Best Delhi Sultanate Mock Test: Top 100 History MCQs

Delhi Sultanate Mock Test – दिल्ली सल्तनत मॉक टेस्ट | Top 100 Medieval History MCQs in Hindi

Delhi Sultanate Mock Test मध्यकालीन भारत के इतिहास (Medieval History) की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए तैयार किया गया एक व्यापक अभ्यास संग्रह है। दिल्ली सल्तनत भारतीय इतिहास का वह महत्वपूर्ण काल है, जिसमें गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैय्यद और लोदी वंशों ने शासन किया। इस काल की प्रशासनिक व्यवस्था, आर्थिक नीतियाँ, सैन्य संगठन, स्थापत्य कला, धार्मिक नीति तथा प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं से संबंधित प्रश्न लगभग सभी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं में नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

इस Top 100 Delhi Sultanate Mock Test MCQs in Hindi में विषय के सभी महत्वपूर्ण टॉपिक्स को शामिल किया गया है, ताकि आप एक ही स्थान पर सम्पूर्ण अभ्यास कर सकें। प्रश्नों का चयन SSC, UPSC, Railway, Banking, Police, CTET, REET, State PCS, Patwari, Gram Sevak तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के नवीनतम परीक्षा पैटर्न और पिछले वर्षों के प्रश्नों के आधार पर किया गया है।

प्रत्येक प्रश्न के साथ सही उत्तर और तथ्यात्मक व्याख्या दी गई है, जिससे केवल उत्तर याद करने के बजाय उसके पीछे की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण तथ्य तथा संबंधित सामान्य ज्ञान को भी समझा जा सके। यदि आप मध्यकालीन भारत के इतिहास में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं और परीक्षा में अधिक अंक प्राप्त करना चाहते हैं, तो यह Delhi Sultanate Mock Test आपके लिए एक उपयोगी अध्ययन सामग्री सिद्ध होगा।

Delhi Sultanate Mock Test – मध्यकालीन भारत इतिहास MCQ Questions 1-20

1. दिल्ली सल्तनत की स्थापना किसने की थी?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. इल्तुतमिश
C. मुहम्मद गौरी
D. बलबन

उत्तर: A. कुतुबुद्दीन ऐबक

व्याख्या: 1206 ई. में मुहम्मद गौरी की मृत्यु के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने स्वयं को स्वतंत्र शासक घोषित कर दिल्ली सल्तनत की स्थापना की। वह मूल रूप से तुर्क मूल का दास था, जिसे बाद में गौरी ने अपना विश्वसनीय सेनापति बनाया। उसके शासनकाल में गुलाम (ममलूक) वंश की नींव पड़ी और भारत में तुर्क शासन का स्वतंत्र युग प्रारम्भ हुआ। ऐबक ने कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद का विस्तार कराया तथा कुतुब मीनार के निर्माण की शुरुआत भी कराई।


2. दिल्ली सल्तनत का प्रथम वंश कौन-सा था?

A. खिलजी वंश
B. तुगलक वंश
C. गुलाम वंश
D. लोदी वंश

उत्तर: C. गुलाम वंश

व्याख्या: गुलाम वंश को ममलूक वंश भी कहा जाता है और यह दिल्ली सल्तनत का प्रथम शासक वंश था। इसकी स्थापना 1206 ई. में कुतुबुद्दीन ऐबक ने की थी। इस वंश के प्रमुख शासकों में कुतुबुद्दीन ऐबक, इल्तुतमिश, रज़िया सुल्तान और बलबन शामिल हैं। यह वंश लगभग 84 वर्षों तक शासन करने के बाद 1290 ई. में समाप्त हुआ और इसके स्थान पर खिलजी वंश सत्ता में आया।


3. कुतुब मीनार का निर्माण किसने प्रारम्भ कराया था?

A. इल्तुतमिश
B. बलबन
C. कुतुबुद्दीन ऐबक
D. अलाउद्दीन खिलजी

उत्तर: C. कुतुबुद्दीन ऐबक

व्याख्या: कुतुब मीनार का निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने विजय स्मारक के रूप में प्रारम्भ कराया था, लेकिन वह केवल प्रथम मंजिल का निर्माण ही करा सका। उसके उत्तराधिकारी इल्तुतमिश ने शेष मंजिलों का निर्माण पूरा कराया और बाद में फिरोज शाह तुगलक ने क्षतिग्रस्त भागों की मरम्मत कराई। यह स्मारक आज यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और प्रारम्भिक इंडो-इस्लामिक स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।


4. दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक किसे माना जाता है?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. इल्तुतमिश
C. बलबन
D. रज़िया सुल्तान

उत्तर: B. इल्तुतमिश

व्याख्या: इल्तुतमिश ने दिल्ली सल्तनत को राजनीतिक स्थिरता प्रदान की और विद्रोही सूबेदारों को पराजित कर केंद्रीय सत्ता को मजबूत बनाया। उसने दिल्ली को स्थायी राजधानी बनाया तथा बगदाद के खलीफा से मान्यता प्राप्त कर अपने शासन की वैधता स्थापित की। प्रशासनिक सुधारों और साम्राज्य विस्तार के कारण इतिहासकार उसे दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक मानते हैं।


5. रज़िया सुल्तान किस वंश की शासिका थीं?

A. खिलजी वंश
B. तुगलक वंश
C. गुलाम वंश
D. लोदी वंश

उत्तर: C. गुलाम वंश

व्याख्या: रज़िया सुल्तान इल्तुतमिश की पुत्री थीं और 1236 ई. में दिल्ली की गद्दी पर बैठीं। वह दिल्ली सल्तनत की पहली और एकमात्र महिला शासक थीं। उन्होंने पर्दा प्रथा का पालन नहीं किया और पुरुष शासकों की तरह दरबार तथा सेना का नेतृत्व किया। तुर्क अमीरों के विरोध के कारण उनका शासन अधिक समय तक नहीं चल सका और 1240 ई. में उनकी मृत्यु हो गई।


6. ‘तुर्कान-ए-चिहलगानी’ (चालीसा) संगठन का गठन किसने किया था?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. इल्तुतमिश
C. बलबन
D. अलाउद्दीन खिलजी

उत्तर: B. इल्तुतमिश

व्याख्या: तुर्कान-ए-चिहलगानी चालीस प्रभावशाली तुर्क अमीरों का एक विशेष समूह था, जिसका गठन इल्तुतमिश ने प्रशासन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से किया था। प्रारम्भ में इस समूह ने सल्तनत की स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन बाद में यही अमीर उत्तराधिकार के मामलों में हस्तक्षेप करने लगे। रज़िया सुल्तान सहित कई शासकों को इस समूह के विरोध का सामना करना पड़ा।


7. ‘लौह एवं रक्त की नीति’ किस शासक से संबंधित है?

A. बलबन
B. इल्तुतमिश
C. अलाउद्दीन खिलजी
D. सिकंदर लोदी

उत्तर: A. बलबन

व्याख्या: बलबन ने राजसत्ता की प्रतिष्ठा स्थापित करने के लिए कठोर शासन नीति अपनाई, जिसे ‘लौह एवं रक्त की नीति’ कहा जाता है। उसने विद्रोहियों, डाकुओं और सीमावर्ती क्षेत्रों के शत्रुओं का कठोर दमन किया। बलबन ने सुल्तान को ईश्वर का प्रतिनिधि मानते हुए शाही गरिमा को सर्वोच्च स्थान दिया तथा दरबार में ‘सिजदा’ और ‘पैबोस’ जैसी परंपराओं को बढ़ावा दिया।


8. खिलजी वंश का संस्थापक कौन था?

A. जलालुद्दीन खिलजी
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. गयासुद्दीन तुगलक
D. बहलोल लोदी

उत्तर: A. जलालुद्दीन खिलजी

व्याख्या: जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने 1290 ई. में गुलाम वंश का अंत करके खिलजी वंश की स्थापना की। वह खिलजी वंश का प्रथम शासक था और अपेक्षाकृत उदार स्वभाव का माना जाता है। उसके भतीजे तथा दामाद अलाउद्दीन खिलजी ने 1296 ई. में उसकी हत्या कर स्वयं सत्ता प्राप्त की। इसके बाद अलाउद्दीन के शासनकाल में सल्तनत का सबसे अधिक विस्तार हुआ।


9. दक्षिण भारत पर सफल सैन्य अभियान किस शासक के शासनकाल में चलाए गए थे?

A. इल्तुतमिश
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. बलबन
D. सिकंदर लोदी

उत्तर: B. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने अपने सेनापति मलिक काफूर के नेतृत्व में दक्षिण भारत के विरुद्ध कई सफल सैन्य अभियान चलाए। इन अभियानों में देवगिरि, वारंगल, द्वारसमुद्र और मदुरै जैसे राज्यों को पराजित किया गया। दक्षिण के इन राज्यों से विशाल धन-संपत्ति, हाथी, घोड़े और बहुमूल्य रत्न प्राप्त हुए, जिससे दिल्ली सल्तनत की आर्थिक स्थिति अत्यंत मजबूत हुई।


10. बाजार नियंत्रण नीति किस शासक ने लागू की थी?

A. इल्तुतमिश
B. बलबन
C. अलाउद्दीन खिलजी
D. फिरोज तुगलक

उत्तर: C. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने सेना के लिए आवश्यक वस्तुएँ सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से व्यापक बाजार नियंत्रण नीति लागू की। उसने अनाज, घोड़े, कपड़े तथा अन्य वस्तुओं के लिए अलग-अलग बाजार स्थापित किए और उनके मूल्य निश्चित किए। इस व्यवस्था की निगरानी के लिए दीवान-ए-रियासत तथा शहना-ए-मंडी जैसे अधिकारियों की नियुक्ति की गई, जिससे व्यापारियों द्वारा कालाबाज़ारी और कृत्रिम मूल्य वृद्धि पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सका।

11. ‘दीवान-ए-रियासत’ विभाग की स्थापना किसने की थी?

A. बलबन
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. मुहम्मद बिन तुगलक
D. इल्तुतमिश

उत्तर: B. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: दीवान-ए-रियासत की स्थापना अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी बाजार नियंत्रण नीति को प्रभावी बनाने के लिए की थी। यह विभाग वस्तुओं की कीमतों, व्यापारियों की गतिविधियों तथा बाजार व्यवस्था की निगरानी करता था। इस विभाग के माध्यम से अनाज, कपड़ा, घोड़े और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के मूल्य निर्धारित किए जाते थे। व्यापारियों द्वारा कालाबाज़ारी, जमाखोरी और कृत्रिम मूल्य वृद्धि रोकने के लिए कठोर दंड का प्रावधान भी किया गया था।


12. तुगलक वंश का संस्थापक कौन था?

