघुनाथराव
B. माधवराव प्रथम
C. नाना फडणवीस
D. महादजी सिंधिया
उत्तर: A. रघुनाथराव
व्याख्या: रघुनाथराव नारायणराव की हत्या के बाद पेशवा बना, लेकिन बारभाई परिषद ने उसका विरोध किया। उसने अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी से सैन्य सहायता प्राप्त करने का प्रयास किया। इसके बदले उसने कंपनी को क्षेत्रीय लाभ देने का वादा किया। इसी समझौते ने प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध की पृष्ठभूमि तैयार की।
75. अंग्रेजों और रघुनाथराव के बीच 1775 ईस्वी में कौन-सी संधि हुई थी?
A. सालबाई की संधि
B. सूरत की संधि
C. बसीन की संधि
D. पुरंदर की संधि
उत्तर: B. सूरत की संधि
व्याख्या: सूरत की संधि मार्च 1775 ईस्वी में रघुनाथराव और बंबई सरकार के बीच हुई थी। अंग्रेजों ने उसे पेशवा बनाने में सहायता देने का वादा किया। बदले में कंपनी को सालसेट, बेसिन और कुछ राजस्व देने की शर्त रखी गई। इस संधि से प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध आरंभ हुआ।
76. प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध कब लड़ा गया था?
A. 1757–1761 ईस्वी
B. 1775–1782 ईस्वी
C. 1803–1805 ईस्वी
D. 1817–1818 ईस्वी
उत्तर: B. 1775–1782 ईस्वी
व्याख्या: प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध रघुनाथराव के पेशवा पद के दावे से उत्पन्न हुआ। बंबई सरकार और कलकत्ता स्थित कंपनी प्रशासन की नीतियों में भी मतभेद थे। मराठा सरदारों ने कई क्षेत्रों में अंग्रेजी सेनाओं का सामना किया। युद्ध का अंत 1782 ईस्वी की सालबाई संधि से हुआ।
77. वड़गाँव की संधि किस युद्ध से संबंधित थी?
A. प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध
B. द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध
C. तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध
D. पानीपत का तृतीय युद्ध
उत्तर: A. प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध
व्याख्या: 1779 ईस्वी में मराठा सेनाओं ने अंग्रेजी सेना को तालेगाँव और वड़गाँव क्षेत्र में घेर लिया। अंग्रेजों की आपूर्ति काट दी गई और उन्हें आत्मसमर्पण की शर्तें स्वीकार करनी पड़ीं। वड़गाँव समझौते में अंग्रेजों ने जीते हुए क्षेत्र लौटाने पर सहमति दी। बंगाल सरकार ने बाद में इस समझौते को स्वीकार नहीं किया।
78. प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध किस संधि से समाप्त हुआ था?
A. देवगाँव की संधि
B. सालबाई की संधि
C. सुर्जी-अंजनगाँव की संधि
D. बसीन की संधि
उत्तर: B. सालबाई की संधि
व्याख्या: सालबाई की संधि 1782 ईस्वी में अंग्रेजों और मराठों के बीच हुई थी। महादजी सिंधिया ने समझौता कराने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंग्रेजों ने माधवराव द्वितीय को पेशवा स्वीकार किया और रघुनाथराव का समर्थन छोड़ दिया। संधि के बाद लगभग दो दशकों तक अंग्रेज-मराठा शांति बनी रही।
79. महादजी सिंधिया की सेना को यूरोपीय शैली में प्रशिक्षित करने वाला फ्रांसीसी अधिकारी कौन था?
A. डी बोएन
B. डुप्ले
C. लाली
D. बुस्सी
उत्तर: A. डी बोएन
व्याख्या: बेनोआ डी बोएन फ्रांसीसी मूल का सैन्य अधिकारी था। उसने महादजी सिंधिया की पैदल सेना और तोपखाने को यूरोपीय पद्धति पर संगठित किया। उसकी प्रशिक्षित ब्रिगेडों ने उत्तर भारत में सिंधिया की शक्ति बढ़ाई। बाद में पेरों ने इस सैन्य व्यवस्था का नेतृत्व संभाला।
80. खर्डा के युद्ध में मराठों ने किसे पराजित किया था?
