
तुगलक वंश मध्यकालीन भारत के इतिहास का एक महत्वपूर्ण राजवंश था, जिसने दिल्ली सल्तनत के राजनीतिक, प्रशासनिक और आर्थिक स्वरूप को नई दिशा देने का प्रयास किया। इस वंश की स्थापना गयासुद्दीन तुगलक ने की थी, जबकि मुहम्मद बिन तुगलक और फिरोज शाह तुगलक जैसे शासकों ने अपने अलग-अलग निर्णयों और नीतियों के कारण इतिहास में विशेष स्थान प्राप्त किया। राजधानी परिवर्तन, सांकेतिक मुद्रा, नहरों का निर्माण, नगरों की स्थापना, कृषि सुधार तथा प्रशासनिक व्यवस्थाओं जैसे अनेक विषय इसी वंश से जुड़े हुए हैं। इस Tughlaq Dynasty Mock Test में तुगलक वंश से संबंधित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्यों, प्रमुख शासकों, प्रशासन, स्थापत्य कला, आर्थिक नीतियों, सैन्य अभियानों तथा अन्य आवश्यक जानकारियों पर आधारित प्रश्न शामिल किए गए हैं, जिससे इस विषय को क्रमबद्ध और गहराई से समझा जा सके।
Tughlaq Dynasty Mock Test MCQ Questions 1–20
1. तुगलक वंश का संस्थापक कौन था?
A. जलालुद्दीन फिरोज खिलजी
B. गयासुद्दीन तुगलक
C. मुहम्मद बिन तुगलक
D. फिरोज शाह तुगलक
उत्तर: B. गयासुद्दीन तुगलक
व्याख्या: गयासुद्दीन तुगलक ने 1320 ईस्वी में तुगलक वंश की स्थापना की और खिलजी वंश का अंत किया। उनका मूल नाम गाजी मलिक था तथा वे सीमांत क्षेत्रों के एक सफल सेनानायक थे। उन्होंने दिल्ली सल्तनत की सुरक्षा को मजबूत किया और प्रशासन को पुनः संगठित करने का प्रयास किया। उनके शासनकाल में तुगलकाबाद दुर्ग का निर्माण भी प्रारंभ हुआ, जो तुगलक स्थापत्य कला का प्रमुख उदाहरण माना जाता है।
2. गयासुद्दीन तुगलक का मूल नाम क्या था?
A. उलूग खाँ
B. गाजी मलिक
C. फखरुद्दीन
D. जूना खाँ
उत्तर: B. गाजी मलिक
व्याख्या: गयासुद्दीन तुगलक का प्रारंभिक नाम गाजी मलिक था। उन्होंने मंगोल आक्रमणों से उत्तर-पश्चिमी सीमा की सफलतापूर्वक रक्षा की थी। उनकी सैन्य योग्यता से प्रभावित होकर उन्हें उच्च पद प्राप्त हुए और बाद में उन्होंने दिल्ली की सत्ता पर अधिकार कर तुगलक वंश की स्थापना की। उनके शासन ने सल्तनत में स्थिरता लाने का प्रयास किया।
3. तुगलक वंश की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
A. 1290 ई.
B. 1316 ई.
C. 1320 ई.
D. 1351 ई.
उत्तर: C. 1320 ई.
व्याख्या: तुगलक वंश की स्थापना 1320 ईस्वी में हुई जब गयासुद्दीन तुगलक ने खुसरो खाँ को पराजित कर दिल्ली की सत्ता प्राप्त की। इसके साथ ही खिलजी वंश का अंत हुआ। तुगलक वंश लगभग 1414 ईस्वी तक दिल्ली सल्तनत पर शासन करता रहा। इस काल में प्रशासन, अर्थव्यवस्था और स्थापत्य के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए।
4. तुगलक वंश का दूसरा शासक कौन था?
A. फिरोज शाह तुगलक
B. नासिरुद्दीन महमूद
C. मुहम्मद बिन तुगलक
D. गयासुद्दीन तुगलक द्वितीय
उत्तर: C. मुहम्मद बिन तुगलक
व्याख्या: गयासुद्दीन तुगलक की मृत्यु के बाद उनके पुत्र जूना खाँ ने मुहम्मद बिन तुगलक के नाम से सिंहासन ग्रहण किया। उनका शासन 1325 से 1351 ईस्वी तक चला। वे अत्यंत विद्वान, महत्वाकांक्षी और दूरदर्शी शासक माने जाते हैं, किंतु उनकी कई योजनाएँ व्यवहारिक कठिनाइयों के कारण असफल रहीं।
5. मुहम्मद बिन तुगलक का प्रारंभिक नाम क्या था?
A. गाजी मलिक
B. उलूग खाँ (जूना खाँ)
C. सिकंदर खाँ
D. नासिरुद्दीन
उत्तर: B. उलूग खाँ (जूना खाँ)
व्याख्या: मुहम्मद बिन तुगलक का प्रारंभिक नाम जूना खाँ अथवा उलूग खाँ था। सिंहासन पर बैठने के बाद उन्होंने मुहम्मद बिन तुगलक की उपाधि धारण की। वे अरबी, फारसी, गणित, दर्शन और चिकित्सा जैसे विषयों के ज्ञाता थे। उनकी विद्वता की प्रशंसा कई समकालीन लेखकों ने भी की है।
6. राजधानी को दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित करने का निर्णय किसने लिया था?
A. गयासुद्दीन तुगलक
B. फिरोज शाह तुगलक
C. मुहम्मद बिन तुगलक
D. बहलोल लोदी
उत्तर: C. मुहम्मद बिन तुगलक
व्याख्या: मुहम्मद बिन तुगलक ने दिल्ली से दौलताबाद राजधानी स्थानांतरित करने का निर्णय साम्राज्य के भौगोलिक संतुलन और दक्षिण भारत पर बेहतर नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से लिया था। यह योजना अत्यधिक कठिन साबित हुई क्योंकि जनता को लंबी दूरी तय करनी पड़ी। अंततः राजधानी को पुनः दिल्ली वापस लाना पड़ा।
7. सांकेतिक मुद्रा (Token Currency) किस शासक ने जारी की थी?
A. अलाउद्दीन खिलजी
B. गयासुद्दीन तुगलक
C. मुहम्मद बिन तुगलक
D. सिकंदर लोदी
उत्तर: C. मुहम्मद बिन तुगलक
व्याख्या: मुहम्मद बिन तुगलक ने चाँदी की कमी को दूर करने के उद्देश्य से ताँबे और पीतल की सांकेतिक मुद्रा जारी की। सरकार द्वारा उचित नियंत्रण न होने के कारण बड़ी मात्रा में नकली सिक्के बनाए जाने लगे। इससे राजकोष को भारी क्षति पहुँची और अंततः इस योजना को समाप्त करना पड़ा। यह मध्यकालीन भारतीय आर्थिक इतिहास की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक है।
8. दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि किस शासक के समय हुई थी?
A. इल्तुतमिश
B. गयासुद्दीन तुगलक
C. मुहम्मद बिन तुगलक
D. फिरोज शाह तुगलक
उत्तर: C. मुहम्मद बिन तुगलक
व्याख्या: मुहम्मद बिन तुगलक ने गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र में भूमि कर बढ़ा दिया था। उसी समय अकाल पड़ने के कारण किसानों की स्थिति अत्यंत खराब हो गई। कर वसूली में कठोरता बरती गई जिससे व्यापक असंतोष उत्पन्न हुआ। बाद में शासक को राहत संबंधी उपाय भी अपनाने पड़े।
9. दीवान-ए-कोही विभाग की स्थापना किसने की थी?
A. फिरोज शाह तुगलक
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. मुहम्मद बिन तुगलक
D. बलबन
उत्तर: C. मुहम्मद बिन तुगलक
व्याख्या: दीवान-ए-कोही की स्थापना कृषि विकास और परती भूमि को खेती योग्य बनाने के उद्देश्य से की गई थी। इस विभाग के माध्यम से किसानों को सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया। योजना का उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना था, लेकिन प्रशासनिक कमजोरियों के कारण अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। यह सल्तनत काल में कृषि सुधार का एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जाता है।
10. तुगलकाबाद दुर्ग का निर्माण किसने करवाया था?
A. मुहम्मद बिन तुगलक
B. गयासुद्दीन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. सिकंदर लोदी
उत्तर: B. गयासुद्दीन तुगलक
व्याख्या: तुगलकाबाद दुर्ग का निर्माण गयासुद्दीन तुगलक ने अपनी राजधानी की सुरक्षा के लिए करवाया था। यह विशाल किला अपनी मजबूत दीवारों, ऊँचे प्राचीरों और सैन्य दृष्टि से उपयुक्त संरचना के लिए प्रसिद्ध है। तुगलक स्थापत्य शैली में सादगी, मजबूती और उपयोगिता पर विशेष बल दिया गया था।
11. मुहम्मद बिन तुगलक का शासनकाल कब तक रहा?
A. 1320–1325 ई.
B. 1325–1351 ई.
C. 1351–1388 ई.
D. 1388–1414 ई.
उत्तर: B. 1325–1351 ई.
व्याख्या: मुहम्मद बिन तुगलक ने 1325 से 1351 ईस्वी तक शासन किया। उनके शासनकाल में अनेक प्रशासनिक और आर्थिक प्रयोग किए गए जिनमें राजधानी परिवर्तन, सांकेतिक मुद्रा, कर सुधार तथा कृषि विकास प्रमुख थे। यद्यपि कई योजनाएँ सफल नहीं रहीं, फिर भी वे मध्यकालीन भारत के सबसे विद्वान और महत्वाकांक्षी शासकों में गिने जाते हैं।
12. फिरोज शाह तुगलक किसका उत्तराधिकारी था?
A. गयासुद्दीन तुगलक
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. नासिरुद्दीन महमूद
D. खिज्र खाँ
उत्तर: B. मुहम्मद बिन तुगलक
व्याख्या: 1351 ईस्वी में मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु के बाद फिरोज शाह तुगलक दिल्ली सल्तनत का शासक बना। उसने प्रशासन में अपेक्षाकृत नरम नीति अपनाई और अनेक लोककल्याणकारी कार्य कराए। उसके शासनकाल में सिंचाई, नगर निर्माण और सार्वजनिक भवनों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया।
13. फिरोज शाह तुगलक ने कौन-सा प्रसिद्ध नगर बसाया था?