A. मुहम्मद बिन तुगलक
B. फिरोज शाह तुगलक
C. गयासुद्दीन तुगलक
D. नासिरुद्दीन महमूद

उत्तर: C. गयासुद्दीन तुगलक

व्याख्या: गयासुद्दीन तुगलक ने 1320 ई. में तुगलक वंश की स्थापना की और खिलजी वंश के शासन का अंत किया। उसका मूल नाम गाजी मलिक था तथा वह एक कुशल सेनापति के रूप में प्रसिद्ध था। सत्ता प्राप्त करने के बाद उसने सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा मजबूत की और प्रशासनिक व्यवस्था को पुनर्गठित किया। दिल्ली के निकट स्थित तुगलकाबाद किले का निर्माण भी उसी के शासनकाल की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता है।


13. राजधानी को दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित करने का निर्णय किसने लिया था?

A. गयासुद्दीन तुगलक
B. फिरोज शाह तुगलक
C. मुहम्मद बिन तुगलक
D. सिकंदर लोदी

उत्तर: C. मुहम्मद बिन तुगलक

व्याख्या: मुहम्मद बिन तुगलक ने राजधानी को दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित करने का निर्णय साम्राज्य के मध्य भाग से प्रभावी प्रशासन स्थापित करने के उद्देश्य से लिया था। उसने बड़ी संख्या में लोगों को भी दिल्ली से दौलताबाद जाने का आदेश दिया, जिससे जनता को अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। योजना सफल नहीं हो सकी और कुछ वर्षों बाद राजधानी पुनः दिल्ली वापस लानी पड़ी। यह निर्णय उसके शासनकाल की सबसे चर्चित प्रशासनिक योजनाओं में माना जाता है।


14. सांकेतिक मुद्रा (Token Currency) का प्रचलन किस शासक ने किया था?

A. अलाउद्दीन खिलजी
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. बलबन

उत्तर: B. मुहम्मद बिन तुगलक

व्याख्या: मुहम्मद बिन तुगलक ने चाँदी के सिक्कों के स्थान पर ताँबे और पीतल की सांकेतिक मुद्रा जारी की थी। उसका उद्देश्य कीमती धातुओं की बचत करना तथा राजकोष की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाना था। पर्याप्त नियंत्रण व्यवस्था के अभाव में बड़ी संख्या में नकली सिक्के बनाए जाने लगे, जिससे मुद्रा प्रणाली पर लोगों का विश्वास समाप्त हो गया। अंततः सुल्तान को यह योजना वापस लेकर नकली सिक्कों के बदले असली चाँदी के सिक्के देने पड़े।


15. नहरों के निर्माण और सिंचाई व्यवस्था के विकास के लिए प्रसिद्ध शासक कौन था?

A. अलाउद्दीन खिलजी
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. बहलोल लोदी

उत्तर: C. फिरोज शाह तुगलक

व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने कृषि उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से अनेक नहरों का निर्माण कराया, जिनमें यमुना और सतलुज से निकाली गई नहरें विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। उसने सिंचाई व्यवस्था के विस्तार के साथ बाग, सराय, अस्पताल और मदरसों का भी निर्माण कराया। उसके शासनकाल में कई नए नगर बसाए गए, जिनमें फिरोजाबाद प्रमुख था। लोककल्याण और सार्वजनिक निर्माण कार्य उसके शासन की प्रमुख विशेषताएँ थीं।


16. सैय्यद वंश का संस्थापक कौन था?

A. खिज्र खाँ
B. बहलोल लोदी
C. इब्राहिम लोदी
D. सिकंदर लोदी

उत्तर: A. खिज्र खाँ

व्याख्या: खिज्र खाँ ने 1414 ई. में सैय्यद वंश की स्थापना की। वह तैमूर का प्रतिनिधि माना जाता था और तैमूर के आक्रमण के बाद दिल्ली की सत्ता पर उसका अधिकार स्थापित हुआ। उसने स्वयं को ‘सुल्तान’ की उपाधि धारण नहीं की बल्कि तैमूरी शासकों के अधीन प्रतिनिधि के रूप में शासन किया। सैय्यद वंश का शासन अपेक्षाकृत कमजोर रहा और इसका प्रभाव मुख्यतः दिल्ली तथा उसके आसपास के क्षेत्रों तक सीमित था।


17. लोदी वंश का संस्थापक कौन था?

A. सिकंदर लोदी
B. इब्राहिम लोदी
C. बहलोल लोदी
D. दौलत खाँ लोदी

उत्तर: C. बहलोल लोदी

व्याख्या: बहलोल लोदी ने 1451 ई. में लोदी वंश की स्थापना की और सैय्यद वंश का अंत किया। वह अफगान मूल का पहला शासक था जिसने दिल्ली की गद्दी प्राप्त की। बहलोल ने जौनपुर सहित अनेक क्षेत्रों को अपने साम्राज्य में मिलाकर सल्तनत का विस्तार किया। उसके शासनकाल से दिल्ली सल्तनत में अफगान राजनीतिक प्रभाव की शुरुआत मानी जाती है।


18. आगरा नगर की स्थापना किस शासक ने की थी?

A. बहलोल लोदी
B. सिकंदर लोदी
C. इब्राहिम लोदी
D. फिरोज शाह तुगलक

उत्तर: B. सिकंदर लोदी

व्याख्या: सिकंदर लोदी ने 1504 ई. में आगरा नगर की स्थापना की और इसे एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक तथा सैन्य केंद्र के रूप में विकसित किया। यमुना नदी के किनारे स्थित होने के कारण यह नगर व्यापार और आवागमन की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी था। बाद में मुगल शासकों विशेषकर अकबर और शाहजहाँ ने आगरा को अपनी प्रमुख राजधानी बनाया। आज भी आगरा मध्यकालीन भारतीय इतिहास का एक प्रमुख ऐतिहासिक नगर माना जाता है।


19. प्रथम पानीपत का युद्ध किनके बीच लड़ा गया था?

A. बाबर और इब्राहिम लोदी
B. बाबर और सिकंदर लोदी
C. बाबर और बहलोल लोदी
D. बाबर और दौलत खाँ लोदी

उत्तर: A. बाबर और इब्राहिम लोदी

व्याख्या: प्रथम पानीपत का युद्ध 21 अप्रैल 1526 ई. को बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच लड़ा गया था। इस युद्ध में बाबर ने तोपखाने तथा तुलुगमा जैसी आधुनिक युद्ध रणनीति का प्रभावी उपयोग किया। इब्राहिम लोदी युद्धभूमि में मारा गया और इसके साथ ही दिल्ली सल्तनत का अंत हो गया। इस विजय के बाद भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना हुई, जिसने लगभग तीन शताब्दियों तक भारतीय इतिहास को प्रभावित किया।


20. दिल्ली सल्तनत का अंतिम शासक कौन था?

A. सिकंदर लोदी
B. बहलोल लोदी
C. इब्राहिम लोदी
D. खिज्र खाँ

उत्तर: C. इब्राहिम लोदी

व्याख्या: इब्राहिम लोदी लोदी वंश तथा सम्पूर्ण दिल्ली सल्तनत का अंतिम शासक था। उसके शासनकाल में अफगान सरदारों के साथ मतभेद बढ़ गए, जिससे केंद्रीय सत्ता कमजोर हो गई। पंजाब के कुछ सरदारों ने बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया, जिसके परिणामस्वरूप 1526 ई. में प्रथम पानीपत का युद्ध हुआ। इस युद्ध में इब्राहिम लोदी की मृत्यु के साथ दिल्ली सल्तनत का इतिहास समाप्त हुआ और भारत में मुगल शासन का आरम्भ हुआ।

दिल्ली सल्तनत MCQ Questions 21-40

21. कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु किस खेल के दौरान हुई थी?

A. पोलो (चौगान)
B. शतरंज
C. कुश्ती
D. घुड़दौड़

उत्तर: A. पोलो (चौगान)

व्याख्या: कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु 1210 ई. में लाहौर में चौगान (पोलो) खेलते समय घोड़े से गिरने के कारण हुई थी। उसकी आकस्मिक मृत्यु के बाद आरामशाह को गद्दी पर बैठाया गया, लेकिन वह अधिक समय तक शासन नहीं कर सका। बाद में इल्तुतमिश ने सत्ता संभालकर दिल्ली सल्तनत को स्थिरता प्रदान की। ऐबक का मकबरा वर्तमान पाकिस्तान के लाहौर शहर में स्थित है।


22. ‘लाख बख्श’ की उपाधि किसे दी गई थी?

A. इल्तुतमिश
B. कुतुबुद्दीन ऐबक
C. बलबन
D. अलाउद्दीन खिलजी

उत्तर: B. कुतुबुद्दीन ऐबक

व्याख्या: कुतुबुद्दीन ऐबक अपनी उदारता और दानशील स्वभाव के कारण ‘लाख बख्श’ अर्थात ‘लाखों का दाता’ कहलाया। वह विद्वानों, सैनिकों और जरूरतमंदों को उदारतापूर्वक धन प्रदान करता था। इसी कारण उसे समकालीन इतिहासकारों ने इस सम्मानजनक उपाधि से संबोधित किया। उसका शासनकाल भले ही छोटा रहा, लेकिन उसने दिल्ली सल्तनत की मजबूत नींव रखी।


23. दिल्ली सल्तनत का पहला सुल्तान कौन था जिसने खलीफा से वैधता की स्वीकृति प्राप्त की?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. इल्तुतमिश
C. बलबन
D. जलालुद्दीन खिलजी

उत्तर: B. इल्तुतमिश

व्याख्या: इल्तुतमिश ने बगदाद के अब्बासी खलीफा से औपचारिक मान्यता प्राप्त कर अपने शासन को वैधता प्रदान की। इसके बाद उसे ‘सुल्तान-ए-हिंद’ के रूप में स्वीकार किया गया और उसके नाम के सिक्के जारी किए गए। इस मान्यता से दिल्ली सल्तनत की राजनीतिक प्रतिष्ठा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। मध्यकालीन भारत में यह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि मानी जाती है।


24. दिल्ली सल्तनत में शुद्ध अरबी सिक्कों के स्थान पर ‘टंका’ और ‘जीटल’ मुद्रा किसने जारी की?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. इल्तुतमिश
C. अलाउद्दीन खिलजी
D. मुहम्मद बिन तुगलक

उत्तर: B. इल्तुतमिश

व्याख्या: इल्तुतमिश ने चाँदी का ‘टंका’ और ताँबे का ‘जीटल’ सिक्का जारी किया, जिससे दिल्ली सल्तनत की मुद्रा व्यवस्था को स्थिरता मिली। टंका बाद के कई शासकों के समय भी प्रमुख मुद्रा बना रहा। संगठित मुद्रा प्रणाली से व्यापार और राजस्व संग्रह में सुविधा हुई। भारतीय मध्यकालीन आर्थिक इतिहास में इल्तुतमिश की यह उपलब्धि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।


25. रज़िया सुल्तान के शासनकाल में ‘अमीर-ए-आखूर’ कौन था?

