
परिचय
Vijayanagara Empire Mock Test से संबंधित विजयनगर साम्राज्य मध्यकालीन भारत के सबसे शक्तिशाली और समृद्ध राज्यों में से एक था। इसकी स्थापना 1336 ईस्वी में हरिहर प्रथम और बुक्का राय प्रथम ने दक्षिण भारत में की थी। इसकी राजधानी विजयनगर थी, जिसके अवशेष वर्तमान कर्नाटक के हम्पी में स्थित हैं। इस साम्राज्य ने लगभग तीन शताब्दियों तक दक्षिण भारत की राजनीति, व्यापार और संस्कृति को प्रभावित किया।
विजयनगर साम्राज्य पर क्रमशः संगम, सालुव, तुलुव और अरविदु वंश के शासकों ने शासन किया। इसकी प्रशासनिक व्यवस्था में राजा सर्वोच्च अधिकारी होता था, जबकि प्रांतों और स्थानीय क्षेत्रों के संचालन के लिए अनेक अधिकारियों की नियुक्ति की जाती थी। नायक व्यवस्था के अंतर्गत सैनिक अधिकारियों को भूमि और राजस्व संबंधी अधिकार दिए जाते थे, जिसके बदले वे साम्राज्य को सेना उपलब्ध कराते थे।
विजयनगर के शासकों का बहमनी राज्य और बाद में बने दक्कन के सुल्तानों से सीमावर्ती क्षेत्रों, विशेषकर रायचूर दोआब, पर लगातार संघर्ष होता रहा। तुलुव वंश के कृष्णदेवराय के शासनकाल में साम्राज्य अपनी राजनीतिक और सैन्य शक्ति के चरम पर पहुँचा। उन्होंने बीजापुर, गोलकुंडा और ओडिशा के गजपति शासकों के विरुद्ध सफल अभियान चलाकर राज्य की सीमाओं का विस्तार किया।
विजयनगर काल में कृषि, सिंचाई, आंतरिक व्यापार और समुद्री वाणिज्य का उल्लेखनीय विकास हुआ। पुर्तगाली यात्री डोमिंगो पायस और फर्नाओ नूनीज ने इसकी राजधानी के विशाल बाजारों, समृद्ध अर्थव्यवस्था और भव्य उत्सवों का वर्णन किया है। साम्राज्य के व्यापारिक संबंध अरब, फारस, पुर्तगाल और दक्षिण-पूर्व एशिया के विभिन्न क्षेत्रों से थे।
विजयनगर की कला और स्थापत्य में द्रविड़ शैली का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। हम्पी के विरुपाक्ष मंदिर, विट्ठल मंदिर, हजारा राम मंदिर, कमल महल और पत्थर का रथ इसकी समृद्ध स्थापत्य परंपरा के प्रमुख उदाहरण हैं। 1565 ईस्वी के तालीकोटा युद्ध के बाद राजधानी को भारी क्षति पहुँची और साम्राज्य की शक्ति कमजोर हो गई, फिर भी इसकी सांस्कृतिक तथा स्थापत्य विरासत दक्षिण भारतीय इतिहास का एक महत्त्वपूर्ण अध्याय बनी रही।
विजयनगर साम्राज्य एक नजर में
स्थापना: 1336 ईस्वी
संस्थापक: हरिहर प्रथम और बुक्का राय प्रथम
स्थापना का क्षेत्र: तुंगभद्रा नदी के दक्षिणी तट का क्षेत्र
राजधानी: विजयनगर
राजधानी का वर्तमान नाम: हम्पी
वर्तमान स्थान: विजयनगर जिला, कर्नाटक
प्रारंभिक मार्गदर्शक: विद्यारण्य
प्रथम शासक: हरिहर प्रथम
प्रथम राजवंश: संगम वंश
शासन करने वाले प्रमुख राजवंश: संगम, सालुव, तुलुव और अरविदु वंश
राजकीय भाषा: कन्नड़ और तेलुगु के साथ संस्कृत का भी व्यापक प्रयोग
प्रमुख धर्म: हिंदू धर्म
प्रशासन की प्रकृति: राजतंत्रात्मक और केंद्रीय शासन व्यवस्था
सर्वोच्च अधिकारी: राजा
प्रमुख प्रशासनिक व्यवस्था: नायक व्यवस्था
नायक व्यवस्था: सैनिक अधिकारियों को भूमि और राजस्व अधिकार देकर उनसे सेना तथा प्रशासनिक सेवाएँ प्राप्त की जाती थीं।
प्रमुख प्रादेशिक इकाई: राज्य अथवा मंडल
प्रमुख राजस्व स्रोत: भूमि कर
प्रमुख आर्थिक आधार: कृषि, व्यापार, पशुपालन और हस्तशिल्प
प्रमुख सिंचाई साधन: तालाब, नहरें, बाँध और जलाशय
प्रमुख व्यापारिक वस्तुएँ: मसाले, वस्त्र, चावल, चीनी, घोड़े, कीमती पत्थर और धातुएँ
विदेशी व्यापारिक संबंध: अरब, फारस, पुर्तगाल और दक्षिण-पूर्व एशिया
प्रमुख विदेशी यात्री: निकोलो कोंटी, अब्दुर रज्जाक, डोमिंगो पायस और फर्नाओ नूनीज
प्रमुख प्रतिद्वंद्वी राज्य: बहमनी साम्राज्य और बाद के दक्कनी सुल्तान
प्रमुख विवादित क्षेत्र: रायचूर दोआब
रायचूर दोआब की स्थिति: कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बीच का उपजाऊ क्षेत्र
सबसे प्रसिद्ध शासक: कृष्णदेवराय
कृष्णदेवराय का राजवंश: तुलुव वंश
कृष्णदेवराय का शासनकाल: 1509 से 1529 ईस्वी
कृष्णदेवराय की उपाधि: आंध्र भोज
कृष्णदेवराय की प्रमुख रचना: आमुक्तमाल्यदा
आमुक्तमाल्यदा की भाषा: तेलुगु
कृष्णदेवराय के दरबार के विद्वान: अष्टदिग्गज
अष्टदिग्गजों की संख्या: आठ
प्रमुख दरबारी कवि: अल्लसानी पेद्दना
अल्लसानी पेद्दना की उपाधि: आंध्र कविता पितामह
प्रमुख स्थापत्य शैली: द्रविड़ शैली
प्रमुख धार्मिक स्थापत्य विशेषता: ऊँचे गोपुरम और विशाल मंदिर परिसर
प्रमुख मंदिर: विरुपाक्ष मंदिर, विट्ठल मंदिर और हजारा राम मंदिर
प्रमुख स्मारक: पत्थर का रथ, कमल महल और महानवमी डिब्बा
पत्थर का प्रसिद्ध रथ: विट्ठल मंदिर परिसर में स्थित है।
प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र: हम्पी
प्रमुख सांस्कृतिक उपलब्धि: तेलुगु, कन्नड़, तमिल और संस्कृत साहित्य का संरक्षण
प्रमुख उत्सव: महानवमी उत्सव
प्रमुख सैन्य संघर्ष: रायचूर का युद्ध
रायचूर युद्ध में कृष्णदेवराय का प्रतिद्वंद्वी: बीजापुर का आदिलशाही राज्य
निर्णायक युद्ध: तालीकोटा का युद्ध
तालीकोटा युद्ध का वर्ष: 1565 ईस्वी
तालीकोटा युद्ध का अन्य नाम: राक्षस-तंगड़ी का युद्ध
तालीकोटा युद्ध में विजयनगर का नेतृत्व: आलिया राम राय
तालीकोटा युद्ध के विरोधी: बीजापुर, अहमदनगर, गोलकुंडा और बीदर के दक्कनी सुल्तान
तालीकोटा युद्ध का परिणाम: विजयनगर की सेना पराजित हुई और राजधानी हम्पी को भारी क्षति पहुँची।
तालीकोटा युद्ध के बाद राजधानी: पहले पेनुकोण्डा और बाद में चंद्रगिरि
अंतिम शासक वंश: अरविदु वंश
साम्राज्य के पतन का प्रमुख कारण: दक्कनी राज्यों से संघर्ष, सामंतों की बढ़ती शक्ति और तालीकोटा की पराजय
ऐतिहासिक विशेषता: विजयनगर साम्राज्य ने मध्यकालीन दक्षिण भारत में राजनीतिक स्थिरता, व्यापारिक समृद्धि और सांस्कृतिक संरक्षण को बढ़ावा दिया।
विश्व धरोहर स्थल: हम्पी के स्मारक समूह को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है।
Vijayanagara Empire Mock Test – विजयनगर साम्राज्य MCQ Questions 1–100
1. विजयनगर साम्राज्य की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
A. 1296 ईस्वी
B. 1325 ईस्वी
C. 1336 ईस्वी
D. 1347 ईस्वी
उत्तर: C. 1336 ईस्वी
व्याख्या: विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 ईस्वी में दक्षिण भारत में हुई थी। इसकी स्थापना ऐसे समय में हुई जब दक्षिण भारत में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही थी। इस साम्राज्य ने विभिन्न भाषाओं और धार्मिक परंपराओं वाले क्षेत्रों को अपने अधीन संगठित किया। बाद में यह कृष्णा नदी से प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिण तक विस्तृत हो गया।
2. विजयनगर साम्राज्य के संस्थापक कौन थे?
A. हरिहर प्रथम और बुक्का राय प्रथम
B. कृष्णदेवराय और अच्युतदेवराय
C. देवराय प्रथम और देवराय द्वितीय
D. सालुव नरसिंह और नरसा नायक
उत्तर: A. हरिहर प्रथम और बुक्का राय प्रथम
व्याख्या: परंपरागत और अभिलेखीय साक्ष्यों के अनुसार हरिहर प्रथम और बुक्का राय प्रथम ने विजयनगर साम्राज्य की स्थापना की थी। दोनों भाई संगम परिवार से संबंधित थे। उन्होंने तुंगभद्रा नदी के क्षेत्र में अपनी सत्ता स्थापित की। उनके द्वारा स्थापित राज्य आगे चलकर मध्यकालीन दक्षिण भारत की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक शक्ति बना।
3. विजयनगर साम्राज्य का प्रथम शासक वंश कौन-सा था?
A. तुलुव वंश
B. संगम वंश
C. सालुव वंश
D. अरविदु वंश
उत्तर: B. संगम वंश
व्याख्या: विजयनगर साम्राज्य पर शासन करने वाला पहला राजवंश संगम वंश था। हरिहर प्रथम और बुक्का राय प्रथम इसी वंश से संबंधित थे। संगम वंश ने लगभग 1485 ईस्वी तक साम्राज्य पर नियंत्रण बनाए रखा। इसके बाद सैन्य अधिकारियों से संबंधित सालुव वंश ने विजयनगर की सत्ता प्राप्त की।
4. विजयनगर साम्राज्य को उसके समकालीन लोग किस नाम से संबोधित करते थे?
A. आंध्र साम्राज्यमु
B. द्रविड़ साम्राज्यमु
C. कर्नाटक साम्राज्यमु
D. दक्षिणापथ साम्राज्यमु
उत्तर: C. कर्नाटक साम्राज्यमु
व्याख्या: आधुनिक इतिहासकार इसे विजयनगर साम्राज्य कहते हैं, जबकि समकालीन स्रोतों में इसे कर्नाटक साम्राज्यमु कहा गया है। यह नाम साम्राज्य की क्षेत्रीय और राजनीतिक पहचान को प्रकट करता है। इसकी राजधानी वर्तमान कर्नाटक के हम्पी क्षेत्र में स्थित थी। साम्राज्य के अंतर्गत कन्नड़, तेलुगु, तमिल और अन्य भाषाएँ बोलने वाले समुदाय रहते थे।
5. ‘विजयनगर’ शब्द का शाब्दिक अर्थ क्या है?