A. सिरी
B. फिरोजाबाद
C. तुगलकाबाद
D. जौनपुर
उत्तर: B. फिरोजाबाद
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने दिल्ली में फिरोजाबाद नगर की स्थापना की थी। इसी नगर में प्रसिद्ध फिरोज शाह कोटला का निर्माण भी कराया गया। उसने अनेक मस्जिदें, मदरसे, सराय, बाग और सार्वजनिक भवन बनवाए। उसके निर्माण कार्यों से तुगलक स्थापत्य शैली को नई पहचान मिली।
14. फिरोज शाह तुगलक द्वारा स्थापित सिंचाई व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य क्या था?
A. व्यापार बढ़ाना
B. कृषि उत्पादन बढ़ाना
C. सेना का विस्तार करना
D. विदेशी व्यापार करना
उत्तर: B. कृषि उत्पादन बढ़ाना
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने कृषि को प्रोत्साहित करने के लिए कई नहरों का निर्माण करवाया। यमुना और सतलुज जैसी नदियों से सिंचाई की व्यवस्था विकसित की गई जिससे खेती योग्य भूमि का विस्तार हुआ। इससे किसानों को लाभ मिला और कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई। यह सल्तनत काल की महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं में से एक थी।
15. अशोक के स्तंभों को दिल्ली लाने का श्रेय किसे दिया जाता है?
A. गयासुद्दीन तुगलक
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. बलबन
उत्तर: C. फिरोज शाह तुगलक
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने मेरठ और टोपरा से अशोक के शिलालेखयुक्त स्तंभों को दिल्ली मंगवाया और उन्हें फिरोज शाह कोटला में स्थापित कराया। उस समय ब्राह्मी लिपि को पढ़ा नहीं जा सकता था, इसलिए इन अभिलेखों का वास्तविक अर्थ बाद के काल में ज्ञात हुआ। यह भारतीय पुरातात्विक धरोहर के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।
16. फिरोज शाह तुगलक का शासनकाल कब था?
A. 1325–1351 ई.
B. 1351–1388 ई.
C. 1388–1394 ई.
D. 1414–1451 ई.
उत्तर: B. 1351–1388 ई.
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने लगभग 37 वर्षों तक शासन किया, जो तुगलक वंश के सबसे लंबे शासनकालों में से एक था। इस दौरान उसने लोककल्याणकारी योजनाओं, नहर निर्माण, शिक्षा संस्थानों और धार्मिक भवनों के निर्माण को प्रोत्साहित किया। उसके शासन के अंतिम वर्षों में केंद्रीय सत्ता धीरे-धीरे कमजोर होने लगी थी।
17. फिरोज शाह तुगलक द्वारा स्थापित दास विभाग को क्या कहा जाता था?
A. दीवान-ए-इंशा
B. दीवान-ए-बंदगान
C. दीवान-ए-अर्ज
D. दीवान-ए-वजारत
उत्तर: B. दीवान-ए-बंदगान
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने बड़ी संख्या में दासों के प्रबंधन के लिए दीवान-ए-बंदगान नामक विशेष विभाग स्थापित किया था। इस विभाग के माध्यम से दासों के प्रशिक्षण, देखरेख और विभिन्न प्रशासनिक कार्यों का संचालन किया जाता था। यह विभाग तुगलक प्रशासन की विशिष्ट विशेषताओं में से एक माना जाता है।
18. तैमूर का भारत पर आक्रमण किस तुगलक शासक के समय हुआ था?
A. फिरोज शाह तुगलक
B. गयासुद्दीन तुगलक
C. नासिरुद्दीन महमूद तुगलक
D. मुहम्मद बिन तुगलक
उत्तर: C. नासिरुद्दीन महमूद तुगलक
व्याख्या: 1398 ईस्वी में तैमूर ने भारत पर आक्रमण किया, उस समय दिल्ली के सिंहासन पर नासिरुद्दीन महमूद तुगलक था। तैमूर ने दिल्ली में व्यापक लूटपाट और विनाश किया जिससे दिल्ली सल्तनत की शक्ति को गहरा आघात पहुँचा। इस घटना के बाद तुगलक वंश का पतन और अधिक तेज हो गया।
19. तुगलक वंश के पतन के बाद दिल्ली पर किस वंश का शासन स्थापित हुआ?
A. खिलजी वंश
B. लोदी वंश
C. सैयद वंश
D. गुलाम वंश
उत्तर: C. सैयद वंश
व्याख्या: 1414 ईस्वी में तुगलक वंश का अंत होने के बाद खिज्र खाँ ने सैयद वंश की स्थापना की। खिज्र खाँ ने स्वयं को तैमूर का प्रतिनिधि माना और दिल्ली पर शासन प्रारंभ किया। इसके साथ ही दिल्ली सल्तनत के इतिहास में एक नए राजवंश का उदय हुआ।
20. तुगलक वंश का अंतिम प्रभावशाली शासक कौन माना जाता है?
A. गयासुद्दीन तुगलक
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. नासिरुद्दीन महमूद तुगलक
उत्तर: C. फिरोज शाह तुगलक
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक को तुगलक वंश का अंतिम प्रभावशाली शासक माना जाता है। उनके शासनकाल के बाद उत्तराधिकार संघर्ष, प्रांतीय विद्रोह और केंद्रीय सत्ता की कमजोरी बढ़ती गई। अंततः तैमूर के आक्रमण और राजनीतिक अस्थिरता ने तुगलक शासन को लगभग समाप्त कर दिया, जिसके बाद सैयद वंश का उदय हुआ।
तुगलक वंश MCQ Questions 21–40
21. गयासुद्दीन तुगलक की मृत्यु किस स्थान पर हुई थी?
A. तुगलकाबाद
B. अफगानपुर
C. देवगिरि
D. वारंगल
उत्तर: B. अफगानपुर
व्याख्या: गयासुद्दीन तुगलक की मृत्यु 1325 ईस्वी में बंगाल अभियान से लौटते समय दिल्ली के निकट अफगानपुर में हुई थी। उनके स्वागत के लिए लकड़ी का एक अस्थायी मंडप बनवाया गया था, जो अचानक गिर गया और वे उसके नीचे दब गए। समकालीन विवरणों में इस घटना की परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग मत मिलते हैं। गयासुद्दीन की मृत्यु के बाद उनके पुत्र जूना खाँ ने मुहम्मद बिन तुगलक के नाम से सत्ता संभाली।
22. वारंगल को दिल्ली सल्तनत में मिलाने वाला तुगलक सेनापति कौन था?
A. गाजी मलिक
B. जूना खाँ
C. मलिक काफूर
D. खिज्र खाँ
उत्तर: B. जूना खाँ
व्याख्या: गयासुद्दीन तुगलक के शासनकाल में उनके पुत्र जूना खाँ ने वारंगल के काकतीय राज्य के विरुद्ध अभियान चलाया था। 1323 ईस्वी में काकतीय शासक प्रतापरुद्र देव को पराजित कर वारंगल को दिल्ली सल्तनत में मिला लिया गया। विजय के बाद वारंगल का नाम बदलकर सुल्तानपुर रखा गया था। जूना खाँ बाद में मुहम्मद बिन तुगलक के नाम से दिल्ली का सुल्तान बना।
23. प्रसिद्ध मोरक्को यात्री इब्न बतूता भारत किस तुगलक शासक के समय आया था?
A. गयासुद्दीन तुगलक
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. गयासुद्दीन तुगलक द्वितीय
उत्तर: B. मुहम्मद बिन तुगलक
व्याख्या: मोरक्को का प्रसिद्ध यात्री इब्न बतूता मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में भारत आया था। सुल्तान ने उसकी विद्वता से प्रभावित होकर उसे दिल्ली का काजी नियुक्त किया। इब्न बतूता कई वर्षों तक भारत में रहा और उसने दिल्ली सल्तनत के दरबार, प्रशासन तथा सामाजिक जीवन का वर्णन किया। उसके विवरण से मुहम्मद बिन तुगलक के व्यक्तित्व और तत्कालीन भारत की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।
24. मुहम्मद बिन तुगलक ने इब्न बतूता को किस पद पर नियुक्त किया था?
A. वजीर
B. सेनापति
C. दिल्ली का काजी
D. दीवान-ए-अर्ज
उत्तर: C. दिल्ली का काजी
व्याख्या: मुहम्मद बिन तुगलक ने इब्न बतूता को दिल्ली का काजी नियुक्त किया था। काजी का कार्य इस्लामी कानून के अनुसार न्यायिक मामलों का निर्णय करना था। बाद में सुल्तान ने इब्न बतूता को अपने दूत के रूप में चीन भेजने का भी निर्णय लिया। इब्न बतूता के अनुभव दिल्ली सल्तनत की न्याय व्यवस्था, दरबारी जीवन और प्रशासनिक संरचना को समझने में सहायक हैं।
25. इब्न बतूता के यात्रा-वृत्तांत का नाम क्या है?
A. तबकात-ए-नासिरी
B. रिहला
C. तारीख-ए-फिरोजशाही
D. फुतूह-उस-सलातीन
उत्तर: B. रिहला
व्याख्या: इब्न बतूता के प्रसिद्ध यात्रा-वृत्तांत का नाम रिहला है, जिसका अर्थ यात्रा का विवरण होता है। इसमें उसने अफ्रीका, अरब, फारस, भारत, चीन और अन्य क्षेत्रों की यात्राओं का वर्णन किया है। भारत से संबंधित विवरण में मुहम्मद बिन तुगलक का दरबार, दिल्ली की समृद्धि, डाक व्यवस्था और सामाजिक परिस्थितियाँ शामिल हैं। रिहला मध्यकालीन भारत के इतिहास का एक महत्वपूर्ण विदेशी स्रोत माना जाता है।
26. खुरासान विजय की योजना किस तुगलक शासक ने बनाई थी?
A. गयासुद्दीन तुगलक
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. नासिरुद्दीन महमूद
उत्तर: B. मुहम्मद बिन तुगलक
व्याख्या: मुहम्मद बिन तुगलक ने मध्य एशिया के खुरासान क्षेत्र को जीतने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई थी। इस अभियान के लिए उसने विशाल सेना तैयार की और सैनिकों को अग्रिम वेतन भी दिया। बाद में खुरासान की राजनीतिक परिस्थितियाँ बदल जाने के कारण अभियान प्रारंभ किए बिना ही योजना छोड़ दी गई। सेना की तैयारी पर हुए भारी व्यय से राजकोष पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ा।
27. कराचिल अभियान किस शासक से संबंधित था?