A. अंग्रेजों को
B. हैदराबाद के निजाम को
C. मैसूर के टीपू सुल्तान को
D. रोहिल्लों को
उत्तर: B. हैदराबाद के निजाम को
व्याख्या: खर्डा का युद्ध 1795 ईस्वी में मराठा संघ और निजाम अली खान के बीच हुआ था। मराठा सरदारों ने संयुक्त रूप से निजाम की सेना को पराजित किया। संधि के अनुसार निजाम को क्षेत्र और बड़ी धनराशि देनी पड़ी। यह अंग्रेजी प्रभुत्व से पहले मराठों की अंतिम बड़ी संयुक्त विजय थी।
81. खर्डा के युद्ध के समय मराठा पेशवा कौन था?
A. माधवराव द्वितीय
B. बाजीराव द्वितीय
C. नारायणराव
D. माधवराव प्रथम
उत्तर: A. माधवराव द्वितीय
व्याख्या: माधवराव द्वितीय को सवाई माधवराव भी कहा जाता था। वह नारायणराव का मरणोपरांत जन्मा पुत्र था। उसके शासनकाल में वास्तविक सत्ता नाना फडणवीस और प्रभावशाली मराठा सरदारों के हाथों में थी। खर्डा की विजय के कुछ महीनों बाद 1795 ईस्वी में उसकी मृत्यु हो गई।
82. नाना फडणवीस की मृत्यु किस वर्ष हुई थी?
A. 1795 ईस्वी
B. 1800 ईस्वी
C. 1802 ईस्वी
D. 1805 ईस्वी
उत्तर: B. 1800 ईस्वी
व्याख्या: नाना फडणवीस की मृत्यु मार्च 1800 ईस्वी में हुई थी। उनके जीवनकाल में पेशवा दरबार और मराठा सरदारों के बीच संतुलन बना रहा। उनकी मृत्यु के बाद बाजीराव द्वितीय की स्थिति और अधिक अस्थिर हो गई। सिंधिया, होल्कर और अन्य घरानों की प्रतिस्पर्धा ने अंग्रेजों को हस्तक्षेप का अवसर दिया।
83. बसीन की संधि कब हुई थी?
A. 1782 ईस्वी
B. 1795 ईस्वी
C. 1802 ईस्वी
D. 1817 ईस्वी
उत्तर: C. 1802 ईस्वी
व्याख्या: बसीन की संधि 31 दिसंबर 1802 ईस्वी को पेशवा बाजीराव द्वितीय और अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच हुई थी। होल्कर से पराजित होने के बाद पेशवा अंग्रेजी संरक्षण में चला गया। उसने सहायक सेना रखने और विदेश नीति पर कंपनी का नियंत्रण स्वीकार किया। मराठा सरदारों ने इसे अपनी स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा माना।
84. अंग्रेजों के साथ बसीन की संधि करने वाला पेशवा कौन था?
A. माधवराव प्रथम
B. बाजीराव द्वितीय
C. रघुनाथराव
D. नारायणराव
उत्तर: B. बाजीराव द्वितीय
व्याख्या: बाजीराव द्वितीय मराठा साम्राज्य का अंतिम पेशवा था। यशवंतराव होल्कर से पराजित होकर वह बसीन पहुँचा और अंग्रेजों से सहायता माँगी। अंग्रेजी सैन्य सहायता से उसे पुणे की गद्दी पर वापस बैठाया गया। इस निर्भरता ने पेशवा की प्रतिष्ठा और मराठा संघ की एकता को कमजोर किया।
85. द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध कब लड़ा गया था?