A. राजाओं का नगर
B. मंदिरों का नगर
C. विजय का नगर
D. व्यापारियों का नगर
उत्तर: C. विजय का नगर
व्याख्या: विजयनगर का अर्थ ‘विजय का नगर’ है और यही नाम राजधानी तथा साम्राज्य दोनों के लिए प्रयुक्त होता था। यह नगर चौदहवीं से सोलहवीं शताब्दी के दौरान एक विशाल राजनीतिक केंद्र बना। इसके आसपास पहाड़ियाँ, तुंगभद्रा नदी और मजबूत किलेबंदी थी। विदेशी यात्रियों ने इसकी विशालता और समृद्धि की प्रशंसा की है।
6. ‘हम्पी’ नाम की उत्पत्ति किस स्थानीय देवी के नाम से हुई मानी जाती है?
A. दुर्गादेवी
B. पम्पादेवी
C. मीनाक्षी देवी
D. भुवनेश्वरी देवी
उत्तर: B. पम्पादेवी
व्याख्या: हम्पी नाम स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी के नाम से निकला माना जाता है। स्थानीय परंपरा में पम्पादेवी ने विरुपाक्ष से विवाह करने के लिए इस क्षेत्र की पहाड़ियों में तपस्या की थी। विरुपाक्ष को भगवान शिव का एक रूप माना जाता है। पम्पादेवी और विरुपाक्ष का विवाह आज भी विरुपाक्ष मंदिर में वार्षिक रूप से मनाया जाता है।
7. विजयनगर साम्राज्य की राजधानी किस नदी के तटवर्ती क्षेत्र में स्थित थी?
A. गोदावरी
B. कृष्णा
C. कावेरी
D. तुंगभद्रा
उत्तर: D. तुंगभद्रा
व्याख्या: विजयनगर की राजधानी तुंगभद्रा नदी के तटवर्ती क्षेत्र में स्थित थी। नदी के आसपास प्राकृतिक चट्टानी पहाड़ियाँ थीं, जो राजधानी को सुरक्षा प्रदान करती थीं। इस नदी से नहरों और बाँधों के माध्यम से सिंचाई की जाती थी। तुंगभद्रा के जल ने कृषि, नगर की जलापूर्ति और राजकीय क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने में योगदान दिया।
8. अपने उत्कर्ष के समय विजयनगर साम्राज्य की उत्तरी सीमा मुख्य रूप से किस नदी तक फैली थी?
A. नर्मदा नदी
B. कृष्णा नदी
C. महानदी
D. तापी नदी
उत्तर: B. कृष्णा नदी
व्याख्या: उत्कर्ष के समय विजयनगर साम्राज्य उत्तर में कृष्णा नदी से लेकर प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिण तक विस्तृत था। इसके अंतर्गत विभिन्न भाषाओं और धार्मिक परंपराओं वाले क्षेत्र शामिल थे। कृष्णा और तुंगभद्रा के बीच का रायचूर दोआब सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण था। इस क्षेत्र के लिए विजयनगर और दक्कनी राज्यों में लगातार संघर्ष होता रहा।
9. हम्पी के खंडहरों को 1800 ईस्वी में प्रकाश में लाने वाला व्यक्ति कौन था?
A. जॉन मार्शल
B. जेम्स प्रिंसेप
C. कॉलिन मैकेंजी
D. अलेक्जेंडर कनिंघम
उत्तर: C. कॉलिन मैकेंजी
व्याख्या: इंजीनियर और पुराविद कॉलिन मैकेंजी ने 1800 ईस्वी में हम्पी के खंडहरों का सर्वेक्षण किया था। वह ईस्ट इंडिया कंपनी का कर्मचारी था और उसने इस स्थल का पहला सर्वेक्षण मानचित्र तैयार किया। प्रारंभिक जानकारी उसे विरुपाक्ष मंदिर और पम्पादेवी के मंदिर के पुजारियों से मिली। उसके कार्य ने विजयनगर के व्यवस्थित अध्ययन की नींव रखी।
10. कॉलिन मैकेंजी को भारत का प्रथम सर्वेयर जनरल कब नियुक्त किया गया था?
A. 1800 ईस्वी
B. 1805 ईस्वी
C. 1815 ईस्वी
D. 1821 ईस्वी
उत्तर: C. 1815 ईस्वी
व्याख्या: कॉलिन मैकेंजी को 1815 ईस्वी में भारत का प्रथम सर्वेयर जनरल नियुक्त किया गया था। उसका जन्म 1754 ईस्वी में हुआ और उसने अभियंता, सर्वेक्षक तथा मानचित्रकार के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त की। उसने स्थानीय इतिहास और ऐतिहासिक स्थलों से संबंधित सामग्री एकत्र की। वह 1821 ईस्वी में अपनी मृत्यु तक सर्वेयर जनरल के पद पर रहा।
11. 1856 ईस्वी में हम्पी के पुरातात्त्विक अवशेषों के विस्तृत चित्र किसने लिए थे?
A. अलेक्जेंडर ग्रीनलॉ
B. जॉन मार्शल
C. जेम्स फर्ग्यूसन
D. मोर्टिमर व्हीलर
उत्तर: A. अलेक्जेंडर ग्रीनलॉ
व्याख्या: अलेक्जेंडर ग्रीनलॉ ने 1856 ईस्वी में हम्पी के पुरातात्त्विक अवशेषों के प्रारंभिक विस्तृत छायाचित्र लिए थे। इन तस्वीरों ने विद्वानों को स्मारकों की संरचना का अध्ययन करने में सहायता दी। इससे पहले कॉलिन मैकेंजी ने स्थल का सर्वेक्षण मानचित्र तैयार किया था। बाद में अभिलेखों, साहित्य और यात्रियों के विवरणों को भी शोध में शामिल किया गया।
12. 1876 ईस्वी में हम्पी के मंदिरों के अभिलेखों का दस्तावेजीकरण किसने प्रारंभ किया था?
A. डी.सी. सरकार
B. जॉन फेथफुल फ्लीट
C. आर.जी. भंडारकर
D. वी.ए. स्मिथ
उत्तर: B. जॉन फेथफुल फ्लीट
व्याख्या: जॉन फेथफुल फ्लीट ने 1876 ईस्वी में हम्पी के मंदिरों की दीवारों पर स्थित अभिलेखों का दस्तावेजीकरण प्रारंभ किया। अभिलेखों से राजाओं, नायकों, धार्मिक दानों और महत्त्वपूर्ण घटनाओं की जानकारी मिलती है। अभिलेखविदों ने उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभ से ही सामग्री एकत्र करनी शुरू कर दी थी। इन साक्ष्यों से विजयनगर का इतिहास पुनर्निर्मित हुआ।
13. विजयनगर के इतिहास के पुनर्निर्माण में किस भाषा के साहित्य का उपयोग नहीं किया गया था?
A. तेलुगु
B. कन्नड़
C. तमिल
D. फ्रांसीसी
उत्तर: D. फ्रांसीसी
व्याख्या: विजयनगर के इतिहास के अध्ययन में तेलुगु, कन्नड़, तमिल और संस्कृत साहित्य का प्रयोग किया गया है। इन साहित्यिक स्रोतों की तुलना अभिलेखों, स्मारकों और विदेशी यात्रियों के विवरणों से की गई। राजधानी से अनेक मंदिर अभिलेख और दान संबंधी विवरण प्राप्त हुए हैं। अलग-अलग प्रकार के स्रोत साम्राज्य के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास को समझने में सहायता करते हैं।
14. विजयनगर के शासकों का उत्तरी सीमा पर मुख्य संघर्ष किन शक्तियों से था?
A. मुगलों और राजपूतों से
B. दक्कन के सुल्तानों और ओडिशा के गजपति शासकों से
C. चोलों और पल्लवों से
D. मराठों और अंग्रेजों से
उत्तर: B. दक्कन के सुल्तानों और ओडिशा के गजपति शासकों से
व्याख्या: विजयनगर के शासक उत्तरी सीमा पर दक्कन के सुल्तानों और ओडिशा के गजपति शासकों से संघर्ष करते थे। इन संघर्षों का उद्देश्य उपजाऊ नदी घाटियों और समुद्री व्यापार से प्राप्त संसाधनों पर नियंत्रण करना था। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद इन राज्यों के बीच सांस्कृतिक संपर्क भी हुआ। स्थापत्य तकनीकों और राजनीतिक विचारों का परस्पर आदान-प्रदान होता रहा।
15. विजयनगर की घुड़सवार सेना के लिए घोड़े मुख्य रूप से कहाँ से आयात किए जाते थे?
A. चीन और जापान
B. तिब्बत और नेपाल
C. अरब और मध्य एशिया
D. श्रीलंका और मालदीव
उत्तर: C. अरब और मध्य एशिया
व्याख्या: मध्यकालीन युद्धों में प्रभावी घुड़सवार सेना आवश्यक थी, इसलिए अरब और मध्य एशिया से अच्छे घोड़े मँगाए जाते थे। प्रारंभ में इस व्यापार पर अरब व्यापारियों का नियंत्रण था। बाद में स्थानीय घोड़ा व्यापारियों और पुर्तगालियों ने भी इसमें भाग लिया। आयातित घोड़ों का उपयोग विजयनगर और दक्कनी राज्यों की सेनाओं में होता था।
16. विजयनगर काल में ‘कुदिरै चेट्टी’ किस व्यवसाय से जुड़े थे?
A. हीरे के व्यापार से
B. घोड़ों के व्यापार से
C. वस्त्र निर्माण से
D. मंदिर निर्माण से
उत्तर: B. घोड़ों के व्यापार से
व्याख्या: कुदिरै चेट्टी स्थानीय व्यापारी समुदाय था, जो घोड़ों के व्यापार में भाग लेता था। ‘कुदिरै’ शब्द घोड़े से संबंधित है और ये व्यापारी आयातित घोड़ों की आपूर्ति करते थे। विजयनगर की सैन्य शक्ति में घुड़सवार सेना की महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। इसलिए अरब, मध्य एशियाई, स्थानीय और बाद में पुर्तगाली व्यापारियों से घोड़े खरीदे जाते थे।
17. पुर्तगाली व्यापारी भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमी तट पर किस वर्ष पहुँचे थे?
A. 1453 ईस्वी
B. 1492 ईस्वी
C. 1498 ईस्वी
D. 1510 ईस्वी
उत्तर: C. 1498 ईस्वी
व्याख्या: पुर्तगाली 1498 ईस्वी में भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमी समुद्र तट पर पहुँचे थे। उन्होंने व्यापारिक और सैन्य केंद्र स्थापित करने का प्रयास किया। बंदूकों और अन्य उन्नत सैन्य तकनीकों ने उन्हें दक्कन की राजनीति में प्रभावशाली बनाया। घोड़ा व्यापार और समुद्री वाणिज्य के कारण उनके विजयनगर से भी संबंध विकसित हुए।
18. विजयनगर के बाजार मुख्य रूप से किन वस्तुओं के लिए प्रसिद्ध थे?
A. मसाले, वस्त्र और बहुमूल्य पत्थर
B. केवल लौह उपकरण
C. केवल कृषि उपकरण
D. कागज और मुद्रित पुस्तकें
उत्तर: A. मसाले, वस्त्र और बहुमूल्य पत्थर
व्याख्या: विजयनगर के बाजार मसालों, वस्त्रों और बहुमूल्य पत्थरों के व्यापार के लिए प्रसिद्ध थे। समृद्ध जनसंख्या आभूषणों और विलासिता की वस्तुओं की माँग करती थी। व्यापार से प्राप्त राजस्व ने साम्राज्य की आर्थिक समृद्धि बढ़ाई। मंदिरों के निकट स्थित बाजारों में पत्थर के मंडपों के भीतर व्यापारी अपनी दुकानें लगाते थे।
19. विजयनगर राज्य की समृद्धि में किससे प्राप्त राजस्व का विशेष योगदान था?