A. बलबन
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. मुहम्मद बिन तुगलक
D. फिरोज शाह तुगलक
उत्तर: C. मुहम्मद बिन तुगलक
व्याख्या: कराचिल अभियान मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र की ओर भेजा गया था। इसका उद्देश्य उत्तरी सीमा को सुरक्षित करना और पर्वतीय क्षेत्रों पर सल्तनत का प्रभाव स्थापित करना माना जाता है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, वर्षा, ठंड और खाद्य सामग्री की कमी के कारण सेना को भारी क्षति हुई। यह अभियान मुहम्मद बिन तुगलक की असफल सैन्य योजनाओं में गिना जाता है।
28. जहाँपनाह नगर का निर्माण किस तुगलक शासक ने करवाया था?
A. गयासुद्दीन तुगलक
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. अबू बक्र शाह
उत्तर: B. मुहम्मद बिन तुगलक
व्याख्या: जहाँपनाह नगर का निर्माण मुहम्मद बिन तुगलक ने दिल्ली में करवाया था। इसका उद्देश्य किला राय पिथौरा और सिरी नगर के बीच के क्षेत्र को दीवारों से जोड़कर एक सुरक्षित राजधानी बनाना था। जहाँपनाह का अर्थ संसार की शरणस्थली होता है। नगर की विशाल दीवारों और किलेबंदी से तुगलक शासकों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं तथा स्थापत्य नीति का पता चलता है।
29. आदिलाबाद किले का निर्माण किसने करवाया था?
A. गयासुद्दीन तुगलक
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. सिकंदर लोदी
उत्तर: B. मुहम्मद बिन तुगलक
व्याख्या: आदिलाबाद किले का निर्माण मुहम्मद बिन तुगलक ने तुगलकाबाद के निकट करवाया था। इसकी स्थापत्य शैली तुगलकाबाद दुर्ग से मिलती-जुलती है और इसमें सुरक्षा को विशेष महत्व दिया गया था। किले की मोटी दीवारें, ढलानदार संरचना और सीमित सजावट तुगलक स्थापत्य की प्रमुख विशेषताएँ हैं। यह किला मुहम्मद बिन तुगलक की सैन्य और राजधानी संबंधी निर्माण योजनाओं का भाग था।
30. तुगलक स्थापत्य कला की प्रमुख विशेषता क्या थी?
A. अत्यधिक संगमरमर की सजावट
B. ढलानदार और मोटी दीवारें
C. काँच की मीनारें
D. लकड़ी के विशाल महल
उत्तर: B. ढलानदार और मोटी दीवारें
व्याख्या: तुगलक स्थापत्य कला में मजबूत, मोटी और अंदर की ओर झुकी हुई ढलानदार दीवारों का प्रयोग किया जाता था। इन दीवारों को सैन्य सुरक्षा और भवन की मजबूती के लिए उपयोगी माना जाता था। तुगलककालीन इमारतों में सजावट की अपेक्षा सादगी, उपयोगिता और दृढ़ता पर अधिक ध्यान दिया गया। तुगलकाबाद दुर्ग और गयासुद्दीन तुगलक का मकबरा इस स्थापत्य शैली के प्रमुख उदाहरण हैं।
31. गयासुद्दीन तुगलक का मकबरा कहाँ स्थित है?
A. सिरी के निकट
B. तुगलकाबाद के निकट
C. फिरोजाबाद में
D. दौलताबाद में
उत्तर: B. तुगलकाबाद के निकट
व्याख्या: गयासुद्दीन तुगलक का मकबरा दिल्ली में तुगलकाबाद दुर्ग के निकट एक अलग किलेबंद परिसर में स्थित है। इसका निर्माण लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से किया गया है। मकबरे की ढलानदार दीवारें और ऊँचा गुंबद तुगलक स्थापत्य शैली को प्रदर्शित करते हैं। यह मकबरा एक मार्ग द्वारा तुगलकाबाद दुर्ग से जुड़ा हुआ था और चारों ओर मजबूत दीवारें बनाई गई थीं।
32. फिरोज शाह तुगलक द्वारा लिखित आत्मकथात्मक रचना कौन-सी थी?
A. फुतूहात-ए-फिरोजशाही
B. रिहला
C. तबकात-ए-नासिरी
D. ताज-उल-मासिर
उत्तर: A. फुतूहात-ए-फिरोजशाही
व्याख्या: फुतूहात-ए-फिरोजशाही फिरोज शाह तुगलक से संबंधित आत्मकथात्मक रचना है। इसमें उसने अपने प्रशासनिक निर्णयों, धार्मिक नीतियों और सार्वजनिक निर्माण कार्यों का विवरण दिया है। इस रचना से फिरोज शाह द्वारा बनवाई गई नहरों, नगरों, मदरसों और अन्य संस्थाओं की जानकारी मिलती है। यह ग्रंथ उसके शासन की नीतियों को शासक के अपने दृष्टिकोण से समझने का महत्वपूर्ण स्रोत है।
33. दीवान-ए-खैरात विभाग की स्थापना किस उद्देश्य से की गई थी?
A. सेना को वेतन देने के लिए
B. निर्धन और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए
C. विदेशी व्यापार बढ़ाने के लिए
D. भूमि कर वसूलने के लिए
उत्तर: B. निर्धन और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने निर्धन, अनाथ और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए दीवान-ए-खैरात की स्थापना की थी। इस विभाग द्वारा विशेष रूप से गरीब मुस्लिम महिलाओं और विवाह योग्य कन्याओं को आर्थिक सहायता दी जाती थी। यह संस्था फिरोज शाह की लोककल्याणकारी प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा थी। इसके माध्यम से राज्य द्वारा सामाजिक सहायता और दान संबंधी कार्यों को संगठित रूप दिया गया।
34. फिरोज शाह तुगलक द्वारा स्थापित निःशुल्क चिकित्सालय को क्या कहा जाता था?
A. दीवान-ए-बंदगान
B. दार-उल-शफा
C. दीवान-ए-इंशा
D. दार-उल-हरब
उत्तर: B. दार-उल-शफा
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने रोगियों के उपचार के लिए दार-उल-शफा नामक चिकित्सालय की स्थापना की थी। यहाँ योग्य चिकित्सकों की नियुक्ति की गई और रोगियों को निःशुल्क दवाइयाँ उपलब्ध कराई जाती थीं। चिकित्सालय के खर्च के लिए राज्य की ओर से आय की व्यवस्था भी की गई थी। यह सल्तनत काल में सार्वजनिक स्वास्थ्य और राज्य समर्थित चिकित्सा व्यवस्था का महत्वपूर्ण उदाहरण था।
35. फिरोज शाह तुगलक द्वारा लगाया गया सिंचाई कर किस नाम से जाना जाता था?
A. खराज
B. जकात
C. हक-ए-शर्ब
D. खम्स
उत्तर: C. हक-ए-शर्ब
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने सरकारी नहरों से सिंचाई करने वाली भूमि पर हक-ए-शर्ब नामक सिंचाई कर लगाया था। इस कर से प्राप्त धन का उपयोग नहरों की देखरेख और सिंचाई व्यवस्था के संचालन में किया जाता था। उसने यमुना, सतलुज और घग्घर से कई नहरें निकलवाकर कृषि क्षेत्र का विस्तार किया। बेहतर सिंचाई व्यवस्था से अनेक सूखे क्षेत्रों में खेती संभव हुई और राज्य की कृषि आय में वृद्धि हुई।
36. ब्राह्मणों पर भी जजिया कर लगाने वाला तुगलक शासक कौन था?
A. गयासुद्दीन तुगलक
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. नासिरुद्दीन महमूद
उत्तर: C. फिरोज शाह तुगलक
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने अपनी रूढ़िवादी धार्मिक नीति के अंतर्गत ब्राह्मणों पर भी जजिया कर लगाया था। उससे पहले ब्राह्मणों को सामान्यतः इस कर से छूट प्राप्त थी। जजिया गैर-मुस्लिम प्रजा से लिया जाने वाला व्यक्तिगत कर था, जिसके बदले उन्हें राज्य की सुरक्षा प्राप्त होती थी। इस निर्णय से फिरोज शाह की धार्मिक नीति पूर्ववर्ती तुगलक शासकों की तुलना में अधिक कठोर दिखाई देती है।
37. प्रशासनिक पदों और इक्ताओं को वंशानुगत बनाने की नीति किसने अपनाई थी?
A. मुहम्मद बिन तुगलक
B. फिरोज शाह तुगलक
C. गयासुद्दीन तुगलक
D. कुतुबुद्दीन ऐबक
उत्तर: B. फिरोज शाह तुगलक
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने सैनिक और प्रशासनिक पदों को वंशानुगत बनाने की नीति अपनाई थी। किसी अधिकारी या सैनिक की मृत्यु के बाद उसका पद उसके पुत्र अथवा निकट संबंधी को दिया जाने लगा। इस नीति से अधिकारियों और अमीरों को तत्काल लाभ मिला, लेकिन योग्यता आधारित नियुक्ति की व्यवस्था कमजोर हुई। लंबे समय में इसने केंद्रीय सत्ता, सैन्य अनुशासन और प्रशासनिक दक्षता को नुकसान पहुँचाया।
38. हिसार-ए-फिरोजा नगर की स्थापना किसने की थी?
A. गयासुद्दीन तुगलक
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. तैमूर
उत्तर: C. फिरोज शाह तुगलक
व्याख्या: हिसार-ए-फिरोजा नगर की स्थापना फिरोज शाह तुगलक ने वर्तमान हरियाणा क्षेत्र में की थी। नगर के विकास के लिए किले, महल, मस्जिद और जल व्यवस्था का निर्माण कराया गया। आसपास के क्षेत्रों तक नहरें पहुँचाकर कृषि और मानव बस्तियों को प्रोत्साहित किया गया। हिसार नाम का संबंध किले या दुर्ग से है और यह नगर फिरोज शाह की नगर निर्माण नीति का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
39. जौनपुर नगर की स्थापना किस तुगलक शासक ने करवाई थी?
A. गयासुद्दीन तुगलक
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. नासिरुद्दीन महमूद
उत्तर: C. फिरोज शाह तुगलक
व्याख्या: जौनपुर नगर की स्थापना फिरोज शाह तुगलक ने गोमती नदी के किनारे करवाई थी। इसका नाम मुहम्मद बिन तुगलक के प्रारंभिक नाम जूना या जौना खाँ की स्मृति में रखा गया माना जाता है। बाद में जौनपुर शर्की वंश की राजधानी बना और शिक्षा, साहित्य तथा स्थापत्य कला का प्रमुख केंद्र बन गया। अटाला मस्जिद और जामा मस्जिद जौनपुर की विशिष्ट स्थापत्य परंपरा के प्रसिद्ध उदाहरण हैं।
40. फिरोज शाह तुगलक के शासनकाल का विस्तृत वर्णन करने वाला इतिहासकार कौन था?