A. 1775–1782 ईस्वी
B. 1790–1792 ईस्वी
C. 1803–1805 ईस्वी
D. 1817–1818 ईस्वी
उत्तर: C. 1803–1805 ईस्वी
व्याख्या: बसीन की संधि के विरोध के कारण सिंधिया और नागपुर के भोंसले अंग्रेजों से युद्ध में उतर गए। अंग्रेजी सेनाओं ने दक्कन और उत्तर भारत दोनों क्षेत्रों में अभियान चलाया। असई, अरगाँव, दिल्ली और लासवाड़ी प्रमुख युद्धस्थल थे। पराजय के बाद मराठा सरदारों को व्यापक क्षेत्र अंग्रेजों को सौंपने पड़े।
86. असई के युद्ध में अंग्रेजी सेना का नेतृत्व किसने किया था?
A. रॉबर्ट क्लाइव
B. आर्थर वेलेजली
C. लॉर्ड लेक
D. वॉरेन हेस्टिंग्स
उत्तर: B. आर्थर वेलेजली
व्याख्या: असई का युद्ध सितंबर 1803 ईस्वी में आर्थर वेलेजली और सिंधिया-भोंसले की संयुक्त सेना के बीच हुआ था। वेलेजली बाद में ड्यूक ऑफ वेलिंगटन के नाम से प्रसिद्ध हुआ। मराठा सेना के पास शक्तिशाली तोपखाना और प्रशिक्षित पैदल सैनिक थे। कठिन युद्ध के बाद अंग्रेजों ने विजय प्राप्त की।
87. लासवाड़ी के युद्ध में अंग्रेजी सेना का नेतृत्व किसने किया था?
A. लॉर्ड लेक
B. आर्थर वेलेजली
C. जॉन माल्कम
D. माउंटस्टुअर्ट एलफिंस्टन
उत्तर: A. लॉर्ड लेक
व्याख्या: लासवाड़ी का युद्ध नवंबर 1803 ईस्वी में सिंधिया की सेना और जनरल जेरार्ड लेक के बीच हुआ। सिंधिया की यूरोपीय शैली में प्रशिक्षित पैदल सेना ने कड़ा प्रतिरोध किया। अंग्रेजों की विजय से उत्तर भारत में सिंधिया की सैन्य शक्ति कमजोर हो गई। दिल्ली और आगरा पर अंग्रेजी नियंत्रण मजबूत हुआ।
88. सुर्जी-अंजनगाँव की संधि किस मराठा घराने के साथ हुई थी?
A. होल्कर
B. सिंधिया
C. गायकवाड़
D. पेशवा
उत्तर: B. सिंधिया
व्याख्या: सुर्जी-अंजनगाँव की संधि दिसंबर 1803 ईस्वी में दौलतराव सिंधिया और अंग्रेजों के बीच हुई थी। सिंधिया को दिल्ली, दोआब और गुजरात के कई क्षेत्रों पर अपना दावा छोड़ना पड़ा। अंग्रेजों को उत्तर भारत में महत्त्वपूर्ण रणनीतिक लाभ मिला। सिंधिया की विदेश नीति पर भी अंग्रेजी प्रभाव बढ़ा।
89. देवगाँव की संधि किस मराठा शासक के साथ हुई थी?
A. नागपुर के भोंसले
B. इंदौर के होल्कर
C. ग्वालियर के सिंधिया
D. बड़ौदा के गायकवाड़
उत्तर: A. नागपुर के भोंसले
व्याख्या: देवगाँव की संधि 1803 ईस्वी में नागपुर के रघुजी भोंसले द्वितीय और अंग्रेजों के बीच हुई थी। अरगाँव के युद्ध में पराजय के बाद भोंसले ने संधि स्वीकार की। उड़ीसा और अन्य क्षेत्रों पर उसका अधिकार समाप्त हुआ। अंग्रेजों को बंगाल और मद्रास के बीच स्थलीय संपर्क मजबूत करने में सहायता मिली।
90. द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध के अंतिम चरण में अंग्रेजों का विरोध जारी रखने वाला प्रमुख मराठा सरदार कौन था?