A. केवल धार्मिक कर से
B. विदेशी और आंतरिक व्यापार से
C. केवल वन कर से
D. तीर्थयात्रियों से वसूले गए कर से
उत्तर: B. विदेशी और आंतरिक व्यापार से
व्याख्या: विजयनगर की समृद्धि में आंतरिक और विदेशी व्यापार से प्राप्त राजस्व का महत्त्वपूर्ण योगदान था। राज्य मसालों, वस्त्रों, घोड़ों, बहुमूल्य रत्नों और आभूषणों के व्यापार का प्रमुख केंद्र था। कृष्णदेवराय ने बंदरगाहों के विकास और विदेशी व्यापारियों को सुविधाएँ देने पर बल दिया। व्यापारिक आय से सेना, प्रशासन और निर्माण गतिविधियों को सहायता मिली।
20. ‘गजपति’ शब्द का शाब्दिक अर्थ क्या था?
A. घोड़ों का स्वामी
B. मनुष्यों का स्वामी
C. हाथियों का स्वामी
D. समुद्र का स्वामी
उत्तर: C. हाथियों का स्वामी
व्याख्या: गजपति का शाब्दिक अर्थ ‘हाथियों का स्वामी’ है। यह नाम पंद्रहवीं शताब्दी में ओडिशा के एक शक्तिशाली शासक वंश के लिए प्रयुक्त होता था। गजपति शासक विजयनगर के प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों में शामिल थे। दोनों शक्तियों के बीच उपजाऊ नदी घाटियों और पूर्वी तट के क्षेत्रों पर नियंत्रण के लिए संघर्ष हुआ।
21. विजयनगर की लोक परंपराओं में दक्कन के सुल्तानों को किस नाम से संबोधित किया गया?
A. गजपति
B. नरपति
C. अश्वपति
D. जलपति
उत्तर: C. अश्वपति
व्याख्या: विजयनगर की लोकप्रिय परंपराओं में दक्कन के सुल्तानों को अश्वपति अर्थात घोड़ों का स्वामी कहा गया। उनकी सेनाओं में घुड़सवार सैनिकों की प्रमुख भूमिका थी। अरब और मध्य एशिया से आयातित घोड़े दक्कन की सैन्य राजनीति के लिए आवश्यक थे। इसी परंपरा में गजपति हाथियों के और विजयनगर के राय नरपति मनुष्यों के स्वामी माने गए।
22. विजयनगर के रायों को लोकप्रिय परंपराओं में किस उपाधि से संबोधित किया गया?
A. नरपति
B. गजपति
C. अश्वपति
D. धनपति
उत्तर: A. नरपति
व्याख्या: विजयनगर के रायों को नरपति अर्थात मनुष्यों का स्वामी कहा गया। यह उपाधि गजपति और अश्वपति जैसी राजनीतिक उपमाओं के साथ प्रयुक्त होती थी। विजयनगर के शासक स्वयं को शक्तिशाली सम्राट और धार्मिक परंपराओं के संरक्षक के रूप में प्रस्तुत करते थे। उन्होंने विशाल सेना, नायक व्यवस्था और मंदिर संरक्षण के माध्यम से अपनी सत्ता मजबूत की।
23. कृष्णदेवराय किस राजवंश से संबंधित थे?
A. संगम वंश
B. सालुव वंश
C. तुलुव वंश
D. अरविदु वंश
उत्तर: C. तुलुव वंश
व्याख्या: कृष्णदेवराय विजयनगर के तुलुव वंश से संबंधित थे। तुलुव वंश ने सालुव वंश के बाद साम्राज्य की सत्ता प्राप्त की थी। कृष्णदेवराय के शासनकाल में विजयनगर अपनी राजनीतिक, सैन्य और सांस्कृतिक शक्ति के चरम पर पहुँचा। उनके समय रायचूर, ओडिशा और बीजापुर के विरुद्ध सफल सैन्य अभियान चलाए गए।
24. कृष्णदेवराय का शासनकाल क्या था?
A. 1485–1503 ईस्वी
B. 1509–1529 ईस्वी
C. 1529–1542 ईस्वी
D. 1542–1565 ईस्वी
उत्तर: B. 1509–1529 ईस्वी
व्याख्या: कृष्णदेवराय ने 1509 से 1529 ईस्वी तक विजयनगर साम्राज्य पर शासन किया। उनका शासन विस्तार, सुदृढ़ीकरण और आर्थिक समृद्धि के लिए जाना जाता है। उन्होंने रायचूर दोआब पर अधिकार किया और गजपति तथा बीजापुर की शक्तियों को पराजित किया। उनके दरबार में साहित्य, स्थापत्य और तेलुगु भाषा को विशेष संरक्षण मिला।
25. कृष्णदेवराय द्वारा रचित राज्यशास्त्र संबंधी प्रसिद्ध ग्रंथ कौन-सा है?
A. मनुचरितम्
B. आमुक्तमाल्यदा
C. मधुराविजयम्
D. पांडुरंग महात्म्यम्
उत्तर: B. आमुक्तमाल्यदा
व्याख्या: आमुक्तमाल्यदा कृष्णदेवराय द्वारा रचित तेलुगु ग्रंथ है, जिसमें शासन और राज्य नीति से संबंधित विचार मिलते हैं। इसमें राजा को बंदरगाहों का विकास करने और विदेशी व्यापारियों को प्रोत्साहित करने की सलाह दी गई है। ग्रंथ में घोड़े, हाथी, मोती और चंदन जैसी वस्तुओं के आयात का उल्लेख है। इससे उनकी आर्थिक और व्यापारिक नीति की जानकारी मिलती है।
26. ‘आमुक्तमाल्यदा’ की रचना किस भाषा में हुई थी?
A. संस्कृत
B. कन्नड़
C. तेलुगु
D. तमिल
उत्तर: C. तेलुगु
व्याख्या: कृष्णदेवराय ने आमुक्तमाल्यदा की रचना तेलुगु भाषा में की थी। यह ग्रंथ साहित्यिक रचना होने के साथ राज्य संचालन और व्यापारिक नीति की जानकारी भी देता है। कृष्णदेवराय स्वयं विद्वान और साहित्य के संरक्षक थे। उनके शासनकाल में तेलुगु साहित्य को व्यापक राजकीय संरक्षण मिला और अनेक प्रसिद्ध कवियों ने उनकी सभा को सुशोभित किया।
27. रायचूर दोआब किन दो नदियों के बीच स्थित था?
A. गोदावरी और कृष्णा
B. कृष्णा और तुंगभद्रा
C. कावेरी और वैगई
D. भीमा और गोदावरी
उत्तर: B. कृष्णा और तुंगभद्रा
व्याख्या: रायचूर दोआब कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बीच स्थित उपजाऊ भूभाग था। कृषि उत्पादन, व्यापारिक मार्ग और सामरिक स्थिति के कारण इसका विशेष महत्त्व था। विजयनगर और दक्कनी सुल्तानों के बीच इस क्षेत्र पर नियंत्रण के लिए बार-बार युद्ध हुए। कृष्णदेवराय ने अपने शासनकाल में इस क्षेत्र पर प्रभावी अधिकार स्थापित किया।
28. कृष्णदेवराय ने रायचूर दोआब पर किस वर्ष अधिकार किया था?
A. 1509 ईस्वी
B. 1512 ईस्वी
C. 1514 ईस्वी
D. 1520 ईस्वी
उत्तर: B. 1512 ईस्वी
व्याख्या: कृष्णदेवराय ने 1512 ईस्वी में कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बीच स्थित रायचूर दोआब पर अधिकार किया। यह क्षेत्र विजयनगर और बीजापुर के बीच संघर्ष का प्रमुख कारण था। इसकी भूमि कृषि की दृष्टि से उपजाऊ और सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण थी। इस विजय ने कृष्णदेवराय की सैन्य प्रतिष्ठा को मजबूत किया।
29. कृष्णदेवराय ने ओडिशा के गजपति शासकों को लगभग किस वर्ष अधीन किया था?
A. 1503 ईस्वी
B. 1510 ईस्वी
C. 1514 ईस्वी
D. 1526 ईस्वी
उत्तर: C. 1514 ईस्वी
व्याख्या: कृष्णदेवराय ने लगभग 1514 ईस्वी में ओडिशा के गजपति शासकों को पराजित किया। दोनों शक्तियों में आंध्र तट और कृष्णा नदी घाटी के क्षेत्रों को लेकर प्रतिस्पर्धा थी। इस अभियान ने विजयनगर की पूर्वी सीमा को सुरक्षित किया। गजपति शासक पंद्रहवीं और सोलहवीं शताब्दी में पूर्वी भारत की प्रमुख शक्तियों में गिने जाते थे।
30. कृष्णदेवराय ने बीजापुर के सुल्तान को गंभीर पराजय किस वर्ष दी थी?
A. 1512 ईस्वी
B. 1514 ईस्वी
C. 1520 ईस्वी
D. 1529 ईस्वी
उत्तर: C. 1520 ईस्वी
व्याख्या: कृष्णदेवराय ने 1520 ईस्वी में बीजापुर के सुल्तान को गंभीर पराजय दी। इस संघर्ष का संबंध मुख्य रूप से रायचूर दोआब पर नियंत्रण से था। विजय में शक्तिशाली पैदल सेना, घुड़सवार सैनिकों और तोपखाने का प्रयोग हुआ। इस सफलता से कृष्णदेवराय की प्रतिष्ठा दक्कन और दक्षिण भारत में अत्यधिक बढ़ गई।
31. कृष्णदेवराय ने अपनी माता के नाम पर किस उपनगर की स्थापना की थी?
A. विद्यानगर
B. नागलपुरम
C. हम्पीनगर
D. रायचूरपुरम
उत्तर: B. नागलपुरम
व्याख्या: कृष्णदेवराय ने विजयनगर के निकट अपनी माता के नाम पर नागलपुरम नामक उपनगर स्थापित किया था। उनके शासनकाल में राजधानी का विस्तार और अनेक निर्माण कार्य हुए। उन्होंने मंदिरों का निर्माण करवाया तथा पुराने मंदिरों में विशाल गोपुरम जोड़े। नागलपुरम साम्राज्य की नगरीय योजना और राजकीय निर्माण गतिविधियों का उदाहरण था।
32. संगम वंश ने विजयनगर पर लगभग किस वर्ष तक शासन किया था?
A. 1420 ईस्वी
B. 1465 ईस्वी
C. 1485 ईस्वी
D. 1503 ईस्वी
उत्तर: C. 1485 ईस्वी
व्याख्या: संगम वंश ने विजयनगर साम्राज्य पर लगभग 1485 ईस्वी तक शासन किया। यह साम्राज्य का पहला राजवंश था और संस्थापक हरिहर तथा बुक्का इसी वंश से थे। समय के साथ केंद्रीय सत्ता कमजोर होने पर सैन्य अधिकारियों का प्रभाव बढ़ा। अंततः सालुव वंश ने संगम शासकों को हटाकर साम्राज्य की सत्ता प्राप्त की।
33. सालुव वंश विजयनगर में लगभग किस वर्ष तक सत्ता में रहा था?
A. 1485 ईस्वी
B. 1503 ईस्वी
C. 1509 ईस्वी
D. 1529 ईस्वी
उत्तर: B. 1503 ईस्वी
व्याख्या: सालुव वंश ने 1485 ईस्वी के बाद विजयनगर की सत्ता संभाली और लगभग 1503 ईस्वी तक शासन किया। सालुव शासक मूल रूप से प्रभावशाली सैन्य अधिकारी थे। उनका शासनकाल अपेक्षाकृत छोटा रहा और उसके बाद तुलुव वंश का उदय हुआ। तुलुव वंश के कृष्णदेवराय ने साम्राज्य को उसकी सर्वोच्च शक्ति तक पहुँचाया।
34. विजयनगर की केंद्रीय सत्ता लगभग 1542 ईस्वी तक किस वंश के हाथों में चली गई थी?