A. अमीर खुसरो
B. शम्स-ए-सिराज अफीफ
C. मिनहाज-उस-सिराज
D. हसन निजामी
उत्तर: B. शम्स-ए-सिराज अफीफ
व्याख्या: शम्स-ए-सिराज अफीफ ने अपनी रचना तारीख-ए-फिरोजशाही में फिरोज शाह तुगलक के शासनकाल का विस्तृत वर्णन किया है। उसने प्रशासन, सार्वजनिक निर्माण, नहरों, दास व्यवस्था और दरबारी जीवन से संबंधित अनेक जानकारियाँ दी हैं। उसका विवरण फिरोज शाह की लोककल्याणकारी योजनाओं के साथ प्रशासन की कमजोरियों को समझने में भी सहायक है। यह ग्रंथ तुगलककालीन इतिहास के प्रमुख समकालीन स्रोतों में शामिल है।
तुगलक वंश MCQ Questions 41–60
41. मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु कहाँ हुई थी?
A. दिल्ली
B. दौलताबाद
C. थट्टा
D. लाहौर
उत्तर: C. थट्टा
व्याख्या: मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु 1351 ईस्वी में सिंध के थट्टा क्षेत्र के निकट हुई थी। वह गुजरात के विद्रोही तगी का पीछा करते हुए सिंध पहुँचा था। अभियान के दौरान बीमार पड़ने के कारण उसकी मृत्यु हो गई। उसकी मृत्यु के बाद अमीरों और धार्मिक अधिकारियों ने फिरोज शाह तुगलक को नया सुल्तान चुना।
42. तगी का विद्रोह किस तुगलक शासक के शासनकाल में हुआ था?
A. गयासुद्दीन तुगलक
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. नासिरुद्दीन महमूद
उत्तर: B. मुहम्मद बिन तुगलक
व्याख्या: तगी ने मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में गुजरात में विद्रोह किया था। सुल्तान ने विद्रोह को दबाने के लिए स्वयं गुजरात की ओर अभियान किया। तगी गुजरात से भागकर सिंध के थट्टा क्षेत्र में पहुँच गया, इसलिए सुल्तान ने उसका पीछा जारी रखा। इसी अभियान के दौरान मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु हो गई और विद्रोह पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सका।
43. दौलताबाद का प्राचीन नाम क्या था?
A. मान्यखेट
B. देवगिरि
C. वातापी
D. कल्याणी
उत्तर: B. देवगिरि
व्याख्या: दौलताबाद का प्राचीन नाम देवगिरि था और यह यादव वंश की राजधानी रहा था। अलाउद्दीन खिलजी ने देवगिरि पर आक्रमण कर वहाँ के शासक रामचंद्र देव को अधीन किया था। मुहम्मद बिन तुगलक ने बाद में इसका नाम दौलताबाद रखा और इसे अपनी राजधानी बनाने का प्रयास किया। यह स्थान दक्कन में होने के कारण उत्तर तथा दक्षिण भारत के बीच सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था।
44. मुहम्मद बिन तुगलक की सांकेतिक मुद्रा मुख्य रूप से किन धातुओं से बनाई गई थी?
A. सोना और चाँदी
B. ताँबा और पीतल
C. लोहा और सीसा
D. चाँदी और कांसा
उत्तर: B. ताँबा और पीतल
व्याख्या: मुहम्मद बिन तुगलक ने ताँबे और पीतल के सिक्कों को चाँदी के टंके के समान मूल्य देकर सांकेतिक मुद्रा जारी की थी। इसका उद्देश्य चाँदी की कमी को दूर करना और राजकोष की आवश्यकताओं को पूरा करना था। सिक्कों की ढलाई पर प्रभावी सरकारी नियंत्रण नहीं होने से सामान्य लोगों ने भी नकली सिक्के बनाने शुरू कर दिए। परिणामस्वरूप बाजार में मुद्रा की विश्वसनीयता समाप्त हो गई और योजना वापस लेनी पड़ी।
45. सांकेतिक मुद्रा की योजना असफल होने का प्रमुख कारण क्या था?
A. धातु उपलब्ध नहीं थी
B. व्यापारियों ने सोने की माँग की
C. नकली सिक्कों का व्यापक निर्माण हुआ
D. सेना ने सिक्के स्वीकार नहीं किए
उत्तर: C. नकली सिक्कों का व्यापक निर्माण हुआ
व्याख्या: सांकेतिक मुद्रा के सिक्के साधारण ताँबे और पीतल से बनाए जाते थे, इसलिए उनकी नकल करना आसान था। राज्य ने सिक्कों की ढलाई पर कठोर एकाधिकार और पहचान की प्रभावी व्यवस्था स्थापित नहीं की थी। लोगों ने घरों में नकली सिक्के बनाकर उनसे भूमि कर और बाजार का भुगतान करना शुरू कर दिया। इससे राजस्व व्यवस्था बिगड़ गई और वास्तविक तथा नकली मुद्रा में अंतर करना कठिन हो गया।
46. सांकेतिक मुद्रा वापस लेने के बाद मुहम्मद बिन तुगलक ने क्या किया था?
A. सभी सिक्कों को नष्ट करवा दिया
B. ताँबे के सिक्कों के बदले सोने-चाँदी का भुगतान किया
C. सिक्कों का मूल्य आधा कर दिया
D. केवल विदेशी व्यापार में प्रयोग की अनुमति दी
उत्तर: B. ताँबे के सिक्कों के बदले सोने-चाँदी का भुगतान किया
व्याख्या: योजना वापस लेने के बाद मुहम्मद बिन तुगलक ने सांकेतिक सिक्कों को राजकोष में जमा करवाने की घोषणा की। सरकार ने उनके बदले वास्तविक सोने या चाँदी की मुद्रा देने का प्रयास किया। नकली सिक्के भी बड़ी मात्रा में सरकारी खजाने में पहुँचे, जिससे राजकोष को भारी आर्थिक क्षति हुई। यह निर्णय सुल्तान की जिम्मेदारी स्वीकार करने की प्रवृत्ति दिखाता है, लेकिन इससे वित्तीय संकट और गहरा हो गया।
47. खुरासान अभियान के लिए मुहम्मद बिन तुगलक ने क्या तैयारी की थी?
A. समुद्री जहाजों का निर्माण
B. विशाल सेना की भर्ती
C. राजधानी को लाहौर ले जाना
D. चीन से सैन्य सहायता लेना
उत्तर: B. विशाल सेना की भर्ती
व्याख्या: मुहम्मद बिन तुगलक ने खुरासान पर विजय प्राप्त करने के उद्देश्य से एक विशाल सेना भर्ती की थी। सैनिकों को अभियान से पहले वेतन और आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध कराए गए। खुरासान की राजनीतिक परिस्थितियाँ बदलने पर सुल्तान ने अभियान रद्द कर दिया। सेना की भर्ती और वेतन पर खर्च हुआ धन व्यर्थ चला गया, जिससे राजकोष पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।
48. कराचिल अभियान किस भौगोलिक क्षेत्र की ओर भेजा गया था?
A. दक्कन का पठार
B. हिमालय का पर्वतीय क्षेत्र
C. बंगाल का डेल्टा
D. सिंध का मरुस्थल
उत्तर: B. हिमालय का पर्वतीय क्षेत्र
व्याख्या: कराचिल अभियान हिमालय के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र की ओर भेजा गया था। इसका उद्देश्य उत्तरी सीमाओं पर सल्तनत का प्रभाव बढ़ाना और वहाँ के स्थानीय शासकों को अधीन करना था। संकरे मार्ग, वर्षा, ठंड, रोग और भोजन की कमी के कारण सेना को भारी क्षति उठानी पड़ी। अभियान की असफलता ने यह दिखाया कि विशाल मैदानी सेना पर्वतीय परिस्थितियों के अनुकूल तैयार नहीं थी।
49. मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी वैधता मजबूत करने के लिए किससे मान्यता प्राप्त की थी?
A. मंगोल शासक से
B. अब्बासी खलीफा से
C. मिस्र के सुल्तान से
D. फारस के शाह से
उत्तर: B. अब्बासी खलीफा से
व्याख्या: मुहम्मद बिन तुगलक ने धार्मिक और राजनीतिक वैधता मजबूत करने के लिए अब्बासी खलीफा से औपचारिक मान्यता प्राप्त की थी। उस समय अब्बासी खलीफा की प्रतीकात्मक सत्ता मिस्र के काहिरा में स्थापित थी। खलीफा की ओर से सम्मानसूचक वस्त्र और अधिकार-पत्र भेजे गए थे। सुल्तान ने कुछ सिक्कों और खुतबे में खलीफा के प्रति सम्मान प्रदर्शित कर अपनी सत्ता को इस्लामी परंपरा से जोड़ने का प्रयास किया।
50. गंगा और यमुना नदियों के बीच का क्षेत्र किस नाम से जाना जाता है?
A. मालवा
B. दोआब
C. बुंदेलखंड
D. रोहिलखंड
उत्तर: B. दोआब
व्याख्या: गंगा और यमुना नदियों के बीच स्थित उपजाऊ भूमि को गंगा-यमुना दोआब कहा जाता है। यह क्षेत्र दिल्ली सल्तनत के लिए अनाज और भूमि राजस्व का प्रमुख स्रोत था। मुहम्मद बिन तुगलक ने यहाँ भूमि कर में वृद्धि की, लेकिन उसी समय अकाल और कृषि संकट उत्पन्न हो गया। कठोर कर वसूली के कारण किसानों का पलायन हुआ और कई क्षेत्रों में विद्रोह फैल गया।
51. जियाउद्दीन बरनी द्वारा लिखित प्रमुख ऐतिहासिक ग्रंथ कौन-सा है?
A. तारीख-ए-फिरोजशाही
B. रिहला
C. ताज-उल-मासिर
D. अकबरनामा
उत्तर: A. तारीख-ए-फिरोजशाही
व्याख्या: जियाउद्दीन बरनी ने तारीख-ए-फिरोजशाही नामक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथ की रचना की थी। इसमें बलबन के शासनकाल से लेकर फिरोज शाह तुगलक के आरंभिक शासन तक की घटनाओं का विवरण मिलता है। बरनी मुहम्मद बिन तुगलक के दरबार से जुड़ा हुआ था और उसने उसकी नीतियों को निकट से देखा था। उसका विवरण महत्वपूर्ण है, लेकिन उसके व्यक्तिगत और धार्मिक विचारों को ध्यान में रखकर उसका अध्ययन किया जाता है।
52. जियाउद्दीन बरनी की राजनीतिक विचारों से संबंधित रचना कौन-सी है?