A. यशवंतराव होल्कर
B. महादजी सिंधिया
C. नाना फडणवीस
D. रघुजी भोंसले प्रथम
उत्तर: A. यशवंतराव होल्कर
व्याख्या: यशवंतराव होल्कर ने सिंधिया और भोंसले की संधियों के बाद भी अंग्रेजों का विरोध जारी रखा। उसने राजस्थान और उत्तर भारत में तीव्र सैन्य अभियान चलाए। अंग्रेज भरतपुर के किले पर अधिकार करने में असफल रहे। 1805 ईस्वी में राजघाट की संधि के साथ संघर्ष समाप्त हुआ।
91. तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध कब हुआ था?
A. 1803–1805 ईस्वी
B. 1814–1816 ईस्वी
C. 1817–1818 ईस्वी
D. 1824–1826 ईस्वी
उत्तर: C. 1817–1818 ईस्वी
व्याख्या: तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध मराठा राजनीतिक स्वतंत्रता का अंतिम बड़ा संघर्ष था। अंग्रेजों ने पिंडारियों के दमन के नाम पर मध्य भारत में विशाल सेना तैनात की। पेशवा, भोंसले और होल्कर की सेनाओं ने अलग-अलग स्थानों पर अंग्रेजों से युद्ध किया। समन्वय की कमी के कारण मराठा शक्तियाँ एक-एक करके पराजित हुईं।
92. किरकी का युद्ध किनके बीच हुआ था?
A. अंग्रेजों और पेशवा बाजीराव द्वितीय के बीच
B. अंग्रेजों और अहमद शाह अब्दाली के बीच
C. मराठों और निजाम के बीच
D. सिंधिया और होल्कर के बीच
उत्तर: A. अंग्रेजों और पेशवा बाजीराव द्वितीय के बीच
व्याख्या: किरकी का युद्ध नवंबर 1817 ईस्वी में पुणे के निकट हुआ था। पेशवा बाजीराव द्वितीय की सेना ने अंग्रेजी रेजीडेंसी पर दबाव बनाने के बाद युद्ध किया। संख्या में कम होने के बावजूद अंग्रेजी सेना ने अपनी स्थिति बनाए रखी। पराजय के बाद पेशवा पुणे छोड़कर दक्षिण और मध्य भारत की ओर चला गया।
93. कोरेगाँव का युद्ध किस नदी के किनारे लड़ा गया था?
A. नर्मदा
B. भीमा
C. गोदावरी
D. कृष्णा
उत्तर: B. भीमा
व्याख्या: कोरेगाँव का युद्ध 1 जनवरी 1818 ईस्वी को भीमा नदी के किनारे हुआ था। अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी की एक छोटी टुकड़ी और पेशवा की सेना के बीच दिनभर संघर्ष चला। दोनों पक्षों को हानि हुई और पेशवा की सेना बाद में वहाँ से हट गई। यह युद्ध तृतीय आंग्ल-मराठा संघर्ष का प्रसिद्ध प्रसंग है।
94. आष्टी के युद्ध में मारा गया पेशवा का प्रमुख सेनापति कौन था?
A. बापू गोखले
B. त्र्यंबकजी डेंगले
C. मोरोपंत पिंगले
D. हंबीरराव मोहिते
उत्तर: A. बापू गोखले
व्याख्या: बापू गोखले पेशवा बाजीराव द्वितीय का प्रमुख और निष्ठावान सेनापति था। फरवरी 1818 ईस्वी में आष्टी के युद्ध में उसने अंग्रेजी सेना का सामना किया। युद्ध करते समय उसकी मृत्यु हो गई। उसके निधन से पेशवा की शेष सैन्य शक्ति को गंभीर आघात पहुँचा।
95. बाजीराव द्वितीय ने किस अंग्रेज अधिकारी के सामने आत्मसमर्पण किया था?
A. जॉन माल्कम
B. आर्थर वेलेजली
C. लॉर्ड लेक
D. हेनरी लॉरेंस
उत्तर: A. जॉन माल्कम
व्याख्या: जून 1818 ईस्वी में बाजीराव द्वितीय ने सर जॉन माल्कम के सामने आत्मसमर्पण किया। अंग्रेजों ने पेशवा पद समाप्त कर दिया और उसे बड़ी वार्षिक पेंशन दी। उसे कानपुर के निकट बिठूर में रहने की अनुमति मिली। उसके दत्तक पुत्र नाना साहेब बाद में 1857 के विद्रोह के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए।
96. मराठा पेशवा शासन का अंत किस वर्ष हुआ था?