A. मलिक काफूर
B. याकूत
C. नुसरत खाँ
D. जफर खाँ

उत्तर: B. याकूत

व्याख्या: याकूत एक हब्शी (अबीसीनियाई) अधिकारी था, जिसे रज़िया सुल्तान ने ‘अमीर-ए-आखूर’ अर्थात शाही अस्तबल का प्रमुख नियुक्त किया था। तुर्क अमीरों ने याकूत को उच्च पद दिए जाने का विरोध किया और इसी कारण रज़िया के विरुद्ध षड्यंत्र तेज हो गए। अंततः विद्रोह के दौरान याकूत की हत्या कर दी गई। रज़िया के पतन के प्रमुख कारणों में यह घटना भी शामिल थी।


26. बलबन ने किस सिद्धांत के आधार पर राजसत्ता की प्रतिष्ठा बढ़ाने का प्रयास किया?

A. दैवी अधिकार सिद्धांत
B. समानता का सिद्धांत
C. जनप्रतिनिधित्व सिद्धांत
D. गणतांत्रिक सिद्धांत

उत्तर: A. दैवी अधिकार सिद्धांत

व्याख्या: बलबन स्वयं को ईश्वर का प्रतिनिधि मानता था और उसने राजसत्ता को सर्वोच्च स्थान देने के लिए दैवी अधिकार सिद्धांत को अपनाया। उसने दरबार में ‘सिजदा’ और ‘पैबोस’ जैसी फ़ारसी परंपराओं को अनिवार्य बनाया। उसका उद्देश्य सुल्तान के प्रति सम्मान और भय दोनों स्थापित करना था। इस नीति से केंद्रीय सत्ता पहले की तुलना में अधिक सशक्त हुई।


27. अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर आक्रमण किस वर्ष किया था?

A. 1296 ई.
B. 1303 ई.
C. 1311 ई.
D. 1320 ई.

उत्तर: B. 1303 ई.

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने 1303 ई. में चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण किया और लंबे घेराव के बाद उस पर अधिकार कर लिया। इस युद्ध के साथ रानी पद्मिनी से जुड़ी कथाएँ भी प्रसिद्ध हैं, जिनका उल्लेख मलिक मुहम्मद जायसी की ‘पद्मावत’ में मिलता है। ऐतिहासिक स्रोतों में पद्मिनी की कथा विवादित मानी जाती है, जबकि चित्तौड़ विजय एक ऐतिहासिक तथ्य है। विजय के बाद अलाउद्दीन ने चित्तौड़ का नाम अपने पुत्र खिज्र खाँ के नाम पर ‘खिज्राबाद’ रखा था।


28. ‘दीवान-ए-मुस्तखराज’ विभाग की स्थापना किसने की थी?

A. इल्तुतमिश
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. फिरोज शाह तुगलक
D. सिकंदर लोदी

उत्तर: B. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: दीवान-ए-मुस्तखराज की स्थापना अलाउद्दीन खिलजी ने राजस्व वसूली को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से की थी। यह विभाग उन अधिकारियों पर निगरानी रखता था जो भू-राजस्व की वसूली में अनियमितता करते थे। किसानों से निर्धारित कर की सही वसूली सुनिश्चित करना भी इसकी प्रमुख जिम्मेदारी थी। इस व्यवस्था से सल्तनत की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।


29. मुहम्मद बिन तुगलक ने दोआब क्षेत्र में कर क्यों बढ़ाया था?

A. धार्मिक कारणों से
B. सेना घटाने के लिए
C. राजस्व बढ़ाने के लिए
D. राजधानी बदलने के लिए

उत्तर: C. राजस्व बढ़ाने के लिए

व्याख्या: मुहम्मद बिन तुगलक ने गंगा-यमुना के दोआब क्षेत्र में राज्य की आय बढ़ाने के उद्देश्य से भू-राजस्व में वृद्धि की। उसी समय उस क्षेत्र में अकाल पड़ गया, जिससे किसानों की स्थिति अत्यंत खराब हो गई। अधिक कर वसूली के कारण किसानों ने विद्रोह कर दिया और बड़ी संख्या में कृषि भूमि छोड़ दी। अंततः सुल्तान को अपनी नीति में परिवर्तन करना पड़ा।


30. ‘फुतूहात-ए-फिरोजशाही’ ग्रंथ की रचना किसने की थी?

A. अमीर खुसरो
B. जियाउद्दीन बरनी
C. फिरोज शाह तुगलक
D. मिनहाज-उस-सिराज

उत्तर: C. फिरोज शाह तुगलक

व्याख्या: ‘फुतूहात-ए-फिरोजशाही’ की रचना स्वयं फिरोज शाह तुगलक ने कराई, जिसमें उसके शासनकाल के प्रशासनिक कार्यों, धार्मिक नीतियों और लोककल्याणकारी योजनाओं का विवरण मिलता है। इस ग्रंथ में नहर निर्माण, नगर स्थापना, कर व्यवस्था और सार्वजनिक निर्माण कार्यों का भी उल्लेख है। दिल्ली सल्तनत के इतिहास के अध्ययन के लिए यह एक महत्वपूर्ण समकालीन स्रोत माना जाता है।

31. ‘तारीख-ए-फिरोजशाही’ के लेखक कौन थे?

A. अमीर खुसरो
B. जियाउद्दीन बरनी
C. मिनहाज-उस-सिराज
D. इब्न बतूता

उत्तर: B. जियाउद्दीन बरनी

व्याख्या: जियाउद्दीन बरनी दिल्ली सल्तनत के प्रमुख इतिहासकार थे। उन्होंने ‘तारीख-ए-फिरोजशाही’ में बलबन से लेकर फिरोज शाह तुगलक के शासनकाल तक की राजनीतिक एवं प्रशासनिक घटनाओं का विस्तृत वर्णन किया है। यह ग्रंथ मध्यकालीन भारत के इतिहास का महत्वपूर्ण समकालीन स्रोत माना जाता है। बरनी ने शासन व्यवस्था, कर नीति, दरबारी जीवन तथा सामाजिक परिस्थितियों का भी विस्तार से उल्लेख किया है।


32. ‘तबकात-ए-नासिरी’ ग्रंथ की रचना किसने की थी?

A. अमीर खुसरो
B. मिनहाज-उस-सिराज
C. इब्न बतूता
D. अबुल फज़ल

उत्तर: B. मिनहाज-उस-सिराज

व्याख्या: ‘तबकात-ए-नासिरी’ की रचना मिनहाज-उस-सिराज ने की थी। इस ग्रंथ में प्रारम्भिक मुस्लिम शासकों तथा विशेष रूप से गुलाम वंश के इतिहास का विस्तृत विवरण मिलता है। लेखक स्वयं दिल्ली सल्तनत के प्रशासन से जुड़ा हुआ था, इसलिए उसके विवरण को विश्वसनीय माना जाता है। इल्तुतमिश और रज़िया सुल्तान के शासनकाल के अध्ययन में यह ग्रंथ विशेष महत्व रखता है।


33. प्रसिद्ध यात्री इब्न बतूता किस शासक के शासनकाल में भारत आया था?

A. अलाउद्दीन खिलजी
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. सिकंदर लोदी

उत्तर: B. मुहम्मद बिन तुगलक

व्याख्या: मोरक्को का प्रसिद्ध यात्री इब्न बतूता 1333 ई. में मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में भारत आया था। सुल्तान ने उसे दिल्ली का काज़ी नियुक्त किया और राजकीय सम्मान प्रदान किया। उसने अपने यात्रा-वृत्तांत ‘रिहला’ में तत्कालीन प्रशासन, समाज, व्यापार, न्याय व्यवस्था तथा सांस्कृतिक जीवन का विस्तृत वर्णन किया है। उसका विवरण दिल्ली सल्तनत के इतिहास का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।


34. अमीर खुसरो किस शासक के दरबार से सबसे अधिक संबंधित थे?

A. इल्तुतमिश
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. सिकंदर लोदी
D. बहलोल लोदी

उत्तर: B. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: अमीर खुसरो एक महान कवि, संगीतज्ञ और विद्वान थे, जिन्होंने कई सुल्तानों के दरबार में कार्य किया, लेकिन अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में उन्हें विशेष सम्मान प्राप्त हुआ। उन्होंने फारसी भाषा में अनेक ऐतिहासिक और साहित्यिक ग्रंथों की रचना की। उन्हें ‘भारत का तोता’ कहा जाता है तथा भारतीय शास्त्रीय संगीत के विकास में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।


35. अलाउद्दीन खिलजी का प्रसिद्ध सेनापति कौन था जिसने दक्षिण भारत में विजय अभियान चलाए?

A. मलिक काफूर
B. बैरम खाँ
C. बैरम शाह
D. याकूत

उत्तर: A. मलिक काफूर

व्याख्या: मलिक काफूर अलाउद्दीन खिलजी का सबसे विश्वसनीय सेनापति था। उसके नेतृत्व में देवगिरि, वारंगल, द्वारसमुद्र और मदुरै जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों पर सफल सैन्य अभियान चलाए गए। इन अभियानों से दिल्ली सल्तनत को अपार धन-संपत्ति, हाथी, घोड़े और बहुमूल्य रत्न प्राप्त हुए। दक्षिण भारत में सल्तनत के प्रभाव के विस्तार में मलिक काफूर की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


36. ‘हजार सुतून महल’ का निर्माण किस शासक ने कराया था?

A. बलबन
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. फिरोज शाह तुगलक
D. सिकंदर लोदी

उत्तर: B. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने दिल्ली स्थित सीरी नगर में ‘हजार सुतून महल’ का निर्माण कराया था। यह महल अपनी विशाल संरचना और अनेक स्तंभों के कारण प्रसिद्ध था। सीरी नगर दिल्ली सल्तनत की दूसरी राजधानी माना जाता है और इसे मंगोल आक्रमणों से सुरक्षा के उद्देश्य से विकसित किया गया था। खिलजी काल में स्थापत्य कला का उल्लेखनीय विकास हुआ।


37. ‘सीरी’ नगर की स्थापना किसने की थी?

A. इल्तुतमिश
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. फिरोज शाह तुगलक
D. गयासुद्दीन तुगलक

उत्तर: B. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने मंगोल आक्रमणों से सुरक्षा के उद्देश्य से दिल्ली के निकट सीरी नगर की स्थापना की। इसे दिल्ली सल्तनत की दूसरी राजधानी माना जाता है। सीरी में अनेक महल, सैनिक छावनियाँ तथा प्रशासनिक भवन बनाए गए थे। यह नगर मध्यकालीन भारत की योजनाबद्ध नगरीय बसावट का महत्वपूर्ण उदाहरण है।


38. ‘जहाँपनाह’ नगर का निर्माण किस शासक ने कराया था?

A. गयासुद्दीन तुगलक
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. बलबन

उत्तर: B. मुहम्मद बिन तुगलक

व्याख्या: मुहम्मद बिन तुगलक ने पुरानी दिल्ली, सीरी और तुगलकाबाद को जोड़ने के उद्देश्य से ‘जहाँपनाह’ नगर का निर्माण कराया। इसका उद्देश्य राजधानी की सुरक्षा को मजबूत बनाना तथा प्रशासनिक गतिविधियों को एकीकृत करना था। यद्यपि उसकी अनेक योजनाएँ असफल रहीं, लेकिन जहाँपनाह का निर्माण उसकी महत्वपूर्ण स्थापत्य उपलब्धियों में गिना जाता है। इसके अवशेष आज भी दिल्ली में देखे जा सकते हैं।


39. तुगलकाबाद किले का निर्माण किसने कराया था?