A. फतवा-ए-जहाँदारी
B. फुतूहात-ए-फिरोजशाही
C. रिहला
D. तबकात-ए-नासिरी
उत्तर: A. फतवा-ए-जहाँदारी
व्याख्या: फतवा-ए-जहाँदारी जियाउद्दीन बरनी की राजनीतिक और प्रशासनिक विचारों से संबंधित रचना है। इसमें उसने आदर्श मुस्लिम शासक, शासन व्यवस्था और सामाजिक वर्गों के बारे में अपने विचार प्रस्तुत किए। बरनी ने शासन में धार्मिक कानून और कुलीन वर्ग की भूमिका पर विशेष बल दिया। यह ग्रंथ घटनाओं के क्रमबद्ध इतिहास से अधिक मध्यकालीन राजनीतिक चिंतन का स्रोत माना जाता है।
53. फुतूह-उस-सलातीन की रचना किसने की थी?
A. शम्स-ए-सिराज अफीफ
B. इसामी
C. इब्न बतूता
D. अमीर खुसरो
उत्तर: B. इसामी
व्याख्या: फुतूह-उस-सलातीन की रचना अब्दुल मलिक इसामी ने की थी। इसामी दिल्ली से दौलताबाद के स्थानांतरण के दौरान दक्कन चला गया था और उसने जनता की कठिनाइयों को देखा था। उसने अपने ग्रंथ में मुहम्मद बिन तुगलक की कई नीतियों की कठोर आलोचना की। यह रचना फारसी पद्य में लिखी गई और बहमनी शासक अलाउद्दीन हसन बहमन शाह को समर्पित की गई थी।
54. इब्न बतूता का जन्म किस देश में हुआ था?
A. मिस्र
B. मोरक्को
C. तुर्की
D. ईरान
उत्तर: B. मोरक्को
व्याख्या: इब्न बतूता का जन्म मोरक्को के तांजीर नगर में हुआ था। वह चौदहवीं शताब्दी का प्रसिद्ध यात्री, विद्वान और न्यायविद था। उसने अफ्रीका, पश्चिम एशिया, भारत, मालदीव, श्रीलंका और चीन सहित अनेक क्षेत्रों की यात्रा की। भारत में उसके अनुभव मुहम्मद बिन तुगलक के दरबार और तत्कालीन सामाजिक जीवन की महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं।
55. इब्न बतूता ने दिल्ली सल्तनत की किस व्यवस्था की विशेष प्रशंसा की थी?
A. समुद्री नौसेना
B. डाक और संचार व्यवस्था
C. मंदिर प्रशासन
D. ग्राम पंचायत व्यवस्था
उत्तर: B. डाक और संचार व्यवस्था
व्याख्या: इब्न बतूता ने मुहम्मद बिन तुगलक के समय की डाक और संचार व्यवस्था का विस्तृत वर्णन किया है। संदेश पहुँचाने के लिए घुड़सवार डाक और पैदल धावकों की अलग-अलग श्रृंखलाएँ काम करती थीं। इस व्यवस्था से राजधानी तक दूरस्थ प्रांतों की सूचनाएँ तेजी से पहुँचती थीं। राज्य प्रशासन, गुप्तचर व्यवस्था और व्यापारिक संचार में इस नेटवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
56. मदुरै सल्तनत का उदय किस तुगलक शासक के समय हुआ था?
A. गयासुद्दीन तुगलक
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. गयासुद्दीन तुगलक द्वितीय
उत्तर: B. मुहम्मद बिन तुगलक
व्याख्या: मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में दक्षिण भारत के माबर क्षेत्र ने दिल्ली से स्वतंत्रता प्राप्त कर ली थी। लगभग 1335 ईस्वी में जलालुद्दीन अहसन शाह ने मदुरै सल्तनत की स्थापना की। दिल्ली से अत्यधिक दूरी और दक्षिण में लगातार विद्रोहों के कारण केंद्रीय नियंत्रण कमजोर हो गया था। मदुरै सल्तनत का उदय तुगलक साम्राज्य के विघटन की प्रारंभिक घटनाओं में से एक था।
57. विजयनगर साम्राज्य की स्थापना किस तुगलक शासक के समय हुई थी?
A. गयासुद्दीन तुगलक
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. नासिरुद्दीन महमूद
उत्तर: B. मुहम्मद बिन तुगलक
व्याख्या: विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 ईस्वी में हरिहर और बुक्का ने की थी। उस समय दिल्ली सल्तनत पर मुहम्मद बिन तुगलक का शासन था। दक्षिण भारत में दिल्ली की प्रशासनिक पकड़ कमजोर होने और स्थानीय शक्तियों के पुनरुत्थान से विजयनगर के उदय का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसकी प्रारंभिक राजधानी तुंगभद्रा नदी के निकट विजयनगर या हम्पी में स्थापित की गई थी।
58. बहमनी राज्य की स्थापना किसने की थी?
A. महमूद गवाँ
B. अलाउद्दीन हसन बहमन शाह
C. मुहम्मद आदिल शाह
D. यूसुफ आदिल शाह
उत्तर: B. अलाउद्दीन हसन बहमन शाह
व्याख्या: बहमनी राज्य की स्थापना 1347 ईस्वी में अलाउद्दीन हसन बहमन शाह ने की थी। उसका प्रारंभिक नाम हसन गंगू भी बताया जाता है, यद्यपि इस नाम से संबंधित कथाओं पर इतिहासकारों में मतभेद हैं। बहमनी राज्य की पहली राजधानी गुलबर्गा थी और बाद में राजधानी बीदर स्थानांतरित की गई। इसका उदय मुहम्मद बिन तुगलक के समय दक्कन में दिल्ली सल्तनत की शक्ति के पतन का परिणाम था।
59. फिरोज शाह तुगलक को सुल्तान कहाँ चुना गया था?
A. दिल्ली
B. थट्टा के निकट
C. दौलताबाद
D. लखनौती
उत्तर: B. थट्टा के निकट
व्याख्या: मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु सिंध के थट्टा क्षेत्र में अभियान के दौरान हुई थी। उसकी मृत्यु के बाद सेना और प्रशासन में नेतृत्व का संकट उत्पन्न हो गया। अमीरों, सैन्य अधिकारियों और धार्मिक वर्ग के लोगों ने वहीं फिरोज शाह तुगलक को सुल्तान चुना। उसने 1351 ईस्वी में शासन संभाला और बाद में दिल्ली लौटकर अपनी सत्ता को व्यवस्थित किया।
60. फिरोज शाह तुगलक का मुहम्मद बिन तुगलक से क्या संबंध था?
A. पुत्र
B. भाई
C. चचेरा भाई
D. दामाद
उत्तर: C. चचेरा भाई
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक मुहम्मद बिन तुगलक का चचेरा भाई था। फिरोज के पिता रजब, गयासुद्दीन तुगलक के भाई थे। मुहम्मद बिन तुगलक की कोई सक्षम प्रत्यक्ष संतान उत्तराधिकारी के रूप में उपलब्ध नहीं थी। इसलिए उसकी मृत्यु के बाद तुगलक परिवार और अमीरों ने फिरोज शाह को शासन के लिए उपयुक्त व्यक्ति माना।
तुगलक वंश MCQ Questions 61–80
61. फिरोज शाह तुगलक ने मुख्य रूप से किन चार करों को मान्यता दी थी?
A. खराज, खम्स, जकात और जजिया
B. चराई कर, गृह कर, सिंचाई कर और चुंगी
C. लगान, व्यापार कर, नमक कर और सीमा कर
D. भू-कर, उपहार कर, पशु कर और बाजार कर
उत्तर: A. खराज, खम्स, जकात और जजिया
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने अपनी राजस्व व्यवस्था को इस्लामी कानून के अनुरूप बनाने का प्रयास किया था। उसने खराज, खम्स, जकात और जजिया को प्रमुख वैध कर माना। खराज भूमि से, जकात संपत्ति से और जजिया गैर-मुस्लिम प्रजा से संबंधित कर था। खम्स युद्ध में प्राप्त धन और संपत्ति के विभाजन से संबंधित था।
62. फिरोज शाह तुगलक ने अनेक छोटे और गैर-धार्मिक कर क्यों समाप्त किए थे?
A. व्यापारियों के विद्रोह के कारण
B. उन्हें इस्लामी कानून के विरुद्ध माना गया था
C. राजकोष में धन अधिक हो गया था
D. मंगोलों से समझौते के कारण
उत्तर: B. उन्हें इस्लामी कानून के विरुद्ध माना गया था
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने शासन को धार्मिक कानून के अनुरूप संचालित करने की नीति अपनाई थी। उसने ऐसे अनेक कर समाप्त कर दिए जिन्हें धार्मिक विद्वान इस्लामी कानून द्वारा मान्य नहीं मानते थे। इससे कुछ वर्गों पर कर का बोझ कम हुआ, लेकिन राज्य की आय के स्रोत भी सीमित हुए। इस कमी को भूमि राजस्व, सिंचाई कर और अन्य स्वीकृत करों के माध्यम से पूरा करने का प्रयास किया गया।
63. फिरोज शाह तुगलक के समय खम्स का कितना भाग राज्य को मिलता था?
A. आधा
B. एक-तिहाई
C. एक-पाँचवाँ
D. चार-पाँचवाँ
उत्तर: C. एक-पाँचवाँ
व्याख्या: खम्स युद्ध में प्राप्त लूट की संपत्ति के विभाजन से संबंधित कर था। इस्लामी नियम के अनुसार इसका एक-पाँचवाँ भाग राज्य को और चार-पाँचवाँ भाग सैनिकों को दिया जाना था। फिरोज शाह तुगलक ने इसी परंपरागत अनुपात को लागू किया। इससे सैनिकों को युद्ध से प्राप्त संपत्ति में अधिक हिस्सा मिला, लेकिन केंद्रीय राजकोष का हिस्सा सीमित हो गया।
64. फिरोज शाह तुगलक के राजस्व निर्धारण से जुड़ा अधिकारी कौन था?
A. मलिक काफूर
B. ख्वाजा हिसामुद्दीन जुनैद
C. खान-ए-जहाँ मकबूल
D. ऐनुलमुल्क मुल्तानी
उत्तर: B. ख्वाजा हिसामुद्दीन जुनैद
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने राज्य की आय का व्यवस्थित अनुमान लगाने का कार्य ख्वाजा हिसामुद्दीन जुनैद को सौंपा था। उसने विभिन्न प्रांतों की भूमि और राजस्व क्षमता का निरीक्षण किया। इस प्रक्रिया में कई वर्ष लगे और राज्य की अनुमानित वार्षिक आय निर्धारित की गई। इसका उद्देश्य अनिश्चित कर माँग के स्थान पर अपेक्षाकृत स्थिर राजस्व व्यवस्था विकसित करना था।
65. फिरोज शाह तुगलक की सबसे प्रसिद्ध नहर किस नदी से हिसार तक लाई गई थी?