A. संगम वंश
B. सालुव वंश
C. तुलुव वंश
D. अरविदु वंश
उत्तर: D. अरविदु वंश
व्याख्या: कृष्णदेवराय की मृत्यु के बाद केंद्रीय सत्ता कमजोर हुई और लगभग 1542 ईस्वी तक नियंत्रण अरविदु शासक परिवार के हाथों में चला गया। इस अवधि में नायकों के विद्रोह और उत्तराधिकार संघर्ष बढ़ गए थे। तालीकोटा के बाद अरविदु वंश ने पेनुकोण्डा और बाद में चंद्रगिरि से शासन किया। यह वंश सत्रहवीं शताब्दी के अंत तक बना रहा।
35. तालीकोटा का निर्णायक युद्ध किस वर्ष लड़ा गया था?
A. 1520 ईस्वी
B. 1526 ईस्वी
C. 1542 ईस्वी
D. 1565 ईस्वी
उत्तर: D. 1565 ईस्वी
व्याख्या: तालीकोटा का युद्ध 1565 ईस्वी में विजयनगर और दक्कनी सुल्तानों की संयुक्त सेना के बीच लड़ा गया। इसमें विजयनगर की सेना को निर्णायक पराजय मिली। युद्ध के बाद विजयी सेनाओं ने राजधानी को लूटा और उसके अनेक भवन नष्ट कर दिए। इस घटना ने विजयनगर की केंद्रीय शक्ति को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया।
36. तालीकोटा के युद्ध का दूसरा नाम क्या है?
A. राक्षसी-तंगड़ी का युद्ध
B. खानवा का युद्ध
C. बन्नीहट्टी का युद्ध
D. चंदेरी का युद्ध
उत्तर: A. राक्षसी-तंगड़ी का युद्ध
व्याख्या: तालीकोटा के युद्ध को राक्षसी-तंगड़ी या राक्षस-तंगड़ी का युद्ध भी कहा जाता है। यह युद्ध 1565 ईस्वी में हुआ था। विजयनगर की सेना का नेतृत्व राम राय ने किया, जबकि उसके विरुद्ध दक्कनी सुल्तानों की संयुक्त सेनाएँ थीं। पराजय के बाद हम्पी की राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था को भारी क्षति पहुँची।
37. तालीकोटा के युद्ध में विजयनगर की सेना का नेतृत्व किसने किया था?
A. कृष्णदेवराय
B. अच्युतदेवराय
C. राम राय
D. हरिहर द्वितीय
उत्तर: C. राम राय
व्याख्या: तालीकोटा के युद्ध में विजयनगर की सेना का नेतृत्व राम राय ने किया था। वह विजयनगर का प्रभावशाली मुख्य मंत्री और वास्तविक सत्ता संचालक था। उसने दक्कन के एक सुल्तान को दूसरे के विरुद्ध खड़ा करने की नीति अपनाई। अंततः दक्कनी सुल्तानों ने संयुक्त होकर 1565 ईस्वी में उसकी सेना को पराजित कर दिया।
38. तालीकोटा के युद्ध में विजयनगर के विरुद्ध किन राज्यों की संयुक्त सेनाएँ थीं?
A. दिल्ली, मालवा और गुजरात
B. बीजापुर, अहमदनगर और गोलकुंडा
C. बंगाल, जौनपुर और कश्मीर
D. ओडिशा, मेवाड़ और मारवाड़
उत्तर: B. बीजापुर, अहमदनगर और गोलकुंडा
व्याख्या: तालीकोटा के युद्ध में बीजापुर, अहमदनगर और गोलकुंडा की संयुक्त सेनाओं ने विजयनगर को पराजित किया। इन दक्कनी राज्यों के बीच आपसी संघर्ष होते थे, लेकिन राम राय की हस्तक्षेपकारी नीति ने उन्हें एकजुट कर दिया। युद्ध में विजयनगर की सेना बिखर गई और राम राय मारा गया। इसके बाद राजधानी पर आक्रमण और लूट हुई।
39. तालीकोटा की पराजय के बाद विजयनगर नगर के साथ क्या हुआ?
A. उसे मुगल राजधानी बनाया गया
B. उसका तुरंत पुनर्निर्माण किया गया
C. उसे लूटा गया और कुछ वर्षों में छोड़ दिया गया
D. वह पुर्तगालियों के अधिकार में चला गया
उत्तर: C. उसे लूटा गया और कुछ वर्षों में छोड़ दिया गया
व्याख्या: तालीकोटा की पराजय के बाद विजयी दक्कनी सेनाओं ने विजयनगर नगर को लूटा और नष्ट किया। अनेक राजकीय तथा नगरीय भवनों को भारी क्षति पहुँची। कुछ ही वर्षों में राजधानी लगभग पूरी तरह छोड़ दी गई। हालांकि साम्राज्य तुरंत समाप्त नहीं हुआ और अरविदु शासकों ने अन्य राजधानियों से शासन जारी रखा।
40. तालीकोटा के बाद अरविदु वंश ने क्रमशः किन स्थानों से शासन किया?
A. रायचूर और गुलबर्गा
B. मदुरै और तंजावुर
C. पेनुकोण्डा और चंद्रगिरि
D. बीदर और गोलकुंडा
उत्तर: C. पेनुकोण्डा और चंद्रगिरि
व्याख्या: हम्पी के विनाश के बाद अरविदु वंश के शासकों ने पहले पेनुकोण्डा और बाद में चंद्रगिरि को अपना राजनीतिक केंद्र बनाया। चंद्रगिरि वर्तमान तिरुपति के निकट स्थित है। राजधानी के स्थानांतरण से साम्राज्य का केंद्र पूर्व की ओर चला गया। अरविदु वंश ने कमजोर होती केंद्रीय सत्ता के बावजूद सत्रहवीं शताब्दी तक शासन जारी रखा।
41. कृष्णदेवराय ने दक्कनी राजनीति में हस्तक्षेप के कारण कौन-सी उपाधि धारण की थी?
A. गजपति विजेता
B. यवन राज्य स्थापनाचार्य
C. हिंदू पद-पादशाही
D. दक्षिणापथेश्वर
उत्तर: B. यवन राज्य स्थापनाचार्य
व्याख्या: कृष्णदेवराय ने कुछ दक्कनी सुल्तानों के उत्तराधिकार दावेदारों का समर्थन किया और स्वयं को यवन राज्य का स्थापनकर्ता बताया। ‘यवन’ शब्द का प्रयोग उत्तर-पश्चिम से आने वाले विदेशी समुदायों के लिए किया जाता था। विजयनगर और दक्कनी सुल्तानों के संबंध हमेशा शत्रुतापूर्ण नहीं थे। दोनों पक्ष कभी संघर्ष करते थे और कभी एक-दूसरे के राजनीतिक मामलों में सहायता करते थे।
42. किस नीति ने दक्कनी सुल्तानों को राम राय के विरुद्ध एकजुट होने के लिए प्रेरित किया?
A. समुद्री व्यापार बंद करने की नीति
B. एक सुल्तान को दूसरे के विरुद्ध प्रयोग करने की नीति
C. मंदिरों पर कर लगाने की नीति
D. पुर्तगालियों को निष्कासित करने की नीति
उत्तर: B. एक सुल्तान को दूसरे के विरुद्ध प्रयोग करने की नीति
व्याख्या: राम राय ने दक्कन के एक सुल्तान को दूसरे के विरुद्ध खड़ा करके विजयनगर का प्रभाव बनाए रखने का प्रयास किया। कुछ समय तक इस नीति से उसे राजनीतिक लाभ मिला। लगातार हस्तक्षेप से दक्कनी सुल्तानों में उसके प्रति असंतोष बढ़ गया। अंततः उन्होंने गठबंधन बनाकर तालीकोटा में विजयनगर की सेना को निर्णायक रूप से पराजित किया।
43. विजयनगर साम्राज्य में ‘नायक’ मुख्य रूप से कौन थे?
A. मंदिरों के पुजारी
B. समुद्री व्यापारी
C. सैन्य प्रमुख
D. राजकीय लेखक
उत्तर: C. सैन्य प्रमुख
व्याख्या: नायक ऐसे सैन्य प्रमुख थे जो किलों और सशस्त्र सैनिकों पर नियंत्रण रखते थे। वे प्रायः एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाते और कभी-कभी किसानों को भी अपने साथ ले जाते थे। अनेक नायकों ने विजयनगर के राय की अधीनता स्वीकार की थी। शक्तिशाली होने पर वे विद्रोह भी करते थे, जिन्हें सैन्य कार्रवाई से दबाना पड़ता था।
44. विजयनगर के अधिकांश नायक मुख्य रूप से कौन-सी भाषाएँ बोलते थे?
A. फारसी और अरबी
B. तेलुगु और कन्नड़
C. मराठी और गुजराती
D. पाली और प्राकृत
उत्तर: B. तेलुगु और कन्नड़
व्याख्या: विजयनगर के अनेक नायक तेलुगु या कन्नड़ भाषा बोलते थे। वे सैन्य प्रमुख थे और साम्राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में किलों तथा सैनिकों को नियंत्रित करते थे। नायक व्यवस्था ने दक्षिण भारत में विजयनगर की सैन्य शक्ति को विस्तार दिया। बाद में मदुरै, तंजावुर, इक्केरी और अन्य क्षेत्रों में अनेक नायकों ने स्वतंत्र राज्य स्थापित कर लिए।
45. विजयनगर की अमर-नायक व्यवस्था की अनेक विशेषताएँ किस व्यवस्था से प्रभावित मानी जाती हैं?
A. मनसबदारी व्यवस्था
B. इक्ता व्यवस्था
C. रैयतवाड़ी व्यवस्था
D. महालवाड़ी व्यवस्था
उत्तर: B. इक्ता व्यवस्था
व्याख्या: अमर-नायक व्यवस्था की अनेक विशेषताएँ दिल्ली सल्तनत की इक्ता व्यवस्था से प्रभावित मानी जाती हैं। अमर-नायकों को राजा द्वारा प्रशासन के लिए क्षेत्र प्रदान किए जाते थे। वे वहाँ से कर वसूल कर सैनिक टुकड़ियाँ बनाए रखते थे। राजस्व का एक भाग मंदिरों, सिंचाई और प्रशासनिक कार्यों पर भी खर्च किया जाता था।
46. अमर-नायकों को शासन के लिए क्षेत्र कौन प्रदान करता था?
A. ग्राम पंचायत
B. मंदिर का महंत
C. विजयनगर का राय
D. विदेशी व्यापारी
उत्तर: C. विजयनगर का राय
व्याख्या: अमर-नायकों को विजयनगर का राय शासन और राजस्व संग्रह के लिए निश्चित क्षेत्र प्रदान करता था। बदले में उन्हें सैनिकों, घोड़ों और हाथियों की निर्धारित संख्या बनाए रखनी होती थी। आवश्यकता पड़ने पर उनकी सेनाएँ राजा के सैन्य अभियानों में भाग लेती थीं। इस व्यवस्था ने विशाल साम्राज्य के प्रशासन और सैन्य नियंत्रण को संभव बनाया।
47. अमर-नायक अपने क्षेत्रों से किनसे कर और अन्य देय राशि एकत्र करते थे?
A. केवल सैनिकों से
B. केवल मंदिरों से
C. किसानों, शिल्पकारों और व्यापारियों से
D. केवल विदेशी यात्रियों से
उत्तर: C. किसानों, शिल्पकारों और व्यापारियों से
व्याख्या: अमर-नायक अपने अधीन क्षेत्र के किसानों, शिल्पकारों और व्यापारियों से कर तथा अन्य देय राशि एकत्र करते थे। वे राजस्व का एक भाग अपने निजी खर्च और सैनिकों के रखरखाव के लिए रखते थे। शेष संसाधनों से मंदिरों तथा सिंचाई कार्यों की सहायता की जाती थी। उन्हें राजा को वार्षिक कर और उपहार भी देने पड़ते थे।
48. अमर-नायक अपने राजस्व के एक भाग से मुख्य रूप से क्या बनाए रखते थे?