A. गयासुद्दीन तुगलक
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. सिकंदर लोदी

उत्तर: A. गयासुद्दीन तुगलक

व्याख्या: तुगलकाबाद किले का निर्माण गयासुद्दीन तुगलक ने अपनी राजधानी की सुरक्षा के लिए कराया था। यह किला विशाल पत्थरों से निर्मित है और इसकी दीवारें अत्यंत मजबूत बनाई गई थीं। किले का निर्माण सैन्य दृष्टि से किया गया था ताकि बाहरी आक्रमणों से प्रभावी रक्षा की जा सके। यह दिल्ली सल्तनत की स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।


40. फिरोज शाह तुगलक द्वारा स्थापित नगर कौन-सा था?

A. सीरी
B. तुगलकाबाद
C. फिरोजाबाद
D. जहाँपनाह

उत्तर: C. फिरोजाबाद

*व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने यमुना नदी के किनारे फिरोजाबाद नगर की स्थापना की थी। इसी नगर में प्रसिद्ध फिरोज शाह कोटला का निर्माण कराया गया, जहाँ उसने अशोक का एक स्तंभ भी स्थापित कराया। उसके शासनकाल में अनेक नगर, नहरें, मस्जिदें, मदरसे और सराय बनवाए गए। सार्वजनिक निर्माण और लोककल्याणकारी कार्य फिरोज शाह तुगलक के शासन की प्रमुख विशेषताएँ थीं।

दिल्ली सल्तनत MCQ Questions 41-60

41. ‘अलाई दरवाज़ा’ का निर्माण किस शासक ने कराया था?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. इल्तुतमिश
C. अलाउद्दीन खिलजी
D. फिरोज शाह तुगलक

उत्तर: C. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: अलाई दरवाज़ा का निर्माण 1311 ई. में अलाउद्दीन खिलजी ने कुतुब परिसर के दक्षिणी प्रवेश द्वार के रूप में कराया था। यह लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से निर्मित है तथा भारतीय-इस्लामी स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। इसमें पहली बार वैज्ञानिक ढंग से सच्चे मेहराब (True Arch) और वास्तविक गुंबद (True Dome) का प्रयोग किया गया। इसकी नक्काशी, ज्यामितीय डिज़ाइन और कुरआनी आयतों की सुंदर लेखन शैली इसे स्थापत्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।


42. दिल्ली सल्तनत में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाला शासक कौन था?

A. इल्तुतमिश
B. बलबन
C. अलाउद्दीन खिलजी
D. फिरोज शाह तुगलक

उत्तर: D. फिरोज शाह तुगलक

व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने 1351 ई. से 1388 ई. तक लगभग 37 वर्षों तक शासन किया, जो दिल्ली सल्तनत के किसी भी शासक का सबसे लंबा शासनकाल था। उसने प्रशासनिक सुधारों के साथ सिंचाई, नगर निर्माण, शिक्षा और लोककल्याण पर विशेष ध्यान दिया। उसके शासनकाल में अनेक नहरें, मदरसे, अस्पताल और सार्वजनिक भवन बनाए गए। लंबे शासनकाल के कारण उसकी नीतियों का सल्तनत के प्रशासन पर गहरा प्रभाव पड़ा।


43. ‘नहर-ए-फिरोज’ का निर्माण किस शासक ने कराया था?

A. मुहम्मद बिन तुगलक
B. फिरोज शाह तुगलक
C. सिकंदर लोदी
D. बहलोल लोदी

उत्तर: B. फिरोज शाह तुगलक

व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने कृषि उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से अनेक नहरों का निर्माण कराया, जिनमें ‘नहर-ए-फिरोज’ प्रमुख थी। यह नहर यमुना और सतलुज जैसी नदियों से सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराती थी। नहरों के कारण खेती योग्य भूमि का विस्तार हुआ और किसानों को नियमित जल उपलब्ध होने लगा। मध्यकालीन भारत में संगठित सिंचाई व्यवस्था विकसित करने वाले प्रमुख शासकों में फिरोज शाह तुगलक का नाम लिया जाता है।


44. ‘दीवान-ए-कोही’ विभाग की स्थापना किसने की थी?

A. अलाउद्दीन खिलजी
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. गयासुद्दीन तुगलक

उत्तर: B. मुहम्मद बिन तुगलक

व्याख्या: दीवान-ए-कोही की स्थापना मुहम्मद बिन तुगलक ने कृषि विकास और बंजर भूमि को खेती योग्य बनाने के उद्देश्य से की थी। इस विभाग के माध्यम से किसानों को बीज, ऋण और कृषि उपकरण उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई। प्रशासनिक कमजोरियों और प्राकृतिक कठिनाइयों के कारण यह योजना अपेक्षित सफलता प्राप्त नहीं कर सकी। इसके बावजूद यह भारतीय इतिहास में कृषि सुधार का एक प्रारम्भिक सरकारी प्रयास माना जाता है।


45. दिल्ली सल्तनत का अंतिम वंश कौन-सा था?

A. तुगलक वंश
B. सैय्यद वंश
C. खिलजी वंश
D. लोदी वंश

उत्तर: D. लोदी वंश

व्याख्या: लोदी वंश दिल्ली सल्तनत का पाँचवाँ और अंतिम शासक वंश था। इसकी स्थापना 1451 ई. में बहलोल लोदी ने की थी। इस वंश के प्रमुख शासक बहलोल लोदी, सिकंदर लोदी और इब्राहिम लोदी थे। 1526 ई. में प्रथम पानीपत के युद्ध में इब्राहिम लोदी की पराजय के साथ दिल्ली सल्तनत का अंत हुआ और मुगल साम्राज्य की स्थापना हुई।


46. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने ‘सिजदा’ और ‘पैबोस’ की परंपरा को राजदरबार में अनिवार्य बनाया?

A. इल्तुतमिश
B. बलबन
C. अलाउद्दीन खिलजी
D. फिरोज शाह तुगलक

उत्तर: B. बलबन

व्याख्या: बलबन ने शाही गरिमा और सुल्तान की सर्वोच्च सत्ता स्थापित करने के लिए फ़ारसी दरबारी परंपराओं ‘सिजदा’ और ‘पैबोस’ को अनिवार्य बनाया। सिजदा में सुल्तान के सामने झुककर सम्मान प्रकट किया जाता था, जबकि पैबोस में शासक के चरणों को स्पर्श या चूमने की प्रथा थी। इन परंपराओं का उद्देश्य सुल्तान के प्रति भय और सम्मान दोनों स्थापित करना था। इससे केंद्रीय सत्ता पहले की अपेक्षा अधिक सुदृढ़ हुई।


47. ‘इक्ता प्रणाली’ को संगठित रूप देने का श्रेय किस शासक को दिया जाता है?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. इल्तुतमिश
C. अलाउद्दीन खिलजी
D. सिकंदर लोदी

उत्तर: B. इल्तुतमिश

व्याख्या: इक्ता प्रणाली के अंतर्गत अधिकारियों को वेतन के बदले भूमि से राजस्व प्राप्त करने का अधिकार दिया जाता था। इल्तुतमिश ने इस व्यवस्था को व्यवस्थित रूप दिया और इक्तादारों की नियुक्ति तथा नियंत्रण की स्पष्ट व्यवस्था विकसित की। इससे प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत हुआ तथा राजस्व संग्रह अधिक प्रभावी बना। बाद के सल्तनत शासकों ने भी इसी प्रणाली को आगे विकसित किया।


48. मंगोल आक्रमणों से दिल्ली सल्तनत की सफल रक्षा करने वाला प्रमुख शासक कौन था?

A. बलबन
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. मुहम्मद बिन तुगलक
D. बहलोल लोदी

उत्तर: B. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में मंगोलों ने कई बार भारत पर आक्रमण किए, लेकिन उसकी सुदृढ़ सैन्य व्यवस्था के कारण उन्हें सफलता नहीं मिली। उसने सीमाओं की सुरक्षा बढ़ाई, स्थायी सेना का विस्तार किया तथा सैनिकों के वेतन और घोड़ों के पंजीकरण की प्रभावी व्यवस्था लागू की। मंगोलों की लगातार पराजय के कारण दिल्ली सल्तनत की सुरक्षा और प्रतिष्ठा दोनों मजबूत हुईं।


49. घोड़ों पर ‘दाग’ (Branding) और सैनिकों का ‘हुलिया’ (Descriptive Roll) रखने की व्यवस्था किसने शुरू की?

A. इल्तुतमिश
B. बलबन
C. अलाउद्दीन खिलजी
D. फिरोज शाह तुगलक

उत्तर: C. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने सेना में भ्रष्टाचार रोकने के लिए घोड़ों पर दाग लगाने तथा सैनिकों का विस्तृत हुलिया दर्ज करने की व्यवस्था लागू की। इससे नकली सैनिकों की भर्ती और निम्न गुणवत्ता वाले घोड़ों की आपूर्ति पर रोक लगी। इस सुधार के कारण सेना अधिक अनुशासित और संगठित बनी। यह दिल्ली सल्तनत के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य सुधारों में से एक माना जाता है।


50. तैमूर ने भारत पर आक्रमण किस वर्ष किया था?

A. 1320 ई.
B. 1351 ई.
C. 1398 ई.
D. 1451 ई.

उत्तर: C. 1398 ई.

व्याख्या: मध्य एशिया के विजेता तैमूर ने 1398 ई. में भारत पर आक्रमण किया और दिल्ली पर अधिकार कर व्यापक लूटपाट एवं विनाश किया। उस समय दिल्ली का शासक नासिरुद्दीन महमूद तुगलक था, जबकि वास्तविक सत्ता मलिक सरवर और अन्य अमीरों के हाथों में कमजोर हो चुकी थी। तैमूर के आक्रमण से तुगलक वंश की शक्ति लगभग समाप्त हो गई और दिल्ली सल्तनत राजनीतिक रूप से अत्यंत कमजोर हो गई। इसी कमजोरी के बाद सैय्यद वंश के उदय का मार्ग प्रशस्त हुआ।

51. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने ‘न्याय की जंजीर’ (Chain of Justice) स्थापित की थी?

A. अलाउद्दीन खिलजी
B. फिरोज शाह तुगलक
C. सिकंदर लोदी
D. इल्तुतमिश

उत्तर: B. फिरोज शाह तुगलक

व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने आम जनता को सीधे न्याय प्राप्त करने का अवसर देने के उद्देश्य से राजमहल के बाहर न्याय की जंजीर लगवाई थी। कोई भी पीड़ित व्यक्ति इस जंजीर को खींचकर अपनी शिकायत सीधे सुल्तान तक पहुँचा सकता था। उसके शासनकाल में न्याय व्यवस्था के साथ लोककल्याणकारी कार्यों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। यद्यपि ‘न्याय की जंजीर’ मुगल सम्राट जहाँगीर से अधिक प्रसिद्ध है, फिरोज शाह के संदर्भ में भी न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने के प्रयास उल्लेखनीय थे।


52. दिल्ली सल्तनत में ‘खालसा भूमि’ से क्या आशय था?