A. गंगा
B. यमुना
C. नर्मदा
D. चंबल
उत्तर: B. यमुना
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने यमुना नदी से हिसार क्षेत्र तक एक महत्वपूर्ण नहर बनवाई थी। इस नहर से शुष्क क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा पहुँची और नई भूमि खेती योग्य बनी। जल उपलब्ध होने से बस्तियों, बागों और कृषि उत्पादन का विस्तार हुआ। बाद के शासकों ने भी इस नहर की मरम्मत कर इसका उपयोग जारी रखा।
66. फिरोज शाह तुगलक की नहर नीति का सबसे प्रत्यक्ष लाभ किस क्षेत्र को मिला था?
A. समुद्री व्यापार
B. कृषि और सिंचाई
C. जहाज निर्माण
D. पर्वतीय रक्षा
उत्तर: B. कृषि और सिंचाई
व्याख्या: नहरों के निर्माण से वर्षा पर निर्भर कृषि क्षेत्रों को नियमित जल उपलब्ध हुआ। इससे परती भूमि को खेती योग्य बनाने और अनेक फसलों का उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिली। सिंचाई के विस्तार से किसानों की आय तथा राज्य के भूमि राजस्व में वृद्धि हुई। नहरों के किनारे नई बस्तियाँ, बाग और बाजार भी विकसित हुए।
67. फिरोज शाह तुगलक द्वारा बनवाई गई नहरों में से एक किस नदी को घग्घर क्षेत्र से जोड़ती थी?
A. सतलुज
B. गोदावरी
C. कृष्णा
D. कावेरी
उत्तर: A. सतलुज
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने सतलुज नदी से घग्घर क्षेत्र की ओर नहर निकलवाने का प्रयास किया था। इसका उद्देश्य पंजाब और हरियाणा के शुष्क भागों में सिंचाई सुविधा पहुँचाना था। तुगलककालीन नहरें तकनीकी रूप से आधुनिक नहरों जैसी नहीं थीं, फिर भी वे मध्यकालीन जल प्रबंधन की महत्वपूर्ण उपलब्धि थीं। इनके माध्यम से राज्य ने कृषि उत्पादन को सीधे सहायता प्रदान की।
68. बेरोजगार लोगों को काम दिलाने के लिए किस तुगलक शासक ने रोजगार कार्यालय स्थापित किया था?
A. गयासुद्दीन तुगलक
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. अबू बक्र शाह
उत्तर: C. फिरोज शाह तुगलक
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने बेरोजगार व्यक्तियों की जानकारी एकत्र करने और उन्हें काम उपलब्ध कराने के लिए एक रोजगार संबंधी व्यवस्था स्थापित की थी। अधिकारियों को विभिन्न मुहल्लों में बेरोजगार लोगों का पता लगाने का निर्देश दिया गया था। योग्य व्यक्तियों को सरकारी विभागों, निर्माण कार्यों और अन्य सेवाओं में लगाया जाता था। यह व्यवस्था उसके लोककल्याणकारी प्रशासन के व्यावहारिक पक्ष को दर्शाती है।
69. फिरोज शाह तुगलक के पास लगभग कितने दास होने का उल्लेख मिलता है?
A. 20,000
B. 50,000
C. 1,80,000
D. 5,00,000
उत्तर: C. 1,80,000
व्याख्या: समकालीन इतिहासकारों के अनुसार फिरोज शाह तुगलक के नियंत्रण में लगभग एक लाख अस्सी हजार दास थे। इनमें से अनेक दासों को हस्तकला, प्रशासन, सेना और शाही कारखानों में प्रशिक्षण दिया गया था। इतनी विशाल संख्या के प्रबंधन के लिए अलग विभाग स्थापित किया गया। बाद में यही संगठित दास वर्ग उत्तराधिकार संघर्षों और दरबारी राजनीति में प्रभावशाली बन गया।
70. संस्कृत ग्रंथों का फारसी में अनुवाद करवाने वाला तुगलक शासक कौन था?
A. गयासुद्दीन तुगलक
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. नासिरुद्दीन महमूद
उत्तर: C. फिरोज शाह तुगलक
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने कुछ संस्कृत ग्रंथों का फारसी भाषा में अनुवाद करवाया था। नगरकोट अभियान के दौरान प्राप्त ग्रंथों में दर्शन, चिकित्सा और ज्योतिष से संबंधित सामग्री बताई जाती है। उसने विद्वानों को इन ग्रंथों के अध्ययन और अनुवाद का कार्य सौंपा। इससे भारतीय ज्ञान परंपरा की कुछ सामग्री फारसी भाषी विद्वानों तक पहुँची।
71. फिरोज शाह तुगलक को संस्कृत पांडुलिपियाँ किस स्थान से प्राप्त हुई थीं?
A. वारंगल
B. नगरकोट
C. थट्टा
D. देवगिरि
उत्तर: B. नगरकोट
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने हिमाचल क्षेत्र के नगरकोट दुर्ग की ओर सैन्य अभियान किया था। वहाँ स्थित ज्वालामुखी मंदिर और उसके संग्रह से अनेक संस्कृत पांडुलिपियाँ प्राप्त होने का उल्लेख मिलता है। इन ग्रंथों में विभिन्न ज्ञान-विषयों से संबंधित सामग्री थी। कुछ पांडुलिपियों का फारसी में अनुवाद करवाकर शाही विद्वानों के अध्ययन के लिए उपलब्ध कराया गया।
72. फतेहाबाद नगर का नाम फिरोज शाह तुगलक ने किसके नाम पर रखा था?
A. अपने पिता रजब के नाम पर
B. अपने पुत्र फतह खाँ के नाम पर
C. गयासुद्दीन तुगलक के नाम पर
D. मुहम्मद बिन तुगलक के नाम पर
उत्तर: B. अपने पुत्र फतह खाँ के नाम पर
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने फतेहाबाद नगर की स्थापना अपने पुत्र फतह खाँ के नाम पर की थी। यह नगर वर्तमान हरियाणा क्षेत्र में स्थित है। नगर के विकास के लिए किले, मस्जिद, जल व्यवस्था और प्रशासनिक भवन बनवाए गए। फतेहाबाद तुगलककालीन नगर नियोजन और नई बस्तियाँ बसाने की नीति का उदाहरण है।
73. फिरोज शाह कोटला का निर्माण किस रूप में कराया गया था?
A. केवल मकबरे के रूप में
B. दुर्ग और शाही महल परिसर के रूप में
C. व्यापारिक बंदरगाह के रूप में
D. सैनिक प्रशिक्षण शिविर के रूप में
उत्तर: B. दुर्ग और शाही महल परिसर के रूप में
व्याख्या: फिरोज शाह कोटला का निर्माण यमुना नदी के किनारे एक दुर्ग और शाही महल परिसर के रूप में कराया गया था। यह फिरोजाबाद नगर का प्रमुख प्रशासनिक केंद्र था। इसके परिसर में महल, मस्जिद, भूमिगत कक्ष और सार्वजनिक सभा से संबंधित संरचनाएँ थीं। टोपरा से लाया गया अशोक स्तंभ भी इसी परिसर की ऊँची संरचना पर स्थापित किया गया था।
74. फिरोज शाह कोटला किस नदी के निकट बनाया गया था?
A. गंगा
B. यमुना
C. सतलुज
D. घग्घर
उत्तर: B. यमुना
व्याख्या: फिरोज शाह कोटला का निर्माण दिल्ली में यमुना नदी के निकट किया गया था। नदी के पास होने से नगर को जल, परिवहन और कृषि संबंधी सुविधा प्राप्त होती थी। फिरोजाबाद का विकास भी यमुना के किनारे किया गया था। नदी की बदलती धारा और समय के प्रभाव से मूल नगर की अनेक संरचनाएँ नष्ट हो गईं, लेकिन कोटला के अवशेष आज भी मौजूद हैं।
75. फिरोज शाह कोटला में स्थापित अशोक स्तंभ मूल रूप से कहाँ से लाया गया था?
A. सारनाथ
B. टोपरा
C. साँची
D. प्रयाग
उत्तर: B. टोपरा
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने एक अशोक स्तंभ को टोपरा से दिल्ली मंगवाया था। टोपरा वर्तमान हरियाणा के यमुनानगर क्षेत्र से संबंधित स्थान है। विशाल स्तंभ को सावधानी से भूमि पर उतारकर विशेष गाड़ी और नावों की सहायता से दिल्ली लाया गया। बाद में इसे फिरोज शाह कोटला की बहुमंजिला संरचना पर स्थापित किया गया।
76. फिरोज शाह द्वारा मेरठ से लाया गया अशोक स्तंभ दिल्ली में कहाँ स्थापित किया गया था?
A. कुतुब परिसर
B. उत्तरी दिल्ली के रिज क्षेत्र में
C. तुगलकाबाद दुर्ग में
D. हौज खास में
उत्तर: B. उत्तरी दिल्ली के रिज क्षेत्र में
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने दूसरा अशोक स्तंभ मेरठ से दिल्ली मंगवाया था। इसे उत्तरी दिल्ली के रिज क्षेत्र में स्थापित किया गया, जहाँ बाद में शिकारगाह से संबंधित भवन विकसित हुए। इस स्तंभ को स्थानांतरित करना मध्यकालीन अभियांत्रिकी का कठिन कार्य था। स्तंभों पर लिखी ब्राह्मी लिपि को उस समय पढ़ा नहीं जा सका था।
77. बिजली गिरने से क्षतिग्रस्त कुतुब मीनार की मरम्मत किसने करवाई थी?
A. मुहम्मद बिन तुगलक
B. फिरोज शाह तुगलक
C. सिकंदर लोदी
D. इब्राहिम लोदी
उत्तर: B. फिरोज शाह तुगलक
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक के शासनकाल में कुतुब मीनार का ऊपरी भाग बिजली गिरने से क्षतिग्रस्त हो गया था। उसने मीनार की मरम्मत करवाकर इसके ऊपरी भाग में नई मंजिलें बनवाईं। इन मंजिलों में लाल बलुआ पत्थर के साथ सफेद संगमरमर का भी प्रयोग किया गया। बाद के काल में सिकंदर लोदी ने भी मीनार की मरम्मत करवाई थी।
78. हौज खास में मदरसे और मकबरे का निर्माण किसने करवाया था?