A. केवल पुस्तकालय
B. घोड़ों और हाथियों की सैनिक टुकड़ियाँ
C. विदेशी दूतावास
D. समुद्री जहाजों का बेड़ा
उत्तर: B. घोड़ों और हाथियों की सैनिक टुकड़ियाँ
व्याख्या: अमर-नायक राजस्व के एक भाग से घोड़ों, हाथियों और सैनिकों की निर्धारित टुकड़ियाँ बनाए रखते थे। यही टुकड़ियाँ विजयनगर के राजा को प्रभावी सैन्य शक्ति प्रदान करती थीं। इस सेना की सहायता से साम्राज्य ने दक्षिण भारतीय प्रायद्वीप के बड़े भाग पर नियंत्रण स्थापित किया। अमर-नायक प्रशासनिक अधिकारी और सैन्य सेनापति दोनों भूमिकाएँ निभाते थे।
49. अमर-नायक राजा के प्रति अपनी निष्ठा किस प्रकार प्रदर्शित करते थे?
A. प्रतिवर्ष राजदरबार में कर और उपहार प्रस्तुत करके
B. अपनी भूमि विदेशी व्यापारियों को देकर
C. केवल मंदिर बनवाकर
D. स्वतंत्र मुद्रा चलाकर
उत्तर: A. प्रतिवर्ष राजदरबार में कर और उपहार प्रस्तुत करके
व्याख्या: अमर-नायक प्रतिवर्ष राजा को निर्धारित कर भेजते और उपहारों के साथ राजदरबार में उपस्थित होते थे। यह उनकी निष्ठा और राजा की सर्वोच्चता स्वीकार करने का प्रतीक था। बदले में उन्हें अपने क्षेत्रों के प्रशासन और राजस्व संग्रह का अधिकार मिलता था। शक्तिशाली नायकों पर नियंत्रण रखने के लिए राजा उनका स्थानांतरण भी कर सकता था।
50. विजयनगर के राजा अमर-नायकों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए कौन-सा उपाय अपनाते थे?
A. उनका समय-समय पर स्थानांतरण
B. उनकी सेना समाप्त करना
C. सभी नायकों को राजधानी में कैद रखना
D. उनसे व्यापारिक कर न लेना
उत्तर: A. उनका समय-समय पर स्थानांतरण
व्याख्या: विजयनगर के राजा अमर-नायकों का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरण करके उन पर नियंत्रण रखते थे। इससे कोई नायक स्थानीय स्तर पर अत्यधिक स्थायी और स्वतंत्र शक्ति विकसित नहीं कर पाता था। नायकों को राजा को वार्षिक कर तथा सैन्य सहायता देनी होती थी। केंद्रीय सत्ता कमजोर होने पर यही नायक स्वतंत्र होने लगे।
51. अनेक नायकों ने स्वतंत्र राज्यों की स्थापना मुख्य रूप से किस शताब्दी में की?
A. चौदहवीं शताब्दी
B. पंद्रहवीं शताब्दी
C. सोलहवीं शताब्दी
D. सत्रहवीं शताब्दी
उत्तर: D. सत्रहवीं शताब्दी
व्याख्या: सत्रहवीं शताब्दी में अनेक शक्तिशाली नायकों ने स्वतंत्र राज्यों की स्थापना कर ली। इससे विजयनगर की केंद्रीय साम्राज्यवादी संरचना का विघटन तेज हो गया। मदुरै, तंजावुर, इक्केरी और अन्य स्थान नायक सत्ता के प्रमुख केंद्र बने। इन स्वतंत्र राज्यों ने विजयनगर की स्थापत्य और प्रशासनिक परंपराओं को आगे जारी रखा।
52. तुंगभद्रा नदी विजयनगर के निकट मुख्य रूप से किस दिशा में बहती है?
A. दक्षिण-पश्चिम
B. उत्तर-पूर्व
C. उत्तर-पश्चिम
D. दक्षिण-पूर्व
उत्तर: B. उत्तर-पूर्व
व्याख्या: विजयनगर के निकट तुंगभद्रा नदी उत्तर-पूर्व दिशा में बहती है और एक प्राकृतिक नदी बेसिन का निर्माण करती है। इसके आसपास ग्रेनाइट की ऊँची पहाड़ियाँ स्थित हैं। पहाड़ियों से उतरने वाली छोटी जलधाराओं पर बाँध बनाकर जलाशय तैयार किए गए थे। इस भौगोलिक व्यवस्था ने सुरक्षा, सिंचाई और नगर की जलापूर्ति में सहायता की।
53. विजयनगर का प्रमुख कमलापुरम जलाशय लगभग किस काल में बनाया गया था?
A. चौदहवीं शताब्दी के प्रारंभ में
B. पंद्रहवीं शताब्दी के प्रारंभ में
C. सोलहवीं शताब्दी के अंत में
D. सत्रहवीं शताब्दी के मध्य में
उत्तर: B. पंद्रहवीं शताब्दी के प्रारंभ में
व्याख्या: कमलापुरम जलाशय का निर्माण पंद्रहवीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों में किया गया था। विजयनगर का क्षेत्र अपेक्षाकृत शुष्क था, इसलिए वर्षाजल के संग्रह की विस्तृत व्यवस्था आवश्यक थी। जलाशय से आसपास के खेतों की सिंचाई की जाती थी। इसका पानी नहर के माध्यम से राजधानी के राजकीय केंद्र तक भी पहुँचाया जाता था।
54. कमलापुरम जलाशय से नहर द्वारा पानी राजधानी के किस क्षेत्र तक पहुँचाया जाता था?
A. केवल सैन्य छावनी तक
B. राजकीय केंद्र तक
C. केवल बंदरगाह तक
D. रायचूर दुर्ग तक
उत्तर: B. राजकीय केंद्र तक
व्याख्या: कमलापुरम जलाशय का पानी नहर द्वारा विजयनगर के राजकीय केंद्र तक पहुँचाया जाता था। जलाशय आसपास के कृषि क्षेत्रों की सिंचाई भी करता था। राजधानी की जल प्रणाली में बाँधों, जलाशयों, नहरों और जलवाहिकाओं का प्रयोग किया गया था। इससे शुष्क क्षेत्र में विशाल जनसंख्या और राजकीय प्रतिष्ठानों की आवश्यकताएँ पूरी होती थीं।
55. तुंगभद्रा पर बने बाँध से पानी लेने वाली प्रमुख नहर कौन-सी थी?
A. हिरिया नहर
B. यमुना नहर
C. अनंतपुर नहर
D. कृष्णराज नहर
उत्तर: A. हिरिया नहर
व्याख्या: हिरिया नहर विजयनगर के सबसे प्रमुख जल प्रबंधन कार्यों में से एक थी। यह तुंगभद्रा नदी पर बने बाँध से पानी प्राप्त करती थी। नहर उस कृषि घाटी की सिंचाई करती थी जो पवित्र केंद्र और नगरीय केंद्र के बीच स्थित थी। इसका निर्माण संभवतः संगम वंश के शासकों द्वारा कराया गया था।
56. हिरिया नहर किसके बीच स्थित कृषि घाटी की सिंचाई करती थी?
A. राजकीय केंद्र और रायचूर के बीच
B. पवित्र केंद्र और नगरीय केंद्र के बीच
C. हम्पी और बीजापुर के बीच
D. पेनुकोण्डा और चंद्रगिरि के बीच
उत्तर: B. पवित्र केंद्र और नगरीय केंद्र के बीच
व्याख्या: हिरिया नहर उस कृषि घाटी की सिंचाई करती थी जो विजयनगर के पवित्र केंद्र और नगरीय केंद्र के बीच स्थित थी। नहर तुंगभद्रा पर बने बाँध से पानी लेती थी। सिंचित कृषि क्षेत्र राजधानी की खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करता था। जल प्रबंधन प्रणाली ने शुष्क भूभाग में नगर के विस्तार और स्थायी कृषि को संभव बनाया।
57. हिरिया नहर का निर्माण संभवतः किस वंश के शासकों ने करवाया था?
A. संगम वंश
B. तुलुव वंश
C. अरविदु वंश
D. सालुव वंश
उत्तर: A. संगम वंश
व्याख्या: उपलब्ध पुरातात्त्विक अध्ययन के अनुसार हिरिया नहर का निर्माण संभवतः संगम वंश के शासकों ने करवाया था। संगम विजयनगर का प्रथम राजवंश था। नहर तुंगभद्रा से पानी लेकर कृषि घाटी तक पहुँचाती थी। इससे स्पष्ट होता है कि विजयनगर के प्रारंभिक शासकों ने राजधानी के साथ सिंचाई और कृषि व्यवस्था के विकास पर भी ध्यान दिया।
58. किस विदेशी यात्री ने विजयनगर की किलेबंदी में सात घेरे होने का उल्लेख किया था?
A. डोमिंगो पायस
B. अब्दुर रज्जाक
C. निकोलो दे कोंटी
D. अफानासी निकितिन
उत्तर: B. अब्दुर रज्जाक
व्याख्या: फारसी शासक द्वारा भेजे गए राजदूत अब्दुर रज्जाक ने विजयनगर की सात पंक्तियों वाली किलेबंदी का वर्णन किया। ये सुरक्षा घेरे केवल नगर को ही नहीं, बल्कि कृषि क्षेत्रों और जंगलों को भी घेरते थे। बाहरी दीवार आसपास की पहाड़ियों को जोड़ती थी। उसने राजधानी की विशालता, संपन्नता और सुरक्षा व्यवस्था की प्रशंसा की।
59. विजयनगर की बाहरी किलेबंदी के भीतर क्या-क्या शामिल था?
A. केवल राजमहल
B. केवल मंदिर
C. नगर, कृषि भूमि और वन
D. केवल सैनिक छावनी
उत्तर: C. नगर, कृषि भूमि और वन
व्याख्या: विजयनगर की किलेबंदी में नगर के साथ कृषि भूमि, बगीचे, मकान और वन भी शामिल थे। इसका उद्देश्य लंबे सैन्य घेरे के समय राजधानी के लिए भोजन की आपूर्ति बनाए रखना था। सामान्य मध्यकालीन किलों में अनाज भंडार रखे जाते थे, लेकिन विजयनगर ने कृषि क्षेत्र को ही सुरक्षित कर लिया था। यह महँगी किंतु प्रभावी रक्षात्मक रणनीति थी।
60. विजयनगर की सबसे बाहरी किलेबंदी की दीवार किसे जोड़ती थी?
A. समुद्री बंदरगाहों को
B. नगर के चारों ओर स्थित पहाड़ियों को
C. कृष्णा और गोदावरी नदियों को
D. सभी प्रमुख मंदिरों को
उत्तर: B. नगर के चारों ओर स्थित पहाड़ियों को
व्याख्या: विजयनगर की सबसे बाहरी दीवार नगर के चारों ओर स्थित प्राकृतिक पहाड़ियों को जोड़ती थी। चट्टानी भूभाग को कृत्रिम किलेबंदी के साथ मिलाकर मजबूत रक्षा व्यवस्था बनाई गई थी। दीवारों में बाहर की ओर निकले वर्गाकार या आयताकार बुर्ज थे। प्राकृतिक और मानवनिर्मित सुरक्षा का यह संयोजन राजधानी की विशिष्ट विशेषता था।
61. विजयनगर की विशाल पत्थर की दीवारों के निर्माण में किसका प्रयोग नहीं किया गया था?
A. पत्थर के खंडों का
B. मिट्टी और मलबे का
C. गारे या सीमेंट का
D. पच्चर के आकार के पत्थरों का
उत्तर: C. गारे या सीमेंट का
व्याख्या: विजयनगर की विशाल किलेबंदी में पत्थरों को जोड़ने के लिए गारे या सीमेंट का प्रयोग नहीं किया गया था। पच्चर के आकार के पत्थर एक-दूसरे को मजबूती से थामे रहते थे। दीवारों के भीतरी भाग में मिट्टी और पत्थरों का मलबा भरा जाता था। यह निर्माण तकनीक स्थानीय सामग्री और भूगोल के कुशल उपयोग को दर्शाती है।
62. विजयनगर में कृषि क्षेत्र को किले के भीतर रखने का मुख्य सैन्य कारण क्या था?