A. धार्मिक संस्थाओं की भूमि
B. सैनिकों को दी गई भूमि
C. सुल्तान के प्रत्यक्ष नियंत्रण वाली भूमि
D. किसानों की निजी भूमि

उत्तर: C. सुल्तान के प्रत्यक्ष नियंत्रण वाली भूमि

व्याख्या: खालसा भूमि वह भूमि होती थी, जिससे प्राप्त होने वाला संपूर्ण राजस्व सीधे शाही कोष में जमा किया जाता था। इस भूमि का प्रबंधन सुल्तान के नियुक्त अधिकारियों द्वारा किया जाता था और इसे किसी इक्तादार को नहीं सौंपा जाता था। खालसा भूमि से प्राप्त आय का उपयोग सेना, प्रशासन और सार्वजनिक व्यय के लिए किया जाता था। दिल्ली सल्तनत की राजस्व व्यवस्था में इसका महत्वपूर्ण स्थान था।


53. ‘इक्ता’ का प्रमुख अधिकारी क्या कहलाता था?

A. आमिल
B. मुकद्दम
C. इक्तादार
D. शहना

उत्तर: C. इक्तादार

व्याख्या: इक्ता प्रशासनिक और राजस्व इकाई होती थी, जिसका प्रबंधन इक्तादार के हाथों में होता था। इक्तादार का कार्य निर्धारित क्षेत्र से कर वसूलना, शांति व्यवस्था बनाए रखना तथा आवश्यकता पड़ने पर सेना उपलब्ध कराना था। उसे भूमि का स्वामी नहीं माना जाता था, बल्कि वह सुल्तान की ओर से नियुक्त अधिकारी होता था। समय-समय पर उसका स्थानांतरण भी किया जाता था ताकि वह स्वतंत्र शक्ति केंद्र न बन सके।


54. दिल्ली सल्तनत में गुप्तचर विभाग को किस नाम से जाना जाता था?

A. दीवान-ए-विजारत
B. बरीद-ए-मुमालिक
C. दीवान-ए-इंशा
D. दीवान-ए-अर्ज

उत्तर: B. बरीद-ए-मुमालिक

व्याख्या: बरीद-ए-मुमालिक दिल्ली सल्तनत का गुप्तचर और डाक विभाग था। इसके अधिकारी साम्राज्य के विभिन्न भागों से राजनीतिक, प्रशासनिक और सैन्य सूचनाएँ एकत्र करके सुल्तान तक पहुँचाते थे। इस विभाग के माध्यम से प्रांतीय अधिकारियों की गतिविधियों पर भी निगरानी रखी जाती थी। प्रभावी गुप्तचर व्यवस्था के कारण सुल्तान विद्रोह और षड्यंत्रों की जानकारी समय रहते प्राप्त कर लेता था।


55. दिल्ली सल्तनत में सेना विभाग का प्रमुख कौन होता था?

A. वजीर
B. आरिज-ए-मुमालिक
C. काज़ी-उल-कुज़ात
D. सद्र-उस-सुदूर

उत्तर: B. आरिज-ए-मुमालिक

व्याख्या: आरिज-ए-मुमालिक सेना विभाग का सर्वोच्च अधिकारी होता था। उसका कार्य सैनिकों की भर्ती, वेतन वितरण, घोड़ों की जाँच तथा सैन्य अनुशासन बनाए रखना था। वह युद्ध संबंधी तैयारियों और सैन्य रिकॉर्ड का भी निरीक्षण करता था। सेना का सर्वोच्च सेनापति सुल्तान होता था, जबकि आरिज-ए-मुमालिक प्रशासनिक स्तर पर सेना का संचालन करता था।


56. दिल्ली सल्तनत में धार्मिक मामलों का सर्वोच्च अधिकारी कौन होता था?

A. वकील-ए-दर
B. सद्र-उस-सुदूर
C. दीवान-ए-इंशा
D. बरीद-ए-मुमालिक

उत्तर: B. सद्र-उस-सुदूर

व्याख्या: सद्र-उस-सुदूर धार्मिक और दान संबंधी मामलों का सर्वोच्च अधिकारी होता था। उसका कार्य मस्जिदों, मदरसों, धार्मिक संस्थाओं तथा विद्वानों को अनुदान प्रदान करना था। वह धार्मिक कानूनों के पालन की निगरानी भी करता था। इस पद का महत्व विशेष रूप से उन शासकों के समय बढ़ गया जिन्होंने धार्मिक नीतियों को शासन का महत्वपूर्ण आधार बनाया।


57. दिल्ली सल्तनत में सर्वोच्च न्यायिक अधिकारी कौन होता था?

A. वजीर
B. आरिज-ए-मुमालिक
C. काज़ी-उल-कुज़ात
D. दीवान-ए-रियासत

उत्तर: C. काज़ी-उल-कुज़ात

व्याख्या: काज़ी-उल-कुज़ात दिल्ली सल्तनत का मुख्य न्यायाधीश होता था। वह इस्लामी कानून के आधार पर न्यायिक निर्णय देता था तथा अन्य काज़ियों की नियुक्ति और कार्यों की देखरेख भी करता था। महत्वपूर्ण न्यायिक मामलों में उसका निर्णय अंतिम माना जाता था। न्याय व्यवस्था को संगठित रखने में इस पद की महत्वपूर्ण भूमिका थी।


58. दिल्ली सल्तनत में राजस्व विभाग का प्रमुख अधिकारी कौन होता था?

A. दीवान-ए-विजारत
B. दीवान-ए-अर्ज
C. दीवान-ए-इंशा
D. दीवान-ए-रियासत

उत्तर: A. दीवान-ए-विजारत

व्याख्या: दीवान-ए-विजारत दिल्ली सल्तनत का सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय विभाग था, जिसका प्रमुख वजीर होता था। यह विभाग राजस्व संग्रह, सरकारी व्यय, लेखा-जोखा तथा आर्थिक नीतियों का संचालन करता था। विभिन्न प्रांतों से प्राप्त आय का रिकॉर्ड भी इसी विभाग में रखा जाता था। प्रशासनिक दृष्टि से वजीर सुल्तान के बाद सबसे प्रभावशाली अधिकारियों में गिना जाता था।


59. ‘दीवान-ए-इंशा’ विभाग का मुख्य कार्य क्या था?

A. सेना का संचालन
B. राजस्व वसूली
C. शाही पत्राचार एवं अभिलेख
D. न्याय व्यवस्था

उत्तर: C. शाही पत्राचार एवं अभिलेख

व्याख्या: दीवान-ए-इंशा शाही पत्राचार और सरकारी अभिलेखों का प्रमुख विभाग था। इस विभाग के अधिकारी सुल्तान के आदेशों, संधियों, नियुक्ति पत्रों और आधिकारिक दस्तावेजों का मसौदा तैयार करते थे। प्रांतीय अधिकारियों के साथ होने वाले आधिकारिक पत्राचार का संचालन भी इसी विभाग द्वारा किया जाता था। प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।


60. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने कृषि पर भूमि कर को उपज का लगभग 50% निर्धारित किया था?

A. इल्तुतमिश
B. बलबन
C. अलाउद्दीन खिलजी
D. फिरोज शाह तुगलक

उत्तर: C. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने राजस्व व्यवस्था में सुधार करते हुए कृषि उपज का लगभग आधा भाग भूमि कर के रूप में निर्धारित किया। उसने मध्यस्थ जमींदारों और स्थानीय प्रमुखों के विशेषाधिकारों को सीमित कर सीधे राजस्व संग्रह की व्यवस्था को मजबूत बनाया। भूमि का मापन कर कर निर्धारण करने की नीति से राजस्व वसूली अधिक व्यवस्थित हुई। इन सुधारों से शाही कोष की आय में वृद्धि हुई और विशाल स्थायी सेना का व्यय वहन करना संभव हो सका।

दिल्ली सल्तनत MCQ Questions 61-80

61. दिल्ली सल्तनत में ‘दीवान-ए-अर्ज’ विभाग किस कार्य से संबंधित था?

A. न्याय व्यवस्था
B. सेना का प्रशासन
C. राजस्व संग्रह
D. धार्मिक कार्य

उत्तर: B. सेना का प्रशासन

व्याख्या: दीवान-ए-अर्ज दिल्ली सल्तनत का सैन्य विभाग था, जिसका प्रमुख अधिकारी आरिज-ए-मुमालिक कहलाता था। यह विभाग सैनिकों की भर्ती, वेतन वितरण, घोड़ों का निरीक्षण तथा सैन्य अनुशासन बनाए रखने का कार्य करता था। सेना की संख्या, हथियारों और युद्ध संबंधी तैयारियों का रिकॉर्ड भी इसी विभाग के अंतर्गत रखा जाता था। सुल्तान की सैन्य शक्ति को प्रभावी बनाए रखने में इस विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका थी।


62. ‘तारीख-ए-मुबारकशाही’ ग्रंथ के लेखक कौन थे?

A. याह्या बिन अहमद सिरहिंदी
B. अमीर खुसरो
C. जियाउद्दीन बरनी
D. मिनहाज-उस-सिराज

उत्तर: A. याह्या बिन अहमद सिरहिंदी

व्याख्या: ‘तारीख-ए-मुबारकशाही’ की रचना याह्या बिन अहमद सिरहिंदी ने की थी। इस ग्रंथ में विशेष रूप से सैय्यद वंश के इतिहास तथा दिल्ली सल्तनत के अंतिम चरण की घटनाओं का विस्तृत विवरण मिलता है। इतिहासकार इस ग्रंथ को सैय्यद काल के अध्ययन का प्रमुख समकालीन स्रोत मानते हैं। इसमें राजनीतिक संघर्ष, प्रशासनिक व्यवस्था और तत्कालीन परिस्थितियों का महत्वपूर्ण वर्णन किया गया है।


63. दिल्ली सल्तनत का कौन-सा शासक ‘विरोधाभासों का मिश्रण’ (A Mixture of Opposites) कहलाता है?

A. अलाउद्दीन खिलजी
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. बलबन
D. फिरोज शाह तुगलक

उत्तर: B. मुहम्मद बिन तुगलक

व्याख्या: इतिहासकार एलफिंस्टन ने मुहम्मद बिन तुगलक को ‘विरोधाभासों का मिश्रण’ कहा है क्योंकि वह अत्यंत विद्वान, दूरदर्शी और महत्वाकांक्षी शासक था, लेकिन उसकी कई योजनाएँ व्यावहारिक रूप से असफल रहीं। राजधानी परिवर्तन, सांकेतिक मुद्रा और दोआब में कर वृद्धि जैसी योजनाएँ इसी कारण प्रसिद्ध हैं। उसके व्यक्तित्व में बुद्धिमत्ता और प्रशासनिक त्रुटियाँ दोनों स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं।


64. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने अशोक के दो स्तंभ दिल्ली मंगवाए थे?