A. इल्तुतमिश
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. फिरोज शाह तुगलक
D. बहलोल लोदी
उत्तर: C. फिरोज शाह तुगलक
व्याख्या: हौज खास का विशाल जलाशय मूल रूप से अलाउद्दीन खिलजी के समय बनवाया गया था। समय के साथ उसमें मिट्टी भर गई और जल व्यवस्था कमजोर हो गई। फिरोज शाह तुगलक ने जलाशय की सफाई और मरम्मत करवाकर उसके किनारे एक मदरसा स्थापित किया। इसी परिसर में उसका मकबरा भी बनाया गया, जिससे यह शिक्षा और स्थापत्य का प्रमुख केंद्र बन गया।
79. फिरोज शाह तुगलक का मकबरा कहाँ स्थित है?
A. तुगलकाबाद
B. हौज खास
C. सिरी
D. पुराना किला
उत्तर: B. हौज खास
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक का मकबरा दिल्ली के हौज खास परिसर में स्थित है। यह उस मदरसे के निकट बनाया गया था जिसे उसने उच्च शिक्षा के लिए स्थापित किया था। मकबरे की बनावट तुगलक शैली की सादगी, मोटी दीवारों और सीमित सजावट को प्रदर्शित करती है। इसी परिसर में कई विद्वानों और शाही परिवार से संबंधित लोगों की कब्रें भी स्थित हैं।
80. फिरोज शाह कोटला की जामा मस्जिद किस नगर का भाग थी?
A. जहाँपनाह
B. फिरोजाबाद
C. सिरी
D. तुगलकाबाद
उत्तर: B. फिरोजाबाद
व्याख्या: फिरोज शाह कोटला की जामा मस्जिद फिरोजाबाद नगर के शाही परिसर का हिस्सा थी। इसका निर्माण बड़ी संख्या में लोगों के सामूहिक नमाज अदा करने के लिए किया गया था। मस्जिद ऊँचे मंच पर बनी थी और उसके नीचे अनेक कक्ष स्थित थे। तैमूर ने दिल्ली पर आक्रमण के समय इस मस्जिद की विशालता और स्थापत्य का उल्लेख किया था।
तुगलक वंश MCQ Questions 81–100
81. फिरोज शाह तुगलक ने बंगाल के विरुद्ध कितनी बार प्रमुख अभियान किए थे?
A. एक बार
B. दो बार
C. तीन बार
D. चार बार
उत्तर: B. दो बार
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने बंगाल पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए दो प्रमुख सैन्य अभियान किए थे। उस समय बंगाल दिल्ली सल्तनत से लगभग स्वतंत्र हो चुका था। फिरोज शाह सैन्य सफलता के बावजूद बंगाल को स्थायी रूप से अपने साम्राज्य में नहीं मिला सका। अंततः उसने स्थानीय शासकों की स्थिति स्वीकार कर समझौते की नीति अपनाई।
82. जाजनगर अभियान वर्तमान भारत के किस क्षेत्र से संबंधित था?
A. पंजाब
B. ओडिशा
C. गुजरात
D. राजस्थान
उत्तर: B. ओडिशा
व्याख्या: जाजनगर मध्यकालीन ओडिशा के क्षेत्र से संबंधित था। फिरोज शाह तुगलक ने पूर्वी भारत में अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए इस क्षेत्र की ओर अभियान किया था। अभियान के दौरान पुरी और आसपास के क्षेत्रों तक तुगलक सेना के पहुँचने का उल्लेख मिलता है। इस अभियान से हाथी और धन प्राप्त हुआ, लेकिन ओडिशा पर स्थायी तुगलक प्रशासन स्थापित नहीं किया जा सका।
83. नगरकोट दुर्ग वर्तमान में किस राज्य से संबंधित है?
A. हरियाणा
B. हिमाचल प्रदेश
C. उत्तर प्रदेश
D. बिहार
उत्तर: B. हिमाचल प्रदेश
व्याख्या: नगरकोट दुर्ग वर्तमान हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा क्षेत्र में स्थित है। यह दुर्ग अपनी सामरिक स्थिति और संपन्न मंदिरों के कारण अनेक शासकों के आकर्षण का केंद्र रहा। फिरोज शाह तुगलक ने भी नगरकोट की ओर अभियान किया था। इस क्षेत्र से प्राप्त संस्कृत पांडुलिपियों का बाद में फारसी में अनुवाद करवाया गया।
84. फिरोज शाह तुगलक का सिंध अभियान किस स्थान के विरुद्ध था?
A. मुल्तान
B. थट्टा
C. लाहौर
D. उच्छ
उत्तर: B. थट्टा
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने सिंध के थट्टा क्षेत्र के स्थानीय शासकों के विरुद्ध अभियान किया था। कठिन जलवायु, भोजन की कमी और महामारी के कारण उसकी सेना को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। एक समय उसे गुजरात की ओर पीछे हटकर सेना को पुनर्गठित करना पड़ा। बाद में उसने दोबारा अभियान करके स्थानीय शासकों से अधीनता स्वीकार करवाई, लेकिन यह अभियान अत्यंत खर्चीला सिद्ध हुआ।
85. फिरोज शाह तुगलक के समय सैनिकों को वेतन देने के लिए किस व्यवस्था का अधिक उपयोग हुआ?
A. केवल नकद वेतन
B. भूमि और राजस्व अधिकार
C. विदेशी मुद्रा
D. व्यापारिक वस्तुएँ
उत्तर: B. भूमि और राजस्व अधिकार
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक ने सैनिकों और अधिकारियों को नकद वेतन के स्थान पर भूमि से राजस्व प्राप्त करने का अधिकार देना शुरू किया। इस व्यवस्था से तत्काल राजकोष पर नकद भुगतान का दबाव कम हुआ। समय के साथ ये अधिकार वंशानुगत होने लगे और स्थानीय अधिकारियों की शक्ति बढ़ गई। इससे केंद्रीय नियंत्रण तथा नियमित सैन्य अनुशासन धीरे-धीरे कमजोर हुआ।
86. फिरोज शाह तुगलक के शासन में दाग और चेहरा व्यवस्था कमजोर होने का क्या परिणाम हुआ?
A. घोड़ों की गुणवत्ता और सैनिकों की जाँच घट गई
B. नौसेना का विस्तार हुआ
C. व्यापारिक कर समाप्त हो गया
D. राजधानी सुरक्षित हो गई
उत्तर: A. घोड़ों की गुणवत्ता और सैनिकों की जाँच घट गई
व्याख्या: दाग व्यवस्था में सैनिक घोड़ों पर सरकारी निशान लगाया जाता था और चेहरा व्यवस्था में सैनिकों का विवरण दर्ज किया जाता था। अलाउद्दीन खिलजी ने सैन्य भ्रष्टाचार रोकने के लिए इन व्यवस्थाओं को कठोरता से लागू किया था। फिरोज शाह के समय इनकी निगरानी कमजोर हो गई। इससे अधिकारियों द्वारा घटिया घोड़े प्रस्तुत करने और वास्तविक संख्या से अधिक सैनिक दिखाने जैसी अनियमितताएँ बढ़ीं।
87. फिरोज शाह तुगलक के तुरंत बाद दिल्ली का सुल्तान कौन बना था?
A. अबू बक्र शाह
B. गयासुद्दीन तुगलक द्वितीय
C. नासिरुद्दीन महमूद
D. खिज्र खाँ
उत्तर: B. गयासुद्दीन तुगलक द्वितीय
व्याख्या: फिरोज शाह तुगलक की मृत्यु 1388 ईस्वी में हुई थी। उसके बाद उसका पौत्र गयासुद्दीन तुगलक द्वितीय दिल्ली के सिंहासन पर बैठा। वह अधिक समय तक सत्ता में नहीं रह सका और दरबारी षड्यंत्रों में मारा गया। इसके बाद तुगलक परिवार में उत्तराधिकार संघर्ष तेज हो गया और केंद्रीय सत्ता लगातार कमजोर होती गई।
88. गयासुद्दीन तुगलक द्वितीय के बाद सत्ता पर अधिकार करने वाला शासक कौन था?
A. अबू बक्र शाह
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. नुसरत शाह
D. दौलत खाँ लोदी
उत्तर: A. अबू बक्र शाह
व्याख्या: गयासुद्दीन तुगलक द्वितीय की हत्या के बाद अबू बक्र शाह ने दिल्ली की सत्ता पर अधिकार किया। उसका शासन भी राजनीतिक संघर्ष और अस्थिरता से घिरा रहा। फिरोज शाह के पुत्र नासिरुद्दीन मुहम्मद ने उसके विरुद्ध संघर्ष किया। अंततः अबू बक्र पराजित हुआ और नासिरुद्दीन मुहम्मद शाह ने दिल्ली का सिंहासन प्राप्त किया।
89. अबू बक्र शाह को पराजित कर दिल्ली की सत्ता किसने प्राप्त की थी?
A. नासिरुद्दीन मुहम्मद शाह
B. नुसरत शाह
C. मलिक सरवर
D. खिज्र खाँ
उत्तर: A. नासिरुद्दीन मुहम्मद शाह
व्याख्या: नासिरुद्दीन मुहम्मद शाह फिरोज शाह तुगलक का पुत्र था। उसने अबू बक्र शाह के विरुद्ध संघर्ष करके दिल्ली की सत्ता प्राप्त की। उसके शासनकाल में भी प्रांतीय विद्रोह, अमीरों की गुटबंदी और प्रशासनिक कमजोरी बनी रही। उसकी मृत्यु के बाद तुगलक परिवार में सत्ता संघर्ष फिर तेज हो गया।
90. नासिरुद्दीन मुहम्मद शाह के बाद बहुत कम समय के लिए शासन करने वाला सुल्तान कौन था?
A. अलाउद्दीन सिकंदर शाह
B. गयासुद्दीन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. बहलोल लोदी
उत्तर: A. अलाउद्दीन सिकंदर शाह
व्याख्या: नासिरुद्दीन मुहम्मद शाह की मृत्यु के बाद उसका पुत्र अलाउद्दीन सिकंदर शाह सिंहासन पर बैठा। उसका शासन अत्यंत अल्पकालिक रहा और कुछ ही समय बाद उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद नासिरुद्दीन महमूद तुगलक ने दिल्ली की सत्ता संभाली। लगातार बदलते शासकों ने तुगलक वंश की राजनीतिक कमजोरी और उत्तराधिकार संकट को बढ़ाया।
91. तुगलक वंश के अंतिम चरण में नासिरुद्दीन महमूद के प्रतिद्वंद्वी शासक के रूप में कौन उभरा था?