A. खेती पर अधिक कर लगाना
B. सैन्य घेराबंदी के समय खाद्यान्न की आपूर्ति बनाए रखना
C. किसानों को नगर से बाहर जाने से रोकना
D. मंदिरों की संख्या बढ़ाना
उत्तर: B. सैन्य घेराबंदी के समय खाद्यान्न की आपूर्ति बनाए रखना
व्याख्या: मध्यकालीन सैन्य घेराबंदी में आक्रमणकारी प्रायः खाद्य आपूर्ति रोककर रक्षकों को आत्मसमर्पण के लिए बाध्य करते थे। ऐसे घेरे कई महीनों या वर्षों तक चल सकते थे। विजयनगर के शासकों ने केवल अनाज भंडार बनाने के बजाय कृषि पट्टी को किले के भीतर सुरक्षित किया। इससे घेरे के समय नियमित खाद्यान्न उत्पादन संभव रहता था।
63. विजयनगर की तीसरी किलेबंदी मुख्य रूप से किस क्षेत्र को घेरती थी?
A. पवित्र केंद्र
B. कृषि क्षेत्र
C. राजकीय केंद्र
D. मुस्लिम आवासीय क्षेत्र
उत्तर: C. राजकीय केंद्र
व्याख्या: विजयनगर में दूसरी किलेबंदी नगरीय परिसर के भीतरी भाग को घेरती थी, जबकि तीसरी किलेबंदी राजकीय केंद्र के चारों ओर थी। राजकीय क्षेत्र के प्रत्येक प्रमुख भवन को भी अलग ऊँची दीवारों से सुरक्षित किया गया था। प्रवेश के लिए नियंत्रित और सुरक्षित द्वार थे। इससे राजधानी में सुरक्षा के कई स्तर विकसित हुए थे।
64. विजयनगर के किले के द्वारों पर बने मेहराब और गुंबद किस स्थापत्य प्रभाव को दर्शाते हैं?
A. यूनानी स्थापत्य
B. रोमन स्थापत्य
C. भारतीय-इस्लामी स्थापत्य
D. गोथिक स्थापत्य
उत्तर: C. भारतीय-इस्लामी स्थापत्य
व्याख्या: विजयनगर के कुछ किले-द्वारों पर बने मेहराब और गुंबद भारतीय-इस्लामी स्थापत्य के प्रभाव को दर्शाते हैं। ऐसी तकनीकें तुर्क सुल्तानों से जुड़ी थीं, लेकिन उन्हें स्थानीय निर्माण परंपराओं के साथ अपनाया गया। विजयनगर और दक्कनी राज्यों के बीच केवल युद्ध ही नहीं, सांस्कृतिक संपर्क भी था। लौकिक भवनों में मिश्रित स्थापत्य शैली विशेष रूप से दिखाई देती है।
65. विजयनगर की सड़कें सामान्यतः किस प्रकार बनाई गई थीं?
A. पहाड़ों की चोटियों के ऊपर
B. घाटियों से होकर चट्टानी क्षेत्रों से बचते हुए
C. केवल नदी के किनारे
D. भूमिगत सुरंगों के भीतर
उत्तर: B. घाटियों से होकर चट्टानी क्षेत्रों से बचते हुए
व्याख्या: विजयनगर की सड़कें सामान्यतः घाटियों से होकर गुजरती थीं और कठिन चट्टानी क्षेत्रों से बचती थीं। पुरातत्त्वविदों ने द्वारों से गुजरने वाले मार्गों और प्राचीन फर्शों के अवशेषों से सड़कों की पहचान की है। सड़कें राजधानी को बाहरी क्षेत्रों से जोड़ती थीं। कई प्रमुख मार्ग मंदिरों के गोपुरम से निकलकर बाजारों के बीच से गुजरते थे।
66. विजयनगर में मंदिर के प्रवेश-द्वारों से निकलने वाली प्रमुख सड़कों के दोनों ओर क्या स्थित था?
A. सैनिक छावनियाँ
B. कृषि खेत
C. बाजार
D. राजकीय कारागार
उत्तर: C. बाजार
व्याख्या: मंदिरों के प्रवेश-द्वारों से निकलने वाली प्रमुख सड़कों के दोनों ओर बाजार स्थित होते थे। विट्ठल मंदिर की रथ सड़क पत्थर की पट्टियों से बनी थी और उसके किनारे स्तंभयुक्त मंडप थे। व्यापारी इन्हीं मंडपों में अपनी दुकानें लगाते थे। इससे मंदिर धार्मिक केंद्र होने के साथ आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों के केंद्र भी बन गए थे।
67. विजयनगर के नगरीय केंद्र से मिले उत्कृष्ट चीनी मिट्टी के बर्तन किस वर्ग की उपस्थिति का संकेत देते हैं?
A. निर्धन कृषकों का
B. समृद्ध व्यापारियों का
C. केवल सैनिकों का
D. वनवासी समुदायों का
उत्तर: B. समृद्ध व्यापारियों का
व्याख्या: नगरीय केंद्र के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र से मिले उत्कृष्ट चीनी मिट्टी के बर्तनों के अवशेष समृद्ध व्यापारियों की उपस्थिति का संकेत देते हैं। आयातित चीनी वस्तुएँ उच्च आर्थिक स्थिति और विदेशी व्यापार को दर्शाती हैं। विजयनगर के बाजार बहुमूल्य वस्तुओं के लिए प्रसिद्ध थे। इसी क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय का आवासीय इलाका भी स्थित था।
68. विजयनगर का मुस्लिम आवासीय क्षेत्र नगरीय केंद्र के किस भाग में स्थित माना जाता है?
A. उत्तर-पूर्वी भाग
B. दक्षिण-पश्चिमी भाग
C. पश्चिमी पहाड़ी क्षेत्र
D. पवित्र केंद्र के भीतर
उत्तर: A. उत्तर-पूर्वी भाग
व्याख्या: विजयनगर का मुस्लिम आवासीय क्षेत्र नगरीय केंद्र के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित माना जाता है। यहाँ कब्रें और मस्जिदें मिली हैं, जिनका स्थापत्य कुछ मामलों में हम्पी के मंदिर मंडपों से मिलता-जुलता है। इसी क्षेत्र से चीनी मिट्टी के उत्कृष्ट बर्तन भी प्राप्त हुए हैं। ये अवशेष नगर की बहुधार्मिक और व्यापारिक प्रकृति को दर्शाते हैं।
69. पुर्तगाली यात्री बारबोसा के अनुसार विजयनगर के सामान्य लोगों के घर कैसे थे?
A. पूर्णतः संगमरमर से बने थे
B. फूस से छाए लेकिन सुव्यवस्थित थे
C. भूमिगत बनाए गए थे
D. केवल लकड़ी के महल थे
उत्तर: B. फूस से छाए लेकिन सुव्यवस्थित थे
व्याख्या: बारबोसा के अनुसार सामान्य लोगों के घर फूस से छाए हुए थे, लेकिन अच्छी तरह बनाए और व्यवस्थित थे। मकान व्यवसायों के आधार पर लंबी सड़कों में समूहबद्ध थे। इनके बीच अनेक खुले स्थान भी थे। नष्ट होने वाली सामग्री से बने होने के कारण सामान्य आवासों के पुरातात्त्विक अवशेष बहुत कम बचे हैं।
70. विजयनगर के सामान्य नगरवासियों को पानी किन साधनों से मिलता था?
A. केवल तुंगभद्रा नदी से
B. कुओं, वर्षाजल जलाशयों और मंदिर के तालाबों से
C. केवल राजमहल की नहर से
D. समुद्री जल से
उत्तर: B. कुओं, वर्षाजल जलाशयों और मंदिर के तालाबों से
व्याख्या: क्षेत्रीय सर्वेक्षणों से पता चलता है कि सामान्य नगरवासियों के लिए कुएँ, वर्षाजल संग्रह टैंक और मंदिरों के तालाब जल के प्रमुख स्रोत थे। विजयनगर अपेक्षाकृत शुष्क क्षेत्र में स्थित था। इसलिए बाँध, नहर, जलाशय और जलवाहिकाओं का विस्तृत जाल बनाया गया। जल व्यवस्था ने घरेलू आवश्यकताओं के साथ कृषि और धार्मिक गतिविधियों को भी समर्थन दिया।
71. विजयनगर का राजकीय केंद्र नगर के किस भाग में स्थित था?
A. उत्तर-पूर्वी भाग
B. दक्षिण-पश्चिमी भाग
C. उत्तरी नदी तट
D. पूर्वी समुद्री तट
उत्तर: B. दक्षिण-पश्चिमी भाग
व्याख्या: विजयनगर का राजकीय केंद्र नगर के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित था। यहाँ राजकीय भवनों, विशाल मंचों, मंदिरों और प्रशासनिक संरचनाओं के अवशेष मिले हैं। इस क्षेत्र को अलग किलेबंदी से सुरक्षित किया गया था। राजकीय केंद्र के भीतर भी प्रमुख भवनों के चारों ओर अपनी-अपनी ऊँची दीवारें थीं।
72. विजयनगर के राजकीय केंद्र में लगभग कितने से अधिक मंदिर स्थित थे?
A. 10
B. 25
C. 40
D. 60
उत्तर: D. 60
व्याख्या: राजकीय केंद्र नाम दिए जाने के बावजूद इस क्षेत्र में 60 से अधिक मंदिर स्थित थे। मंदिरों के संरक्षण से शासक अपनी सत्ता को धार्मिक मान्यता प्रदान करते थे। विजयनगर के राजा देवताओं के साथ अपना निकट संबंध प्रदर्शित करते थे। धार्मिक संरक्षण राजकीय प्रतिष्ठा, शक्ति, संपन्नता और पुण्य को व्यक्त करने का साधन था।
73. विजयनगर के राजकीय केंद्र में लगभग कितने भवन-समूहों को महल के रूप में पहचाना गया है?
A. लगभग 10
B. लगभग 20
C. लगभग 30
D. लगभग 100
उत्तर: C. लगभग 30
व्याख्या: राजकीय केंद्र में लगभग 30 बड़े भवन-समूहों को महलों के रूप में पहचाना गया है। इनमें सामान्यतः मंदिरों जैसी स्पष्ट धार्मिक संरचना नहीं मिली है। इन भवनों के पत्थर के आधार बचे हैं, जबकि ऊपरी भाग नष्ट हो चुके हैं। इसलिए अनेक संरचनाओं के वास्तविक नाम और उपयोग को निश्चित रूप से निर्धारित करना कठिन है।
74. विजयनगर के अधिकांश लौकिक भवनों की ऊपरी संरचना किस प्रकार की सामग्री से बनी थी?
A. केवल ग्रेनाइट से
B. नष्ट होने वाली सामग्री से
C. संगमरमर से
D. लोहे की चादरों से
उत्तर: B. नष्ट होने वाली सामग्री से
व्याख्या: विजयनगर के मंदिर पूर्णतः पत्थर और अन्य टिकाऊ चिनाई सामग्री से बनाए जाते थे, जबकि लौकिक भवनों की ऊपरी संरचनाएँ लकड़ी जैसी नष्ट होने वाली सामग्री से बनी थीं। इसी कारण राजमहलों के अधिकांश ऊपरी भाग सुरक्षित नहीं रहे। आज मुख्यतः उनके मंच, नींव और पत्थर के आधार दिखाई देते हैं। इससे भवनों का मूल स्वरूप समझना कठिन होता है।
75. तथाकथित ‘राजा का महल’ किस विशेषता के लिए जाना जाता है?
A. वह विजयनगर का सबसे छोटा भवन है
B. वह सबसे बड़ा घिरा हुआ परिसर है, पर राजनिवास होने का निश्चित प्रमाण नहीं है
C. वह केवल मंदिर था
D. वह पुर्तगाली व्यापारिक केंद्र था
उत्तर: B. वह सबसे बड़ा घिरा हुआ परिसर है, पर राजनिवास होने का निश्चित प्रमाण नहीं है
व्याख्या: ‘राजा का महल’ राजकीय केंद्र का सबसे बड़ा घिरा हुआ परिसर है, लेकिन उसके राजनिवास होने का निर्णायक प्रमाण नहीं मिला है। इसमें सभा भवन और महानवमी डिब्बा कहे जाने वाले दो विशाल मंच हैं। परिसर ऊँची दोहरी दीवारों से घिरा था। वर्तमान नाम संरचना और अनुमानित उपयोग के आधार पर दिए गए हैं।
76. महानवमी डिब्बा की ऊँचाई लगभग कितनी थी?