A. गयासुद्दीन तुगलक
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. सिकंदर लोदी

उत्तर: C. फिरोज शाह तुगलक

व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने हरियाणा के टोपरा तथा मेरठ से सम्राट अशोक के दो शिलास्तंभ दिल्ली मंगवाकर स्थापित कराए। इनमें से एक स्तंभ फिरोज शाह कोटला और दूसरा दिल्ली के उत्तरी क्षेत्र में स्थापित किया गया। उस समय इन अभिलेखों की लिपि को पढ़ा नहीं जा सकता था, इसलिए उनका वास्तविक महत्व बाद में ज्ञात हुआ। अशोक के अभिलेखों के संरक्षण में फिरोज शाह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


65. दिल्ली सल्तनत में ‘जज़िया कर’ मुख्यतः किससे लिया जाता था?

A. केवल मुस्लिम व्यापारियों से
B. केवल सैनिकों से
C. गैर-मुस्लिम प्रजा से
D. सभी किसानों से समान रूप से

उत्तर: C. गैर-मुस्लिम प्रजा से

व्याख्या: जज़िया एक धार्मिक कर था, जो इस्लामी शासन व्यवस्था के अंतर्गत गैर-मुस्लिम प्रजा से लिया जाता था। महिलाओं, बच्चों, साधुओं और कुछ विशेष वर्गों को कई बार इससे छूट भी दी जाती थी, हालांकि विभिन्न शासकों के समय नियमों में परिवर्तन होता रहा। फिरोज शाह तुगलक ने इस कर को अधिक कठोरता से लागू किया। जज़िया, भूमि कर से अलग एक व्यक्तिगत कर था।


66. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने ब्राह्मणों पर भी जज़िया कर लगाया था?

A. अलाउद्दीन खिलजी
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. सिकंदर लोदी

उत्तर: C. फिरोज शाह तुगलक

व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने जज़िया कर की व्यवस्था को अधिक कठोर बनाया और पहली बार ब्राह्मणों को भी इस कर के दायरे में शामिल किया। इससे पहले कई शासकों के समय ब्राह्मणों को इस कर से छूट प्राप्त थी। फिरोज शाह ने अपनी धार्मिक नीतियों में इस्लामी सिद्धांतों का अधिक पालन किया। उसके शासनकाल में धार्मिक करों के संग्रह पर विशेष बल दिया गया।


67. ‘खम्स’ (Khams) का संबंध किससे था?

A. व्यापार कर
B. युद्ध में प्राप्त लूट के पाँचवें भाग से
C. भूमि कर
D. सिंचाई कर

उत्तर: B. युद्ध में प्राप्त लूट के पाँचवें भाग से

व्याख्या: खम्स उस व्यवस्था को कहा जाता था जिसके अनुसार युद्ध में प्राप्त लूट का पाँचवाँ भाग राज्य अथवा सुल्तान के अधिकार में रहता था। शेष संपत्ति सैनिकों के बीच बाँटी जाती थी। इस व्यवस्था का आधार इस्लामी कानून था और दिल्ली सल्तनत के अनेक शासकों ने इसका पालन किया। सैन्य अभियानों से प्राप्त धन राज्य की आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत था।


68. दिल्ली सल्तनत में ‘जकात’ किस प्रकार का कर था?

A. कृषि कर
B. धार्मिक कर
C. व्यापार कर
D. संपत्ति कर

उत्तर: B. धार्मिक कर

व्याख्या: जकात इस्लाम धर्म के अनुयायियों पर लगाया जाने वाला धार्मिक कर था, जिसका उद्देश्य निर्धनों और जरूरतमंदों की सहायता करना था। यह कर केवल मुसलमानों से लिया जाता था और इसकी एक निश्चित दर निर्धारित थी। जकात से प्राप्त धन धार्मिक एवं सामाजिक कल्याण के कार्यों में व्यय किया जाता था। यह जज़िया से पूर्णतः भिन्न कर था, क्योंकि जज़िया गैर-मुस्लिम प्रजा पर लगाया जाता था।


69. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने ‘अलाई मीनार’ का निर्माण प्रारम्भ कराया था?

A. इल्तुतमिश
B. बलबन
C. अलाउद्दीन खिलजी
D. फिरोज शाह तुगलक

उत्तर: C. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने कुतुब मीनार से लगभग दोगुनी ऊँचाई वाली ‘अलाई मीनार’ के निर्माण की योजना बनाई थी। उसके जीवनकाल में केवल आधार भाग और प्रथम स्तर तक ही निर्माण हो सका। 1316 ई. में उसकी मृत्यु के बाद यह परियोजना अधूरी रह गई। आज भी कुतुब परिसर में अलाई मीनार के अवशेष इस महत्वाकांक्षी योजना की याद दिलाते हैं।


70. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने ‘हौज़ खास’ का विस्तार एवं पुनर्निर्माण कराया था?

A. इल्तुतमिश
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. फिरोज शाह तुगलक
D. बहलोल लोदी

उत्तर: C. फिरोज शाह तुगलक

व्याख्या: हौज़ खास जलाशय का निर्माण मूल रूप से अलाउद्दीन खिलजी ने कराया था ताकि सीरी नगर को जल उपलब्ध कराया जा सके। बाद में फिरोज शाह तुगलक ने इसकी सफाई, पुनर्निर्माण और विस्तार कराया तथा इसके आसपास मदरसा, मस्जिद और अपना मकबरा बनवाया। हौज़ खास मध्यकालीन दिल्ली की जल प्रबंधन व्यवस्था और स्थापत्य कला का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

71. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने ‘दार-उल-शिफा’ (अस्पताल) की स्थापना कराई थी?

A. अलाउद्दीन खिलजी
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. सिकंदर लोदी

उत्तर: C. फिरोज शाह तुगलक

व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने जनता के उपचार के लिए ‘दार-उल-शिफा’ नामक अस्पतालों की स्थापना कराई। इन अस्पतालों में निर्धन लोगों का निःशुल्क उपचार किया जाता था तथा दवाइयों की भी व्यवस्था की जाती थी। उसने शिक्षा, चिकित्सा और जनकल्याण के क्षेत्र में अनेक संस्थानों की स्थापना की। उसके शासनकाल को लोककल्याणकारी निर्माण कार्यों के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।


72. ‘दीवान-ए-खैरात’ विभाग की स्थापना किसने की थी?

A. अलाउद्दीन खिलजी
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. बहलोल लोदी

उत्तर: C. फिरोज शाह तुगलक

व्याख्या: दीवान-ए-खैरात की स्थापना फिरोज शाह तुगलक ने गरीबों, अनाथों, विधवाओं और निर्धन कन्याओं की सहायता के उद्देश्य से की थी। इस विभाग के माध्यम से आर्थिक सहायता और विवाह के लिए अनुदान प्रदान किया जाता था। यह संस्था सामाजिक कल्याण के लिए कार्य करने वाला एक महत्वपूर्ण विभाग थी। इससे स्पष्ट होता है कि फिरोज शाह ने प्रशासन के साथ सामाजिक योजनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया।


73. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने दासों के लिए ‘दीवान-ए-बंदगान’ विभाग स्थापित किया था?

A. इल्तुतमिश
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. फिरोज शाह तुगलक
D. सिकंदर लोदी

उत्तर: C. फिरोज शाह तुगलक

व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक के शासनकाल में बड़ी संख्या में दास रखे जाते थे और उनके प्रबंधन के लिए ‘दीवान-ए-बंदगान’ नामक अलग विभाग बनाया गया था। इस विभाग के माध्यम से दासों के प्रशिक्षण, वेतन, कार्य और देखरेख की व्यवस्था की जाती थी। समकालीन स्रोतों के अनुसार उसके अधीन लगभग 1,80,000 दास थे। दिल्ली सल्तनत में दास प्रशासन का यह सबसे संगठित उदाहरण माना जाता है।


74. सिकंदर लोदी ने अपनी राजधानी कहाँ स्थानांतरित की थी?

A. दिल्ली से लाहौर
B. दिल्ली से आगरा
C. दिल्ली से जौनपुर
D. दिल्ली से दौलताबाद

उत्तर: B. दिल्ली से आगरा

व्याख्या: सिकंदर लोदी ने प्रशासनिक सुविधा और साम्राज्य पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से आगरा को अपनी राजधानी बनाया। उसने 1504 ई. में आगरा नगर की स्थापना की और इसे राजनीतिक तथा व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित किया। यमुना नदी के किनारे स्थित होने के कारण यह नगर सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण था। बाद में मुगल शासकों ने भी आगरा को अपनी प्रमुख राजधानी बनाया।


75. दिल्ली सल्तनत के किस शासक के समय पुर्तगाली भारत पहुँचे थे?

A. बहलोल लोदी
B. सिकंदर लोदी
C. इब्राहिम लोदी
D. फिरोज शाह तुगलक

उत्तर: B. सिकंदर लोदी

व्याख्या: 1498 ई. में वास्को-डि-गामा समुद्री मार्ग से कालीकट पहुँचा, उस समय दिल्ली में सिकंदर लोदी का शासन था। वास्को-डि-गामा को कालीकट के शासक ज़मोरिन ने व्यापार की अनुमति दी। इस घटना के बाद भारत और यूरोप के बीच प्रत्यक्ष समुद्री व्यापार का मार्ग स्थापित हुआ। भारतीय इतिहास में यह घटना मध्यकाल से आधुनिक काल की ओर संक्रमण का महत्वपूर्ण चरण मानी जाती है।


76. लोदी वंश का अंतिम शासक कौन था?

A. बहलोल लोदी
B. सिकंदर लोदी
C. इब्राहिम लोदी
D. दौलत खाँ लोदी

उत्तर: C. इब्राहिम लोदी

व्याख्या: इब्राहिम लोदी लोदी वंश का अंतिम शासक था और उसने 1517 ई. से 1526 ई. तक शासन किया। उसके शासनकाल में अफगान सरदारों के साथ मतभेद बढ़ते गए, जिससे केंद्रीय सत्ता कमजोर हो गई। पंजाब के गवर्नर दौलत खाँ लोदी और अन्य असंतुष्ट सरदारों ने बाबर को भारत आने का निमंत्रण दिया। प्रथम पानीपत के युद्ध में उसकी मृत्यु के साथ लोदी वंश का अंत हो गया।


77. दिल्ली सल्तनत का कौन-सा शासक स्वयं एक विद्वान लेखक और कवि माना जाता है?

A. मुहम्मद बिन तुगलक
B. बलबन
C. बहलोल लोदी
D. जलालुद्दीन खिलजी

उत्तर: A. मुहम्मद बिन तुगलक

व्याख्या: मुहम्मद बिन तुगलक अरबी, फारसी, दर्शन, गणित, चिकित्सा और तर्कशास्त्र का गहरा ज्ञान रखता था। वह स्वयं लेखन और साहित्य में रुचि रखता था तथा विद्वानों को संरक्षण देता था। उसकी विद्वत्ता की प्रशंसा अनेक विदेशी यात्रियों और इतिहासकारों ने की है। यद्यपि उसकी कई प्रशासनिक योजनाएँ असफल रहीं, फिर भी उसे दिल्ली सल्तनत का सबसे शिक्षित शासक माना जाता है।


78. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने सर्वप्रथम दक्षिण भारत को स्थायी रूप से सल्तनत के अधीन लाने का प्रयास किया?