A. नुसरत शाह
B. खिज्र खाँ
C. मलिक काफूर
D. जफर खाँ
उत्तर: A. नुसरत शाह
व्याख्या: फिरोज शाह की मृत्यु के बाद तुगलक परिवार के कई सदस्य सत्ता के दावेदार बन गए थे। नासिरुद्दीन महमूद के विरुद्ध नुसरत शाह ने भी सुल्तान होने का दावा किया। एक समय नासिरुद्दीन महमूद दिल्ली में और नुसरत शाह फिरोजाबाद के आसपास प्रभाव रखता था। इस दोहरी सत्ता ने प्रशासन को विभाजित कर दिया और प्रांतीय सरदार अधिक स्वतंत्र हो गए।
92. तैमूर ने भारत पर किस वर्ष आक्रमण किया था?
A. 1320 ई.
B. 1351 ई.
C. 1398 ई.
D. 1414 ई.
उत्तर: C. 1398 ई.
व्याख्या: मध्य एशियाई विजेता तैमूर ने 1398 ईस्वी में भारत पर आक्रमण किया था। उस समय तुगलक वंश की केंद्रीय सत्ता अत्यंत कमजोर थी और प्रांत लगभग स्वतंत्र हो चुके थे। तैमूर की सेना ने सिंधु नदी पार कर उत्तर-पश्चिमी भारत के अनेक नगरों को लूटा। दिल्ली पर अधिकार करने के बाद व्यापक हत्या, विनाश और संपत्ति की लूट हुई।
93. तैमूर के आक्रमण के समय दिल्ली प्रशासन का प्रभावशाली सरदार कौन था?
A. मलिक सरवर
B. मल्लू इकबाल
C. खान-ए-जहाँ मकबूल
D. तातार खाँ
उत्तर: B. मल्लू इकबाल
व्याख्या: तैमूर के आक्रमण के समय नासिरुद्दीन महमूद नाममात्र का सुल्तान था। वास्तविक प्रशासन और सैन्य शक्ति पर मल्लू इकबाल जैसे अमीरों का प्रभाव था। दिल्ली के निकट तुगलक सेना ने तैमूर की सेना का सामना किया, लेकिन उसे पराजय मिली। हार के बाद सुल्तान और प्रमुख अधिकारी दिल्ली छोड़कर भाग गए, जिससे नगर असुरक्षित हो गया।
94. तैमूर के आक्रमण से दिल्ली सल्तनत पर क्या प्रभाव पड़ा था?
A. तुगलक सत्ता मजबूत हुई
B. दिल्ली की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति नष्ट हो गई
C. दक्षिण भारत पर नियंत्रण बढ़ गया
D. मंगोल आक्रमण स्थायी रूप से रुक गए
उत्तर: B. दिल्ली की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति नष्ट हो गई
व्याख्या: तैमूर की सेना ने दिल्ली में बड़े पैमाने पर लूटपाट, हत्या और विनाश किया था। व्यापार, शिल्प और शहरी जीवन को गंभीर क्षति पहुँची तथा बड़ी संख्या में कारीगरों को बंदी बनाकर मध्य एशिया ले जाया गया। दिल्ली की जनसंख्या और राजस्व व्यवस्था दोनों कमजोर हो गए। इस आक्रमण के बाद तुगलक वंश केवल नाममात्र की सत्ता बनकर रह गया।
95. तैमूर ने भारत से लौटते समय पंजाब क्षेत्र का प्रभारी किसे बनाया था?
A. खिज्र खाँ
B. बहलोल लोदी
C. दौलत खाँ लोदी
D. मुबारक शाह
उत्तर: A. खिज्र खाँ
व्याख्या: तैमूर ने भारत से लौटते समय खिज्र खाँ को मुल्तान, दीपालपुर और आसपास के क्षेत्रों का अधिकार दिया था। खिज्र खाँ ने बाद में अपनी शक्ति बढ़ाकर दिल्ली की ओर अभियान किया। 1414 ईस्वी में उसने दिल्ली पर अधिकार कर सैयद वंश की स्थापना की। उसने प्रारंभ में सुल्तान की उपाधि नहीं अपनाई और स्वयं को तैमूर के उत्तराधिकारी शाहरुख का प्रतिनिधि बताया।
96. तुगलक वंश का अंतिम शासक कौन था?
A. नुसरत शाह
B. नासिरुद्दीन महमूद तुगलक
C. गयासुद्दीन तुगलक द्वितीय
D. अबू बक्र शाह
उत्तर: B. नासिरुद्दीन महमूद तुगलक
व्याख्या: नासिरुद्दीन महमूद तुगलक को सामान्यतः तुगलक वंश का अंतिम शासक माना जाता है। उसके शासनकाल में दिल्ली की सत्ता आसपास के सीमित क्षेत्र तक सिमट गई थी। तैमूर के आक्रमण ने उसकी राजनीतिक और आर्थिक शक्ति को लगभग समाप्त कर दिया। उसकी मृत्यु के बाद तुगलक परिवार दिल्ली की सत्ता पर दोबारा अधिकार नहीं कर सका।
97. नासिरुद्दीन महमूद तुगलक की मृत्यु के बाद दिल्ली पर कुछ समय तक किसने शासन किया था?
A. दौलत खाँ लोदी
B. बहलोल लोदी
C. खिज्र खाँ
D. सिकंदर लोदी
उत्तर: A. दौलत खाँ लोदी
व्याख्या: नासिरुद्दीन महमूद की मृत्यु के बाद दिल्ली में सत्ता का स्पष्ट उत्तराधिकारी नहीं था। इस स्थिति में दौलत खाँ लोदी ने कुछ समय के लिए दिल्ली पर अधिकार कर लिया। उसका शासन अधिक समय तक नहीं चला और वह मजबूत केंद्रीय सत्ता स्थापित नहीं कर सका। 1414 ईस्वी में खिज्र खाँ ने उसे पराजित कर दिल्ली पर अधिकार कर लिया।
98. सैयद वंश की स्थापना किसने की थी?
A. मुबारक शाह
B. खिज्र खाँ
C. बहलोल लोदी
D. आलम शाह
उत्तर: B. खिज्र खाँ
व्याख्या: खिज्र खाँ ने 1414 ईस्वी में दिल्ली पर अधिकार कर सैयद वंश की स्थापना की थी। उसके सत्ता ग्रहण के साथ दिल्ली सल्तनत में तुगलक वंश का राजनीतिक अध्याय समाप्त हुआ। खिज्र खाँ ने सुल्तान की उपाधि ग्रहण करने के बजाय रैयत-ए-आला जैसी उपाधि का प्रयोग किया। उसने तैमूर के पुत्र शाहरुख की सर्वोच्चता को औपचारिक रूप से स्वीकार किया था।
99. तुगलककालीन भवनों के निर्माण में किस सामग्री का व्यापक उपयोग हुआ था?
A. केवल सफेद संगमरमर
B. मलबे की चिनाई और स्थानीय पत्थर
C. केवल लकड़ी
D. पकी हुई रंगीन टाइलें
उत्तर: B. मलबे की चिनाई और स्थानीय पत्थर
व्याख्या: तुगलककालीन भवनों में मलबे की चिनाई, स्थानीय पत्थर और मोटे चूने के गारे का व्यापक उपयोग किया गया था। इससे कम समय और सीमित खर्च में मजबूत दुर्ग तथा सार्वजनिक भवन बनाए जा सकते थे। बाहरी सतहों पर तराशे हुए पत्थरों का सीमित प्रयोग किया जाता था। इस स्थापत्य में सजावट से अधिक सुरक्षा, सादगी और उपयोगिता को प्राथमिकता दी गई।
100. सतपुला बाँध का निर्माण किस तुगलक शासक के समय हुआ था?
A. गयासुद्दीन तुगलक
B. मुहम्मद बिन तुगलक
C. फिरोज शाह तुगलक
D. नासिरुद्दीन महमूद
उत्तर: B. मुहम्मद बिन तुगलक
व्याख्या: सतपुला का निर्माण मुहम्मद बिन तुगलक के समय जहाँपनाह नगर की जल व्यवस्था के लिए किया गया था। इसका नाम इसकी सात मेहराबदार जल निकासी संरचनाओं से संबंधित है। यह बाँध वर्षा के पानी को रोकने, जलाशय भरने और आसपास की भूमि को सिंचाई उपलब्ध कराने में सहायक था। सतपुला तुगलककालीन जल प्रबंधन, रक्षा और स्थापत्य तकनीक के संयुक्त प्रयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
संबंधित महत्वपूर्ण मॉक टेस्ट
दिल्ली सल्तनत पर आधारित 100 महत्वपूर्ण MCQ
तुगलक वंश – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तुगलक वंश की स्थापना किसने और कब की थी?
तुगलक वंश की स्थापना गाजी मलिक ने 1320 ईस्वी में की थी। दिल्ली का सुल्तान बनने के बाद उसने गयासुद्दीन तुगलक की उपाधि धारण की। उसके सत्ता ग्रहण के साथ खिलजी वंश का अंत हो गया।
तुगलक वंश के प्रमुख शासक कौन-कौन थे?
तुगलक वंश के प्रमुख शासक गयासुद्दीन तुगलक, मुहम्मद बिन तुगलक और फिरोज शाह तुगलक थे। इनके बाद कई कमजोर शासक सत्ता में आए, जिससे केंद्रीय प्रशासन और सल्तनत की शक्ति धीरे-धीरे कमजोर हो गई।
मुहम्मद बिन तुगलक का वास्तविक या प्रारंभिक नाम क्या था?
मुहम्मद बिन तुगलक का प्रारंभिक नाम जूना खाँ था और उसे उलूग खाँ के नाम से भी जाना जाता था। वह गयासुद्दीन तुगलक का पुत्र था और 1325 ईस्वी में दिल्ली का सुल्तान बना।
मुहम्मद बिन तुगलक ने राजधानी दिल्ली से कहाँ स्थानांतरित की थी?
मुहम्मद बिन तुगलक ने राजधानी दिल्ली से देवगिरि स्थानांतरित की थी, जिसका नाम बदलकर दौलताबाद रखा गया। अत्यधिक दूरी, यात्रा की कठिनाइयों और प्रशासनिक समस्याओं के कारण बाद में राजधानी दोबारा दिल्ली ले जानी पड़ी।
मुहम्मद बिन तुगलक की सांकेतिक मुद्रा योजना क्या थी?
मुहम्मद बिन तुगलक ने चाँदी की कमी को पूरा करने के लिए ताँबे और पीतल के सिक्कों को चाँदी के सिक्कों के समान मूल्य प्रदान किया था। प्रभावी सरकारी नियंत्रण के अभाव में बड़ी मात्रा में नकली सिक्के बनने लगे, जिसके कारण यह योजना असफल हो गई।