A. 10 फुट
B. 20 फुट
C. 40 फुट
D. 100 फुट
उत्तर: C. 40 फुट
व्याख्या: महानवमी डिब्बा लगभग 40 फुट ऊँचा विशाल मंच है, जिसका आधार करीब 11,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैला है। यह नगर के सबसे ऊँचे स्थानों में से एक पर स्थित था। इसके आधार पर अनेक उभरी हुई नक्काशियाँ बनी हैं। प्रमाणों से पता चलता है कि मंच के ऊपर किसी समय लकड़ी की संरचना रही होगी।
77. महानवमी से संबंधित दस दिवसीय उत्सव सामान्यतः किन महीनों में मनाया जाता था?
A. जनवरी–फरवरी
B. मार्च–अप्रैल
C. जुलाई–अगस्त
D. सितंबर–अक्टूबर
उत्तर: D. सितंबर–अक्टूबर
व्याख्या: महानवमी से संबंधित दस दिवसीय उत्सव शरद ऋतु में सितंबर और अक्टूबर के दौरान मनाया जाता था। उत्तर भारत में इसे दशहरा, बंगाल में दुर्गा पूजा और दक्षिण भारत में नवरात्रि या महानवमी कहा जाता था। इस अवसर पर विजयनगर के शासक अपनी शक्ति और प्रभुत्व प्रदर्शित करते थे। समारोहों में धार्मिक तथा सैन्य गतिविधियाँ शामिल थीं।
78. महानवमी समारोह के दौरान निम्नलिखित में से कौन-सा अनुष्ठान किया जाता था?
A. राजकीय घोड़े की पूजा
B. समुद्री जहाज की पूजा
C. केवल राज्याभिषेक
D. विदेशी मुद्रा का वितरण
उत्तर: A. राजकीय घोड़े की पूजा
व्याख्या: महानवमी समारोह में देवी-देवताओं की प्रतिमा और राजकीय घोड़े की पूजा की जाती थी। भैंसों तथा अन्य पशुओं की बलि, नृत्य, कुश्ती और शोभायात्राएँ भी आयोजित होती थीं। सजे हुए घोड़े, हाथी, रथ और सैनिक समारोह में भाग लेते थे। इन आयोजनों के माध्यम से राजा अपनी धार्मिक वैधता और सैन्य शक्ति प्रदर्शित करता था।
79. महानवमी उत्सव के अंतिम दिन राजा कौन-सा कार्य करता था?
A. राजधानी छोड़ देता था
B. अपनी और नायकों की सेनाओं का निरीक्षण करता था
C. विदेशी व्यापार बंद करता था
D. नया राजवंश स्थापित करता था
उत्तर: B. अपनी और नायकों की सेनाओं का निरीक्षण करता था
व्याख्या: महानवमी उत्सव के अंतिम दिन राजा खुले मैदान में अपनी सेना और नायकों की सैनिक टुकड़ियों का निरीक्षण करता था। नायक इस अवसर पर निर्धारित कर और बहुमूल्य उपहार प्रस्तुत करते थे। यह समारोह उनकी निष्ठा की सार्वजनिक पुष्टि था। सेना का प्रदर्शन राजा की सर्वोच्चता और युद्ध क्षमता को प्रकट करता था।
80. डोमिंगो पायस ने सभा भवन और महानवमी डिब्बा को संयुक्त रूप से क्या कहा था?
A. न्याय भवन
B. विजय भवन
C. कमल भवन
D. संगीत भवन
उत्तर: B. विजय भवन
व्याख्या: पुर्तगाली यात्री डोमिंगो पायस ने सभा भवन और महानवमी डिब्बा को संयुक्त रूप से ‘विजय भवन’ कहा था। उसने एक-दूसरे के ऊपर बने सुसज्जित मंचों और राजकीय सिंहासन का वर्णन किया। इस परिसर में धार्मिक प्रतिमा और राजकीय प्रतीकों के लिए स्थान था। पायस के विवरण से विजयनगर के राजकीय समारोहों की भव्यता का पता चलता है।
81. ‘कमल महल’ नाम इस भवन को किसने दिया था?
A. विजयनगर के संस्थापकों ने
B. उन्नीसवीं शताब्दी के ब्रिटिश यात्रियों ने
C. पुर्तगाली व्यापारियों ने
D. बहमनी सुल्तानों ने
उत्तर: B. उन्नीसवीं शताब्दी के ब्रिटिश यात्रियों ने
व्याख्या: कमल महल का वर्तमान नाम उन्नीसवीं शताब्दी के ब्रिटिश यात्रियों ने उसके स्वरूप के आधार पर दिया था। इतिहासकार इसके वास्तविक विजयनगरकालीन नाम और उपयोग के विषय में निश्चित नहीं हैं। भवन के मेहराबों पर भारतीय-इस्लामी स्थापत्य तकनीक का प्रभाव दिखाई देता है। यह राजकीय केंद्र के सुंदर और विशिष्ट लौकिक भवनों में शामिल है।
82. कॉलिन मैकेंजी के मानचित्र के अनुसार कमल महल का संभावित उपयोग क्या था?
A. घोड़ों के अस्तबल के रूप में
B. परिषद कक्ष के रूप में
C. राजकीय कारागार के रूप में
D. अनाज भंडार के रूप में
उत्तर: B. परिषद कक्ष के रूप में
व्याख्या: कॉलिन मैकेंजी के मानचित्र के आधार पर एक सुझाव है कि कमल महल परिषद कक्ष रहा होगा। संभवतः यहाँ राजा अपने मंत्रियों और सलाहकारों से मिलता था। हालांकि इसके वास्तविक उपयोग के संबंध में इतिहासकारों के पास निर्णायक प्रमाण नहीं हैं। भवन की मेहराबें, बहुमंजिली संरचना और मिश्रित स्थापत्य शैली इसे विशिष्ट बनाती हैं।
83. कमल महल में मूल रूप से कुल कितनी मीनारनुमा संरचनाएँ थीं?
A. पाँच
B. सात
C. नौ
D. बारह
उत्तर: C. नौ
व्याख्या: कमल महल में कुल नौ मीनारनुमा संरचनाएँ थीं। इनमें एक ऊँची केंद्रीय मीनार और उसके चारों ओर आठ छोटी मीनारें थीं। भवन में भारतीय मंदिर परंपरा और भारतीय-इस्लामी मेहराबों का संयोजन दिखाई देता है। इसका वर्तमान नाम बाद की परंपरा से आया है और इसके मूल राजकीय उपयोग पर इतिहासकारों में अनिश्चितता है।
84. हजारा राम मंदिर मुख्य रूप से किसके निजी उपयोग के लिए बनाया गया माना जाता है?
A. विदेशी व्यापारियों के लिए
B. राजा और उसके परिवार के लिए
C. सामान्य सैनिकों के लिए
D. दक्कनी सुल्तानों के लिए
उत्तर: B. राजा और उसके परिवार के लिए
व्याख्या: राजकीय केंद्र में स्थित हजारा राम मंदिर संभवतः राजा और उसके परिवार के निजी धार्मिक उपयोग के लिए बनाया गया था। मंदिर के केंद्रीय गर्भगृह की मूल प्रतिमाएँ अब उपलब्ध नहीं हैं। इसकी दीवारों पर विस्तृत मूर्तिकला सुरक्षित है। राजकीय क्षेत्र में मंदिर की उपस्थिति विजयनगर की राजनीति और धर्म के घनिष्ठ संबंध को दर्शाती है।
85. हजारा राम मंदिर की भीतरी दीवारों पर मुख्य रूप से किस ग्रंथ के दृश्य अंकित हैं?
A. महाभारत
B. रामायण
C. जातक कथाएँ
D. अर्थशास्त्र
उत्तर: B. रामायण
व्याख्या: हजारा राम मंदिर की भीतरी दीवारों पर रामायण के अनेक दृश्य उकेरे गए हैं। बाहरी और आंतरिक पट्टिकाओं पर जुलूस, घोड़े, हाथी, नर्तक और राजकीय गतिविधियाँ भी दिखाई देती हैं। मंदिर राजकीय केंद्र में स्थित था और संभवतः शाही परिवार के उपयोग के लिए था। इसकी मूर्तियाँ धर्म और राजसत्ता के संबंध को अभिव्यक्त करती हैं।
86. विजयनगर का पवित्र केंद्र नगर के किस भाग में स्थित था?
A. चट्टानी उत्तरी भाग में तुंगभद्रा के तट पर
B. दक्षिण-पश्चिमी राजकीय क्षेत्र में
C. रायचूर दोआब के मध्य में
D. पश्चिमी समुद्री तट पर
उत्तर: A. चट्टानी उत्तरी भाग में तुंगभद्रा के तट पर
व्याख्या: विजयनगर का पवित्र केंद्र नगर के चट्टानी उत्तरी छोर पर तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित था। इस क्षेत्र में विरुपाक्ष, पम्पादेवी और अन्य प्राचीन धार्मिक परंपराओं से जुड़े स्थल थे। यहाँ विजयनगर से पहले के जैन मंदिर भी पाए गए हैं। राजधानी का चयन इस क्षेत्र की धार्मिक प्रतिष्ठा से प्रभावित माना जाता है।
87. स्थानीय परंपरा के अनुसार विजयनगर की पहाड़ियाँ रामायण के किन पात्रों के वानर राज्य से जुड़ी थीं?
A. राम और लक्ष्मण
B. वाली और सुग्रीव
C. भरत और शत्रुघ्न
D. जटायु और सम्पाती
उत्तर: B. वाली और सुग्रीव
व्याख्या: स्थानीय परंपरा विजयनगर की पहाड़ियों को रामायण में वर्णित वाली और सुग्रीव के वानर राज्य से जोड़ती है। इस पौराणिक संबंध ने क्षेत्र की धार्मिक प्रतिष्ठा को बढ़ाया। पम्पादेवी और विरुपाक्ष की कथाएँ भी इसी पवित्र भू-दृश्य से संबंधित थीं। विजयनगर के शासकों ने इन परंपराओं को अपनी राजकीय वैधता से जोड़ा।
88. स्थानीय परंपरा के अनुसार पम्पादेवी ने किस देवता से विवाह के लिए तपस्या की थी?
A. विट्ठल
B. विरुपाक्ष
C. नरसिंह
D. गणेश
उत्तर: B. विरुपाक्ष
व्याख्या: स्थानीय परंपरा के अनुसार पम्पादेवी ने विरुपाक्ष से विवाह करने के लिए हम्पी की पहाड़ियों में तपस्या की थी। विरुपाक्ष को भगवान शिव का एक रूप और विजयनगर का संरक्षक देवता माना जाता था। उनका पम्पादेवी के साथ विवाह आज भी वार्षिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस परंपरा ने राजधानी को विशेष धार्मिक महत्त्व प्रदान किया।
89. विजयनगर के राजकीय आदेशों पर सामान्यतः किस नाम से हस्ताक्षर किए जाते थे?
A. श्री विट्ठल
B. श्री विरुपाक्ष
C. श्री कृष्ण
D. श्री गजपति
उत्तर: B. श्री विरुपाक्ष
व्याख्या: विजयनगर के शासक स्वयं को भगवान विरुपाक्ष की ओर से शासन करने वाला मानते थे। इसलिए राजकीय आदेशों पर सामान्यतः ‘श्री विरुपाक्ष’ लिखकर हस्ताक्षर किए जाते थे। यह नाम प्रायः कन्नड़ लिपि में अंकित होता था। धार्मिक संरक्षकता के माध्यम से राजा अपनी सत्ता को दैवी स्वीकृति और सामाजिक मान्यता प्रदान करता था।
90. विजयनगर के शासकों द्वारा प्रयुक्त ‘हिंदू सुरत्राण’ उपाधि का अर्थ क्या था?