A. बलबन
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. इल्तुतमिश
D. बहलोल लोदी

उत्तर: B. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने अपने सेनापति मलिक काफूर के माध्यम से दक्षिण भारत के प्रमुख राज्यों पर सफल अभियान चलाए। देवगिरि, वारंगल, द्वारसमुद्र और मदुरै के शासकों को कर देने के लिए बाध्य किया गया। इन विजयों से दिल्ली सल्तनत की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और दक्षिण भारत में उसका राजनीतिक प्रभाव स्थापित हुआ। यह पहली बार था जब दिल्ली सल्तनत का प्रभाव दक्षिण भारत के इतने बड़े भाग तक पहुँचा।


79. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने सबसे पहले मंगोलों के विरुद्ध सीमांत सुरक्षा को मजबूत किया?

A. इल्तुतमिश
B. बलबन
C. अलाउद्दीन खिलजी
D. फिरोज शाह तुगलक

उत्तर: B. बलबन

व्याख्या: बलबन ने उत्तर-पश्चिमी सीमा पर मंगोल आक्रमणों के खतरे को देखते हुए किलों की मरम्मत कराई और नई सैन्य चौकियाँ स्थापित कीं। उसने योग्य सेनानायकों की नियुक्ति कर सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा को मजबूत बनाया। उसकी कठोर सैन्य नीति के कारण मंगोलों की प्रगति पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सका। बाद में अलाउद्दीन खिलजी ने इसी नीति को और अधिक सुदृढ़ बनाया।


80. दिल्ली सल्तनत के इतिहास में ‘ममलूक’ शब्द का अर्थ क्या है?

A. योद्धा
B. स्वतंत्र शासक
C. दास
D. सामंत

उत्तर: C. दास

व्याख्या: ‘ममलूक’ एक अरबी शब्द है, जिसका अर्थ ‘दास’ या ‘गुलाम’ होता है। दिल्ली सल्तनत के प्रथम शासक कुतुबुद्दीन ऐबक और उसके कई उत्तराधिकारी मूल रूप से दास थे, जिन्हें उनकी योग्यता के आधार पर उच्च पद प्राप्त हुए। इसी कारण गुलाम वंश को ममलूक वंश भी कहा जाता है। मध्यकालीन इस्लामी इतिहास में ममलूक शासकों ने कई क्षेत्रों में सफल और शक्तिशाली शासन स्थापित किया।

दिल्ली सल्तनत MCQ Questions 81-100

81. दिल्ली सल्तनत में ‘नायब-ए-मुल्क’ का क्या कार्य था?

A. सेना का नेतृत्व करना
B. सुल्तान के प्रतिनिधि के रूप में शासन चलाना
C. न्यायालय का संचालन करना
D. कर संग्रह करना

उत्तर: B. सुल्तान के प्रतिनिधि के रूप में शासन चलाना

व्याख्या: नायब-ए-मुल्क सुल्तान का प्रमुख प्रतिनिधि होता था और उसकी अनुपस्थिति में प्रशासनिक कार्यों का संचालन करता था। जब कोई शासक अल्पवयस्क, कमजोर या किसी अभियान पर होता था, तब यह अधिकारी शासन की जिम्मेदारी संभालता था। कई बार नायब-ए-मुल्क का प्रभाव इतना बढ़ जाता था कि वह वास्तविक सत्ता का संचालन करने लगता था। दिल्ली सल्तनत के प्रशासन में यह अत्यंत प्रभावशाली पद माना जाता था।


82. दिल्ली सल्तनत में ‘आमिल’ किस कार्य से संबंधित अधिकारी था?

A. सेना का अधिकारी
B. न्यायाधीश
C. भू-राजस्व वसूली अधिकारी
D. धार्मिक अधिकारी

उत्तर: C. भू-राजस्व वसूली अधिकारी

व्याख्या: आमिल का प्रमुख कार्य किसानों से भूमि कर और अन्य राजस्व की वसूली करना था। वह अपने क्षेत्र के राजस्व अभिलेख तैयार करता था तथा वसूले गए कर को शाही कोष तक पहुँचाने की व्यवस्था करता था। आमिल स्थानीय प्रशासन और वित्तीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग था। उसकी कार्यप्रणाली पर समय-समय पर केंद्रीय प्रशासन द्वारा निगरानी रखी जाती थी।


83. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने योग्यता के आधार पर अधिकारियों की नियुक्ति को बढ़ावा दिया?

A. बलबन
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. इल्तुतमिश
D. सिकंदर लोदी

उत्तर: B. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति के समय वंश या जाति के स्थान पर योग्यता और कार्यकुशलता को महत्व दिया। उसने भ्रष्ट अधिकारियों को कठोर दंड दिया तथा प्रशासन पर सुल्तान का प्रत्यक्ष नियंत्रण स्थापित किया। राजस्व, सेना और बाजार व्यवस्था में नियुक्त अधिकारी सीधे केंद्रीय शासन के प्रति उत्तरदायी थे। उसकी इस नीति से प्रशासन अधिक संगठित और प्रभावी बना।


84. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने सर्वप्रथम दक्षिण भारत के देवगिरि राज्य पर आक्रमण किया था?

A. जलालुद्दीन खिलजी
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. मुहम्मद बिन तुगलक
D. बलबन

उत्तर: B. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: 1296 ई. में सुल्तान बनने से पहले अलाउद्दीन खिलजी ने देवगिरि पर सफल आक्रमण किया था। उस समय वह कड़ा का सूबेदार था और इस अभियान से उसे अपार धन-संपत्ति प्राप्त हुई। इसी संपत्ति के आधार पर उसने बाद में सत्ता प्राप्त करने की तैयारी की। देवगिरि अभियान ने उसके राजनीतिक जीवन को निर्णायक दिशा प्रदान की।


85. ‘सीरी’ दिल्ली का कौन-सा ऐतिहासिक नगर माना जाता है?

A. प्रथम
B. द्वितीय
C. तृतीय
D. चतुर्थ

उत्तर: B. द्वितीय

व्याख्या: सीरी नगर की स्थापना अलाउद्दीन खिलजी ने की थी और इसे दिल्ली का दूसरा ऐतिहासिक नगर माना जाता है। यह नगर मंगोल आक्रमणों से सुरक्षा के उद्देश्य से विकसित किया गया था। यहाँ शाही महल, सैनिक छावनियाँ तथा प्रशासनिक भवन बनाए गए थे। वर्तमान दिल्ली के हौज़ खास और शाहपुर जाट क्षेत्र के आसपास इसके अवशेष पाए जाते हैं।


86. दिल्ली सल्तनत में ‘जहाँपनाह’ किस शासक द्वारा बसाया गया नगर था?

A. गयासुद्दीन तुगलक
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. सिकंदर लोदी

उत्तर: B. मुहम्मद बिन तुगलक

व्याख्या: मुहम्मद बिन तुगलक ने पुरानी दिल्ली, सीरी और तुगलकाबाद को एक सुरक्षित क्षेत्र में जोड़ने के उद्देश्य से जहाँपनाह नगर का निर्माण कराया। इस नगर का उद्देश्य राजधानी की रक्षा को मजबूत बनाना और प्रशासनिक गतिविधियों को एक स्थान पर केंद्रित करना था। इसके चारों ओर मजबूत दीवारें बनवाई गई थीं। आज भी इसके कुछ अवशेष दक्षिण दिल्ली में देखे जा सकते हैं।


87. दिल्ली सल्तनत में ‘इमाद-उल-मुल्क’ उपाधि किस क्षेत्र से संबंधित थी?

A. सैन्य प्रशासन
B. धार्मिक प्रशासन
C. न्याय व्यवस्था
D. व्यापार विभाग

उत्तर: A. सैन्य प्रशासन

व्याख्या: ‘इमाद-उल-मुल्क’ एक उच्च सैन्य उपाधि थी, जो योग्य सेनापतियों अथवा प्रमुख सैन्य अधिकारियों को प्रदान की जाती थी। इस प्रकार की उपाधियाँ शासकों द्वारा विशेष सेवाओं के सम्मान में दी जाती थीं। दिल्ली सल्तनत में प्रशासनिक और सैन्य अधिकारियों को विभिन्न मानद उपाधियों से सम्मानित करने की परंपरा प्रचलित थी। इससे अधिकारियों की प्रतिष्ठा और जिम्मेदारियाँ दोनों बढ़ जाती थीं।


88. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने ‘इकबाल मंडी’ जैसी नियंत्रित बाजार व्यवस्था विकसित की?

A. बलबन
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. सिकंदर लोदी
D. फिरोज शाह तुगलक

उत्तर: B. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने विभिन्न वस्तुओं के लिए अलग-अलग नियंत्रित बाजार स्थापित किए, जिनमें अनाज, कपड़ा, घोड़े तथा दैनिक उपयोग की वस्तुओं की खरीद-बिक्री होती थी। इन बाजारों की नियमित निगरानी के लिए विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी। मूल्य निर्धारण और जमाखोरी पर नियंत्रण उसकी आर्थिक नीति की प्रमुख विशेषता थी। इस व्यवस्था से सेना और आम जनता दोनों को निश्चित मूल्य पर वस्तुएँ उपलब्ध होती थीं।


89. दिल्ली सल्तनत के किस शासक के समय ‘रिहला’ ग्रंथ लिखा गया?

A. अलाउद्दीन खिलजी
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. सिकंदर लोदी

उत्तर: B. मुहम्मद बिन तुगलक

व्याख्या: ‘रिहला’ प्रसिद्ध मोरक्को के यात्री इब्न बतूता का यात्रा-वृत्तांत है, जिसे उसने भारत यात्रा के अनुभवों के आधार पर लिखा। वह मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में दिल्ली आया था और कई वर्षों तक यहाँ रहा। इस ग्रंथ में तत्कालीन प्रशासन, समाज, व्यापार, न्याय व्यवस्था और सांस्कृतिक जीवन का विस्तृत वर्णन मिलता है। दिल्ली सल्तनत के इतिहास के अध्ययन में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण समकालीन स्रोत माना जाता है।


90. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने विद्रोहों को दबाने के लिए सबसे कठोर दंड नीति अपनाई थी?

A. इल्तुतमिश
B. बलबन
C. बहलोल लोदी
D. सिकंदर लोदी

उत्तर: B. बलबन

व्याख्या: बलबन ने विद्रोहों और अराजकता को समाप्त करने के लिए अत्यंत कठोर दंड नीति अपनाई, जिसे ‘लौह एवं रक्त की नीति’ के नाम से जाना जाता है। उसने मेवात, दोआब और कटेहर जैसे विद्रोही क्षेत्रों में सैन्य अभियान चलाकर केंद्रीय सत्ता को मजबूत किया। सीमावर्ती क्षेत्रों में किलों का निर्माण और सैनिक चौकियों की स्थापना भी उसकी नीति का हिस्सा थी। उसकी कठोर प्रशासनिक व्यवस्था ने दिल्ली सल्तनत की राजनीतिक स्थिरता को मजबूत किया।

91. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने ‘सिकंदर-ए-सानी’ (द्वितीय सिकंदर) की उपाधि धारण की थी?