A. 1805 ईस्वी
B. 1813 ईस्वी
C. 1818 ईस्वी
D. 1824 ईस्वी
उत्तर: C. 1818 ईस्वी
व्याख्या: तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध के बाद 1818 ईस्वी में पेशवा शासन समाप्त हुआ। अंग्रेजों ने बाजीराव द्वितीय को पदच्युत कर दिया। उसके अधिकांश प्रदेश बंबई प्रेसीडेंसी में मिला लिए गए। इस विजय से ईस्ट इंडिया कंपनी भारत की सर्वोच्च राजनीतिक शक्ति बन गई।
97. मराठा साम्राज्य का अंतिम पेशवा कौन था?
A. माधवराव द्वितीय
B. बाजीराव द्वितीय
C. नारायणराव
D. रघुनाथराव
उत्तर: B. बाजीराव द्वितीय
व्याख्या: बाजीराव द्वितीय 1796 से 1818 ईस्वी तक विभिन्न परिस्थितियों में पेशवा रहा। उसकी निर्भरता अंग्रेजों पर बसीन की संधि के बाद बढ़ गई। बाद में उसने अंग्रेजी नियंत्रण से मुक्त होने का प्रयास किया, जिससे तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध आरंभ हुआ। पराजय के बाद पेशवा पद स्थायी रूप से समाप्त कर दिया गया।
98. पेशवा शासन समाप्त करने के बाद अंग्रेजों ने सतारा का शासक किसे बनाया था?
A. प्रताप सिंह
B. शाहू द्वितीय
C. संभाजी द्वितीय
D. रामराजा
उत्तर: A. प्रताप सिंह
व्याख्या: अंग्रेजों ने शिवाजी के वंशज प्रताप सिंह को सतारा की सीमित रियासत का शासक बनाया। इसका उद्देश्य पेशवा शासन और छत्रपति की पारंपरिक सत्ता को अलग दिखाना था। सतारा राज्य अंग्रेजी सर्वोच्चता के अधीन था। 1848 ईस्वी में इसे विलय की नीति के तहत अंग्रेजी राज्य में मिला लिया गया।
99. मराठा नौसेना का सर्वाधिक प्रसिद्ध सेनानायक कौन था?
A. कान्होजी आंग्रे
B. तानाजी मालुसरे
C. बाजी प्रभु देशपांडे
D. संताजी घोरपड़े
उत्तर: A. कान्होजी आंग्रे
व्याख्या: कान्होजी आंग्रे ने सत्रहवीं शताब्दी के अंत और अठारहवीं शताब्दी के आरंभ में मराठा नौसेना का नेतृत्व किया। उसका प्रभाव कोंकण तट के अनेक समुद्री दुर्गों पर था। उसने अंग्रेजों, पुर्तगालियों और जंजीरा के सिद्दियों को चुनौती दी। यूरोपीय कंपनियाँ उसे समुद्री डाकू कहती थीं, जबकि मराठा शासन में वह नौसेनाध्यक्ष था।
100. मराठा साम्राज्य की सबसे प्रमुख ऐतिहासिक विरासत क्या मानी जाती है?
A. समुद्री व्यापार का पूर्ण अंत
B. स्वराज्य, स्थानीय प्रशासन और संगठित प्रतिरोध की परंपरा
C. दिल्ली सल्तनत की पुनर्स्थापना
D. भारत में यूरोपीय शासन की स्थापना
उत्तर: B. स्वराज्य, स्थानीय प्रशासन और संगठित प्रतिरोध की परंपरा
व्याख्या: मराठा साम्राज्य ने स्वराज्य की धारणा को सैन्य और प्रशासनिक आधार प्रदान किया। शिवाजी की दुर्ग-व्यवस्था, स्थानीय प्रशासन, नौसेना और छापामार नीति इसकी प्रमुख विशेषताएँ थीं। पेशवाओं के समय मराठा प्रभाव भारतीय उपमहाद्वीप के विशाल क्षेत्र तक फैल गया। आंतरिक विभाजन के बावजूद मराठों ने मुगल और अंग्रेजी सत्ता को लंबे समय तक चुनौती दी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मराठा का सबसे शक्तिशाली शासक कौन था?