A. हिंदू सेनापति
B. हिंदू सुल्तान
C. मंदिरों का रक्षक
D. दक्षिण का सम्राट
उत्तर: B. हिंदू सुल्तान
व्याख्या: ‘हिंदू सुरत्राण’ अरबी शब्द ‘सुल्तान’ का संस्कृत रूप था और इसका शाब्दिक अर्थ हिंदू सुल्तान था। इस उपाधि से विजयनगर के शासकों ने अलग-अलग राजनीतिक परंपराओं को अपनाया। उन्होंने धार्मिक पहचान को दक्कनी राजकीय शब्दावली के साथ जोड़ा। यह विजयनगर और पड़ोसी राज्यों के बीच सांस्कृतिक तथा राजनीतिक आदान-प्रदान का प्रमाण है।
91. विजयनगर मंदिर स्थापत्य में ‘राय गोपुरम’ किसे कहा जाता था?
A. भूमिगत जलाशय को
B. विशाल राजकीय प्रवेश-द्वार को
C. राजकीय सिंहासन को
D. सैनिकों के आवास को
उत्तर: B. विशाल राजकीय प्रवेश-द्वार को
व्याख्या: राय गोपुरम मंदिर परिसरों के विशाल और ऊँचे राजकीय प्रवेश-द्वार थे। उनका आकार प्रायः केंद्रीय गर्भगृह के ऊपर बने शिखर से भी अधिक विशाल होता था। दूर से दिखाई देने वाले ये प्रवेश-द्वार राजा की शक्ति और संसाधनों का प्रदर्शन करते थे। विजयनगर की स्थापत्य परंपरा ने बाद में पूरे दक्षिण भारत के मंदिर निर्माण को प्रभावित किया।
92. विरुपाक्ष मंदिर का सबसे प्राचीन मंदिर-स्थल लगभग किस काल का माना जाता है?
A. पाँचवीं–छठी शताब्दी
B. सातवीं–आठवीं शताब्दी
C. नौवीं–दसवीं शताब्दी
D. बारहवीं–तेरहवीं शताब्दी
उत्तर: C. नौवीं–दसवीं शताब्दी
व्याख्या: अभिलेखीय साक्ष्यों के अनुसार विरुपाक्ष मंदिर का सबसे प्राचीन मंदिर-स्थल नौवीं या दसवीं शताब्दी का था। इसलिए यह विजयनगर साम्राज्य की स्थापना से कई शताब्दियाँ पुराना है। साम्राज्य की स्थापना के बाद मंदिर का व्यापक विस्तार किया गया। यह आज भी सक्रिय पूजा और धार्मिक उत्सवों का प्रमुख केंद्र है।
93. कृष्णदेवराय ने अपने सिंहासनारोहण की स्मृति में विरुपाक्ष मंदिर में क्या बनवाया था?
A. मुख्य मंदिर के सामने स्तंभयुक्त मंडप
B. हाथियों का अस्तबल
C. कमल महल
D. महानवमी डिब्बा
उत्तर: A. मुख्य मंदिर के सामने स्तंभयुक्त मंडप
व्याख्या: कृष्णदेवराय ने अपने सिंहासनारोहण की स्मृति में विरुपाक्ष मंदिर के मुख्य मंदिर के सामने एक भव्य मंडप बनवाया था। इसके स्तंभों पर बारीक नक्काशी की गई है। उन्हें मंदिर के पूर्वी गोपुरम के निर्माण का श्रेय भी दिया जाता है। इन निर्माणों ने प्राचीन मंदिर को एक विशाल विजयनगरकालीन परिसर में परिवर्तित कर दिया।
94. विजयनगर के मंदिरों में ‘कल्याण मंडप’ का उपयोग किस लिए किया जाता था?
A. सैनिकों के प्रशिक्षण के लिए
B. देवताओं के प्रतीकात्मक विवाह के लिए
C. व्यापारिक कर एकत्र करने के लिए
D. राजकीय कैदियों को रखने के लिए
उत्तर: B. देवताओं के प्रतीकात्मक विवाह के लिए
व्याख्या: कल्याण मंडप मंदिर के भीतर देवताओं के प्रतीकात्मक विवाह समारोह आयोजित करने के लिए बनाया जाता था। अन्य मंडपों में संगीत, नृत्य, नाटक और झूला उत्सव आयोजित होते थे। विशेष अवसरों पर मुख्य गर्भगृह से अलग उत्सव प्रतिमाओं का उपयोग किया जाता था। इन मंडपों ने मंदिरों को धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बनाया।
95. विट्ठल मंदिर का प्रमुख देवता विट्ठल किस देवता का रूप माना जाता है?
A. शिव
B. विष्णु
C. ब्रह्मा
D. सूर्य
उत्तर: B. विष्णु
व्याख्या: विट्ठल भगवान विष्णु का एक रूप है, जिसकी उपासना विशेष रूप से महाराष्ट्र में लोकप्रिय थी। कर्नाटक में विट्ठल पूजा का प्रसार विजयनगर की समन्वयकारी साम्राज्यवादी संस्कृति को दर्शाता है। विट्ठल मंदिर हम्पी के सबसे भव्य मंदिर परिसरों में शामिल है। इसमें अनेक मंडप, विशाल बाजार मार्ग और रथ के आकार का गरुड़ मंदिर है।
96. विट्ठल मंदिर की रथ सड़क की प्रमुख विशेषता क्या थी?
A. वह मिट्टी से बनी और खाली थी
B. वह पत्थर की पट्टियों से बनी तथा स्तंभयुक्त दुकानों से घिरी थी
C. वह केवल राजा के लिए आरक्षित थी
D. वह भूमिगत मार्ग था
उत्तर: B. वह पत्थर की पट्टियों से बनी तथा स्तंभयुक्त दुकानों से घिरी थी
व्याख्या: विट्ठल मंदिर की रथ सड़क गोपुरम से सीधी निकलती थी और पत्थर की पट्टियों से पक्की की गई थी। सड़क के दोनों ओर स्तंभयुक्त मंडप बने थे, जिनमें व्यापारी अपनी दुकानें लगाते थे। धार्मिक रथ उत्सव इसी मार्ग से गुजरते थे। इससे मंदिर, व्यापार और सार्वजनिक समारोहों के बीच घनिष्ठ संबंध दिखाई देता है।
97. विजयनगर का विवरण देने वाला पंद्रहवीं शताब्दी का इतालवी व्यापारी कौन था?
A. निकोलो दे कोंटी
B. डोमिंगो पायस
C. फर्नाओ नूनीज
D. दुआर्ते बारबोसा
उत्तर: A. निकोलो दे कोंटी
व्याख्या: निकोलो दे कोंटी पंद्रहवीं शताब्दी का इतालवी व्यापारी और यात्री था, जिसने विजयनगर का भ्रमण किया। उसके विवरण से राजधानी की विशालता, जनसंख्या और आर्थिक गतिविधियों की जानकारी मिलती है। इसी शताब्दी में अब्दुर रज्जाक और रूसी व्यापारी अफानासी निकितिन भी दक्षिण भारत आए। यात्रियों के वृत्तांतों की तुलना अभिलेखीय और पुरातात्त्विक प्रमाणों से की जाती है।
98. विजयनगर आने वाला अब्दुर रज्जाक किस देश के शासक का राजदूत था?
A. चीन
B. फारस
C. पुर्तगाल
D. रूस
उत्तर: B. फारस
व्याख्या: अब्दुर रज्जाक फारस के शासक द्वारा भेजा गया राजदूत था। वह पंद्रहवीं शताब्दी में कालीकट पहुँचा और विजयनगर की यात्रा की। उसने राजधानी की सात पंक्तियों वाली किलेबंदी, कृषि भूमि और विशाल नगर का विवरण दिया। उसका वृत्तांत विजयनगर की सुरक्षा, नगरीय योजना और समृद्धि का महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत है।
99. विजयनगर की यात्रा करने वाला अफानासी निकितिन किस देश का व्यापारी था?
A. इटली
B. फारस
C. रूस
D. फ्रांस
उत्तर: C. रूस
व्याख्या: अफानासी निकितिन रूस का व्यापारी और यात्री था, जिसने पंद्रहवीं शताब्दी में दक्षिण भारत की यात्रा की। उसके साथ निकोलो दे कोंटी और अब्दुर रज्जाक के वृत्तांत भी इस काल के प्रमुख विदेशी स्रोत हैं। सोलहवीं शताब्दी में बारबोसा, डोमिंगो पायस और फर्नाओ नूनीज जैसे पुर्तगाली यात्रियों ने विजयनगर का वर्णन किया। ये विवरण सामाजिक और आर्थिक इतिहास समझने में सहायक हैं।
100. हम्पी के स्मारक समूह को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा किस वर्ष मिला था?
A. 1976 ईस्वी
B. 1980 ईस्वी
C. 1986 ईस्वी
D. 1999 ईस्वी
उत्तर: C. 1986 ईस्वी
व्याख्या: हम्पी के स्मारक समूह को 1986 ईस्वी में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। इससे पहले 1976 में इसे राष्ट्रीय महत्त्व का स्थल माना गया था। हम्पी क्षेत्र में मंदिरों, किलों, राजकीय परिसरों, जल संरचनाओं और मंडपों सहित 1,600 से अधिक अवशेष सुरक्षित हैं। यह विजयनगर की विकसित नगरीय योजना और स्थापत्य परंपरा का असाधारण प्रमाण है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विजयनगर का अंतिम शासक कौन था?
विजयनगर साम्राज्य का अंतिम शासक श्रीरंग तृतीय माना जाता है। वह अरविदु वंश का शासक था और उसके शासनकाल में साम्राज्य की केंद्रीय शक्ति लगभग समाप्त हो गई थी।
विजयनगर साम्राज्य की राजधानी क्या थी?
विजयनगर साम्राज्य की प्रमुख राजधानी विजयनगर नगर थी, जिसे वर्तमान में हम्पी कहा जाता है। यह कर्नाटक में तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित है। तालीकोटा युद्ध के बाद राजधानी को पेनुकोण्डा और बाद में चंद्रगिरि स्थानांतरित किया गया था।
विजयनगर की लड़ाई कब और कहाँ हुई थी?
विजयनगर की निर्णायक लड़ाई, जिसे तालीकोटा का युद्ध कहा जाता है, 1565 ईस्वी में वर्तमान कर्नाटक के तालीकोटा क्षेत्र के निकट लड़ी गई थी। इस युद्ध में दक्कनी सुल्तानों की संयुक्त सेना ने विजयनगर की सेना को पराजित किया था।
विजयनगर का दूसरा नाम क्या था?
विजयनगर साम्राज्य को समकालीन अभिलेखों और साहित्यिक स्रोतों में कर्नाटक साम्राज्य अथवा कर्नाट साम्राज्य के नाम से भी संबोधित किया गया है।
निष्कर्ष
Vijayanagara Empire Mock Test के माध्यम से विजयनगर साम्राज्य की स्थापना, प्रमुख राजवंशों, प्रशासनिक व्यवस्था, सैन्य शक्ति, आर्थिक समृद्धि, साहित्य, कला और स्थापत्य से संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्यों को समझा जा सकता है। हरिहर प्रथम और बुक्का राय प्रथम द्वारा स्थापित यह साम्राज्य कृष्णदेवराय के शासनकाल में अपनी राजनीतिक और सांस्कृतिक उन्नति के चरम पर पहुँचा।
विजयनगर साम्राज्य ने दक्षिण भारत में व्यापार, सिंचाई, मंदिर स्थापत्य और क्षेत्रीय भाषाओं के विकास को विशेष प्रोत्साहन दिया। तालीकोटा के युद्ध के बाद इसकी केंद्रीय शक्ति कमजोर हो गई, लेकिन हम्पी के मंदिर, राजकीय भवन, जल संरचनाएँ और अन्य स्मारक आज भी इसकी समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करते हैं।