A. बलबन
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. मुहम्मद बिन तुगलक
D. सिकंदर लोदी

उत्तर: B. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी विजयों और साम्राज्य विस्तार के कारण स्वयं को ‘सिकंदर-ए-सानी’ अर्थात ‘द्वितीय सिकंदर’ की उपाधि दी थी। उसने गुजरात, रणथंभौर, चित्तौड़, मालवा तथा दक्षिण भारत के अनेक राज्यों पर सफल अभियान चलाए। उसके शासनकाल में दिल्ली सल्तनत अपने सबसे बड़े भौगोलिक विस्तार तक पहुँची। उसकी सैन्य सफलताओं ने उसे मध्यकालीन भारत के सबसे शक्तिशाली शासकों में स्थान दिलाया।


92. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने स्वयं को ‘जिल्ले-इलाही’ (ईश्वर की छाया) माना?

A. इल्तुतमिश
B. बलबन
C. बहलोल लोदी
D. जलालुद्दीन खिलजी

उत्तर: B. बलबन

व्याख्या: बलबन ने राजसत्ता की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए स्वयं को ‘जिल्ले-इलाही’ अर्थात ईश्वर की छाया घोषित किया। उसका मानना था कि सुल्तान की सत्ता दैवी इच्छा से प्राप्त होती है, इसलिए उसका सम्मान सर्वोच्च होना चाहिए। इसी नीति के अंतर्गत उसने दरबार में सिजदा और पैबोस जैसी परंपराएँ लागू कीं। उसकी इस विचारधारा ने केंद्रीय शासन को अधिक शक्तिशाली बनाया।


93. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने सर्वाधिक मंगोल आक्रमणों का सफलतापूर्वक सामना किया?

A. इल्तुतमिश
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. फिरोज शाह तुगलक
D. सिकंदर लोदी

उत्तर: B. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में मंगोलों ने कई बार भारत पर आक्रमण किए, लेकिन प्रत्येक बार उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। उसने सीमाओं की सुरक्षा के लिए विशाल स्थायी सेना रखी तथा किलों और चौकियों को मजबूत किया। सैनिक सुधारों और प्रभावी नेतृत्व के कारण मंगोल दिल्ली पर अधिकार स्थापित नहीं कर सके। उसकी सैन्य नीति ने सल्तनत को बाहरी आक्रमणों से सुरक्षित रखा।


94. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने सबसे पहले दक्षिण भारत से नियमित कर (Tribute) प्राप्त किया?

A. इल्तुतमिश
B. बलबन
C. अलाउद्दीन खिलजी
D. बहलोल लोदी

उत्तर: C. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने मलिक काफूर के नेतृत्व में दक्षिण भारत के राज्यों पर सफल अभियान चलाकर उन्हें वार्षिक कर देने के लिए बाध्य किया। देवगिरि, वारंगल, द्वारसमुद्र और मदुरै जैसे राज्यों से नियमित रूप से धन, हाथी, घोड़े और बहुमूल्य वस्तुएँ दिल्ली भेजी जाने लगीं। इससे दिल्ली सल्तनत की आर्थिक स्थिति अत्यंत सुदृढ़ हुई। दक्षिण भारत पर यह प्रत्यक्ष शासन नहीं बल्कि अधीनता स्वीकार कराने की नीति थी।


95. दिल्ली सल्तनत का पहला अफगान वंश कौन-सा था?

A. खिलजी वंश
B. तुगलक वंश
C. लोदी वंश
D. सैय्यद वंश

उत्तर: C. लोदी वंश

व्याख्या: लोदी वंश दिल्ली सल्तनत का पहला अफगान वंश था, जिसकी स्थापना 1451 ई. में बहलोल लोदी ने की थी। इससे पहले सल्तनत पर मुख्यतः तुर्क मूल के शासकों का शासन रहा था। लोदी शासकों ने अफगान सरदारों को प्रशासन में महत्वपूर्ण स्थान दिया। यह वंश 1526 ई. तक सत्ता में रहा और प्रथम पानीपत के युद्ध के बाद समाप्त हो गया।


96. दिल्ली सल्तनत में ‘मुक्ति’ (Muqti) किसे कहा जाता था?

A. मुख्य न्यायाधीश
B. इक्तादार या प्रांतीय अधिकारी
C. धार्मिक प्रमुख
D. शाही चिकित्सक

उत्तर: B. इक्तादार या प्रांतीय अधिकारी

व्याख्या: मुक्ति या इक्तादार वह अधिकारी होता था जिसे किसी इक्ता का प्रशासन और राजस्व संग्रह सौंपा जाता था। उसका दायित्व कानून व्यवस्था बनाए रखना, कर वसूलना तथा आवश्यकता पड़ने पर सुल्तान को सैनिक उपलब्ध कराना था। मुक्ति भूमि का स्वामी नहीं होता था, बल्कि वह राज्य की ओर से नियुक्त प्रशासक होता था। केंद्रीय सत्ता उसके कार्यों की नियमित निगरानी करती थी।


97. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने कृषि योग्य भूमि का सर्वाधिक विस्तार कराने का प्रयास किया?

A. अलाउद्दीन खिलजी
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. बलबन

उत्तर: C. फिरोज शाह तुगलक

व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने नहरों का निर्माण, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और नई कृषि भूमि विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया। उसने किसानों को सिंचाई के साधन उपलब्ध कराकर उत्पादन बढ़ाने का प्रयास किया। अनेक बंजर क्षेत्रों को खेती योग्य बनाया गया और कृषि को प्रोत्साहन देने के लिए प्रशासनिक सहायता प्रदान की गई। उसके शासनकाल में कृषि और सार्वजनिक निर्माण कार्यों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।


98. दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने ‘खालिसा भूमि’ का विस्तार किया?

A. इल्तुतमिश
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. सिकंदर लोदी
D. बहलोल लोदी

उत्तर: B. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने शाही आय बढ़ाने के उद्देश्य से खालिसा भूमि का विस्तार किया, जिससे अधिक राजस्व सीधे शाही कोष में जमा होने लगा। उसने कई इक्ताओं को वापस लेकर उन्हें खालिसा क्षेत्र में शामिल किया। इस नीति से केंद्रीय शासन की आर्थिक शक्ति बढ़ी और विशाल स्थायी सेना का खर्च वहन करना संभव हुआ। उसकी राजस्व व्यवस्था दिल्ली सल्तनत की सबसे प्रभावशाली आर्थिक नीतियों में गिनी जाती है।


99. दिल्ली सल्तनत का सबसे शिक्षित और विद्वान शासक किसे माना जाता है?

A. बलबन
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. बहलोल लोदी
D. फिरोज शाह तुगलक

उत्तर: B. मुहम्मद बिन तुगलक

व्याख्या: मुहम्मद बिन तुगलक को दिल्ली सल्तनत का सबसे विद्वान शासक माना जाता है। उसे अरबी, फारसी, दर्शन, गणित, चिकित्सा, तर्कशास्त्र और धर्मशास्त्र का गहरा ज्ञान था। वह विद्वानों के साथ शास्त्रार्थ करता था और साहित्य तथा विज्ञान में विशेष रुचि रखता था। उसकी बौद्धिक क्षमता की प्रशंसा अनेक समकालीन लेखकों और विदेशी यात्रियों ने की है।


100. दिल्ली सल्तनत का काल सामान्यतः किस अवधि तक माना जाता है?

A. 1000–1206 ई.
B. 1206–1526 ई.
C. 1290–1526 ई.
D. 1526–1707 ई.

उत्तर: B. 1206–1526 ई.

व्याख्या: दिल्ली सल्तनत का काल 1206 ई. में कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा गुलाम वंश की स्थापना से प्रारम्भ होकर 1526 ई. में प्रथम पानीपत के युद्ध तक माना जाता है। इस अवधि में क्रमशः गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैय्यद और लोदी वंशों ने शासन किया। 1526 ई. में बाबर द्वारा इब्राहिम लोदी को पराजित करने के बाद भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना हुई। मध्यकालीन भारतीय इतिहास के अध्ययन में यह 320 वर्षों का कालखंड अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न 

क्या दिल्ली सल्तनत मध्यकालीन इतिहास है?

हाँ, दिल्ली सल्तनत भारतीय मध्यकालीन इतिहास (Medieval History) का महत्वपूर्ण भाग है। इसका काल 1206 ई. से 1526 ई. तक माना जाता है। इस अवधि में गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैय्यद और लोदी वंशों ने दिल्ली तथा भारत के बड़े भाग पर शासन किया। प्रतियोगी परीक्षाओं में मध्यकालीन इतिहास से पूछे जाने वाले प्रश्नों में दिल्ली सल्तनत का विशेष महत्व है।

दिल्ली सल्तनत का इतिहास क्या था?

दिल्ली सल्तनत की स्थापना 1206 ई. में कुतुबुद्दीन ऐबक ने की थी। इसके बाद क्रमशः गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैय्यद और लोदी वंशों ने शासन किया। इस काल में प्रशासन, कर व्यवस्था, सैन्य संगठन, स्थापत्य कला तथा सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। 1526 ई. में प्रथम पानीपत के युद्ध में इब्राहिम लोदी की पराजय के साथ दिल्ली सल्तनत का अंत हुआ और मुगल साम्राज्य की स्थापना हुई।

दिल्ली सल्तनत का इतिहास क्या है?

दिल्ली सल्तनत भारत में तुर्क एवं अफगान शासकों द्वारा स्थापित एक शक्तिशाली मुस्लिम शासन था, जिसने लगभग 320 वर्षों तक उत्तर भारत के बड़े भाग पर शासन किया। इस काल में अनेक प्रशासनिक सुधार, आर्थिक नीतियाँ, स्थापत्य स्मारक तथा सैन्य अभियान हुए। कुतुब मीनार, अलाई दरवाज़ा, तुगलकाबाद और फिरोज शाह कोटला जैसी ऐतिहासिक धरोहरें इसी काल की प्रमुख उपलब्धियाँ हैं।

दिल्ली सल्तनत के इतिहास के बारे में जानकारी के स्रोत क्या हैं?

दिल्ली सल्तनत के इतिहास की जानकारी समकालीन ग्रंथों, विदेशी यात्रियों के यात्रा-वृत्तांत, अभिलेखों, सिक्कों तथा ऐतिहासिक स्मारकों से प्राप्त होती है। प्रमुख स्रोतों में तबकात-ए-नासिरी, तारीख-ए-फिरोजशाही, तारीख-ए-मुबारकशाही, रिहला, अमीर खुसरो की रचनाएँ, कुतुब परिसर, तुगलकाबाद, फिरोज शाह कोटला तथा उस काल के सिक्के और शिलालेख शामिल हैं।

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