सामान्यतः छत्रपति शिवाजी महाराज को मराठों का सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली शासक माना जाता है। उन्होंने विभिन्न मराठा सरदारों को संगठित करके स्वराज्य की स्थापना की, मजबूत दुर्ग-व्यवस्था और प्रशासन विकसित किया तथा 1674 ईस्वी में रायगढ़ में छत्रपति के रूप में राज्याभिषेक कराया।
मराठों के पूर्वज कौन थे?
मराठों का संबंध किसी एक व्यक्ति या एक ही पूर्वज से नहीं माना जाता। वे मुख्यतः पश्चिमी दक्कन और वर्तमान महाराष्ट्र के मराठीभाषी कृषक, पशुपालक और योद्धा समुदायों तथा अनेक स्थानीय कुलों से विकसित हुए थे। सत्रहवीं शताब्दी में शिवाजी महाराज के नेतृत्व में ये समुदाय एक प्रमुख राजनीतिक और सैनिक शक्ति के रूप में संगठित हुए।
मराठा साम्राज्य का अंत कैसे हुआ था?
मराठा सरदारों के आपसी संघर्ष, पेशवा की कमजोर होती सत्ता और अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी के हस्तक्षेप से साम्राज्य धीरे-धीरे कमजोर हुआ। तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध में पराजय के बाद 1818 ईस्वी में पेशवा बाजीराव द्वितीय को पद से हटा दिया गया और मराठा साम्राज्य की स्वतंत्र केंद्रीय सत्ता समाप्त हो गई।
छत्रपति शिवाजी के वंशज कौन थे?
छत्रपति शिवाजी महाराज के दो प्रमुख पुत्र संभाजी और राजाराम थे। संभाजी के पुत्र शाहू महाराज हुए, जबकि राजाराम और ताराबाई के पुत्र शिवाजी द्वितीय थे। आगे चलकर शिवाजी महाराज का राजवंश मुख्य रूप से सतारा और कोल्हापुर की दो शाखाओं में विभाजित हुआ।
निष्कर्ष
maratha empire mock test के माध्यम से मराठा साम्राज्य के उदय, प्रशासनिक व्यवस्था, सैन्य संगठन, प्रमुख युद्धों और राजनीतिक विस्तार से जुड़े तथ्यों को क्रमबद्ध रूप से समझा जा सकता है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य की स्थापना करते हुए दुर्ग-व्यवस्था, अष्टप्रधान परिषद, नौसेना और गणिमी कावा जैसी युद्ध-पद्धति को मजबूत आधार प्रदान किया।
शिवाजी के बाद संभाजी, राजाराम और ताराबाई ने औरंगजेब की विशाल सेना के विरुद्ध मराठा प्रतिरोध जारी रखा। शाहू महाराज और पेशवाओं के समय मराठा शक्ति दक्कन से निकलकर मालवा, गुजरात, बुंदेलखंड और उत्तर भारत तक फैल गई। सिंधिया, होल्कर, गायकवाड़ और भोंसले जैसे घरानों ने मराठा संघ को व्यापक राजनीतिक स्वरूप दिया।
पानीपत के तृतीय युद्ध की पराजय के बाद भी माधवराव प्रथम और महादजी सिंधिया के नेतृत्व में मराठा शक्ति का पुनरुत्थान हुआ। बाद में आपसी संघर्ष, पेशवा की कमजोर होती स्थिति और अंग्रेजों के बढ़ते हस्तक्षेप के कारण 1818 ईस्वी में मराठा साम्राज्य की केंद्रीय सत्ता समाप्त हो गई। इसके बावजूद स्वराज्य, स्थानीय प्रशासन, दुर्ग-नीति और संगठित सैन्य प्रतिरोध की उसकी विरासत भारतीय इतिहास में स्थायी महत्त्व रखती है।